Punjabi Devi Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

जो सबकी चिंता दूर करे (Jo Sabki Chinta Door Kare) - Devi Geet

नरेंद्र चंचल द्वारा गाए प्रसिद्ध देवी गीत 'जो सबकी चिंता दूर करे' के बोल, हिंदी अर्थ और आध्यात्मिक महत्व को जानें। मां दुर्गा की भक्ति का आनंद लें।

आदिशक्ति भगवती दुर्गा की आराधना सनातन धर्म में परम कल्याणकारी और समस्त दुखों का निवारण करने वाली मानी गई है। जब मानव जीवन में विपत्तियों का अंधकार छा जाता है और मन चिंताओं के भंवर में फंस जाता है, तब केवल जगदम्बा की शरण ही एकमात्र संबल बनती है। सुप्रसिद्ध भजन सम्राट नरेंद्र चंचल जी द्वारा गाया गया यह अत्यंत लोकप्रिय देवी गीत "जो सबकी चिंता दूर करे (Jo Sabki Chinta Door Kare)" माता रानी के प्रति अटूट विश्वास और अनन्य शरणागति का जीवंत प्रतीक है। यह गीत न केवल मन को असीम शांति प्रदान करता है, बल्कि साधक के भीतर एक नई ऊर्जा, शक्ति और सकारात्मकता का संचार करता है। इस लेख में हम इस पावन देवी गीत के संपूर्ण बोल, उसका गहन आध्यात्मिक भावार्थ, कठिन शब्दों के अर्थ, और इसके गायन-श्रवण के महत्व का सविस्तार विवेचन करेंगे। इस भजन के माध्यम से भक्त अपनी समस्त चिंताओं को मां के चरणों में समर्पित कर निश्चिंत हो जाता है।

सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics

जो सबकी चिंता दूर करे (Jo Sabki Chinta Door Kare)


जो सबकी चिंता दूर करे, वो है शेरावाली।
जो सबकी झोली भरपूर करे, वो है लाटांवाली।
मैया जी के द्वारे जो भी सवाली आता है,
खाली हाथ नहीं जाता, झोली भर के जाता है।

मैया शेरावाली, मैया लाटांवाली,
मैया जोतांवाली, मैया मेहरांवाली।

जो सबकी चिंता दूर करे, वो है शेरावाली।
जो सबकी झोली भरपूर करे, वो है लाटांवाली।

ऊंचे पहाड़ों पे मैया का डेरा है,
चारों तरफ मैया की कृपा का घेरा है।
भक्तों की पुकार सुनके दौड़ी चली आती है,
अपने बच्चों के सारे कष्ट मिटाती है।

जो सबकी चिंता दूर करे, वो है शेरावाली।
जो सबकी झोली भरपूर करे, वो है लाटांवाली।

मैया के चरणों में जो शीश झुकाता है,
वो भवसागर से पार उतर जाता है।
नाम जपो मैया का, सुबह और शाम को,
पूरा करेगी मैया तुम्हारे हर काम को।

जो सबकी चिंता दूर करे, वो है शेरावाली।
जो सबकी झोली भरपूर करे, वो है लाटांवाली।

मैया शेरावाली, मैया लाटांवाली,
मैया जोतांवाली, मैया मेहरांवाली।
जो सबकी चिंता दूर करे, वो है शेरावाली।

गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth

यह भजन अत्यंत सरल और सुबोध भाषा में लिखा गया है, परंतु इसका आध्यात्मिक अर्थ अत्यंत गहरा है। इस भजन का मुख्य भाव पूर्ण समर्पण और विश्वास है।

प्रथम अंतरा: शरणागति और सर्वव्यापकता

भजन की शुरुआत में ही कहा गया है कि जो संपूर्ण जगत की चिंताओं को हर लेती हैं, वही शेरावाली मां हैं। संसार में ऐसा कोई जीव नहीं है जिसकी चिंता मां दूर न कर सके। मां लाटांवाली (ज्वालाजी) अपने भक्तों की झोलियां खुशियों और समृद्धि से भर देती हैं। मां के दरबार में आने वाला कोई भी याचक खाली हाथ नहीं लौटता। यह पंक्ति दर्शाती है कि देवी मां अत्यंत दयालु और उदार हैं, वे अपने बच्चों की हर पुकार सुनती हैं और उनकी झोली को अपनी असीम कृपा से भर देती हैं।

द्वितीय अंतरा: दिव्य निवास और त्वरित कृपा

मां का निवास ऊंचे पहाड़ों पर है, जो इस बात का प्रतीक है कि मां का स्थान सांसारिक प्रपंचों से ऊपर, परम पावन और दिव्य है। पहाड़ों की ऊंचाई साधक के ऊंचे विचारों और साधना के स्तर को भी दर्शाती है। मां की कृपा का घेरा चारों तरफ फैला हुआ है। जैसे ही कोई भक्त सच्चे हृदय से मां को पुकारता है, मां अविलंब उसकी सहायता के लिए दौड़ी चली आती हैं और उसके समस्त कष्टों का निवारण कर देती हैं।

