Krishna Bhajan

माँगा है मैंने श्याम से वरदान एक ही लिरिक्स (Manga Hai Maine Shyam Se Lyrics in HIndi) - Khatu Shyam Bhajan Sanju Sharma - Bhaktilok

93 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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"माँगा है मैंने श्याम से वरदान एक ही" खाटू श्याम जी का एक अत्यंत लोकप्रिय और हृदयस्पर्शी भजन है, जिसे सुप्रसिद्ध भजन गायक संजू शर्मा जी ने अपनी मधुर आवाज से सजाया है। यह भजन अनन्य भक्ति, पूर्ण शरणागति और निष्काम प्रेम का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। सनातन धर्म की भक्ति परंपरा में भगवान से भौतिक सुखों की याचना करने के बजाय उनके नित्य सानिध्य और चरणों की सेवा माँगने को सर्वोत्तम माना गया है। इस भजन में एक भक्त अपने आराध्य बाबा श्याम से किसी सांसारिक वैभव, धन या ऐश्वर्य की कामना नहीं करता, बल्कि वह केवल एक ही वरदान माँगता है—हर जन्म में प्रभु का साथ और उनके चरणों की अटूट सेवा। यह भजन कलयुग के अवतारी भगवान श्री खाटू श्याम जी के प्रति अटूट विश्वास और समर्पण की भावना को जागृत करता है, जिससे श्रोता का अंतर्मन भाव-विभोर हो उठता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

माँगा है मैंने श्याम से वरदान एक ही लिरिक्स


(कोरस)
माँगा है मैंने श्याम से वरदान एक ही,
जन्मो जनम मिले मुझे तेरा साथ ओ हरी।
सिर पर मेरे रहे सदा तेरा हाथ ओ हरी,
जन्मो जनम मिले मुझे तेरा साथ ओ हरी॥

(अंतरा - 1)
करूँ सेवा तेरी हर पल, यही अरदास है मेरी,
न छूटे हाथ से मेरे, कभी चौखट ये तेरी।
बसा लूँ दिल में मैं तेरी, छवि प्यारी सी मनोहारी,
जन्मो जनम मिले मुझे तेरा साथ ओ हरी॥

(अंतरा - 2)
सुखों में याद मैं रक्खूँ, दुखों में तुम न बिसराना,
बना कर दास अपना तुम, शरण में अपनी अपनाना।
तुम्हारी भक्ति की मस्ती, रहे दिन रात ओ हरी,
जन्मो जनम मिले मुझे तेरा साथ ओ हरी॥

(अंतरा - 3)
न चाहूँ राज और पाट, न चाहूँ धन और दौलत,
मिले चरणों की सेवा बस, यही है मेरी किस्मत।
संजू की लाज अब तेरे, है हाथों हाथ ओ हरी,
जन्मो जनम मिले मुझे तेरा साथ ओ हरी॥

(महिमा गायन)
माँगा है मैंने श्याम से वरदान एक ही,
जन्मो जनम मिले मुझे तेरा साथ ओ हरी।
सिर पर मेरे रहे सदा तेरा हाथ ओ हरी,
जन्मो जनम मिले मुझे तेरा साथ ओ हरी॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस पावन भजन का मूल भाव "निष्काम भक्ति" और "अनन्य शरणागति" पर आधारित है। श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्री कृष्ण ने चार प्रकार के भक्तों का वर्णन किया है—आर्त, अर्थार्थी, जिज्ञासु और ज्ञानी। इनमें जो भक्त बिना किसी सांसारिक कामना के केवल ईश्वर को ही चाहता है, उसकी भक्ति को सर्वोत्तम माना गया है। यह भजन इसी सर्वोच्च भक्ति भाव को दर्शाता है।

भजन की शुरुआत में ही भक्त स्पष्ट करता है कि उसने अपने आराध्य बाबा श्याम से केवल एक ही वरदान माँगा है। वह वरदान यह है कि उसे प्रत्येक जन्म में भगवान का साथ मिले और प्रभु का वरदहस्त हमेशा उसके सिर पर बना रहे। भक्त जानता है कि संसार के सभी भौतिक सुख नश्वर हैं, लेकिन परमात्मा का साथ शाश्वत और अविनाशी है।

