Latest Bhakti Song बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

लट खोल के नाचो मेरी माये सुपरहिट भजन (lat khol ke naacho meree maaye bhajan lyrics in hindi)

प्रसिद्ध भजन 'लट खोल के नाचो मेरी माये' के बोल और अर्थ यहाँ पढ़ें। मां दुर्गा की भक्ति में लीन करने वाले इस सुपरहिट भजन का आनंद लें।

"लट खोल के नाचो मेरी माये" (Lat Khol Ke Naacho Meri Maaye) सनातन धर्म की देवी-भक्ति परंपरा का एक अत्यंत लोकप्रिय, ऊर्जावान और भावपूर्ण भजन है। यह भजन मुख्य रूप से आदिशक्ति मां दुर्गा और महाकाली के दिव्य स्वरूप को समर्पित है। इस भजन में भक्त अपनी आराध्य देवी से अत्यंत आत्मीयता और अनन्य प्रेम के साथ उनके दिव्य, उन्मुक्त और आनंदमयी नृत्य की कामना करता है। "लट खोल के" (खुले केशों के साथ) नृत्य करने का आह्वान देवी के उस आदिम, असीम और स्वतंत्र स्वरूप को दर्शाता है जो सृष्टि की उत्पत्ति, स्थिति और संहार की अधिष्ठात्री हैं। यह भजन नवरात्रि, माता की चौकी, जगराता और विशेष पूजा-उत्सवों के अवसर पर भक्तों के बीच अत्यंत उत्साह और भक्ति भाव के साथ गाया जाता है। इस भजन का मुख्य स्वर 'भक्ति रस' और 'आनंद रस' है, जो साधक के हृदय में दिव्यता का संचार करता है और उसे मां के चरणों में पूर्णतः समर्पित होने की प्रेरणा देता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

लट खोल के नाचो मेरी माये सुपरहिट भजन


लट खोल के नाचो मेरी माये
कि नैना रतन जड़े – 2
रतन जड़े रे मैया, रतन जड़े-2
लट खोल के नाचो मेरे माय,
कि नैना रतन जड़े,

कौन दये मैया मुंडन माला-2
कौन दिए रे मैया हार,
ओ मैया मोरी कोन दिये रे हार, कि नैना रतन जड़े,
लट खोल के, नाचो मेरी माये
कि नैना रतन जड़े – 2
रतन जड़े रे मैया, रतन जड़े-2
लट खोल के नाचो मेरे माय,
कि नैना रतन जड़े,

महामाया दी मुंडन माल-2
क्षीर सागर दये हार,
ओ मैया मोरी क्षीर सागर दये हार
कि नैना रतन जड़े,
लट खोल के, नाचो मेरी माये
कि नैना रतन जड़े – 2
रतन जड़े रे मैया, रतन जड़े-2
लट खोल के नाचो मेरे माय,
कि नैना रतन जड़े,

कौन दिये री मैया कमल की माला-2
कौन ने धनुष बाण ,
ओ मैया मोरी कोन ने धनुष बाण
कि नैना रतन जड़े,
लट खोल के, नाचो मेरी माये
कि नैना रतन जड़े – 2
रतन जड़े रे मैया, रतन जड़े-2
लट खोल के नाचो मेरे माय,
कि नैना रतन जड़े।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस पावन भजन का भावार्थ अत्यंत गहरा और रहस्यमयी है। यहाँ भक्त अपनी मैया से विनती कर रहा है कि वह अपने केशों को खोलकर आनंदमयी नृत्य करें। आध्यात्मिक दृष्टि से, देवी के खुले केश (लटें) ब्रह्मांड की असीम ऊर्जा और प्रकृति की उन्मुक्त शक्ति का प्रतीक हैं। जब मां अपने केश खोलकर नृत्य करती हैं, तो वह सृष्टि के कण-कण में चेतना का संचार करती हैं।

