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तुम रूठे रहो मोहन हम तुम्हे मना लेंगे भजन लिरिक्स (Tum Ruthe Raho Mohan Hum Mana Lenge Lyrics in Hindi) - Shyam Bhajan - Bhaktilok

122 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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तुम रूठे रहो मोहन हम तुम्हे मना लेंगे भजन लिरिक्स - Tum Ruthe Raho Mohan Hum Mana Lenge Lyrics in Hindi

भक्ति और प्रेम के अद्वितीय संबंध को दर्शाने वाला यह अत्यंत लोकप्रिय श्याम भजन 'तुम रूठे रहो मोहन हम तुम्हे मना लेंगे' भगवान श्रीकृष्ण और उनके भक्तों के बीच के अनन्य प्रेम, हठ, समर्पण और वात्सल्य का अनमोल प्रतीक है। हिंदू सनातन परंपरा और विशेषकर उत्तर भारत की ब्रज संस्कृति में भगवान श्री कृष्ण (मोहन) को रिझाने, मनाने और उनके साथ सखा या प्रेमीवत संबंध स्थापित करने की लंबी परंपरा रही है। इस भजन में भक्त का भगवान के प्रति अगाध विश्वास झलकता है कि चाहे भगवान कितनी भी परीक्षा लें, रूठ जाएं या दूरी बना लें, परंतु भक्त का अनन्य प्रेम उन्हें अंततः अपनी ओर खींच ही लेगा। यह भजन मुख्य रूप से एकाग्रता, आंतरिक समर्पण, विरह की पीड़ा और मिलन के आनंद का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। इसे कीर्तन सत्संग, एकादशी जागरण, जन्माष्टमी उत्सव, और श्री बांके बिहारी जी के दरबार में अत्यंत भावुकता के साथ गाया जाता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

तुम रूठे रहो मोहन, हम तुम्हे मना लेंगे,
आहों में असर होगा, घर बैठे बुला लेंगे।
तुम रूठे रहो मोहन, हम तुम्हे मना लेंगे ॥

तुम कहते हो मोहन, हमें मधुबन प्यारा है,
इक बार तो आ जाओ, मधुबन ही बना देंगे।
तुम रूठे रहो मोहन, हम तुम्हे मना लेंगे ॥

तुम कहते हो मोहन, हमें राधा प्यारी है,
इक बार तो आ जाओ, राधा से मिला देंगे।
तुम रूठे रहो मोहन, हम तुम्हे मना लेंगे ॥

तुम कहते हो मोहन, हमें माखन प्यारा है,
इक बार तो आ जाओ, माखन ही खिला देंगे।
तुम रूठे रहो मोहन, हम तुम्हे मना लेंगे ॥

तुम कहते हो मोहन, हमें कहाँ बिठाओगे,
इस दिल में तो आ जाओ, पलकों पे बिठा लेंगे।
तुम रूठे रहो मोहन, हम तुम्हे मना लेंगे ॥

तुम हमको ना चाहो, इसकी हमें परवाह नही,
हम वादे के पक्के हैं, तुम्हे अपना बना लेंगे।
तुम रूठे रहो मोहन, हम तुम्हे मना लेंगे ॥

लगी आग जो सीने में, तेरी प्रेम जुदाई की,
हम प्रेम की धारा से, लगी दिल की बुझा लेंगे।
तुम रूठे रहो मोहन, हम तुम्हे मना लेंगे,
आहों में असर होगा, घर बैठे बुला लेंगे।
तुम रूठे रहो मोहन, हम तुम्हे मना लेंगे ॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन केवल शब्दों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह एक प्रेमी भक्त की अपने आराध्य बांकेबिहारी श्याम सुंदर के प्रति की गई जिद्द और अनन्य भक्ति का जीवंत दस्तावेज है। भजन की हर एक पंक्ति में भक्त और भगवान के बीच के आत्मीय संवाद को उकेरा गया है। भक्त कहता है कि हे मोहन! यदि तुम हमसे रूठे रहना चाहते हो तो रहो, तुम्हारी इस नाराजगी से भी हमें कोई भय नहीं है, क्योंकि हम अपने प्रेम और समर्पण के बल पर तुम्हें मना ही लेंगे। हमारी पुकार और आहों में इतनी शक्ति अवश्य होगी कि हम तुम्हें अपने घर बैठे ही दर्शन देने के लिए विवश कर देंगे।

