Ram Bhajan बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

ये रामायण है पुण्य कथा श्री राम की भजन इन हिंदी

श्री राम भजन "ये रामायण है पुण्य कथा श्री राम की भजन इन हिंदी" के लिरिक्स, अर्थ और शास्त्रीय महत्त्व। मर्यादा पुरुषोत्तम राम की पावन महिमा और साधना नियमों की संपूर्ण जानकारी, अर्थ सहित पढ़ें।

प्रस्तावना एवं परिचय

मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें
प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें।
 हम कथा सुनाते राम सकल गुणधाम क�
हम कथा सुनाते राम सकल गुणधाम क�

हम कथा सुनाते राम सकल गुणधाम क�
ये रामायण है पुण्य कथा श्री राम क�
जम्बुद्वीपे. भरत खंडे. आर्यावर्ते, भारतवर्षे
इक नगरी है विख्यात अयोध्या नाम क�

यही जन्म भूमि है परम पूज्य श्री राम क�
हम कथा सुनाते राम सकल गुणधाम क�
ये रामायण है पुण्य कथा श्री राम क�
ये रामायण है पुण्य कथा श्री राम क�

रघुकुल के राजा धर्मात्मा. चक्रवर्ती दशरथ पुण्यात्मा
संतति हेतु यज्ञ करवाया, धर्म यज्ञ का शुभ फल पाया
नृप घर जन्मे चार कुमारा, रघुकुल दीप जगत आधारा
चारों भ्रातों के शुभ नामा. भरत, शत्रुघ्न, लक्ष्मण रामा

गुरु वशिष्ठ के गुरुकुल जाके, अल्प काल विद्या सब पाके
पूरण हुयी शिक्षा. रघुवर पूरण काम क�
हम कथा सुनाते राम सकल गुणधाम क�
ये रामायण है पुण्य कथा श्री राम क�

मृदु स्वर, कोमल भावना, रोचक प्रस्तुति ढंग
इक इक कर वर्णन करें. लव कुश राम प्रसंग
विश्वामित्र महामुनि राई, तिनके संग चले दोउ भाई
कैसे राम ताड़का मारी. कैसे नाथ अहिल्या तार�

मुनिवर विश्वामित्र तब, संग ले लक्ष्मण राम
सिया स्वयंवर देखने. पहुंचे मिथिला धाम
जनकपुर उत्सव है भार�
जनकपुर उत्सव है भार�

अपने वर का चयन करेगी सीता सुकुमार�
जनकपुर उत्सव है भार�
जनक राज का कठिन प्रण, सुनो सुनो सब कोई
जो तोडे शिव धनुष को. सो सीता पति होई

को तोरी शिव धनुष कठोर, सबकी दृष्टि राम की ओर
राम विनय गुण के अवतार. गुरुवार की आज्ञा शिरधार
सहज भाव से शिव धनु तोड़ा, जनकसुता संग नाता जोड़ा
रघुवर जैसा और न कोई. सीता की समता नही होई

दोउ करें पराजित कांति कोटि रति काम क�
हम कथा सुनाते राम सकल गुणधाम क�
ये रामायण है पुण्य कथा सिया राम क�
सब पर शब्द मोहिनी डारी, मन्त्र मुग्ध भये सब नर नार�

यूँ दिन रैन जात हैं बीते, लव कुश नें सबके मन जीते
वन गमन, सीता हरण, हनुमत मिलन, लंका दहन, रावण मरण, अयोध्या पुनरागमन
सविस्तार सब कथा सुनाई, राजा राम भये रघुराई
राम राज आयो सुख दाई. सुख समृद्धि श्री घर घर आई

काल चक्र नें घटना क्रम में ऐसा चक्र चलाया
राम सिया के जीवन में फिर घोर अँधेरा छाया
अवध में ऐसा, ऐसा इक दिन आया
निष्कलंक सीता पे प्रजा नें मिथ्या दोष लगाया

अवध में ऐसा. ऐसा इक दिन आया
चल दी सिया जब तोड़ कर सब नेह नाते मोह के
पाषण हृदयों में न अंगारे जगे विद्रोह के
ममतामयी माँओं के आँचल भी सिमट कर रह गए

गुरुदेव ज्ञान और नीति के सागर भी घट कर रह गए
न रघुकुल न रघुकुलनायक, कोई न सिय का हुआ सहायक
मानवता को खो बैठे जब, सभ्य नगर के वास�
तब सीता को हुआ सहायक, वन का इक सन्यास�

उन ऋषि परम उदार का वाल्मीकि शुभ नाम
सीता को आश्रय दिया ले आए निज धाम
रघुकुल में कुलदीप जलाए, राम के दो सुत सिय नें जाए
श्रोतागण जो एक राजा की पुत्री है एक राजा की पुत्रवधू है और एक चक्रवर्ती राजा की पत्नी है वही महारानी सीता वनवास के दुखों में अपने दिन कैसे काटती है अपने कुल के गौरव और स्वाभिमान के रक्षा करते हुए किसी से सहायता मांगे बिना कैसे अपना काम वो स्वयं करती है  स्वयं वन से लकड़ी काटती है स्वयं अपना धान कूटती है स्वयं अपनी चक्की पीसती है और अपनी संतान को स्वावलंबी बनने की शिक्षा कैसे देती है अब उसकी एक करुण झांकी देखिये

जनक दुलारी कुलवधू दशरथजी क�
राजरानी होके दिन वन में बिताती है
रहते थे घेरे जिसे दास दासी आठों याम
दासी बनी अपनी उदासी को छिपती है

धरम प्रवीना सती. परम कुलीना
सब विधि दोष हीना जीना दुःख में सिखाती है
जगमाता हरिप्रिया लक्ष्मी स्वरूपा सिया
कूटती है धान . भोज स्वयं बनती है

कठिन कुल्हाडी लेके लकडियाँ काटती है
करम लिखे को पर काट नही पाती है
फूल भी उठाना भारी जिस सुकुमारी को था
दुःख भरे जीवन का बोझ वो उठाती है

अर्धांगिनी रघुवीर की वो धर धीर
भरती है नीर .  नीर नैन में न लाती है
जिसकी प्रजा के अपवादों के कुचक्र में वो
पीसती है चाकी स्वाभिमान को बचाती है

पालती है बच्चों को वो कर्म योगिनी की भाँत�
स्वाभिमानी, स्वावलंबी , सबल बनाती है
ऐसी सीता माता की परीक्षा लेते दुःख देते
निठुर नियति को दया भी नही आती है

उस दुखिया के राज दुलारे , हम ही सुत श्री राम तिहारे
सीता मां की आँख के तारे , लव कुश हैं पितु नाम हमारे
हे पितु, भाग्य हमारे जागे , राम कथा कही राम के आगे

साझा करें:
🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ भगवान श्री रामचंद्र जी को समर्पित यह भजन "ये रामायण है पुण्य कथा श्री राम की भजन इन हिंदी" मर्यादा पुरुषोत्तम के पावन चरित्र का स्मरण कराता है। गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित रामचरितमानस के सिद्धांतों के अनुसार, राम का नाम स्वयं राम से भी अधिक सामर्थ्यवान है। इस भजन की लय और शब्द भक्त को सीधे साकेत धाम की पावन चेतना से जोड़ते हैं।
भजन का प्रमुख भाव शरणागति का है। जब जीव समस्त सांसारिक प्रपंचों से थककर भगवान राम के चरणों में शरण लेता है, तो उसे परम अभय की प्राप्ति होती है। राम नाम की ध्वनि से वातावरण शुद्ध होता है और अंतःकरण में धर्म और सत्य के प्रति निष्ठा दृढ़ होती है।
🔍 विशेष महत्त्व और लाभ सनातन ग्रंथों के अनुसार, राम नाम का जाप कलयुग का सर्वश्रेष्ठ साधन माना गया है। वाल्मीकि रामायण और रामचरितमानस में राम नाम की असीम महिमा गाई गई है। यह भजन साधक के मन में वैराग्य, संयम, दया और कर्तव्य परायणता जैसे नैतिक मूल्यों का संचार करता है।

प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें। राम नाम के संकीर्तन से व्यक्ति का आत्मबल जागृत होता है, भय तथा शंकाओं का नाश होता है और प्रतिकूल परिस्थितियों में भी धैर्य रखने की शक्ति प्राप्त होती है। यह पारिवारिक सौहार्द और मर्यादा की स्थापना में सहायक है।
🕒 साधना एवं गायन विधि राम भजन का संकीर्तन प्रातःकाल स्नान के पश्चात राम दरबार की प्रतिमा के सम्मुख घी का दीपक जलाकर करें। तुलसी की माला से राम नाम का जप करने के पश्चात इस भजन का गायन अत्यंत फलदायी होता है।
�� अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ) राम भजन के गायन से क्या लाभ प्राप्त होते हैं?राम भजन के संकीर्तन से मानसिक शांति, उत्तम चरित्र, और विपत्तियों में धैर्य बनाए रखने का आत्मबल प्राप्त होता है।
राम नाम जप के लिए सर्वश्रेष्ठ माला कौन सी है?भगवान श्री राम के मंत्र जाप और संकीर्तन के लिए तुलसी की माला को सर्वश्रेष्ठ और अत्यंत पवित्र माना गया है।

क्या राम भजन बच्चों के संस्कारों के लिए उपयोगी है?हाँ, भगवान राम के मर्यादापूर्ण चरित्र के भजन सुनने से बच्चों में बड़ों के प्रति सम्मान, सत्यप्रियता और उच्च नैतिक संस्कारों का विकास होता है।

श्रेणियां: Ram Bhajan

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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