Shyam Bhajan

हर श्याम प्रेमी की बाबा ने मौज कर दी ( Mauj Kar Di Lyrics in hindi )

71 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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हर श्याम प्रेमी की बाबा ने मौज कर दी ( Mauj Kar Di Lyrics in hindi )

खाटू श्याम बाबा के दरबार में जब एक भक्त की पुकार पहुँचती है, तो बाबा उसकी झोली ऐसी खुशियों से भर देते हैं कि उसका जीवन उत्सव बन जाता है। प्रसिद्ध गायक सचिन श्याम द्वारा गाया गया यह लोकप्रिय भजन "हर श्याम प्रेमी की बाबा ने मौज कर दी" कलयुग के धनी लखाती दाता हारे के सहारे बाबा श्याम की अहेतुकी कृपा का अत्यंत जीवंत और हृदयस्पर्शी वर्णन करता है। इस भजन का प्रत्येक शब्द श्याम भक्तों के अंतर्मन में एक नई ऊर्जा, अगाध विश्वास और परमानंद का संचार करता है। जब साधक श्याम बाबा के चरणों में अपनी पूर्ण शरणागति अर्पित करता है, तो उसके जीवन के सारे कष्ट स्वतः ही समाप्त हो जाते हैं और बाबा उसे ऐसी मौज बख्शते हैं जो इस संसार के भौतिक सुखों से परे होती है।

सनातनी परंपरा में संकीर्तन और प्रभु स्मरण को कलयुग का सबसे सरल और प्रभावी साधन माना गया है। श्री खाटू श्याम जी (जिन्हें बर्बरीक के रूप में पूजा जाता है) अपने हर उस भक्त की सुधि लेते हैं जो सच्चे मन से उन्हें याद करता है। इस भजन के माध्यम से न केवल बाबा की महिमा का गुणगान किया गया है, बल्कि श्याम प्रेमियों के उस आपसी प्रेम, भाईचारे और आनंदमय उत्सव का भी सुंदर चित्रण किया गया है जो खाटू धाम की फाल्गुन और निशान यात्राओं के दौरान देखने को मिलता है। इस विस्तृत लेख में हम इस पावन भजन के संपूर्ण लिरिक्स, सरल हिंदी अर्थ, आध्यात्मिक महत्व, गायन की विधि और श्याम बाबा से जुड़ी महिमा का संपूर्ण रसास्वादन करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

स्थाई (मुखड़ा)

हर श्याम प्रेमी की बाबा ने मौज कर दी,

मौज कर दी मेरे खाटू वाले ने मौज कर दी।

जिसने लगाई श्याम नाम की लगन,

उसकी तो बाबा ने तकदीर ही रोज कर दी॥

अंतरा 1

हार के जो आया दर पे श्याम बाबा के,

गले से लगाया उसे श्याम बाबा ने।

दुनिया ठुकराए जिसे अपनाए सांवरिया,

छप्पर फाड़ के दी ऐसी मेहरबानिया।

दुखियों के आंसू पल भर में पोंछ कर दी॥
हर श्याम प्रेमी की बाबा ने मौज कर दी...

अंतरा 2

फाल्गुन का मेला जब खाटू में सजता है,

श्याम धनी का दरबार बड़ा फबता है।

निशान हाथों में ले भक्त झूमते हैं,

बाबा के चरणों में शीश चूमते हैं।

दीवानों की दुनिया ही अनोखी खोज कर दी॥
हर श्याम प्रेमी की बाबा ने मौज कर दी...

अंतरा 3

सचिन श्याम गाए महिमा मेरे श्याम की,

दुनिया दीवानी हुई इस नाम की।

चरणों की धूल मेरे माथे पे सजा दो,

जिंदगी ये सारी बाबा तुझको ही दे दी।

प्रेमी की हर मुराद पूरी आज कर दी॥
हर श्याम प्रेमी की बाबा ने मौज कर दी...

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस पावन भजन का भावार्थ अत्यंत गहरा है जो भक्त और भगवान के बीच के अनन्य प्रेम को उजागर करता है। भजन की पहली पंक्ति "हर श्याम प्रेमी की बाबा ने मौज कर दी" यह स्पष्ट करती है कि जो भी व्यक्ति अपने जीवन में भगवान श्री खाटू श्याम को अपने आराध्य के रूप में स्वीकार कर लेता है, उसके जीवन के सारे अभाव और संताप मिट जाते हैं। बाबा उसे ऐसी परम शांति और आनंद प्रदान करते हैं जिसे सांसारिक भाषा में 'मौज' कहा गया है। कलयुग में भगवान श्याम हारे का सहारा बनकर अपने भक्तों की रक्षा करते हैं।