भजन के अगले चरणों में भक्त भगवान की उन बातों का उत्तर देता है जो प्रायः भगवान भक्तों से परीक्षा लेते समय कहते हैं। भगवान कहते हैं कि मुझे तो ब्रज का मधुबन प्यारा है। इस पर भक्त का उत्तर है कि हे प्रभु! आप एक बार हमारे पास तो आ जाइए, हम आपके लिए अपने अंतःकरण को ही मधुबन बना देंगे, जहाँ सदा वसंत रहेगा। इसी प्रकार, जब भगवान अपनी प्रिय राधा रानी का स्मरण दिलाते हैं, तो भक्त कहता है कि आप एक बार कृपा करके आइए, हम आपको आपकी प्रिय राधा से मिला देंगे अथवा आपके भीतर ही उस प्रेम भाव को जागृत कर देंगे। माखन प्रेम का प्रतीक है, और भक्त आश्वासन देता है कि वह अपने हृदय के प्रेम रूपी मक्खन से कान्हा को तृप्त कर देगा। अंत में, भक्त यह घोषणा करता है कि चाहे आप हमसे प्रेम करें या न करें, हम अपने प्रण के पक्के हैं और आपको अपना बनाकर ही दम लेंगे। यही सच्ची भक्ति और आत्म-समर्पण की पराकाष्ठा है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

इस सुंदर श्याम भजन की अनेक विशेषताएं हैं जो इसे हर भक्त के हृदय के निकट लाती हैं:

  • भक्ति का सखा भाव: इसमें दासता से ऊपर उठकर सखा या प्रियतम रूप में ईश्वर के साथ संबंध स्थापित किया गया है।
  • विरह और मिलन का भाव: भगवान से बिछड़ने का दर्द और उन्हें पुनः पाने की जिद इस भजन का मुख्य प्राण है।
  • सुलगती हुई भावनाएं: 'लगी आग जो सीने में' पंक्ति भक्त के भीतर ईश्वर प्राप्ति की तीव्र उत्कंठा (आार्ति) को दर्शाती है।
  • सर्वसुलभ भाषा: अत्यंत सरल हिंदी और ब्रजभाषा के स्पर्श से युक्त होने के कारण इसे कोई भी आसानी से गा सकता है।
  • मानसिक शांति और आनंद: इस भजन के निरंतर स्मरण से मन में उत्पन्न होने वाली अशांति और चिंता दूर होती है तथा भगवान के प्रति प्रेम भाव प्रगाढ़ होता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को गाने और सुनने के लिए किसी विशेष नियम या कठिन विधान की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि भक्ति का मार्ग पूरी तरह से भाव प्रधान है। फिर भी, निम्नलिखित अवसरों पर इसका गायन विशेष रूप से फलदायी माना जाता है:

  • संध्याकालीन पूजन या आरती के पश्चात: घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करने के बाद शांत मन से इस भजन का गान करना मानसिक शांति प्रदान करता है।
  • एकादशी एवं जन्माष्टमी उत्सव: भगवान श्री कृष्ण के प्रकटोत्सव या प्रत्येक एकादशी की रात्रि को होने वाले कीर्तन और सत्संग में इसे विशेष रूप से गाया जाता है।
  • एकांत साधना एवं ध्यान के समय: जब मन विचलित हो या प्रभु की याद सताए, तब इस भजन को गुनगुनाने से हृदय को असीम संतोष मिलता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन पूर्णतः जगत के पालनहार भगवान श्री कृष्ण, श्री बांके बिहारी, खाटू श्याम और गोपीनाथ के चरणों में समर्पित है। सनातन धर्म में कृष्ण भक्ति की परंपरा श्रीमद्भागवत गीता, नारद भक्ति सूत्र और चैतन्य महाप्रभु, मीराबाई, सूरदास जैसे महान संतों के माध्यम से जन-जन तक पहुँची है। इस भजन में उसी कृष्ण-भक्ति परंपरा की सुगंध मिलती है जहाँ भक्त भगवान को अपना सर्वस्व मानता है और उनसे प्रेम करने का अधिकार रखता है। भगवान श्रीकृष्ण भक्तों के प्रेम के इतने अधीन हैं कि वे अपनी महिमा छोड़कर भक्त की पुकार सुनने चले आते हैं, जैसा कि इस भजन में वर्णित है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

