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Krishna Bhajan

देता हर दम सांवरे तू हारे का साथ लिरिक्स भजन ( Deta Hardam Sanware Tu Haare Ka Sath Lyrics in Hindi ) - Krishna Bhajan - Bhaktilok

120 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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कृष्ण की कृपा के लिए हृदय से भजन

सांवरे कृष्ण की महिमा का निरंतर अनुभव करने के लिए यह भजन गाइए।

देता हर दम सांवरे तू हारे का साथ मैं भी जग से हार के आया था म ले मेरा हाथ देता हर दम सांवरे रो रही आँखें मेरी हँसता ज़मान है मुश्किलों में घिर गया तेरा दीवाना है बिन तेरे कौन सुने मेरे दिल की बात मैं भी जग से हार के आया था म ले मेरा हाथ देता हर दम सांवरे दो आंसू तो दे दे चारनो में बहाने को मुझे चरणों से लगाले मेरे श्याम हर कदम पर क्यों भला मैं मार खाता हूँ जीतना चहुँ मगर मैं हार जाता हूँ आजा अब तू देख ले मेरे ये हालात मैं भी जग से हार के आया था म ले मेरा हाथ देता हर दम सांवरे तू नहीं सुनता अगर किसको बताता मैं घाव जो दिल पे लगे किसको दिखता मैं हर्ष ज़माने ने दिए कितने ही आघात मैं भी जग से हार के आया था म ले मेरा हाथ देता हर दम सांवरे

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में भक्त ने भगवान श्री कृष्ण से हार के आने की स्वीकार्यता व्यक्त की है। पहले श्लोक में, भक्त कहता है कि 'देता हर दम सांवरे तू हारे का साथ', इसका अर्थ है कि ईश्वर उसके जीवन में हर समय साथ देते हैं। इस भजन में जीवन के संघर्षों, मुश्किलों और हताशा का जिक्र है, जहां भक्त ने जग से हार मान ली है और उसे श्री कृष्ण के सहारे की जरूरत है। यह भाव एक प्रकार की विनम्रता को दर्शाता है, जिसमें भक्त ईश्वर को अपना मार्गदर्शक मानते हैं। यह हमारे जीवन की कठिनाइयों में भी भगवान की उपस्थिति का अनुभव करने का एक तरीका है।

भजन में अन्य कई भावनाएँ भी झलकी हैं। जैसे, 'रो रही आँखें मेरी हँसता ज़मान है' स्थिति की दुष्करता को दर्शाता है जहां एक भक्त के दिल की आवाज़ को कोई सुन नहीं रहा है। भक्त अपनी पीड़ा और कष्टों को भगवान के चरणों में समर्पित कर, उनसे नम्र निवेदन करता है कि वह उसकी लज्जा और दुख को समझें। यह स्पष्ट रूप से दिखाता है कि भक्ति का मार्ग एक व्यक्ति को कैसा सशक्त बनाता है, क्योंकि वह श्रृंगार के बजाय अपनी कमी, कठिनाई और अज्ञानता को स्वीकार करके श्री कृष्ण का ध्यान खींचता है।

भक्ति मार्ग की गहराई को इस भजन में समझा जा सकता है, जहां भक्त ने 'मैं भी जग से हार के आया था' कहकर जिज्ञासा जताई है। यह दर्शाता है कि भक्ति में हार मानने का भाव भी महत्वपूर्ण है। जब एक व्यक्ति भगवान के प्रति समर्पित हो जाता है, तो उसकी आत्मा के कष्ट और वस्त्र उसके आत्म-साक्षात्कार का मार्ग बन जाते हैं। भक्ति का यह सफर हमें इस तथ्य पर प्रेरित करता है कि ईश्वर ही हमारे दुखों का निराकरण कर सकते हैं, और हर समस्या में हमें सच्चाई के रूप में अडिग रहना चाहिए।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन, जो श्री कृष्ण के प्रति प्रेम और समर्पण की अद्भुत अभिव्यक्ति है, पुरानी संत परंपरा का हिस्सा है। महाभारत और पुराणों में वर्णित भगवान श्री कृष्ण ने भक्तों की कठिनाइयों के समय में सहायता की है, जैसे कभी-कभी अर्जुन की पीड़ा को समझना या गीता का संदेश देना। इस प्रकार के भजनों का पाठ करने से भक्त को श्री कृष्ण का निकटता और उनकी कृपा का अनुभव होता है। यह भजन उन लोगों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जो जीवन की जटिलताओं और कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का जप या गायन मानसिक शांति और आंतरिक बल का संचार करता है। यह भक्ति पाठ भक्तों को सकारात्मक ऊर्जा और उत्साह प्रदान करता है, जिससे वे अपनी कठिनाइयों का सामना करने में सक्षम बनते हैं। भक्ति संगीत से मन में संतोष और खुशी का अनुभव होता है, और यह मन को सुकून प्रदान करता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जप सुबह के समय या शाम को किया जा सकता है। जप के समय ध्यान केंद्रित करने के लिए एक दीया जलाना और भगवान के समक्ष भोग के रूप में कुछ फल या मिठाई अर्पित करना शुभ होता है। ध्यान से बैठकर, भक्त को पूरा ध्यान श्री कृष्ण पर केंद्रित करना चाहिए और मन की शांत व सकारात्मक स्थिति में रहना चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश यह है कि ईश्वर हर मुश्किल में हमारे साथ हैं और हमें उनकी मदद चाहिए। यह भक्ति की भावना को प्रकट करता है कि कैसे भक्त अपने हृदय के दर्द को भगवान के चरणों में रखते हैं।

कृष्ण भक्ति का अनुसरण करने का क्या लाभ है?

कृष्ण भक्ति से मन में शांति मिलती है, कठिनाइयों का सामना करने का साहस पाते हैं, और भक्ति के माध्यम से आत्मिक उन्नति होती है। यह मानसिक स्वास्थ्य और संतुलन बनाए रखने में भी मदद करता है।

इस भजन को गाने का सही समय क्या है?

इस भजन को सुबह या शाम के समय गाना सर्वश्रेष्ठ होता है, खासकर जब मन शांति की ओर अग्रसर हो। ध्यान और भक्ति में गलतियों को सुधारने के लिए यह बेहद फलदायक होता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 03 Sep 2026

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