"नैना रतन जड़े" का अर्थ है कि मां के नेत्र करुणा, ज्ञान और दिव्यता के रत्नों से सुशोभित हैं। उनकी एक तिरछी चितवन ही भक्त के जीवन के अंधकार को दूर करने के लिए पर्याप्त है। भजन के अगले भाग में एक सुंदर संवाद है, जहाँ भक्त पूछता है कि मां को मुंडों की माला और सुंदर हार किसने अर्पित किए हैं? इसके उत्तर में बताया गया है कि स्वयं 'महामाया' (जो सृष्टि की आदि शक्ति हैं) ने उन्हें मुंडों की माला दी है, जो काल और अहंकार के विनाश का प्रतीक है। वहीं, 'क्षीर सागर' (दूध के महासागर) ने उन्हें अत्यंत सुंदर और उज्ज्वल हार भेंट किया है, जो शांति, पवित्रता और समृद्धि का प्रतीक है।

यह भजन हमें सिखाता है कि मां का स्वरूप जितना सौम्य और ममतामयी है, उतना ही वह संहारक और शक्तिशाली भी है। भक्त मां के इन दोनों रूपों को एक साथ स्वीकार करता है और उनके इस दिव्य स्वरूप के दर्शन कर आनंदित होता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन केवल एक पारंपरिक गीत नहीं है, बल्कि यह देवी साधना और भक्ति मार्ग का एक महत्वपूर्ण सोपान है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • अहंकार का विसर्जन: मां का "मुंडन माला" धारण करना और नृत्य करना इस बात का प्रतीक है कि वह अपने भक्तों के अहंकार (मुंड) का मर्दन कर उन्हें मोक्ष प्रदान करती हैं।
  • द्वैत से अद्वैत की यात्रा: भजन में एक ओर संहारक रूप (मुंडन माला) और दूसरी ओर सौम्य रूप (क्षीर सागर का हार) का वर्णन है। यह दर्शाता है कि सृष्टि में सृजन और विनाश दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।
  • सामूहिक संकीर्तन का आनंद: इस भजन की लय और ताल इतनी मनमोहक है कि इसे सुनते ही भक्त झूमने लगते हैं। यह सामूहिक संकीर्तन में ऊर्जा का संचार करता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यद्यपि मां की आराधना किसी भी समय की जा सकती है, परंतु इस भजन के गायन और श्रवण के लिए कुछ विशेष अवसर अत्यंत फलदायी माने गए हैं:

  • शारदीय एवं चैत्र नवरात्रि: नवरात्रि के नौ दिनों में देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा के समय इस भजन का गायन करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है।
  • माता का जगराता और चौकी: रात्रि कालीन संकीर्तन और चौकी के दौरान जब देवी की महिमा का गुणगान चरम पर होता है, तब इस भजन को गाने से वातावरण अत्यंत भक्तिमय हो जाता है।
  • मंगलवार और शुक्रवार: ये दोनों दिन देवी मां की पूजा के लिए विशेष रूप से समर्पित हैं। इन दिनों सुबह या शाम की आरती के बाद इस भजन का पाठ किया जा सकता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन मुख्य रूप से आदिशक्ति मां दुर्गा और उनके उग्र स्वरूप मां महाकाली को समर्पित है। सनातन परंपरा में मां दुर्गा को शक्ति, बुद्धि और करुणा की देवी माना गया है। इस भजन में प्रयुक्त शब्द जैसे "महामाया" और "मुंडन माल" सीधे तौर पर मां काली के स्वरूप की ओर संकेत करते हैं। मां काली का यह स्वरूप दुष्टों के संहार और भक्तों की रक्षा के लिए जाना जाता है। इस भजन के माध्यम से भक्त मां के ममतामयी और रक्षक दोनों रूपों की एक साथ वंदना करता है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

