भक्ति काव्य व भजन मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

हे दुःख भन्जन मारुती नंदन - भजन (Hey Dukh Bhanjan Maruti Nandan Lyrics in Hindi )

हे दुःख भन्जन मारुती नंदन भजन के संपूर्ण बोल, हिंदी अर्थ और पाठ विधि पढ़ें। संकट मोचन हनुमान जी के इस पावन भजन से जीवन के सभी कष्ट दूर करें।

सनातन धर्म और भक्ति परंपरा में संकटमोचन भगवान हनुमान की महिमा अपरंपार है। जब भी भक्त किसी मानसिक, शारीरिक या आध्यात्मिक कष्ट से घिरता है, तो उसे केवल एक ही नाम स्मरण आता है—पवनसुत हनुमान। प्रस्तुत भजन "हे दुःख भन्जन मारुती नंदन" अनन्य प्रेम, पूर्ण शरणागति और संकटों से मुक्ति पाने का एक अत्यंत पावन और दिव्य माध्यम है। इस भजन का प्रत्येक शब्द भक्त के भीतर अगाध विश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। संगीत, लय और भाव के त्रिवेणी संगम से परिपूर्ण यह संकीर्तन विशेष रूप से मंगलवार, शनिवार, हनुमान जयंती और संकट मोचन अनुष्ठानों के दौरान बड़े प्रेम से गाया और सुना जाता है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस पावन भजन के संपूर्ण बोल, हिंदी अर्थ, भावार्थ, पाठ विधि, आध्यात्मिक महत्व और जीवन पर पड़ने वाले इसके गहरे प्रभावों का संपूर्ण अध्ययन करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें:


हे दुःख भन्जन मारुती नंदन,
सुन लो मेरी पुकार।
पवनसुत विनती बारम्बार ॥

हे दुःख भन्जन मारुती नंदन,
सुन लो मेरी पुकार।
पवनसुत विनती बारम्बार ॥

अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता,
दुखिओं के तुम भाग्यविधाता।
सियाराम के काज सवारे,
मेरा करो उद्धार ॥
पवनसुत विनती बारम्बार ॥

हे दुःख भन्जन मारुती नंदन,
सुन लो मेरी पुकार।
पवनसुत विनती बारम्बार ॥

अपरम्पार है शक्ति तुम्हारी,
तुम पर रीझे अवधबिहारी।
भक्तिभाव से ध्याऊं तोहे,
कर दुखों से पार ॥
पवनसुत विनती बारम्बार ॥

हे दुःख भन्जन मारुती नंदन,
सुन लो मेरी पुकार।
पवनसुत विनती बारम्बार ॥

जपूँ निरंतर नाम तिहरा,
अब नहीं छोडूं तेरा द्वारा।
रामभक्त मोहे शरण मे लीजे,
भाव सागर से तार ॥
पवनसुत विनती बारम्बार ॥

हे दुःख भन्जन मारुती नंदन,
सुन लो मेरी पुकार।
पवनसुत विनती बारम्बार ॥

हे दुःख भन्जन मारुती नंदन,
सुन लो मेरी पुकार।
पवनसुत विनती बारम्बार ॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन साधक की आर्त पुकार और हनुमान जी की करुणा का सुंदर जीवंत चित्रण प्रस्तुत करता है। पहले अंतरे में भक्त हनुमान जी को 'दुःख भंजन' और 'मारुति नंदन' कहकर संबोधित करता है, जिसका अर्थ है कि वे भक्तों के सभी दुखों को नष्ट करने वाले और माता अंजनी के आनंद को बढ़ाने वाले हैं। भक्त विनती करता है कि हे पवनसुत, मेरी इस पुकार को सुनिए, मैं बार-बार आपके चरणों में प्रार्थना करता हूँ।

दूसरे पद में हनुमान जी को श्री हनुमान चालीसा के प्रसंग के अनुसार 'अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता' यानी आठों सिद्धियों और नौ निधियों के प्रदाता के रूप में वंदना की गई है। वे दुखी जनों के भाग्य विधाता हैं जिन्होंने प्रभु श्री राम और माता सीता के सभी कार्यों को सुगमता से पूर्ण किया। भक्त प्रार्थना करता है कि जिस प्रकार आपने प्रभु के कार्य संवारे, उसी प्रकार मेरे जीवन के संकटों को दूर कर मेरा उद्धार कीजिए।

तीसरे और चौथे पद में हनुमान जी की असीम शक्तियों और अवधबिहारी (श्री राम) के प्रति उनकी अनन्य भक्ति का वर्णन है। भगवान राम जिन पर रीझते हैं, वे पवनसुत ही हैं। भक्त कहता है कि मैं निरंतर आपके पवित्र नाम का जप करता हूँ और अब आपका यह द्वार कभी नहीं छोडूँगा। मुझे अपनी शरण में लेकर इस भवसागर (संसार चक्र) से पार लगा दीजिए।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