आगे के पदों में भक्त अपनी अभिलाषा व्यक्त करते हुए कहता है कि वह हर क्षण प्रभु की सेवा करना चाहता है और उसकी यही एकमात्र प्रार्थना है कि उसके हाथ से कभी भी बाबा श्याम की चौखट न छूटे। वह भगवान की मनमोहक छवि को अपने हृदय में बसाना चाहता है। वह सुख और दुःख दोनों ही परिस्थितियों में समभाव रहने की प्रार्थना करता है—सुख में वह भगवान को कभी न भूले और दुःख में भगवान उसे न बिसराएँ। अंत में, भक्त सांसारिक धन-दौलत और राज-पाट को ठुकराकर केवल चरणों की सेवा को ही अपनी असली किस्मत मानता है और अपनी लाज (प्रतिष्ठा) प्रभु के हाथों में सौंप देता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन केवल एक गीत नहीं है, बल्कि यह साधक के अंतर्मन की पुकार है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • निष्काम प्रार्थना का संदेश: यह भजन सिखाता है कि भगवान से कभी भी धन, संपत्ति या क्षणभंगुर सुख नहीं माँगना चाहिए। यदि माँगना ही है, तो स्वयं भगवान को और उनकी भक्ति को मांगना चाहिए।
  • समर्पण भाव (शरणागति): भजन की प्रत्येक पंक्ति में "ममत्व" और "अहंकार" का विसर्जन दिखाई देता है। भक्त स्वयं को भगवान का "दास" स्वीकार करता है।
  • भावपूर्ण संगीत और गायन: संजू शर्मा जी की सुरीली और भावुक आवाज ने इस भजन को घर-घर में लोकप्रिय बना दिया है। इसकी धुन मन को शांत और अंतर्मुखी करती है।
  • कलयुग में नाम संकीर्तन की महिमा: शास्त्रों के अनुसार कलयुग में केवल नाम स्मरण और कीर्तन से ही मोक्ष की प्राप्ति संभव है। यह भजन उसी नाम संकीर्तन की परंपरा को आगे बढ़ाता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यद्यपि ईश्वर की आराधना के लिए सभी समय शुभ हैं, परंतु इस भजन के गायन और श्रवण के लिए विशेष अवसर और विधियां इस प्रकार हैं:

  • एकादशी व्रत के अवसर पर: खाटू श्याम जी की पूजा में एकादशी (विशेषकर शुक्ल पक्ष की ग्यारस) का अत्यधिक महत्व है। इस दिन श्याम बाबा के कीर्तन में इस भजन को गाने से विशेष मानसिक शांति मिलती है।
  • संध्या आरती के समय: घर के मंदिर या देवालय में संध्या काल की पूजा के बाद शांत चित्त से इस भजन का श्रवण या गायन करना चाहिए।
  • श्याम जगरण और सत्संग: श्याम प्रेमियों द्वारा आयोजित किए जाने वाले श्री श्याम संकीर्तन और जगरातों में यह भजन मुख्य रूप से गाया जाता है।
  • गायन की विधि: इस भजन को गाते समय मन में पूर्ण श्रद्धा, आंखों में प्रेमाश्रु और हाथों से ताली बजाकर प्रभु के चरणों में ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन महाभारत कालीन महान योद्धा बर्बरीक, जिन्हें वर्तमान में हम भगवान श्री खाटू श्याम जी के रूप में पूजते हैं, को समर्पित है। पौराणिक कथा के अनुसार, बर्बरीक भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र थे। उन्होंने युद्ध में हारते हुए पक्ष का साथ देने का प्रण लिया था। भगवान श्री कृष्ण ने कलयुग में धर्म की रक्षा और बर्बरीक के महान बलिदान (शीश दान) से प्रसन्न होकर उन्हें वरदान दिया था कि वे कलयुग में उनके स्वयं के नाम "श्याम" से पूजे जाएंगे।

इस भजन के गायक संजू शर्मा जी हैं, जिन्होंने अपनी अनन्य श्याम भक्ति और सुमधुर भजनों के माध्यम से लाखों भक्तों को खाटू नरेश के चरणों से जोड़ा है। उनके भजनों में राजस्थानी लोक संगीत और शास्त्रीय भक्ति रस का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