तृतीय अंतरा: नाम संकीर्तन और भवसागर से मुक्ति

भजन के अंतिम भाग में नाम संकीर्तन की महिमा का वर्णन है। जो भक्त मां के चरणों में अपना शीश झुकाता है, अर्थात अपने अहंकार का त्याग करता है, वह इस संसार रूपी भवसागर से सुगमता से पार हो जाता है। सुबह और शाम मां के नाम का जप करने से जीवन के सभी विघ्न-बाधाएं दूर हो जाती हैं और मां साधक के सभी मनोरथों को पूर्ण करती हैं।

गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message

इस देवी गीत की मुख्य भावना "वात्सल्य रस" और "भक्ति रस" से ओतप्रोत है। यह भजन हमें निम्नलिखित महत्वपूर्ण संदेश देता है:

  • अहंकार का विसर्जन: मां के चरणों में शीश झुकाना इस बात का प्रतीक है कि जब तक मनुष्य अपने अहंकार को नहीं छोड़ता, तब तक उसे सच्ची शांति और मां की कृपा प्राप्त नहीं हो सकती।
  • अटूट विश्वास: जीवन में चाहे कितनी भी कठिन परिस्थितियां क्यों न आएं, यदि हमें मां की शक्ति पर पूर्ण विश्वास है, तो हमारी चिंताएं स्वतः ही समाप्त हो जाती हैं।
  • नाम स्मरण की शक्ति: सुबह-शाम मां के नाम का जप करने से मानसिक तनाव दूर होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

गीत की जानकारी | Song Information

विवरण बिंदु जानकारी
गीत का नाम जो सबकी चिंता दूर करे (Jo Sabki Chinta Door Kare)
गायक (Singer) नरेन्द्र चंचल (Narendra Chanchal)
संगीत निर्देशक (Music Director) सुरिंदर कोहली (Surinder Kohli)
गीतकार (Lyricist) नम्रता नरेंद्र चंचल (Namrata Narendra Chanchal)
एल्बम (Album) आओ मैयाजी तुम्हें भोग लगाऊं (Aao Maiyaji Tumhein Bhog Lagaoon)
संगीत लेबल (Music Label) टी-सीरीज (T-Series)
भाषा (Language) हिन्दी और पंजाबी मिश्रित (Devi Geet)

गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators

इस कालजयी भजन को स्वर देने वाले महान गायक नरेन्द्र चंचल जी हैं, जिन्हें भारत में "भजन सम्राट" के रूप में जाना जाता है। उनके कंठ की खनक और जगरातों में गाए जाने वाले उनके भजनों ने करोड़ों भक्तों के दिलों में मां दुर्गा के प्रति अगाध श्रद्धा जगाई है। सुरिंदर कोहली जी का मधुर संगीत और नम्रता नरेंद्र चंचल जी के भावपूर्ण शब्द इस भजन को और भी अधिक प्रभावशाली बनाते हैं। नरेन्द्र चंचल जी की अनूठी गायन शैली के कारण ही यह भजन आज भी हर मंदिर, जगराते और नवरात्र उत्सव की शान बना हुआ है।

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings

शब्द सरल अर्थ संदर्भ / महत्व
शेरावाली सिंह पर सवारी करने वाली मां दुर्गा मां के पराक्रम और शक्ति का प्रतीक
लाटांवाली ज्वाला के रूप में प्रकट होने वाली मां ज्वालाजी मंदिर (हिमाचल प्रदेश) से संबंधित
सवाली प्रार्थना करने वाला या याचक मां के दरबार में अपनी अर्जी लगाने वाला भक्त
जोतांवाली दिव्य ज्योत के रूप में पूजी जाने वाली मां प्रकाश और ज्ञान की देवी
मेहरांवाली कृपा बरसाने वाली मां मां की असीम करुणा और दया
भवसागर संसार रूपी सागर जन्म और मृत्यु का चक्र

गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance

सनातन संस्कृति में शक्ति पूजा का विशेष महत्व है। यह भजन केवल एक गीत नहीं है, बल्कि यह एक प्रार्थना है जो साधक को मानसिक चिंताओं से मुक्त कर आध्यात्मिक चेतना की ओर ले जाती है।

