मन के मंदिर में प्रभु को बसाना लिरिक्स भजन (Man Ke Mandir Mein Prabhu Ko Basana Lyrics in Hindi) - Shyam Bhajan Krishna Bhajan
सनातन भक्ति परंपरा में संकीर्तन और प्रभु नाम का स्मरण जीवात्मा के उद्धार का सबसे सरल और सुगम मार्ग माना गया है। "मन के मंदिर में प्रभु को बसाना" अत्यंत ही पावन, मधुर और भक्ति रस से परिपूर्ण एक ऐसा श्याम भजन है जो साधक के अंतर्मन को सीधे झंकृत कर देता है। भगवान श्री कृष्ण और खाटू श्याम जी के चरणों में समर्पित यह भजन न केवल सुनने में कर्णप्रिय है, बल्कि यह मनुष्य को बाह्य आडंबरों से दूर ले जाकर अंतःकरण में विराजमान परम आराध्य के दर्शन की प्रेरणा देता है। इस विस्तृत लेख में हम इस भजन के सम्पूर्ण बोल, विस्तृत भावार्थ, गायन विधि, आध्यात्मिक महत्व और जीवन पर पड़ने वाले इसके गहरे प्रभावों का संपूर्ण अध्ययन करेंगे।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
॥ स्थायी (मुखड़ा) ॥
मन के मंदिर में प्रभु को बसाना,
प्रेम का दीप सदा तुम जलाना।
बांके बिहारी मेरे श्याम प्यारे,
तुझको ही अपना सर्वस्व माना॥
॥ प्रथम अंतरा ॥
दुनिया के मेले में भटके जो प्राणी,
तूने ही समझाई जीवन की वाणी।
माया के बंधन से हमको बचा ले,
चरणों की छाया में हमको बिठा ले।
मोहन मेरी सांस-सांस में समाना,
प्रेम का दीप सदा तुम जलाना॥
॥ द्वितीय अंतरा ॥
मुरली की धुन पे जो दुनिया मचलती,
तेरे बिना सांवरिया हर ज्योति है जलती।
तू ही तो राधा का मोहन कन्हैया,
तू ही तो इस भव से तारे खिवैया।
श्याम रूप मन से कभी ना भुलाना,
प्रेम का दीप सदा तुम जलाना॥
॥ तृतीय अंतरा ॥
सुख हो या दुःख हो पुकारूं तुम्हारा,
तेरे सिवा कौन है सांवरिया सहारा।
हंसते हुए हर मुसीबत को सह लेंगे,
बांके बिहारी तेरा नाम लेते रहेंगे।
भक्तों की पीर को पल में मिटाना,
प्रेम का दीप सदा तुम जलाना॥
॥ समापन दोहा ॥
दास कहे चरणों की धूल मिल जाए,
जन्म-जन्म की ये प्यास बुझ जाए।
मन के मंदिर में प्रभु को बसाना,
प्रेम का दीप सदा तुम जलाना॥
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
यह भजन साधारण शब्दों के माध्यम से एक अत्यंत ही गहन आध्यात्मिक सत्य को उजागर करता है। भजन के मुखड़े में कहा गया है कि भगवान को बाहर ढूंढने के बजाय अपने 'मन के मंदिर' में स्थापित करना चाहिए। भौतिक दुनिया के मंदिर ईंट-पत्थर के बने होते हैं, किंतु सच्चा मंदिर मनुष्य का अंतःकरण है जहां शुद्ध प्रेम का दीपक जलना चाहिए।
प्रथम अंतरे में संसार की असारता और माया के प्रभावों का वर्णन है। जीवात्मा संसार रूपी मेले में भटककर अपने वास्तविक उद्देश्य को भूल जाती है, तब सतगुरु या प्रभु की वाणी उसे पुनःमार्ग पर लाती है। साधक प्रार्थना करता है कि हे मोहन! मेरी प्रत्येक सांस में आपका वास हो, ताकि मन विचलित न हो।
द्वितीय और तृतीय अंतरे में भगवान श्री कृष्ण की सर्वव्यापकता, उनकी मुरली की मोहक तान और उनके 'खिवैया' (नैया पार लगाने वाले) रूप का गुणगान किया गया है। सुख और दुःख जीवन के दो पहलू हैं, लेकिन भक्त का संकल्प यह है कि वह हर परिस्थिति में बांके बिहारी का नाम नहीं छोड़ेगा। यही सच्ची शरणागति और अनन्य भक्ति (Unalloyed Devotion) है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
- आंतरिक शुद्धि: यह भजन बाह्य पूजा-पाठ से आगे बढ़कर आंतरिक चेतना और हृदय की शुद्धि पर जोर देता है।
- शरणगति भाव: श्री कृष्ण और खाटू श्याम के प्रति पूर्ण समर्पण और अटूट विश्वास का सुंदर भाव प्रस्तुत करता है।
- कलयुग में संकीर्तन का महत्व: श्रीमद्भागवत और संतों के वचनों के अनुसार कलयुग में केवल हरि नाम स्मरण ही भवसागर से पार लगाने का एकमात्र साधन है।
- मानसिक शांति: इस भजन के नियमित श्रवण या गान से मन का तनाव कम होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
इस पावन भजन को किसी भी समय गाया या सुना जा सकता है, किंतु इसके गायन के लिए कुछ विशेष समय और स्थितियां अत्यंत फलदायी मानी जाती हैं:
- ब्रह्ममुहूर्त एवं प्रातःकालीन वंदना: सुबह उठकर स्नान के पश्चात पूजा घर में दीप प्रज्वलित करके इस भजन का स्मरण करने से पूरा दिन सकारात्मक और ऊर्जावान रहता है।
