भक्ति काव्य व भजन मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

लाल द्व्जा लहराए रे जिस घर के ओ शिखरा भजन इन हिंदी

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लाल द्व्जा लहराए रे जिस घर के ओ शिखरा भजन परिचय एवं आध्यात्मिक महत्व

सनातन संस्कृति और बजरंगबली की अनन्य उपासना में 'लाल द्व्जा लहराए रे जिस घर के ओ शिखरा' अत्यंत लोकप्रिय, ऊर्जावान और पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन है। संकटमोचन हनुमान जी की कृपा प्राप्ति के लिए लाल ध्वज (निशान) को अत्यंत पवित्र और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है। उत्तर भारत के विभिन्न मंदिरों, विशेषकर मंगलवार और शनिवार को होने वाले संकीर्तन आयोजनों में इस भजन को गाकर भक्तजन हनुमान जी का आह्वान करते हैं। इस भजन का मुख्य भाव यह है कि जिस घर के शिखर पर वीर हनुमान का लाल ध्वज लहराता है, वहाँ किसी भी प्रकार के अमंगल, संकट, भय और दरिद्रता का वास नहीं हो सकता। यह भजन जीवात्मा को भगवान के चरणों में पूर्ण शरणागति, अगाध विश्वास और निर्भयता का पाठ पढ़ाता है। कलयुग में हनुमान जी जीवित जागृत देवता माने गए हैं, और इस भजन का प्रत्येक शब्द भक्तों के हृदय में असीम उत्साह व सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

पवित्र संकीर्तन और शुद्ध उच्चारण के साथ स्मरण करें:


लाल द्व्जा लहराए रे जिस घर के ओ शिखरा,
सब संकट मिट जाए रे सब संकट मिट जाए रे ओ घर से ओ मित्रा,
|| लाल द्व्जा लहराए रे जिस घर के ओ शिखरा ||

जिस घर पे ये द्व्जा लहराए, वाहा पे खुशिया ही खुशिया आये,
उस घर से मिट जाए रे फिर तंगी का फिकरा,
|| लाल द्व्जा लहराए रे जिस घर के ओ शिखरा ||

बजरंग बली की ध्वजा निराली, भाग जाग गये जिस ने लगा ली,
खूब किरपा बरसाए रे मिट जाए रे फिकरा,
|| लाल द्व्जा लहराए रे जिस घर के ओ शिखरा ||

अष्ट सीधी नव निधि के दाता, सब पे किरपा खूब लुटाता,
शिभु मौज उडाये रे ध्वजा लगा के शिखरा,
|| लाल द्व्जा लहराए रे जिस घर के ओ शिखरा ||

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन केवल एक सामान्य गीत नहीं, बल्कि बजरंगबली की शरण में जाने वाले भक्त की अदम्य आस्था का उद्घोष है। भजन की पहली पंक्ति 'लाल द्व्जा लहराए रे जिस घर के ओ शिखरा' यह दर्शाती है कि जिस घर या मंदिर के शिखर पर हनुमान जी का प्रतीक लाल ध्वज लहराता है, वहाँ की ऊर्जा पूरी तरह सकारात्मक और पवित्र हो जाती है। लाल रंग ऊर्जा, शौर्य, विजय और उल्लास का प्रतीक है। हनुमान जी भक्तों के समस्त संकटों का हरण करने वाले हैं, इसलिए कवि कहते हैं कि उस घर से सभी प्रकार के संकट और विपत्तियाँ कोसों दूर चली जाती हैं।

आगे की पंक्तियों में वर्णन है कि जिस घर पर यह ध्वज लहराता है, वहाँ निरंतर सुख-समृद्धि का वास होता है और जीवन से 'तंगी का फिकरा' यानी आर्थिक अभाव या चिंताएं समाप्त हो जाती हैं। हनुमान जी को माता सीता द्वारा 'अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता' का वरदान प्राप्त है। जो भक्त श्रद्धापूर्वक उनके चरणों में अपना जीवन समर्पित कर देते हैं, उन्हें सांसारिक और आध्यात्मिक दोनों प्रकार की निधियों की प्राप्ति होती है। भजन के अंत में रचनाकार 'शिभु' (भजन रचयिता/गायक) का संदर्भ देते हुए कहते हैं कि हनुमान जी की कृपा से साधक जीवन में परमानंद (मौज) का अनुभव करता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