आगे की पंक्तियों में गायक कहते हैं कि "जिसने लगाई श्याम नाम की लगन, उसकी तो बाबा ने तकदीर ही रोज कर दी।" इसका तात्पर्य यह है कि नामस्मरण और सच्ची भक्ति मनुष्य के भाग्य को बदलने की सामर्थ्य रखती है। जो व्यक्ति दुनिया से ठुकराया हुआ होता है, जिसे चारों तरफ से निराशा मिलती है, जब वह खाटू के दरबार में पहुँचता है तो सांवरिया उसे अपने गले से लगा लेते हैं। फाल्गुन मेले और निशान यात्रा का प्रसंग यह दर्शाता है कि कैसे लाखों भक्त अपनी सारी चिंताएं छोड़कर केवल बाबा की भक्ति में सराबोर होकर झूमते हैं। यह भजन साधक के अंतर्मन को भौतिक बंधनों से मुक्त कर आध्यात्मिक आनंद की ओर ले जाता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • भक्ति का अनूठा रस: यह भजन साधक के हृदय में श्याम प्रेम के प्रति गहरी निष्ठा और उत्साह जगाता है।
  • हारे का सहारा: भजन में खाटू श्याम बाबा के उस स्वभाव का सुंदर चित्रण है जहाँ वे हारे हुए और निराश मनुष्यों को संबल प्रदान करते हैं।
  • सांस्कृतिक जुड़ाव: फाल्गुन मेले, निशान यात्रा और खाटू धाम की संस्कृति को इस भजन में बहुत ही जीवंत रूप से पिरोया गया है।
  • मानसिक शांति: इस भजन को सुनने या गुनगुनाने से तनाव, चिंता और मानसिक अशांति दूर होती है तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

श्याम बाबा के भजनों को गाने या सुनने के लिए किसी विशेष समय या कठोर नियमों की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि श्याम बाबा अपने भक्तों के भाव के भूखे हैं। फिर भी, इस भजन के गायन और श्रवण से अधिकतम आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित नियमों का पालन किया जा सकता है:

  • ब्रह्म मुहूर्त या संध्याकाल: प्रातः काल स्नान के पश्चात पूजा के समय या संध्या के समय दीपक प्रज्वलित करके इस भजन का स्मरण करना अत्यंत फलदायी माना गया है।
  • श्याम संकीर्तन / जागरण: घर पर होने वाले पारिवारिक आयोजनों, एकादशी व्रत के दिन या खाटू श्याम के मासिक कीर्तन में इस भजन को सामूहिक रूप से गाया जा सकता है।
  • भावपूर्ण स्मरण: भजन गाते समय मन में बाबा श्याम के अलौकिक स्वरूप और उनके दरबार की छवि का ध्यान रखना चाहिए।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के केंद्र में महाभारत काल के महान योद्धा और भगवान श्री कृष्ण द्वारा वरदान प्राप्त श्री बर्बरीक यानी हमारे आराध्य खाटू श्याम बाबा हैं। भगवान श्री कृष्ण ने बर्बरीक के अद्वितीय त्याग और दानशीलता से प्रसन्न होकर उन्हें कलयुग में अपने ही नाम 'श्याम' से पूजे जाने का वरदान दिया था। आज राजस्थान के सीकर जिले स्थित खाटू धाम में उनका भव्य मंदिर है जहाँ देश-विदेश से करोड़ों श्याम प्रेमी शीश नवाने आते हैं। इसके साथ ही, इस भजन के रचनाकार और लोकप्रिय गायक सचिन श्याम प्रेमी हैं जिन्होंने अपनी मधुर वाणी से इस रचना को अमर कर दिया है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

यह भजन सरल और सुबोध हिंदी (ब्रज-राजस्थानी मिश्रित लोक भाषा) में रचा गया है। इसकी शब्दावली इतनी सहज और कर्णप्रिय है कि आम जनमानस से लेकर बच्चे और बुजुर्ग भी इसे बहुत आसानी से गुनगुना सकते हैं। भजन में अनुप्रास और लयबद्धता का सुंदर प्रयोग किया गया है जैसे— *"मौज कर दी"*, *"तकदीर ही रोज कर दी"*, और *"छप्पर फाड़ के दी"* जैसे मुहावरों और लोक बोलियों के प्रयोग ने इस रचना को अत्यधिक प्रभावशाली और लोकप्रिय बना दिया है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

  • अटूट विश्वास: मनुष्य को जीवन की हर परिस्थिति में ईश्वर पर अटूट विश्वास रखना चाहिए। जो श्याम पर भरोसा रखता है, उसकी नैया कभी नहीं डूबती।
  • शरणागति का भाव: अहंकार का त्याग कर बाबा के चरणों में खुद को समर्पित कर देना ही सच्ची भक्ति है।
  • निराशा से मुक्ति: यह भजन सिखाता है कि चाहे दुनिया साथ छोड़ दे, यदि श्याम का हाथ आपके सिर पर है तो कोई आपका कुछ नहीं बिगाड़ सकता।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ संदर्भ / प्रसंग
श्याम प्रेमी भगवान खाटू श्याम का भक्त जो श्याम नाम में लीन रहता है
मौज कर दी असीम कृपा करना, आनंदित करना भक्त की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करना
लगातार लगन परमात्मा से गाढ़ प्रेम और जुड़ाव श्याम नाम का निरंतर स्मरण
फाल्गुन का मेला खाटू धाम का वार्षिक लक्खी मेला फाल्गुन मास की एकादशी का उत्सव
निशान श्याम भक्तों द्वारा ले जाया जाने वाला पवित्र ध्वज यात्रा और समर्पण का प्रतीक

