Papmochani Ekadashi Vrat Katha बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

भेजा है बुलावा तूने शेरा वालिए लिरिक्स भजन

शेरा वाले भजन का अर्थ और महत्व भक्ति मार्ग पर चलने वालों को दिव्य प्रेम और आस्था प्रदान करता है।

प्रस्तावना एवं परिचय

शेरा वाले: भक्ति का अमृत साधना

इस भजन के माध्यम से भाव भक्त के मन में प्रेम और भक्ति का संचार होता है।

भेजा है बुलावा तूने शेरा वालिए, भेजा है बुलावा तूने शेरा वालिए, तेरी महिमा गाई हम, देखो ये सारा जहाँ है। संगीत की मीठी धुन पर, आपकी भक्ति का राग है। भेजा है बुलावा तूने शेरा वालिए। तेरे चरणों में बसा है, सारा सुख का सागर। स्वर्ग से भी ऊपर है, ये सच्चा प्रेम का नागर। तू ही रक्षा करे, जीवन में घनघोर अंधेरा। भेजा है बुलावा तूने शेरा वालिए। याद तेरी छिंदार है, तेरा नाम सबसे प्यारा। भजते हैं तुझे हम सब, करते हैं तेरा सहारा। तूने दिया जो सहारा, वो जीवन सुख से भरा है। भेजा है बुलावा तूने शेरा वालिए।
साझा करें:

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह भजन भक्तिहीन मन के रंगों को भरने का प्रयास करता है, जिसमें 'बुलावा' का संदर्भ दिया गया है। 'भेजा है बुलावा तूने शेरा वालिए' यह भी दर्शाता है कि किस तरह भक्त अपने इष्ट देवता की ओर आकर्षित हो रहा है। यह बोध कराता है कि जब हम सच्चे मन से प्रार्थना करते हैं, तो दिव्य शक्ति हमें बुलाने लगती है। इसमें सच्चे प्रेम, भक्ति, और आस्था की महत्ता को भी दर्शाया गया है। जैसे-जैसे भक्ति की धुन सुनाई देती है, भक्त का मन उस सागर में विलीन होता जाता है, जिससे वह अपना सभी दुख-दर्द भूल जाता है। यह भजन न केवल संगीत की एक कला है, बल्कि एक आध्यात्मिक यात्रा की ओर अग्रसर करता है।

इस भजन का भावार्थ हमें यह सिखाता है कि भक्ति में एक गहराई है, जो हमें हमारे इष्ट देवता के निकट लाती है। 'तेरे चरणों में बसा है, सारा सुख का सागर' इस पंक्ति में, सुख का सागर केवल भौतिक सुख नहीं है, बल्कि आध्यात्मिक शान्ति का प्रतीक है। भक्त विश्वास करता है कि उसके ईश्वर के चरणों में हर कठिनाई का समाधान है, और जब ईश्वर का स्मरण किया जाता है, तो जीवन में आए अंधकार को समाप्त कर दिया जाता है। एक आत्मीय संबंध की कल्पना करते हुए भक्त ईश्वर से प्रेम की आकांक्षा रखता है। इस भक्ति भजन में भक्ति के उच्चतम रूप को दर्शाया गया है, जहाँ भक्त केवल स्वयं को नहीं बल्कि समस्त प्रजा के कल्याण की भी प्रार्थना करता है।

भक्ति मार्ग की जो नींव इस भजन में स्थापित की गई है, वह दरअसल हमारे चरित्र के विकास में सहायक है। संतों के अनुसार, सच्ची भक्ति अपने स्वार्थ से परे होती है और इसमें केवल श्रद्धा और प्रेम होता है। यह भजन दृष्टि देता है कि भक्ति आत्मनिर्भरता की ओर नहीं, बल्कि ईश्वर पर निर्भरता की ओर ले जाती है। इस भजन में, ईश्वर के प्रति भक्ति केवल एक साधना नहीं, बल्कि जीवन का आधार बन जाती है। भक्ति मार्ग पर चलने वाले भक्त को न केवल सुख-शांति मिलती है बल्कि उसके बीच एक अद्भुत दिव्यता का अनुभव होता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का संदर्भ हिन्दू धर्म में भक्ति के महत्व को दर्शाता है, जिसमें ईश्वर और भक्त के बीच एक अटल संबंध को रेखांकित किया गया है। पुराणों में भक्ति को आस्था और प्रेम का आसन बताया जाता है। यह भजन हमें याद दिलाता है कि कितना भी कठिन समय आए, सच्ची श्रद्धा और समर्पण से हम अपने भक्त के पास पहुँच सकते हैं। यह रामायण और महाभारत में भी वर्णित है कि कैसे भक्त अपनी भक्ति से ईश्वर को प्रसन्न करते हैं। यह भजन इस कथा को सशक्त करता है कि शुद्ध निष्ठा से की गई भक्ति सदा फलदायी होती है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का गायन मानसिक शांति और आंतरिक संतोष का साधन है। यह न केवल मानसिक तनाव को कम करता है बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करके आत्मा को अद्भुत शांतिपूर्ण स्थिति में ले जाता है। नियमित रूप से इस भजन का जाप करने से भक्त को सकारात्मकता प्राप्त होती है और वह जीवन में स्थिरता महसूस करता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप प्रातः काल या संध्या समय पर किया जाना चाहिए, जब मन शांत और निर्बाध हो। एक दीपक जलाकर, पुष्प अर्पित करते हुए प्रेम और समर्पण के साथ इस भजन का गायन करें। साधक को एक शांत और ध्यानमग्न मुद्रा में बैठना चाहिए, ताकि ईश्वर के प्रति उसकी भक्ति स्पष्ट हो सके।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन को गाने का सर्वोत्तम समय क्या है?

इस भजन को प्रातः या संध्या समय में गाना श्रेष्ठ माना जाता है, जब वातावरण शांत होता है और मन की एकाग्रता बढ़ती है।

क्या इस भजन के विशेष फायदे हैं?

इस भजन के नियमित जप से मानसिक तनाव कम होता है, सकारात्मकता और ऊर्जा का संचार होता है, जिससे जीवन में खुशियों की भरपूरता आती है।

इस भजन के दौरान किस प्रकार की साधना करें?

इस भजन के दौरान दीप जलाना, पुष्प अर्पित करना और ध्यानपूर्वक गाना चाहिए, ताकि भक्ति के प्रति आस्था प्रगाढ़ हो सके।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 11 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!