इस भजन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सरलयता, लयात्मकता और जन-जन से जुड़ाव है। बजरंगबली के भक्तों के बीच लाल ध्वज लगाने की परंपरा सदियों पुरानी है, जो विजय और रक्षा का प्रतीक है। इसके प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • निर्भयता का प्रतीक: हनुमान जी के ध्वज के स्मरण मात्र से भूत, पिशाच, भय और मानसिक संताप दूर होते हैं।
  • आर्थिक संपन्नता: जीवन के अभाव और फिक्र मिटाने वाला यह संकीर्तन घर में बरकत लाता है।
  • भक्ति रस: सामूहिक संकीर्तन और कीर्तन मंडलियों में इसे बहुत उत्साह के साथ गाया जाता है।
  • अधिक जानकारी के लिए श्री हनुमान चालीसा का पाठ अवश्य करें।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस पावन भजन को किसी भी समय सुना या गाया जा सकता है, परंतु कुछ विशेष अवसरों पर इसका प्रभाव अत्यंत चमत्कारी माना जाता है:

  • मंगलवार और शनिवार के पावन दिन बजरंगबली के पूजन के समय।
  • घर पर ध्वजारोहण या नया मकान प्रवेश (गृह प्रवेश) के दौरान।
  • सत्यानारायण कथा, सुंदरकांड पाठ या हनुमान चालीसा संकीर्तन के पूर्व या पश्चात।
  • प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त में या संध्या वंदन के समय मानसिक शांति के लिए।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के केंद्र में संकटमोचन महाबली हनुमान जी हैं, जिन्हें पवनपुत्र, अंजनीसुत, रुद्र अवतार और राम भक्त के रूप में पूजा जाता है। भगवान श्रीराम की अनन्य भक्ति के कारण हनुमान जी चिरंजीवी हैं और अपने भक्तों की पुकार पर तुरंत सहायता के लिए प्रकट होते हैं। इस भजन के माध्यम से भक्त उनकी शरण में जाकर अपनी सभी चिंताओं से मुक्त होने की प्रार्थना करते हैं। इसी प्रकार के अन्य स्तोत्रों के लिए शिव तांडव स्तोत्र भी पढ़ सकते हैं।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

भजन की रचना लोक परंपरा और पारंपरिक भक्ति शैलियों से प्रेरित है। इसमें सरल ब्रज-हिन्दी मिश्रित लोकभाषा का प्रयोग किया गया है ताकि आम जनमानस इसे आसानी से समझ सके और गा सके। इस प्रकार के भजन विशेष रूप से उत्तर भारत के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में हनुमान भक्त मंडलियों द्वारा घर-घर जाकर गाए जाते हैं।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस रचना में ठेठ हिंदी और लोकभाषा के शब्दों जैसे 'द्व्जा' (ध्वज), 'शिखरा' (शिखर), 'फिकरा' (फिक्र/चिंता), और 'किरपा' (कृपा) का सहज प्रयोग हुआ है। तुकांत शैली (Rhyming scheme) होने के कारण यह जुबान पर तुरंत चढ़ जाता है और सामूहिक गायन में अत्यंत आनंदित करता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें सिखाता है कि जीवन में कितनी भी बड़ी बाधाएं क्यों न आएं, यदि ईश्वर और सद्गुरु पर अटूट विश्वास (शरणागति) हो, तो सभी संकट स्वतः समाप्त हो जाते हैं। हनुमान जी का लाल ध्वज इस बात का प्रतीक है कि हमारे जीवन के मंदिर रूपी शरीर पर हमेशा धर्म, शौर्य और भक्ति का झंडा ऊंचा रहना चाहिए।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल अर्थ संदर्भ
द्व्जा ध्वज या झंडा मंदिर या घर के शिखर पर लगने वाला प्रतीक
शिखरा शिखर या सबसे ऊपरी हिस्सा घर की छत या मंदिर का गुंबद
फिकरा फिक्र या चिंता सांसारिक अभाव और तनाव
अष्ट सिद्धि नव निधि आठ प्रकार की सिद्धियां और नौ प्रकार की निधियां हनुमान जी द्वारा भक्तों को मिलने वाले आध्यात्मिक वरदान