समकालीन हिंदी भजन परंपरा में इस रचना को आधुनिक संत गायकों और लोक कलाकारों द्वारा अत्यंत लोकप्रियता दी गई है। हालांकि इसकी मूल रचना किसी एक विशिष्ट प्राचीन ग्रंथ में नहीं मिलती, परंतु यह लोक-कंठ और भजन संध्याओं के माध्यम से पिछले कई दशकों से भक्तों की जुबान पर है। ब्रज मंडल की गलियों से लेकर देश-विदेश के इस्कॉन मंदिरों और श्याम बाबा के दरबारों (खाटू धाम) में इस भजन को गाकर भक्त झूम उठते हैं। इसकी लयबद्धता और कर्णप्रियता इसे श्रोताओं के मन में सीधा उतार देती है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा बहुत ही सहज, सरल और प्रवाहमयी खड़ी बोली हिंदी है जिसमें ब्रजभाषा के सांस्कृतिक शब्दों (मोहन, मधुबन, माखन) का सुंदर समन्वय किया गया है। इसमें अनुप्रास और यमक अलंकारों की स्वाभाविक छटा देखने को मिलती है। कवियों ने बहुत ही सुंदर बिंबों (Images) का प्रयोग किया है—जैसे पलकों पर बिठाना, दिल को मधुबन बनाना और सीने में लगी प्रेम की आग। यह काव्य शैली श्रोता के मन में तुरंत एक दृश्य खड़ा कर देती है जिससे भगवान का स्वरूप जीवंत हो उठता है.

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें जीवन जीने के कई गहरे आध्यात्मिक पाठ पढ़ाता है:

  • दृढ़ संकल्प और अटूट विश्वास: भगवान चाहे जितनी भी परीक्षा लें, भक्त को कभी भी अपने प्रेम और विश्वास से डिगना नहीं चाहिए।
  • प्रेम की सर्वोच्च शक्ति: क्रोध, अहंकार या बल से नहीं, बल्कि केवल प्रेम और समर्पण से ही ईश्वर को वश में किया जा सकता है।
  • आंतरिक शुद्धि: यदि हृदय में भगवान के लिए सच्चा स्थान (मधुबन और सिंहासन) बना लिया जाए, तो भगवान स्वयं वहाँ निवास करने आते हैं।
  • विरह ही मिलन की सीढ़ी है: ईश्वर से बिछड़ने की तड़प ही भक्त को भगवान के और अधिक निकट ले जाती है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
मोहन मन को मोहने वाले भगवान श्री कृष्ण आराध्य देव जो सभी के आकर्षण का केंद्र हैं
मधुबन वृंदावन का प्रसिद्ध वन प्रेम और साधना की पावन भूमि, हृदय का पवित्र कोना
आह दिल से निकली हुई गहरी पुकार या सांस ईश्वर के वियोग में निकली सच्ची प्रार्थना
जुदाई वियोग, अलगाव ईश्वर से दूर होने का आध्यात्मिक दर्द
पलकों पे बिठाना अत्यधिक आदर और सम्मान देना हृदय में सर्वोच्च स्थान प्रदान करना

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"तुम रूठे रहो मोहन हम तुम्हे मना लेंगे, आहों मे असर होगा घर बैठे बुला लेंगे।"
भावार्थ: भक्त कहता है कि हे श्याम! यदि आप हमसे नाराज हैं तो बने रहिए। हमारी प्रार्थना और पुकार में इतनी सच्ची तड़प है कि हम अपनी आहों और आंसुओं के बल पर आपको अपने पास खींच ही लेंगे। आपको बाहर जाने की आवश्यकता नहीं, हम अपने प्रेम से आपको घर बैठे ही बुला लेंगे।

"तुम कहते हो मोहन हमें मधुबन प्यारा है, इक बार तो आ जाओ मधुबन ही बना देंगे।"
भावार्थ: भगवान की इस बात का स्मरण करते हुए कि उन्हें प्राकृतिक सौंदर्य और मधुबन प्रिय है, भक्त कहता है कि आप हमारे इस ह्रदय रूपी आंगन में पधारिए, हम अपने प्रेम से इस स्थान को ही वृंदावन जैसा पावन मधुबन बना देंगे।