- संध्याकालीन आरती एवं सत्संग: संध्या के समय जब दैनिक कार्यों से निवृत्त होकर व्यक्ति शांत बैठता है, तब यह भजन चित्त को एकाग्र करने में सहायता करता है।
- एकादशी एवं जन्माष्टमी उत्सव: भगवान श्री कृष्ण के विशेष पर्वों, जैसे श्री कृष्ण जन्माष्टमी व्रत या एकादशी के जागरण और संकीर्तन में इस भजन को सामूहिक रूप से गाने पर अद्भुत आनंद की प्राप्ति होती है।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
यह भजन मूल रूप से लीलाधारी भगवान श्री कृष्ण, उनके बांके बिहारी स्वरूप और कलयुग के धनी बाबा खाटू श्याम को समर्पित है। सनातन धर्म में कृष्ण भक्ति धारा (जैसे मीराबाई, सूरदास, रसखान और चैतन्य महाप्रभु द्वारा स्थापित परंपरा) ने प्रेम भक्ति को सर्वोच्च स्थान दिया है। इस परंपरा में भगवान को स्वामी या मास्टर के रूप में नहीं, बल्कि सखा, प्रियतम और पालक के रूप में देखा जाता है।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
- ईश्वर सर्वत्र हैं: भगवान सातवें आसमान पर नहीं, बल्कि हर प्राणी के हृदय रूपी मंदिर में निवास करते हैं।
- निःस्वार्थ प्रेम (Bhakti): भगवान को केवल दिखावे की पूजा नहीं, बल्कि निर्मल प्रेम और समर्पण चाहिए।
- धैर्य और सहनशीलता: जीवन के दुखों और संकटों में भी ईश्वर का दामन न छोड़ना ही सच्चे भक्त की पहचान है।
- अहंकार का त्याग: 'मैं और मेरा' की भावना को छोड़कर सब कुछ प्रभु के चरणों में समर्पित करना ही मोक्ष का मार्ग है।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / वाक्यांश | सरल अर्थ | संदर्भ / भाव |
|---|---|---|
| मन का मंदिर | अंतःकरण / हृदय | जहां भगवान की वास्तविक स्थापना होती है |
| बांके बिहारी | श्री कृष्ण (जिनकी त्रिभंग मुद्रा है) | वृंदावन के आराध्य देव |
| सर्वस्व | सब कुछ (धन, प्राण, मन) | भगवान को ही अपना सब कुछ मानना |
| माया | संसार का मोह-माया जाल | जो जीव को ईश्वर से दूर करता है |
| खिवैया | नाव चलाने वाला / नैया पार लगाने वाला | संसार सागर से पार करने वाले श्री कृष्ण |
भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
"ईश्वरः सर्वभूतानां हृद्देशेऽर्जुन तिष्ठति।"
(गीता अध्याय 18, श्लोक 61) - भगवान श्री कृष्ण अर्जुन से कहते हैं कि हे अर्जुन! ईश्वर सभी प्राणियों के हृदय में निवास करते हैं।
तथा स्मरण करें पावन महामंत्र: ॐ नमो भगवते वासुदेवाय एवं श्री कृष्ण शरणं मम।
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| भजन का नाम | मन के मंदिर में प्रभु को बसाना (Man Ke Mandir Mein Prabhu Ko Basana) |
|---|---|
| समर्पित देवता | भगवान श्री कृष्ण, खाटू श्याम बाबा, बांके बिहारी |
| संगीत शैली | पारंपरिक श्याम भजन / संकीर्तन |
| भाषा | सरल हिंदी / ब्रजभाषा मिश्रित |
| भक्ति भाव | अनन्य प्रेम, पूर्ण शरणागति और विनय |
| उपयुक्त अवसर | दैनिक पूजा, एकादशी, सत्संग, औरर्तन, जन्माष्टमी |
| प्रमुख मंच | भक्तिलोक (Bhaktilok.in) |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह लेख श्री कृष्ण भक्ति और संकीर्तन परंपरा के अंतर्गत संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसे पाठकों की आध्यात्मिक रुचि, प्रामाणिक भक्ति साहित्य और सनातन संस्कृति के सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए सुसज्जित किया गया है। यदि आपके पास इस भजन से संबंधित कोई अन्य संस्करण या सुझाव है, तो आप संपर्क कर सकते हैं।
स्रोत एवं संदर्भ (Sources & References)
- श्रीमद्भगवद्गीता (यथार्थ रूप) - व्यास जी
- पारंपरिक सनातन संकीर्तन और श्याम भजन ग्रंथ
- भक्तिकाल की प्रेममार्गी एवं कृष्णोपासना काव्य परंपरा
संबंधित भजन एवं लेख
श्री कृष्ण चालीसा लिरिक्स एवं अर्थ
भगवान बांके बिहारी की महिमा और संपूर्ण चालीसा पाठ का विस्तृत भावार्थ पढ़ें।
श्री खाटू श्याम जी आरती लिरिक्स
हारे के सहारे बाबा खाटू श्याम की पावन आरती और पूजन विधि की संपूर्ण जानकारी।
अच्युतम केशवम कृष्ण स्तोत्रम
मधुर कृष्ण स्तोत्र का संस्कृत पाठ, हिंदी अनुवाद और आध्यात्मिक महत्व।
पाठकों के विचार (0)
भक्ति रस चर्चा में भाग लें