इस भजन की रचना आधुनिक श्याम भजन परंपरा के अंतर्गत हुई है। राजस्थान के सीकर जिले में स्थित खाटू धाम कलयुग का एक परम पवित्र तीर्थ स्थल है। यहाँ देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु बाबा श्याम के दर्शन के लिए आते हैं। इस मंदिर की महिमा और भक्तों के व्यक्तिगत अनुभवों ने कई सुंदर भजनों को जन्म दिया है। "माँगा है मैंने श्याम से वरदान एक ही" भजन भी एक ऐसे ही भक्त के हृदयोद्गार हैं, जिसने संसार की असारता को समझकर बाबा श्याम के चरणों में अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल, सुबोध और प्रवाहमयी खड़ी बोली हिंदी है, जिसमें भक्ति रस के पारंपरिक शब्दों का सुंदर प्रयोग किया गया है।

  • काव्य शैली: यह एक गेय पद (गीत) है, जिसे सुगमता से गाया जा सकता है। इसमें अंत्यानुप्रास अलंकार का सुंदर प्रयोग हुआ है (जैसे: मेरी-तेरी, बिसराना-अपनाना, दौलत-किस्मत)।
  • बिंब और प्रतीक: भजन में "चौखट", "वरदहस्त" (सिर पर हाथ) और "छवि मनोहारी" जैसे सुंदर बिंबों का उपयोग किया गया है, जो भक्त के मन में भगवान की एक सजीव आकृति अंकित करते हैं।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें व्यावहारिक और आध्यात्मिक जीवन के लिए कई महत्वपूर्ण सीख देता है:

  1. सच्चा सुख ईश्वर के सानिध्य में है: भौतिक वस्तुएं हमें क्षणिक सुख दे सकती हैं, लेकिन शाश्वत आनंद केवल परमात्मा के चरणों में ही मिल सकता है।
  2. समभाव की स्थिति: सुख में भगवान को धन्यवाद देना और दुःख में उन पर अटूट विश्वास बनाए रखना ही सच्ची धार्मिकता है।
  3. अहंकार का त्याग: जब हम स्वयं को भगवान का "दास" मान लेते हैं, तो हमारे भीतर का अहंकार स्वतः समाप्त हो जाता है, जो कि मोक्ष का मार्ग है।
  4. शरणागति की शक्ति: जब भक्त अपनी लाज और जीवन की डोर भगवान के हाथों में सौंप देता है, तो भगवान स्वयं उसके योगक्षेम (सुरक्षा और कल्याण) का वहन करते हैं।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
वरदान आशीर्वाद या मनचाहा उपहार प्रभु से मांगी गई परम याचना
अरदास प्रार्थना, विनती या पुकार भक्त द्वारा भगवान के समक्ष की गई दीन याचना
चौखट द्वार की देहरी भगवान का पावन मंदिर या शरण
बिसराना भूल जाना या उपेक्षा करना विपत्ति काल में प्रभु की विस्मृति न होना
लाज सम्मान, प्रतिष्ठा या इज्जत भक्त की रक्षा का दायित्व भगवान पर होना
मनोहारी मन को हरने वाली, अत्यंत सुंदर श्याम सुंदर की दिव्य और आकर्षक छवि

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

पंक्ति: "माँगा है मैंने श्याम से वरदान एक ही, जन्मो जनम मिले मुझे तेरा साथ ओ हरी।"
भावार्थ: भक्त कहता है कि हे हरी! हे श्याम सुंदर! मैंने आपसे केवल एक ही वरदान की कामना की है। मेरी कोई अन्य इच्छा नहीं है, बस मुझे हर जन्म में आपका साथ मिलता रहे।

पंक्ति: "सिर पर मेरे रहे सदा तेरा हाथ ओ हरी, जन्मो जनम मिले मुझे तेरा साथ ओ हरी॥"
भावार्थ: हे प्रभु! आपका कृपामयी और सुरक्षात्मक हाथ सदैव मेरे मस्तक पर बना रहे। आपके आशीर्वाद की छत्रछाया में मेरा जीवन व्यतीत हो।