इस भजन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सरलता, मार्मिकता और लयबद्धता है। यह किसी भी आयु वर्ग के व्यक्ति द्वारा आसानी से गाया जा सकता है। इसके श्रवण मात्र से मन में व्याप्त भय, चिंता, और नकारात्मकता दूर होने लगती है। सनातन संस्कृति में हनुमान जी को कलयुग का जागृत देवता माना गया है, जो अपने भक्तों के एक बार स्मरण करने मात्र से उनकी रक्षा के लिए दौड़े चले आते हैं। इस भजन के माध्यम से भक्त अपनी सम्पूर्ण अहंता को त्यागकर हनुमान जी के चरणों में समर्पित हो जाता है, जिससे उसे मानसिक शांति और आत्मिक बल की प्राप्ति होती है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस पावन भजन को गाने और सुनने के लिए प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त या संध्याकाल का समय अत्यंत उत्तम माना गया है। विशेष रूप से मंगलवार और शनिवार के दिन हनुमान जी के मंदिर में, घर के पूजा स्थल पर दीप प्रज्वलित करके, या किसी भी बड़े धार्मिक अनुष्ठान और सत्संग के दौरान इसे समूह में गाना अत्यंत फलदायी होता है। गायन से पूर्व पवित्रता का ध्यान रखें और हनुमान जी के चित्र के समक्ष धूप-दीप अर्पित करें। नियमित रूप से इस भजन का संकीर्तन करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और सभी प्रकार के कष्ट स्वतः दूर होने लगते हैं।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के केंद्र बिंदु भगवान श्री हनुमान (मारुति नंदन, पवनसुत) हैं, जो भगवान श्री राम और माता सीता के परम भक्त तथा अनन्य सेवक हैं। इसके साथ ही इसमें मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम स्तुति और अवधबिहारी के गुणों का भी स्मरण किया गया है। संत परंपरा में हनुमान जी को बल, बुद्धि, विद्या और अमोघ भक्ति का प्रतीक माना गया है। तुलसीदास जी और अन्य संतों ने भी अपनी रचनाओं में हनुमान जी की शरण में जाने को ही भवसागर से पार पाने का सर्वोत्तम मार्ग बताया है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

यह भजन पारंपरिक लोक भक्ति और संत वाणी की परंपरा से निकला हुआ एक अत्यंत लोकप्रिय संकीर्तन है। पीढ़ी-दर-पीढ़ी संतों, महात्माओं और लोक-गायकों द्वारा इसे गाया जाता रहा है। इसकी रचना का मुख्य उद्देश्य जन-साधारण को हनुमान जी की महिमा से जोड़ना और उन्हें संकटों से लड़ने की मानसिक व आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करना है। इसकी पंक्तियाँ इतनी सरल और भावपूर्ण हैं कि यह सीधे श्रोता के हृदय को स्पर्श करती हैं।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल हिंदी, ब्रज और अवधी के सहज मिश्रण वाली लोक-भाषा है, जिसे भारत के आम जनमानस द्वारा आसानी से समझा और बोला जा सकता है। इसमें अनुप्रास और यमक अलंकारों का सहज प्रयोग हुआ है जैसे 'दुःख भन्जन मारुती नंदन', जो इसकी लय और संगीतात्मकता को और अधिक प्रगाढ़ बनाते हैं। इसकी काव्य शैली विनय और शरणागति (दास भाव) की है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

  • पूर्ण शरणागति: जीवन में कितनी भी बड़ी बाधाएँ आएँ, ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास और समर्पण कभी नहीं छोड़ना चाहिए।
  • संकट में धैर्य: हनुमान जी का स्मरण हमें संकट के समय घबराने के बजाय धैर्य और साहस के साथ उसका सामना करना सिखाता है।
  • निस्वार्थ सेवा भाव: जिस प्रकार हनुमान जी ने बिना किसी स्वार्थ के राम काज किए, हमें भी जीवन में निष्काम भाव से सेवा करनी चाहिए।
  • नाम जप की महिमा: निरंतर प्रभु के नाम का स्मरण करने से बड़े से बड़े मानसिक और भौतिक बंधन कट जाते हैं।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल अर्थ संदर्भ / प्रसंग
दुःख भंजन दुखों को नष्ट करने वाला भक्तों के संकटों का निवारण करने वाले हनुमान जी
मारुति नंदन पवन देव या माता अंजनी के पुत्र हनुमान जी का एक पौराणिक नाम
पवनसुत वायुपुत्र हनुमान जी के लिए प्रयुक्त विशेष संबोधन
अष्ट सिद्धि नव निधि आठ सिद्धियाँ और नौ निधियाँ समस्त आध्यात्मिक शक्तियाँ जिनके दाता हनुमान जी हैं
अवधबिहारी अयोध्या के निवासी, श्री राम भगवान श्रीराम का विशेष संबोधन
भाव सागर जन्म-मृत्यु का संसार चक्र सांसारिक मोह-माया और दुखों का सागर