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"हर श्याम प्रेमी की बाबा ने मौज कर दी..." - इस पंक्ति का अर्थ है कि खाटू श्याम जी अपने हर छोटे-बड़े भक्त की सुधि लेते हैं और उनकी हर मुराद पूरी करके उन्हें परमानंद से भर देते हैं।
"हार के जो आया दर पे श्याम बाबा के..." - यह संसार जब व्यक्ति को चारों तरफ से निराश कर देता है और वह हारकर बाबा की शरण में आता है, तो बाबा उसे गले से लगाकर उसकी सारी विपत्तियों को हर लेते हैं।
"फाल्गुन का मेला जब खाटू में सजता है..." - फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी पर खाटू धाम में जो अलौकिक उत्सव होता है, वहाँ भक्तों का उत्साह और बाबा का दरबार देखने योग्य होता है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

ॐ श्री खाटूश्यामय नमः

हारे का सहारा, बाबा श्याम हमारा। शीश के दानी की जय!

खाटू श्याम बाबा के इस मूल मंत्र का स्मरण करने से साधक को मानसिक बल और अटूट आस्तिकता की प्राप्ति होती है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम हर श्याम प्रेमी की बाबा ने मौज कर दी (Mauj Kar Di)
आराध्य देव श्री खाटू श्याम बाबा (बर्बरीक)
गायक / रचनाकार सचिन श्याम प्रेमी
भाषा हिंदी / राजस्थानी लोक शैली
मुख्य विषय / थीम भक्ति, शरणागति, कृपा और उत्सव
भाव (Bhava) उल्लास, आनंद और अनन्य प्रेम
उपयुक्त अवसर एकादशी पूजा, श्याम कीर्तन, जागरण, फाल्गुन मेला

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. "हर श्याम प्रेमी की बाबा ने मौज कर दी" भजन के गायक कौन हैं?

इस लोकप्रिय भजन के गायक और रचनाकार सचिन श्याम प्रेमी हैं, जिन्होंने अपनी मधुर आवाज से इसे श्याम भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय बनाया है।

Q2. खाटू श्याम बाबा को किसका अवतार माना जाता है?

खाटू श्याम बाबा को महाभारत के वीर योद्धा बर्बरीक का रूप माना जाता है, जिन्हें भगवान श्री कृष्ण ने कलयुग में अपने नाम 'श्याम' से पूजे जाने का वरदान दिया था।

Q3. खाटू श्याम जी का मुख्य मेला कब लगता है?

खाटू श्याम जी का मुख्य वार्षिक लक्खी मेला हर वर्ष फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की दशमी से द्वादशी (विशेषकर फाल्गुन एकादशी) के दौरान राजस्थान के सीकर जिले स्थित खाटू धाम में लगता है।

Q4. श्याम बाबा को 'हारे का सहारा' क्यों कहा जाता है?

ऐसी अटूट धार्मिक मान्यता है कि जो मनुष्य जीवन की हर परिस्थिति से हार जाता है और चारों तरफ से निराश हो जाता है, खाटू श्याम जी उसका संबल बनकर उसकी सहायता करते हैं।

Q5. इस भजन को कब और कैसे सुनना चाहिए?

इस भजन को आप किसी भी समय, विशेषकर प्रातःकालीन पूजा के समय, एकादशी व्रत के दिन या श्याम संकीर्तन और जागरण के दौरान सुन सकते हैं।

Q6. खाटू श्याम मंदिर कहाँ स्थित है?

खाटू श्याम जी का भव्य मंदिर राजस्थान राज्य के सीकर जिले के खाटू नामक कस्बे में स्थित है।

Q7. निशान यात्रा का श्याम भक्ति में क्या महत्व है?

निशान यात्रा श्याम भक्तों द्वारा हाथों में पवित्र निशान (ध्वज) लेकर खाटू धाम तक पैदल यात्रा करने की एक अत्यंत पवित्र परंपरा है, जो समर्पण का प्रतीक है।

Q8. घर पर श्याम बाबा की पूजा कैसे करनी चाहिए?

घर पर स्नान कर शुद्ध वस्त्र पहनकर बाबा की तस्वीर के समक्ष धूप-दीप जलाकर, भोग अर्पित कर इस भजन का पाठ या श्रवण करना चाहिए।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख हमारे विद्वान संपादकों और सनातन धर्म के शोधकर्ताओं द्वारा श्याम भक्तों की आध्यात्मिक जिज्ञासा को ध्यान में रखते हुए संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसका उद्देश्य पाठकों को सटीक लिरिक्स, सरल अर्थ और प्रामाणिक सांस्कृतिक संदर्भ प्रदान करना है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • पारंपरिक खाटू श्याम संकीर्तन साहित्य एवं लोक भजन परंपरा।
  • श्री खाटू श्याम मंदिर कमेटी, खाटू (सीकर, राजस्थान) की ऐतिहासिक व धार्मिक मान्यताएं।
  • महाभारत एवं पौराणिक ग्रंथ (बर्बरीक कथा प्रसंग)।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 25 Sep 2026

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