पंक्ति: "करूँ सेवा तेरी हर पल, यही अरदास है मेरी, न छूटे हाथ से मेरे, कभी चौखट ये तेरी।"
भावार्थ: मेरी एकमात्र प्रार्थना यही है कि मैं जीवन के प्रत्येक क्षण में आपकी सेवा कर सकूँ। आपकी यह पावन चौखट, जहाँ आकर मुझे परम शांति मिलती है, मुझसे कभी न छूटे।

पंक्ति: "बसा लूँ दिल में मैं तेरी, छवि प्यारी सी मनोहारी, जन्मो जनम मिले मुझे तेरा साथ ओ हरी॥"
भावार्थ: मैं आपकी उस अत्यंत सुंदर और मनमोहक छवि को अपने हृदय के सिंहासन पर विराजमान करना चाहता हूँ, ताकि सोते-जागते हर समय मुझे आपके ही दर्शन होते रहें।

पंक्ति: "सुखों में याद मैं रक्खूँ, दुखों में तुम न बिसराना, बना कर दास अपना तुम, शरण में अपनी अपनाना।"
भावार्थ: हे दयालु देव! जब मेरे जीवन में सुख के दिन हों, तब मैं अहंकारवश आपको भूल न जाऊँ, और जब मुझ पर दुखों का पहाड़ टूटे, तब आप मुझे अकेला न छोड़ें। मुझे अपना सेवक मानकर अपनी शरण में स्थान दें।

पंक्ति: "तुम्हारी भक्ति की मस्ती, रहे दिन रात ओ हरी, जन्मो जनम मिले मुझे तेरा साथ ओ हरी॥"
भावार्थ: मेरे भीतर आपकी भक्ति का ऐसा रंग चढ़े कि मैं दिन-रात उसी दिव्य आनंद और मस्ती में सराबोर रहूँ।

पंक्ति: "न चाहूँ राज और पाट, न चाहूँ धन और दौलत, मिले चरणों की सेवा बस, यही है मेरी किस्मत।"
भावार्थ: मुझे इस संसार का कोई बड़ा राज्य नहीं चाहिए, न ही मुझे सोने-चांदी और धन-दौलत की लालसा है। मेरे लिए तो आपके चरणों की धूल और आपकी सेवा ही मेरी सबसे बड़ी पूंजी और सौभाग्य है।

पंक्ति: "संजू की लाज अब तेरे, है हाथों हाथ ओ हरी, जन्मो जनम मिले मुझे तेरा साथ ओ हरी॥"
भावार्थ: गायक संजू शर्मा (और उनके माध्यम से प्रत्येक भक्त) कहते हैं कि हे प्रभु! अब मेरी लाज, मेरा मान-सम्मान सब आपके ही हाथों में है। आप ही मेरे रक्षक और खेवनहार हैं।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

खाटू श्याम जी की आराधना करते समय निम्नलिखित मंत्रों और श्लोकों का संपुट लगाने से भजन का प्रभाव और अधिक बढ़ जाता है:

॥ श्री श्याम मंत्र ॥

"ॐ श्री श्याम देवाय नमः"

यह मंत्र बाबा श्याम की प्रसन्नता और मानसिक शांति के लिए अत्यंत प्रभावशाली है।

श्रीमद्भगवद्गीता का यह श्लोक भी इस भजन के भाव को पूर्णतः चरितार्थ करता है:

॥ भगवद्गीता श्लोक (अध्याय 9, श्लोक 22) ॥

"अनन्याश्चिन्तयन्तो मां ये जनाः पर्युपासते।
तेषां नित्याभियुक्तानां योगक्षेमं वहाम्यहम्॥"

अर्थ: जो अनन्य प्रेमी भक्त मेरा निरंतर चिंतन करते हुए निष्काम भाव से मेरी उपासना करते हैं, उन नित्य निरंतर मुझमें लीन रहने वाले पुरुषों का योगक्षेम (आवश्यकताओं की पूर्ति और रक्षा) मैं स्वयं वहन करता हूँ।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम माँगा है मैंने श्याम से वरदान एक ही
समर्पित देवता भगवान श्री खाटू श्याम जी (श्री कृष्ण)
मुख्य गायक संजू शर्मा (Sanju Sharma)
भाषा सरल हिंदी (Devanagari)
भक्ति का प्रकार निष्काम भक्ति, शरणागति (Surrender)
मुख्य रस भक्ति रस, शांत रस
उपयुक्त अवसर श्याम संकीर्तन, एकादशी, देवउठनी ग्यारस, दैनिक संध्या पूजा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस सुप्रसिद्ध भजन के मूल गायक संजू शर्मा जी हैं। उन्होंने अपनी भावपूर्ण और सुरीली आवाज में इस भजन को गाकर देश-विदेश के श्याम प्रेमियों के बीच अत्यंत लोकप्रिय बनाया है।

