Parvati Stotram

बिन पिये नशा हो जाता है जब सूरत देखू भोळे की लिरिक्स (Bin Piye Nasha Ho Jata Hai Jab Surat Dekhu Bhole Ki Lyrics in Hindi) - Bhaktilok

209 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रस्तावना एवं परिचय

भोलेनाथ की आनंदमयी भक्ति: निराधार प्रेम का अनुभव

शिव की दिव्य छवि देखकर भक्त नशे में चूर हो जाते हैं, इसमें गहराई और प्रेम का अनूठा अनुभव है।

बिन पिये नशा हो जाता है जब सूरत देखू भोळे कीबिन पिये नशा हो जाता हैजब सूरत देखू भोले कीबिन पिये नशा हो जाता हैजब सूरत देखू भोले कीउसके शीश पे चँदा विराज रहाचँदा की चांदनी में खो जाऊँजब सूरत देखू भोले कीबिन पिए नशा हो जाता हैजब सूरत देखू भोळे कीउसके गले में नाग विराज रहानागाँ की लहर में खो जाऊँजब सूरत देखू भोले कीबिन पिए नशा हो जाता हैजब सूरत देखू भोले कीउसके हाथ में डमरुँ विराज रहाडमरुँ की ताल में खो जाऊँजब सूरत देखू भोले कीबिन पिए नशा हो जाता हैजब सूरत देखू भोले कीउसके पैरो में घुंघरू विराज रहेघुंघरूं की ताल में खो जाऊँजब सूरत देखू भोले कीबिन पिए नशा हो जाता हैजब सूरत देखू भोले कीबिन पिये नशा हो जाता हैजब सूरत देखू भोले कीबिन पिये नशा हो जाता हैजब सूरत देखू भोले की
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का प्राथमिक विषय भोलेनाथ की दिव्यता और भक्त की भावना का अनूठा समर्पण है। 'बिन पिये नशा हो जाता है जब सूरत देखू भोले की', यह वाक्य भक्त की उस गहन अनुभूति को दर्शाता है, जब वह शिवजी की छवि को देखकर तृप्ति और नशे का अनुभव करता है। शिवजी की सुंदरता और उनकी दिव्य ऊर्जा भक्त के मन-मस्तिष्क को आनंदित कर देती है। अगला अंश, 'उसके शीश पे चँदा विराज रहा' दर्शाता है कि शिवजी के सिर पर चाँद का दृश्य उनकी शांति और सौंदर्य को दर्शाता है। यह भक्ति का एक अनूठा पहलू है, जहाँ भक्त शिवजी की छवि को अपने मन में बसा लेते हैं और उनके धाम में खो जाते हैं।

इस गीत में भक्त की श्रद्धा और असीम प्रेम को स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है। 'चाँदनी में खो जाऊँ' का वाक्य दर्शाता है कि शिवजी की छवि में कितनी गहराई और प्रकाश है, जिससे भक्त अपने सांसारिक दुख-दर्दों को भुलाकर आनंदित हो जाता है। 'उसके गले में नाग विराज' और 'डमरुँ की ताल' जैसे शब्द परमेश्वर की अनूठी कला और क्रीड़ा को दर्शाते हैं। इन पंक्तियों में मुग्ध होकर भक्त अपनी सारी चिंताओं को भुलाकर शिव की स्तुति करता है। इस नशे का तात्पर्य केवल भौतिक नशे से नहीं, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति और अनुभव से भी है।

इस भजन के मुख्य धार्मिक तत्व भक्ति मार्ग का अनोखा अनुभव प्रस्तुत करते हैं। भक्तिभाव की गहराई को समझते हुए, हम देखते हैं कि शिव के प्रति यह समर्पण अनिर्वचनीय आनंद और शांति का स्रोत है। 'घुंघरू की ताल' इस बात को दर्शाता है कि भक्ति संगीत और नृत्य के माध्यम से भी परमेश्वर के साथ संबंध को गहराई में लाती है। अनुशासन, प्रेम और शांति के मार्ग पर चलने वाले भक्त का स्वरूप ही इस कविता का मूल अधिभाव है। यह भजन साधना के माध्यम से आत्मिक और भावनात्मक जातिका की उडान को प्रस्तुत करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन की पृष्ठभूमि में शिवजी का महत्व छिपा हुआ है, जो विभिन्न पुराणों में माँ पार्वती के पति और सृष्टि के सृजनकर्ता के रूप में प्रतिष्ठित हैं। शिव का भक्ति भाव रामायण और महाभारत में भी दर्शाया गया है, जहाँ उनके प्रति श्रद्धा प्रकट की गई है। शिव की छवि केवल एक सज्जन युाग का प्रतिनिधित्व नहीं करती, बल्कि समस्त जीवन के संहार और सृजन के प्रतीक के रूप में भी जानी जाती है। भक्ति और प्रेम के माध्यम से शिव के ध्यान में लीन होने का का मार्ग भक्तों को दिव्यता की ओर अग्रसर करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। भोलेनाथ के इस भजन का जप करने से मानसिक शांति और आध्यात्मिक अनुभूति की प्राप्ति होती है। यह भक्तों को तनाव मुक्त करने में मदद करता है और मन की शांति प्रदान करता है। इस भजन को गुनगुनाने से आत्म-संयम और विवेक में वृद्धि होती है। मन में विश्वास और सकारात्मकता उत्पन्न होती है, जिससे जीवन में उपलब्दियों का मार्ग प्रशस्त होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का अभ्यास सुबह-सुबह या संध्या समय किया जाता है, जब वातावरण में शांति होती है। पूजन करने के लिए एक साफ स्थान पर बैठकर एक दीप जलाना और शिवलिंग या शिव की तस्वीर के सामने पेश करना उचित है। उचित मुद्रा में बैठकर भजन का ध्यान करते हुए यह पवित्र गान गाना चाहिए। मन में भक्ति भाव और तरंग लाकर इसे गाने से उपासना अधिक फलदायी होती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश है शिवजी की विलक्षण सुंदरता और भक्त की सम्पूर्ण निष्ठा और प्रेम। यह भक्त को आध्यात्मिक नशे में चूर करने वाली भावना का अनुभव कराता है।

भोलेनाथ की छवि में क्या विशेषताएँ हैं?

भोलेनाथ की छवि में चाँद, नाग और डमरुँ जैसे प्रतीक हैं, जो उनकी दिव्यता, शक्ति और संगीनीता को दर्शाते हैं। ये सब तत्व उन्हें अनूठा बनाते हैं।

इस भजन का महत्व क्यों है?

यह भजन भक्तों को शिव की स्तुति और भक्ति का अनुभव कराता है, जिससे आध्यात्मिक विकास और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है। इसके माध्यम से भक्त शिव के प्रति अपनी भक्ति और प्यार का इज़हार करते हैं।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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