आज का पंचांग (Columbus) | सूर्योदय: ०४:१८ PM | सूर्यास्त: ०५:५१ AM
भक्ति रस काव्य व भजन

मनुष्य जन्म अनमोल रे (manushy janm anamol re lyrics in Hindi) - Bhaktilok

89 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
आकार:
कंट्रास्ट:

मनुष्य जन्म की अनमोलता: साईं की भक्ति में

इस भजन के माध्यम से मनुष्य जीवन की अनमोलता और भक्ति का महत्व समझें।

मनुष्य जन्म अनमोल रे मिटटी में न रोल रे,अब जो मिला है फिर न मिलेगा-कभी नही कभी नही रेओम साईं नमो नम श्री साईं नमो नमतू सत्संग में आया कर गीत प्रभु के गाया कर,साँझ सवेरे बैठ के बन्दे गीत प्रभु के लगाया कर,नहीं लगता कुछ मोल रे मिट्टी में ना रोल रेअब जो मिला है फिर ना मिलेगा,कभी नही कभी नहीं कभी नही रे...तू है बुद बुद पानी का,मत कर जोर जवानी का,समझ संभल के कदम रखो,पता नही जिंदगानी का,सबसे मीठा बोल रे,मिट्टी में ना रोल रे,अब जो मिला है फिर ना मिलेगा-कभी नही कभी नहीं कभी नहीं रे...मतलब का संसार है किसका क्या इतवार है ,समज समज के कदम रखो फूल नही अंगार है,मन की आँखे खोल रेमिट्टी में ना रोल रे,अब जो मिला है फिर ना मिलेगा-कभी नही कभी नहीं कभी नही रे...

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

गीत 'मनुष्य जन्म अनमोल रे' में जीवन की अनमोलता को स्पष्ट किया गया है। यह हमें याद दिलाता है कि हमें अपनी इस जीवन की हर क्षण का सदुपयोग करना चाहिए। पहले पंक्ति में कहा गया है कि 'मनुष्य जन्म अनमोल रे मिटटी में न रोल रे', इसका अर्थ है कि यह जन्म अनमोल है और इसे बर्बाद नहीं किया जाना चाहिए। इस जन्म को पाने के लिए अनेक युगों तक तप किया जाता है। भजन में कहा गया है कि जो अवसर हमें इस जीवन में मिला है, वह फिर से नहीं मिलेगा। यहां पर भक्ति की ओर इशारा किया गया है कि भक्त को प्रभु को याद करते रहना चाहिए। 'साँझ सवेरे बैठ के बन्दे गीत प्रभु के लगाया कर' इस पंक्ति से यह स्पष्ट होता है कि नियमित रूप से भक्ति करना, प्रभु की स्तुति करना, मनुष्य के जीवन में स्थायी सुख और संतोष लाता है।

इस भजन में जीवन के काल चक्र और मनुष्य की स्थिति पर ध्यान दिया गया है। 'तू है बुद बुद पानी का, मत कर जोर जवानी का' इस पंक्ति से यह स्पष्ट है कि जीवन क्षणभंगुर है। जब तक हमें युवा अवस्था का आनंद लेने का मौका है, तब तक हमें अपने कदम सोच-समझकर रखना चाहिए। मनुष्य को यह समझना चाहिए कि जीवन में क्या महत्वपूर्ण है और क्या नहीं। 'मतलब का संसार है किसका क्या इतवार है' से यह इंगित होता है कि भौतिक दुनिया में लाभ-हानि से संबंधित सोच में खोकर समय बर्बाद करना व्यर्थ है। असल में, जो सबसे मूल्यवान है, वह है मन की शांति और भक्ति का मार्ग।

यह भजन भक्तिपूर्वक जीवन जीने की प्रेरणा देता है। 'मिट्टी में ना रोल रे' हमें याद दिलाने वाला वाक्य है कि हमें इस कलियुग के मोहमाया से बचना चाहिए और अपने जीवन का उद्देश्य भक्ति में लगाना चाहिए। भक्ति मार्ग के माध्यम से मनुष्य अपनी आत्मा को शुद्ध कर सकता है और परमात्मा के निकट जा सकता है। इसे ध्यान में रखते हुए, यह भजन सुनना और गाना एक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक अभ्यास बन जाता है, जो व्यक्तित्व को विस्तारित करता है। आत्मा की शुद्धि, सेवा, और सद्गुणों की प्राप्ति के लिए भक्ति का यह मार्ग अनिवार्य है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन भारतीय संस्कृति में जीवन के गहरे अर्थ और आध्यात्मिकता को स्पष्ट करता है। मनुष्य जीवन को पवित्र और महत्वपूर्ण समझते हुए, यह भजन हमें सिखाता है कि दैवीय कृपा से प्राप्त हुए इस जन्म का आदर करें। पुराणों और उपनिषदों में मनुष्य जन्म को पवित्र एवं दुर्लभ बताया गया है। महाभारत और रामायण में भी जीवन के उद्देश्य को समझाने और भक्ति के महत्व को रेखांकित किया गया है। इस दृष्टिकोण से प्रेरित, यह भजन हमें योग्य तरीके से जीवन जीने की प्रेरणा देता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का जाप करने से मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक लाभ होते हैं। मानसिक रूप से, यह ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है और मन को शांति प्रदान करता है। भक्ति में लीन होकर व्यक्ति नकारात्मकता को दूर कर सकता है, जिससे मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होता है। आध्यात्मिक स्तर पर, यह आत्मा के विकास में सहायक होता है और व्यक्ति को परमात्मा के निकट ले जाता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह या शाम के समय करना सर्वोत्तम माना जाता है। भक्त को एक शुद्ध वातावरण में, जैसे कि पूजा स्थल पर, दीया जलाकर और फूलों का अर्पण करके बैठना चाहिए। एक शांत मन और ध्यान केंद्रित करने वाली मुद्रा में बैठकर इस भजन को गुनगुनाना चाहिए। यह साधना व्यक्ति के मन को शुद्ध करने और ध्यान की ओर ले जाने में सहायक होती है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

यह भजन क्यों गाया जाता है?

यह भजन मानव जीवन की अनमोलता की चर्चा करता है और भक्ति के प्रति प्रेरित करता है। यह हमें याद दिलाता है कि हमें इस जीवन का सदुपयोग करना चाहिए।

इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश है कि हमें अपने जीवन को भक्ति और साधना में लगाना चाहिए क्योंकि यह जीवन एक अनमोल उपहार है।

क्या इस भजन का कोई धार्मिक महत्व है?

हां, यह भजन हमारे धर्म में भक्ति का महत्व बताते हुए भक्ति मार्ग में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है और जीवन की समर्पण भावना को जाग्रत करता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 20 Aug 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!