सांस्कृतिक रूप से, उत्तर भारत में आयोजित होने वाले माता के जगरातों और चौकियों में इस भजन का गायन अनिवार्य रूप से किया जाता है। जब भक्त सामूहिक रूप से इस भजन को गाते हैं, तो पूरा वातावरण मां के जयकारों से गूंज उठता है। यह भजन भक्तों में एकता, भाईचारा और सामूहिक भक्ति की भावना को सुदृढ़ करता है। इसके साथ ही, देवी भजन की इस समृद्ध परंपरा को युवा पीढ़ी तक पहुंचाने में भी इस गीत का बहुत बड़ा योगदान है।

गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons

यह पावन भजन हमें व्यावहारिक जीवन में कई महत्वपूर्ण सीख देता है:

  1. चिंता का त्याग कर चिंतन करें: चिंता चिता के समान होती है। भजन हमें सिखाता है कि अपनी चिंताओं को मां के चरणों में सौंपकर हमें कर्म करना चाहिए और मां का चिंतन करना चाहिए।
  2. धैर्य और विश्वास: कठिन समय में विचलित हुए बिना मां की शक्ति पर विश्वास रखना चाहिए, क्योंकि वे अपने बच्चों के कष्टों को कभी अनदेखा नहीं करतीं।
  3. समर्पण भाव: जीवन की हर सफलता और असफलता को मां की इच्छा मानकर स्वीकार करना ही सच्ची भक्ति है।

गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing

वैसे तो मां की आराधना किसी भी समय की जा सकती है, परंतु इस भजन को सुनने और गाने के कुछ विशेष अवसर निम्नलिखित हैं:

  • शारदीय एवं चैत्र नवरात्रि: नवरात्रि के पावन नौ दिनों में इस भजन का श्रवण अत्यंत फलदायी माना जाता है।
  • माता की चौकी और जगराता: किसी भी मांगलिक कार्य की शुरुआत में माता की चौकी या जगराते के दौरान इस भजन को गाकर मां का आशीर्वाद लिया जाता है।
  • दैनिक संध्या आरती: घर के मंदिर में संध्या काल की पूजा के समय इस भजन को बजाने से घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।

एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance

मुख्य बिंदु संक्षिप्त विवरण
मुख्य देवी आदिशक्ति मां दुर्गा (शेरावाली)
मुख्य भाव शरणागति, करुणा, और अगाध श्रद्धा
प्रसिद्ध गायक नरेन्द्र चंचल
उपयुक्त अवसर नवरात्रि, माता की चौकी, जगराता, दैनिक पूजा
संबंधित स्तोत्र श्री दुर्गा चालीसा, आरती संग्रह

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस भजन के मूल गायक सुप्रसिद्ध भजन सम्राट नरेन्द्र चंचल जी हैं। उनकी अनूठी और भावपूर्ण आवाज ने इस भजन को घर-घर में लोकप्रिय बना दिया है।

"लाटांवाली" का अर्थ है ज्वाला के रूप में प्रकट होने वाली देवी। यह मुख्य रूप से हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध शक्तिपीठ "ज्वालाजी मंदिर" को संदर्भित करता है, जहां मां ज्योति के रूप में विराजमान हैं।

इस भजन को सुबह की पूजा के समय या संध्या काल में सुनना अत्यंत शुभ माना जाता है। विशेष रूप से नवरात्रि के दिनों में इसका श्रवण मन को शांति और सकारात्मकता प्रदान करता है।

हां, इस भजन के शब्द और संगीत भक्त के मन में सुरक्षा और विश्वास की भावना जगाते हैं। मां के प्रति पूर्ण समर्पण का भाव साधक के मानसिक तनाव और चिंताओं को दूर करने में अत्यंत सहायक सिद्ध होता है।

इस भजन के संगीत निर्देशक सुरिंदर कोहली जी हैं, जिन्होंने इस भजन को एक अत्यंत मधुर और कर्णप्रिय धुन से सजाया है।

यह भजन टी-सीरीज द्वारा जारी किए गए सुप्रसिद्ध एल्बम "आओ मैयाजी तुम्हें भोग लगाऊं" (Aao Maiyaji Tumhein Bhog Lagaoon) का हिस्सा है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इस लेख में प्रस्तुत भजन के बोल, अर्थ और आध्यात्मिक व्याख्या को प्रामाणिक स्रोतों और सनातन परंपरा के अनुसार संकलित किया गया है। नरेन्द्र चंचल जी के भजनों की यह श्रृंखला भक्तों को मां दुर्गा की भक्ति के रस में सराबोर करने के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्देवीभागवत महापुराण - मां दुर्गा की महिमा और उनके विभिन्न रूपों का वर्णन।
  • टी-सीरीज भक्ति सागर - "आओ मैयाजी तुम्हें भोग लगाऊं" एल्बम के आधिकारिक विवरण।
  • सनातन भजन परंपरा और लोक संगीत संग्रह।

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 10 Oct 2026

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