Parvati Stotram

तीन बाण के धारी तीनो बाण चलाओ ना लिरिक्स (Teen ban ke dhaaree teeno ban chalao na liriks) - Bhaktilok

602 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
आकार:
कंट्रास्ट:

तीन बाण के धारी तीनो बाण चलाओ ना लिरिक्स (Teen ban ke dhaaree teeno ban chalao na liriks) - Bhaktilok

दिव्य कृपा, असीम शक्ति और आधिपत्य के प्रतीक भगवान खाटू श्याम जी अथवा तीन बाण धारी के चरणों में समर्पित यह अत्यंत लोकप्रिय भजन 'तीन बाण के धारी तीनो बाण चलाओ ना लिरिक्स (Teen ban ke dhaaree teeno ban chalao na liriks)' भक्तों के अंतस में अगाध श्रद्धा और विश्वास का संचार करता है। हिंदू पौराणिक कथाओं और विशेषकर महाभारत कालीन परंपरा में भगवान श्री कृष्ण द्वारा बर्बरीक को दिए गए वरदान के अनुसार उन्हें 'तीन बाण धारी' के रूप में पूजा जाता है। यह भजन केवल एक प्रार्थना नहीं है, बल्कि जीवन के तमाम कष्टों, अज्ञानता, संशय और विषम परिस्थितियों से जूझ रहे भक्त की वह पुकार है जिसमें वह अपने आराध्य से करुणा की भीख मांगता है। जब मनुष्य संसार के बंधनों और दुखों से घिर जाता है, तब इस दिव्य भजन का गान और श्रवण उसके भीतर सकारात्मक ऊर्जा, धैर्य और आत्मबल जगाता है। इस विस्तृत लेख में हम इस पावन भजन के संपूर्ण बोल, इसका गहरा आध्यात्मिक अर्थ, भावार्थ, गायन की विधि, तथा इसके जीवनोपयोगी संदेशों पर विस्तार से चर्चा करेंगे ताकि साधक इसे पूरी तल्लीनता के साथ अपने जीवन में उतार सकें।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

स्थाई (Mukhda):

तीन बाण के धारी, तीनों बाण चलाओ ना!
भक्त खड़े हैं द्वार तुम्हारे, दर्शन आके पाओ ना!
तीन बाण के धारी, तीनों बाण चलाओ ना!

अंतरा 1:

दुनिया के झूठे मेलों में, मन मेरा घबराता है,
कोई नहीं है अपना यहां पर, हर कोई ठुकराता है!
तुम हो हारे के सहारे, मुझको भी अपनाओ ना!
तीन बाण के धारी, तीनों बाण चलाओ ना!

अंतरा 2:

पहला बाण चलाकर मेरे, सारे संकट हरो प्रभु,
दूसरे बाण से ज्ञान का दीपक, मेरे हृदय में धरो प्रभु!
तीसरे बाण से भवसागर से, मुझको पार लगाओ ना!
तीन बाण के धारी, तीनों बाण चलाओ ना!

अंतरा 3:

कलयुग के इस अंधकार में, राह मुझे दिखलाओ ना,
चरणों की पावन धूलि देकर, अपना दास बनाओ ना!
कृपा दृष्टि की कोर जरा सा, मुझ पर भी बरसाओ ना!
तीन बाण के धारी, तीनों बाण चलाओ ना!

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का प्रत्येक शब्द भक्त और भगवान के बीच के अनन्य प्रेम और समर्पण को दर्शाता है। 'तीन बाण के धारी' संबोधन भगवान श्री खाटू श्याम (बर्बरीक) के लिए प्रयुक्त हुआ है, जिन्हें महाभारत युद्ध में उनकी अजेय शक्ति और तीन दिव्य बाणों के कारण विशेष स्थान प्राप्त है। भक्त अपने आराध्य से प्रार्थना करता है कि वे अपने तीनों पावन बाणों का संधान कर दें ताकि जीवन की समस्त बाधाएं क्षणभर में समाप्त हो जाएं।

भजन के दूसरे चरण में भक्त अपनी दीनता और संसार की नश्वरता का वर्णन करता है। वह कहता है कि इस स्वार्थी दुनिया के मेलों में उसका मन विचलित हो रहा है, जहाँ हर कोई स्वार्थवश साथ छोड़ देता है। ऐसे में केवल 'हारे के सहारे' भगवान ही एकमात्र आश्रय बचते हैं। भक्त निवेदन करता है कि वह दीन-हीन है, अतः प्रभु उसे अपनी शरण में ले लें।