इस भजन में भक्त भगवान से किसी भी प्रकार के सांसारिक सुख, धन, संपत्ति या राज-पाट की मांग नहीं करता। वह केवल एक ही वरदान मांगता है कि उसे हर जन्म में भगवान का साथ मिले और प्रभु का वरदहस्त हमेशा उसके सिर पर बना रहे।

महाभारत के युद्ध के समय भीम के पौत्र बर्बरीक ने अपने शीश का दान भगवान श्री कृष्ण को दिया था। उनकी इस महान निष्काम भावना से प्रसन्न होकर श्री कृष्ण ने उन्हें वरदान दिया था कि कलयुग में वे उनके सबसे प्रिय नाम "श्याम" से पूजे जाएंगे और भक्तों के सभी कष्टों को दूर करेंगे। इसलिए उन्हें कलयुग का अवतारी माना जाता है।

इस भजन को प्रतिदिन सुबह या शाम की पूजा के समय सुना जा सकता है। विशेष रूप से एकादशी (ग्यारस), द्वादशी, और खाटू श्याम जी के मासिक कीर्तन या वार्षिक फाल्गुन मेले के दौरान इस भजन का गायन अत्यंत फलदायी और आनंददायक माना जाता है।

यह भजन हमें सिखाता है कि सच्ची प्रसन्नता और शांति भौतिक वस्तुओं में नहीं बल्कि ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण में है। हमें सुख और दुःख दोनों ही परिस्थितियों में भगवान का स्मरण रखना चाहिए और अपनी लाज प्रभु के चरणों में सौंप देनी चाहिए।

हाँ, बिल्कुल। दैनिक पूजा-अर्चना के बाद इस भजन को शांत मन से गाने या सुनने से मन की चंचलता समाप्त होती है, मानसिक तनाव दूर होता है और साधक का मन भगवान श्री कृष्ण (श्याम बाबा) के चरणों में स्थिर होता है।

यहाँ "संजू" शब्द भजन के गायक संजू शर्मा जी के लिए आया है, जो स्वयं को एक साधारण भक्त के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं। इस पंक्ति का अर्थ है कि हे प्रभु! अब मेरी प्रतिष्ठा, मेरा जीवन और मेरी रक्षा पूरी तरह से आपके हाथों में है। मैं निश्चिंत हूँ क्योंकि मेरा रक्षक स्वयं मेरा श्याम है।

भगवान श्री खाटू श्याम जी का मुख्य और ऐतिहासिक मंदिर भारत के राजस्थान राज्य के सीकर जिले के "खाटू" नामक कस्बे में स्थित है। यह संपूर्ण भारत के सबसे पूजनीय और जागृत देव स्थानों में से एक है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "माँगा है मैंने श्याम से वरदान एक ही" के आध्यात्मिक, साहित्यिक और व्यावहारिक पहलुओं का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है। इस सामग्री का संकलन सनातन धर्म की प्रामाणिक भजन परंपराओं, खाटू श्याम जी के पौराणिक इतिहास और सुप्रसिद्ध संकीर्तनों के आधार पर किया गया है। यह "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" पाठकों को न केवल भजन के सही बोल (लिरिक्स) प्रदान करती है, बल्कि उन्हें इसके गहरे दार्शनिक अर्थ से भी परिचित कराती है ताकि वे पूर्ण भाव के साथ प्रभु की आराधना कर सकें।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्भगवद्गीता - निष्काम कर्मयोग एवं अनन्य भक्ति सिद्धांत।
  • महाभारत - बर्बरीक (खाटू श्याम जी) के शीश दान की पौराणिक कथा।
  • श्री श्याम चरित्र मानस एवं खाटू धाम की स्थानीय लोक परंपराएं।
  • संजू शर्मा जी द्वारा गाए गए मूल ऑडियो एवं वीडियो संकीर्तन संस्करण।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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