यह भजन उत्तर भारतीय लोक भक्ति परंपरा (Folk Devotional Tradition) से प्रेरित है। सदियों से भारत के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में देवी मां के जागरणों में इस प्रकार के गीतों का प्रचलन रहा है। इस भजन के मूल रचयिता के विषय में कोई स्पष्ट लिखित प्रमाण नहीं मिलता है, क्योंकि यह मौखिक परंपरा और लोक कलाकारों के माध्यम से पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ा है। वर्तमान में कई प्रसिद्ध भजन गायकों ने इसे अपने सुरों से सजाकर वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय बना दिया है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल, सुबोध और लोक-भाषा (खड़ी बोली और ब्रज का मिश्रण) है। इसकी काव्य शैली संवादात्मक (Dialogue Style) है, जहाँ भक्त प्रश्न पूछता है और फिर स्वयं ही या देवी की महिमा के माध्यम से उसका उत्तर प्राप्त करता है। इसमें प्रयुक्त रूपक और उपमाएं जैसे "नैना रतन जड़े" और "क्षीर सागर दये हार" काव्य सौंदर्य को बढ़ाते हैं और श्रोता के मन में एक सुंदर दृश्य बिंब (Visual Imagery) का निर्माण करते हैं।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें कई महत्वपूर्ण आध्यात्मिक और व्यावहारिक सीख देता है:

  1. समर्पण भाव: ईश्वर के सामने अपने अस्तित्व को भूलकर पूरी तरह समर्पित हो जाना ही सच्ची भक्ति है।
  2. संतुलन की सीख: जीवन में सुख (क्षीर सागर का हार) और दुख या चुनौतियां (मुंडन माला) दोनों का सह-अस्तित्व है। हमें दोनों ही परिस्थितियों में समभाव रहना चाहिए।
  3. भय से मुक्ति: जब हम मां के उग्र और शक्तिशाली स्वरूप की शरण में जाते हैं, तो हमारे भीतर से हर प्रकार का भय समाप्त हो जाता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द/वाक्यांश सरल अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
लट खोल के खुले बालों के साथ प्रकृति की असीम और उन्मुक्त ब्रह्मांडीय ऊर्जा का प्रतीक।
नैना रतन जड़े रत्नों से जड़े हुए नेत्र मां की दिव्य, करुणामयी और ज्ञानमयी दृष्टि।
मुंडन माला नरमुंडों की माला अहंकार के विनाश और काल (समय) पर विजय का प्रतीक।
महामाया सृष्टि की आदि शक्ति वह शक्ति जो पूरे संसार को अपनी माया से संचालित करती है।
क्षीर सागर दूध का सागर शांति, पवित्रता और विष्णु लोक की समृद्धि का प्रतीक।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"लट खोल के नाचो मेरी माये, कि नैना रतन जड़े..."
हे मेरी ममतामयी मां! आप अपने दिव्य केशों को खोलकर आनंदपूर्वक नृत्य करें। आपके नेत्र अत्यंत सुंदर हैं, मानो उनमें ब्रह्मांड के सारे दिव्य रत्न जड़े हुए हों। आपकी एक दृष्टि ही हमारे जीवन को धन्य कर देती है।

"कौन दये मैया मुंडन माला, कौन दिए रे मैया हार..."
भक्त कौतूहलवश पूछता है कि हे मां! आपको यह मुंडों की माला किसने दी है और यह सुंदर, चमचमाता हुआ हार किसने भेंट किया है?

"महामाया दी मुंडन माल, क्षीर सागर दये हार..."
स्वयं महामाया (आदिशक्ति) ने आपको यह मुंडों की माला धारण कराई है, जो इस बात का प्रतीक है कि आप काल से परे हैं। और क्षीर सागर ने आपको यह दिव्य हार दिया है, जो आपकी सौम्यता और शांति को दर्शाता है।

"कौन दिये री मैया कमल की माला, कौन ने धनुष बाण..."
भक्त पुनः पूछता है कि हे मां! आपको यह कोमल कमल की माला किसने दी है और दुष्टों का संहार करने के लिए यह शक्तिशाली धनुष-बाण किसने प्रदान किया है?