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

'लाल द्व्जा लहराए रे...' - जिस घर के शिखर पर हनुमान जी का लाल निशान लहराता है, वहाँ भक्तों के जीवन के सभी संकट नष्ट हो जाते हैं।

'जिस घर पे ये द्व्जा लहराए...' - वहाँ केवल खुशियों का आगमन होता है और गरीबी या तंगी की सारी चिंताएं दूर हो जाती हैं।

'बजरंग बली की ध्वजा निराली...' - हनुमान जी की महिमा अद्भुत है, भाग्य उनके जाग जाते हैं जो इस ध्वज को अपने द्वार पर स्थापित करते हैं।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के पाठ के साथ निम्नलिखित प्रसिद्ध हनुमान मंत्र का स्मरण अत्यंत फलदायी माना जाता है:

"मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्। वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥"

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम लाल द्व्जा लहराए रे जिस घर के ओ शिखरा
आराध्य देव संकटमोचन श्री हनुमान जी
भाषा हिंदी / लोक भाषा
मुख्य भाव भक्ति, सुरक्षा, संकट निवारण एवं शरणागति
उपयुक्त अवसर मंगलवार व्रत, सुंदरकांड, हनुमान जयंती, घर का ध्वजारोहण
श्रेणी भक्ति भजन एवं संकीर्तन

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

घर के शिखर पर लाल ध्वज लगाना हनुमान जी की कृपा, सुरक्षा, विजय और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा का प्रतीक माना जाता है।

यह भजन पूर्ण रूप से भगवान संकटमोचन श्री हनुमान जी को समर्पित है।

मंगलवार और शनिवार के दिन हनुमान जी के पूजन और संकीर्तन में इस भजन को गाना अत्यंत शुभ होता है।

हाँ, विधि-विधान और शुद्धता का ध्यान रखते हुए दक्षिण-पूर्व या उत्तर-पश्चिम दिशा में अथवा मंदिर के ऊपर लाल ध्वज लगाया जाता है।

माता सीता द्वारा हनुमान जी को अष्ट सिद्धियों और नौ निधियों का दाता होने का वरदान प्राप्त है।

इस भजन के श्रवण व गायन से मानसिक शांति, संकटों से मुक्ति और हनुमान जी की असीम कृपा प्राप्त होती है।

निश्चित रूप से, इसकी लयात्मकता और उत्साहपूर्ण धुन के कारण यह सामूहिक संकीर्तन के लिए सर्वश्रेष्ठ भजनों में से एक है।

यहाँ 'फिकरा' का अर्थ जीवन की चिंता, तंगी और अभाव से है जो भगवान की कृपा से दूर हो जाते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री। यह आलेख सनातन भक्ति परंपरा, हनुमान उपासना पद्धति और लोक भजनों के सांस्कृतिक महत्व को ध्यान में रखते हुए प्रामाणिक स्रोतों व जन-श्रुतियों के आधार पर संकलित किया गया है। इसका उद्देश्य पाठकों को शुद्ध भक्ति रस प्रदान करना है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • पारंपरिक हनुमान संकीर्तन एवं लोक भजन संग्रह
  • श्री हनुमान चालीसा एवं सुंदरकांड के दार्शनिक प्रसंग
  • सनातन संस्कृति में ध्वज पूजन एवं वास्तु परंपरा

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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