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"हे दुःख भन्जन मारुती नंदन, सुन लो मेरी पुकार।"
यहाँ भक्त पुकार लगा रहा है कि हे हनुमान जी, आप समस्त दुखों का निवारण करने वाले हैं, कृपया मेरी इस दीन-हीन पुकार को अनसुना न करें और मुझ पर कृपा दृष्टि डालें।

"अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता, दुखिओं के तुम भाग्यविधाता।"
माता सीता से वरदान प्राप्त हनुमान जी सभी प्रकार की सिद्धियों और निधियों के स्वामी हैं। वे दीन-दुखियों के भाग्य को बदलने की सामर्थ्य रखते हैं।

"अपरम्पार है शक्ति तुम्हारी, तुम पर रीझे अवधबिहारी।"
आपकी शक्तियाँ असीम और अलौकिक हैं। आपकी निष्कपट सेवा से भगवान श्रीराम अति प्रसन्न होते हैं।

"जपूँ निरंतर नाम तिहरा, अब नहीं छोडूं तेरा द्वारा।"
भक्त प्रतिज्ञा करता है कि वह हर पल आपका नाम जपेगा और अब आपकी शरण को छोड़कर कहीं नहीं जाएगा।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के पाठ के साथ निम्नलिखित प्रसिद्ध हनुमान श्लोक का स्मरण करना अत्यंत फलदायी होता है:

सम्पूर्ण मूल भजन लिरिक्स (हिंदी पाठ)

मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम् ।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्री रामदूतम शरणं प्रपद्ये ॥

इसके साथ ही सुंदरकांड पाठ का स्मरण भी हनुमान साधना में सर्वोपरि माना गया है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम हे दुःख भन्जन मारुती नंदन (Hey Dukh Bhanjan Maruti Nandan)
आराध्य देव संकटमोचन भगवान श्री हनुमान
रचना परंपरा पारंपरिक लोक एवं संत संकीर्तन परंपरा
भाषा सरल हिंदी / ब्रज / अवधी लोक शैली
मुख्य थीम भक्ति, शरणागति, संकट निवारण और राम सेवा
प्रधान भाव विनय, प्रेम, विश्वास और आर्त भाव
उचित अवसर मंगलवार, शनिवार, हनुमान जयंती, संकट मोचन अनुष्ठान एवं दैनिक पूजा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह अत्यंत पावन भजन संकटमोचन भगवान श्री हनुमान (पवनसुत मारुति नंदन) को समर्पित है।

यह भजन वैसे तो प्रतिदिन गाया जा सकता है, परंतु मंगलवार और शनिवार को हनुमान जी की विशेष पूजा के दौरान इसे गाना अत्यधिक फलदायी माना जाता है।

'मारुति' पवन देव (वायु) का एक नाम है और 'नंदन' का अर्थ पुत्र होता है। अतः मारुति नंदन का अर्थ वायुपुत्र हनुमान है।

हाँ, इस भजन और हनुमान नाम के निरंतर स्मरण से मन को असीम शांति मिलती है और सभी प्रकार का भय व तनाव दूर होता है।

यह उपाधि भगवान हनुमान को दी गई है, जिन्हें माता सीता द्वारा सभी प्रकार की सिद्धियाँ और निधियाँ प्रदान करने का वरदान प्राप्त है।

प्रातः या संध्या के समय स्नान करके, पूजा स्थल पर दीपक जलाकर पूरी श्रद्धा और प्रेम के साथ इस भजन का संकीर्तन करना चाहिए।

निश्चित रूप से, ताली बजाकर और संगीत के साथ संकीर्तन करने से भक्ति का भाव और अधिक प्रबल होता है तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

यह भजन हमें संकट के समय भगवान पर अटूट विश्वास रखने और निष्काम भाव से उनकी सेवा करने की प्रेरणा देता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह मार्गदर्शिका भक्तजनों की आध्यात्मिक जिज्ञासा और पारंपरिक संकीर्तन परंपरा को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है। इसमें भजन के सटीक बोल, प्रामाणिक अर्थ और व्यावहारिक जीवन मूल्यों का समावेश किया गया है। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के अंतर्गत यह सुनिश्चित किया गया है कि पाठकों को शुद्ध, उपयोगी और प्रेरणादायक जानकारी प्राप्त हो।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • पारंपरिक सनातन भजन एवं संकीर्तन संग्रह
  • श्री हनुमान जी से जुड़े पौराणिक ग्रंथ एवं लोक कथाएँ
  • तुलसीकृत श्री रामचरितमानस एवं हनुमान चालीसा
  • वैदिक एवं पौराणिक भक्ति साहित्य

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 10 Oct 2026

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