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के गायन से पूर्व या पश्चात देवी मां के इस प्रसिद्ध श्लोक का उच्चारण करना अत्यंत शुभ माना जाता है:

सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोऽस्तु ते॥

अर्थ: जो शरण में आए हुए लोगों का कल्याण करने वाली हैं, जो सभी पुरुषार्थों को सिद्ध करने वाली हैं, ऐसी गौरी स्वरूप नारायणी मां को हम बारंबार नमस्कार करते हैं।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम लट खोल के नाचो मेरी माये (Lat Khol Ke Naacho Meri Maaye)
मुख्य आराध्य मां दुर्गा, मां महाकाली, आदिशक्ति
मुख्य रस भक्ति रस, आनंद रस, वीर रस
भाषा हिंदी (लोक भाषा / खड़ी बोली)
गायन का उत्तम समय नवरात्रि, माता का जगराता, मंगलवार, शुक्रवार
मुख्य प्रतीक खुले केश (ब्रह्मांडीय ऊर्जा), मुंडन माला (अहंकार का नाश)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह भजन मुख्य रूप से आदिशक्ति मां दुर्गा और उनके उग्र स्वरूप मां महाकाली को समर्पित है।

"लट खोल के" का अर्थ है देवी के खुले केश, जो ब्रह्मांड की असीम, उन्मुक्त और स्वतंत्र आदि-शक्ति का प्रतीक हैं। यह सृष्टि के सृजन और संहार की प्राकृतिक ऊर्जा को दर्शाता है।

"मुंडन माला" अहंकार के विनाश और काल पर विजय का प्रतीक है, जबकि "क्षीर सागर का हार" शांति, पवित्रता और ऐश्वर्य का प्रतीक है। यह देवी के उग्र और सौम्य दोनों रूपों के संतुलन को दर्शाता है।

इस भजन को नवरात्रि, माता की चौकी, जगराता, मंगलवार और शुक्रवार की विशेष पूजा के अवसर पर गाना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।

हाँ, इस भजन में प्रयुक्त "मुंडन माला" और "लट खोल के नाचना" मां काली के उस दिव्य नृत्य की ओर संकेत करता है जो उन्होंने दुष्टों के संहार के बाद ब्रह्मांड को शुद्ध करने के लिए किया था।

इसका अर्थ है कि मां के नेत्र करुणा, प्रेम और ज्ञान रूपी दिव्य रत्नों से सुशोभित हैं, जो अपने भक्तों पर हमेशा कृपा बरसाते हैं।

यह भजन सरल हिंदी और उत्तर भारतीय लोक-भाषा (खड़ी बोली) के मिश्रण में लिखा गया है, जिससे यह आम जनमानस के लिए अत्यंत सुगम है।

इस भजन के श्रवण से मन का भय दूर होता है, आत्मविश्वास में वृद्धि होती है और साधक के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत आता है। इस भजन के पाठ, अर्थ और आध्यात्मिक विश्लेषण को तैयार करने के लिए सनातन धर्म के विभिन्न ग्रंथों, लोक परंपराओं और प्रामाणिक भजन संग्रहों का संदर्भ लिया गया है। हमारा उद्देश्य पाठकों तक शुद्ध और त्रुटिहीन सामग्री पहुँचाना है ताकि वे अपनी साधना और भक्ति मार्ग में इसका सही लाभ उठा सकें।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्देवीभागवत पुराण: देवी के महाकाली और महामाया स्वरूप का वर्णन।
  • उत्तर भारतीय लोक भजन संग्रह: पारंपरिक जगराता और चौकी के गीतों का संकलन।
  • सनातन धर्म ग्रंथ: देवी सूक्तम और दुर्गा सप्तशती के मंत्र संदर्भ।

संबंधित भजन एवं लेख

मां दुर्गा और भक्ति रस से जुड़े अन्य पावन लेख और भजन पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएं:

श्रेणियां: Latest Bhakti Song

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!