तीसरे चरण में 'तीनों बाणों' के प्रतीकात्मक और आध्यात्मिक महत्व को बहुत ही सुंदर ढंग से स्पष्ट किया गया है। पहला बाण भक्त के जीवन के सभी भौतिक और मानसिक संकटों को हरने के लिए है। दूसरा बाण अज्ञान रूपी अंधकार को मिटाकर हृदय में दिव्य ज्ञान और भक्ति का दीपक प्रज्वलित करता है। और तीसरा बाण इस भयंकर भवसागर (संसार चक्र) से जीव को पार लगाकर मोक्ष की ओर अग्रसर करता है। यह भजन मनुष्य को सिखाता है कि जब चारों तरफ निराशा हो, तब सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य फलित होती है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन राजस्थान के सीकर जिले में स्थित खाटू धाम और देश के कोने-कोने में फैले श्याम भक्तों के बीच अत्यधिक लोकप्रिय है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार: इस भजन के बोल सरल, सहज और सीधे हृदय को छूने वाले हैं, जो साधक को तुरंत भक्ति भाव से भर देते हैं।
  • हारे का सहारा: भगवान श्याम को 'हारे का सहारा' माना जाता है, और यह भजन उसी मूल भावना को पुनर्जीवित करता है।
  • तीनों बाणों का रहस्य: इसमें बाणों को केवल अस्त्र के रूप में नहीं, बल्कि संकट निवारण, ज्ञान प्राप्ति और मुक्ति के साधन के रूप में दर्शाया गया है।
  • मानसिक शांति: नियमित रूप से इस भजन का गان और श्रवण करने से मन की व्याकुलता शांत होती है और एकाग्रता बढ़ती है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

भजन की सार्थकता उसकी पवित्रता और सही विधि से गायन में निहित है:

  • उचित समय: प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त में अथवा संध्याकालीन आरती के समय इस भजन का गान अत्यंत फलदायी होता है।
  • स्थान: इसे घर के मंदिर, पूजा कक्ष, किसी धार्मिक सत्संग या खाटू श्याम जी के दरबार में गाया जा सकता है।
  • विधि: स्नान आदि से निवृत्त होकर शुद्ध वस्त्र धारण करें। भगवान के समक्ष घी का दीपक प्रज्वलित करें, पुष्प अर्पित करें और पूरी श्रद्धा के साथ इस भजन का गायन करें। आप श्री हनुमान चालीसा के पाठ के पश्चात भी इसका स्मरण कर सकते हैं।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के मुख्य आराध्य भगवान खाटू श्याम हैं, जिन्हें कलियुग में श्री कृष्ण के अवतार के रूप में पूजा जाता है। बर्बरीक जी महाराज ने अपने वचनों और त्याग से भगवान श्री कृष्ण को प्रसन्न किया था, जिसके फलस्वरूप उन्हें कलयुग में 'श्याम' के रूप में पूजे जाने का वरदान मिला। संत परंपरा में श्याम भक्तों ने इस प्रकार के भजनों के माध्यम से जन-जन तक भक्ति का संदेश पहुंचाया है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

यह भजन समकालीन भक्ति साहित्य और लोक संगीत की देन है, जिसे विभिन्न भजन गायकों ने अपनी मधुर आवाज़ से सजाया है। इसकी पृष्ठभूमि श्याम भक्तों की उस अगाध श्रद्धा पर आधारित है जो वे बाबा श्याम के दरबार में हाजिरी लगाते समय अनुभव करते हैं। यह भजन हर उस व्यक्ति की आवाज है जो जीवन में संघर्षों से हारकर भगवान की शरण में पहुंचता है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

भजन की भाषा सरल हिंदी और राजस्थानी-ब्रज मिश्रित लोक भाषा है, जिसे हर आम और खास इंसान आसानी से समझ सकता है। इसमें अनुप्रास और उपमा अलंकारों का सुंदर प्रयोग हुआ है। काव्य शैली प्रवाहमयी और संगीतात्मक है, जो ढोलक, मंजीरा और हारमोनियम की धुन पर आसानी से गाई जा सकती है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें सिखाता है कि:

  • मनुष्य को कभी भी कठिन परिस्थितियों से घबराना नहीं चाहिए, बल्कि भगवान पर अटूट विश्वास रखना चाहिए।
  • अहंकार का त्याग कर दीनता और विनम्रता के साथ ईश्वर की शरण में जाना ही असली भक्ति है।
  • ज्ञान और भक्ति के मार्ग पर चलकर ही इस भवसागर को पार किया जा सकता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ संदर्भ / प्रसंग
तीन बाण के धारी तीनों दिव्य बाणों को धारण करने वाले भगवान खाटू श्याम / बर्बरीक के लिए
भवसागर जन्म-मृत्यु का संसार चक्र संसार जिससे पार पाना है
संकट हरो कष्टों और दुखों को दूर करो प्रभु से प्रार्थना के रूप में
हारे के सहारे जो हारे हुए मनुष्यों का एकमात्र सहारा हैं भगवान श्याम की उपाधि

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"तीन बाण के धारी, तीनों बाण चलाओ ना!" - इस पंक्ति में भक्त अपने आराध्य से आग्रह कर रहा है कि वे अपनी असीम शक्तियों का प्रदर्शन कर भक्तों के दुखों का निवारण करें।

"दुनिया के झूठे मेलों में, मन मेरा घबराता है..." - संसार की असारता और स्वार्थपरता से तंग आकर भक्त भगवान के चरणों में शांति की तलाश कर रहा है।

"पहला बाण चलाकर मेरे, सारे संकट हरो प्रभु..." - भक्त अपने जीवन के कष्टों से मुक्ति पाने के लिए प्रभु के प्रथम बाण का आह्वान करता है।

"तीसरे बाण से भवसागर से, मुझको पार लगाओ ना!" - अंततः भक्त इस नश्वर संसार से मुक्ति और मोक्ष की कामना करता है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

श्याम बाबा के स्मरण के समय निम्नलिखित मंत्र का जाप करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है:

"ॐ श्याम देवाय नमः"

इसके साथ ही भगवान श्री कृष्ण के पावन स्मरण के लिए आप ओम जय जगदीश हरे आरती का भी पाठ कर सकते हैं।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विवरण तथ्य / जानकारी
भजन का नाम तीन बाण के धारी तीनों बाण चलाओ ना
आराध्य देवता भगवान खाटू श्याम जी (बर्बरीक)
भाषा सरल हिंदी / लोक भाषा
मुख्य भाव समर्पण, विनय, करुणा और संकट निवारण
उपयुक्त अवसर श्याम बाबा कीर्तन, एकादशी पूजा, जागरण

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

उत्तर: 'तीन बाण के धारी' महाभारत के प्रसिद्ध वीर बर्बरीक को कहा जाता है, जिन्हें कलयुग में भगवान खाटू श्याम के रूप में पूजा जाता है।

उत्तर: इस भजन को शुक्ल पक्ष की एकादशी, खाटू श्याम जी के मेलों, जागरण, अथवा प्रतिदिन संध्या वंदन के समय गाना अत्यंत शुभ माना जाता है।

उत्तर: यह भजन सिखाता है कि विषम परिस्थितियों और दुखों के समय मनुष्य को भगवान पर पूर्ण विश्वास रखना चाहिए और उनकी शरण में जाना चाहिए।

उत्तर: हाँ, इसे घर पर अकेले पूजा के दौरान अथवा किसी भी समय पूरी श्रद्धा के साथ गाया जा सकता है। भक्ति में भाव मुख्य होता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री भक्तों की धार्मिक भावनाओं, पारंपरिक लोक भजनों और पौराणिक संदर्भों को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है। इसमें प्रयुक्त शब्द और अर्थ प्रामाणिक परंपरा पर आधारित हैं। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के अंतर्गत पाठकों की सुगमता और प्रामाणिकता का पूरा ध्यान रखा गया है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • पारंपरिक श्याम भजन संग्रह एवं लोक कथाएं
  • महाभारत कथा एवं बर्बरीक प्रसंग
  • श्री खाटू श्याम मंदिर इतिहास एवं महिमा

संबंधित भजन एवं लेख

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 24 Sep 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!