"तुम हमको ना चाहो इसकी हमें परवाह नही, हम वादे के पक्के है तुम्हे अपना बना लेंगे।"
भावार्थ: यह प्रेम की सर्वोच्च अवस्था है जहाँ भक्त कहता है कि यदि आप हमसे प्रेम न भी करें तो भी हमें कोई दुःख नहीं है, क्योंकि हम अपने प्रेम के प्रति पूरी तरह समर्पित हैं और आपको अपना इष्ट मान चुके हैं।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के भाव को पुष्ट करने के लिए श्रीमद्भागवत गीता और कृष्ण स्तोत्र के ये श्लोक अत्यंत प्रासंगिक हैं:

मन्मना भव मद्भक्तो मद्याजी मां नमुरु।
मामेवैष्यसि युक्त्वात्मेमत्परायणः॥

-- श्रीमद्भागवत गीता (अध्याय 9, श्लोक 34)

अर्थात्: मुझमें मन लगाओ, मेरे भक्त बनो, मेरा पूजन करो और मुझको नमस्कार करो। इस प्रकार मुझमें ही चित्त को लगाकर मेरे परायण होकर तुम मुझे ही प्राप्त होगे।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

श्रेणी (Category) विवरण
भजन का नाम तुम रूठे रहो मोहन हम तुम्हे मना लेंगे (Tum Ruthe Raho Mohan Hum Mana Lenge)
आराध्य देव भगवान श्री कृष्ण / श्याम बाबा / बांके बिहारी
संगीत शैली श्याम भजन / लोक भक्ति संगीत
भाषा सरल हिंदी एवं ब्रजभाषा मिश्रित
मुख्य भाव (Bhava) प्रेम, हठ, समर्पण, विरह और मिलन की लालसा
उपयुक्त अवसर जन्माष्टमी, एकादशी, सत्संग, कीर्तन, संध्या वंदन

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस भजन के मुख्य आराध्य भगवान श्री कृष्ण (मोहन, श्याम बाबा, बांके बिहारी) हैं।

इस भजन का मुख्य भाव भक्त और भगवान के बीच अनन्य प्रेम, हठ, समर्पण और विरह की पीड़ा को समाप्त कर प्रभु को अपने वश में करने का है।

हाँ, यह भजन बहुत ही सरल शब्दावली में है और इसकी धुन बहुत कर्णप्रिय है, जिसे घर पर संध्या के समय या किसी भी सत्संग में आसानी से गाया जा सकता है।

जन्माष्टमी, एकादशी, श्याम बाबा के फाल्गुन मेले, या घर पर होने वाले साप्ताहिक कीर्तन व जागरण में इस भजन का विशेष महत्व है।

इसका अर्थ है कि भक्त भगवान के स्वागत के लिए अपने अंतःकरण को ही वृंदावन के मधुबन के समान पवित्र और प्रेममय बना लेगा।

भक्ति गीतों के लिए कोई कठोर नियम नहीं होते; केवल शुद्ध उच्चारण, स्वच्छता और सच्चे प्रेमपूर्ण भाव का होना आवश्यक है।

भगवान श्रीकृष्ण के माधुर्य रूप का स्मरण करने और अपनी चिंताओं को उनके चरणों में समर्पित करने से मन का तनाव दूर होता है और आंतरिक शांति प्राप्त होती है।

हाँ, इसकी ताल और लय बहुत सरल (सामान्य কাহারवा या दादरा ताल) होती है, इसलिए हारमोनियम और ढोलक के साथ इसे आसानी से सीखा और गाया जा सकता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

भक्तिलोक (Bhaktilok) पर प्रकाशित यह सामग्री सनातन धर्म की पारंपरिक कृष्ण भक्ति और लोक-साहित्य के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है। इस आलेख में भजन के प्रत्येक शब्द, उसके गहरे आध्यात्मिक अर्थ, और गायन की विधि का तथ्यात्मक और प्रामाणिक विवरण प्रस्तुत किया गया है। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के अंतर्गत यह सुनिश्चित किया गया है कि पाठकों को उच्च कोटि की भक्तिमय जानकारी प्राप्त हो।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्भागवत महापुराण - गीताप्रेस गोरखपुर
  • भक्ति रस सिंधु - आचार्य श्री रूप गोस्वामी
  • पारंपरिक ब्रज लोकगीत एवं श्याम भजन परंपरा
  • नारद भक्ति सूत्र एवं सनातन संत दर्शन

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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