भक्ति काव्य व भजन बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

गणपति को याद करें (Sab haath jod darbar me ganpati ka dhayan dharen Lyrics in Hindi)

सब् हाथ जोड़ दरबार में गणपति का ध्यान धरें भजन के संपूर्ण लिरिक्स, भावार्थ और आध्यात्मिक महत्व को पढ़ें। संदर्भ एवं व्याख्या सहित।

हिंदू धर्म और सनातन संस्कृति में किसी भी शुभ कार्य, पूजा-अनुष्ठान, सत्संग या कीर्तन के शुभारंभ में विघ्नहर्ता, बुद्धि के दाता भगवान श्री गणेश जी की आराधना अनिवार्य मानी गई है। "सब हाथ जोड़ दरबार में गणपति का ध्यान धरें (Sab haath jod darbar me ganpati ka dhayan dharen)" एक ऐसा ही अत्यंत लोकप्रिय, ऊर्जावान और भक्ति रस से सराबोर भजन है, जो भक्तों को सांसारिक चिंताओं को छोड़कर ईश्वर की शरण में आने का संदेश देता है। यह भजन न केवल भगवान गणेश की महिमा गाता है, बल्कि गुरु की सेवा, माँ सरस्वती की वंदना, हनुमान जी की भक्ति और आदि शक्ति माँ दुर्गा के पूजन के महत्व को भी रेखांकित करता है। इस लेख में हम इस पावन भजन के संपूर्ण लिरिक्स, विस्तृत भावार्थ, आध्यात्मिक महत्व और इससे मिलने वाली जीवनोपयोगी सीखों का गहराई से विश्लेषण करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

सब हाथ जोड़ दरबार में गणपति का ध्यान धरें

सब हाथ जोड़ दरबार में गणपति का ध्यान धरें,
आओ छोड़ के सारे काम को गणपति को याद करें।

सबसे पहले सतगुरु सेवा,
फेर मनाये गणपति देवा,
करे सरस्वती आराधना माँ से फरियाद करें,
आओ छोड़ के सारे काम को गणपति को याद करें।

लंगर वीरा ज्योत जगाओ,
सब मिलके हनुमान मनाओ,
कर पूजन मेरी मात का जीवन आबाद करें,
आओ छोड़ के सारे काम को गणपति को याद करें।

हाथ उठाकर मारो ताली,
भरलो अपनी झोली खाली,
आओ आज की पावन रात को ना यू बर्बाद करें,
आओ छोड़ के सारे काम को गणपति को याद करें।

सिद्धि विनायक गजमुख धारी,
तुम पर सारा जग बलिहारी,
धनुवंशी प्रीत के साथ में मिल धन्यवाद करें,
आओ छोड़ के सारे काम को गणपति को याद करें।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन सामूहिक भक्ति और शरणागति का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इसका मुख्य भाव यह है कि मनुष्य को अपने दैनिक जीवन की व्यस्तताओं और चिंताओं को कुछ समय के लिए विराम देकर पूर्ण समर्पण के साथ ईश्वर की आराधना में लीन हो जाना चाहिए। भजन की शुरुआत ही एक आह्वान से होती है, जहाँ सभी भक्तों से हाथ जोड़कर भगवान गणेश के दरबार में ध्यान लगाने के लिए कहा गया है।

भजन में आध्यात्मिक प्रगति के सही मार्ग को दर्शाया गया है। इसमें सबसे पहले गुरु की सेवा को स्थान दिया गया है, क्योंकि गुरु ही वह माध्यम हैं जो हमें ईश्वर तक पहुँचने का मार्ग दिखाते हैं। गुरु के बाद प्रथम पूज्य भगवान गणेश की वंदना की जाती है, जो सभी विघ्नों को हरने वाले हैं। इसके पश्चात, ज्ञान की देवी माँ सरस्वती की आराधना की जाती है ताकि साधक की बुद्धि निर्मल और वाणी मधुर हो सके।

आगे चलकर यह भजन पंचदेव उपासना और सामूहिक शक्ति के जागरण की बात करता है। इसमें हनुमान जी की वीरता और भक्ति तथा आदि शक्ति माँ दुर्गा के पूजन से जीवन को समृद्ध और आबाद करने की प्रार्थना की गई है। भजन का अंतिम भाग हमें कृतज्ञता (Gratitude) सिखाता है, जहाँ भगवान सिद्धि विनायक के प्रति पूरे जगत की ओर से धन्यवाद ज्ञापित किया गया है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • सर्वदेव उपासना का समन्वय: इस भजन में केवल गणेश जी ही नहीं, बल्कि गुरु, सरस्वती, हनुमान, भैरव (लंगर वीर) और देवी माँ की आराधना का सुंदर समन्वय है।
  • सामूहिक भक्ति (Satsang Bhava): "सब हाथ जोड़" और "सब मिलके" जैसे शब्द सामूहिक प्रार्थना की शक्ति को दर्शाते हैं, जिससे वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
  • मनोवैज्ञानिक शांति: "छोड़ के सारे काम को" पंक्ति मनुष्य को मानसिक तनाव और सांसारिक चिंताओं से मुक्त होकर वर्तमान क्षण में जीने की प्रेरणा देती है।
  • कृतज्ञता का भाव: भजन के अंत में भगवान को धन्यवाद देना यह सिखाता है कि जीवन में जो कुछ भी प्राप्त हुआ है, उसके लिए ईश्वर के प्रति आभारी रहना चाहिए।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को गाने और सुनने के लिए कोई भी समय उत्तम है, लेकिन कुछ विशेष अवसरों पर इसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है:

  • सत्संग या जागरण का प्रारंभ: चूंकि यह विघ्नहर्ता गणेश जी का भजन है, इसलिए किसी भी कीर्तन, जागरण या धार्मिक सभा की शुरुआत में इसे गाना अत्यंत शुभ माना जाता है।
  • गणेश चतुर्थी उत्सव: गणेशोत्सव के दौरान पंडालों और घरों में इस भजन का सामूहिक गायन भक्तों में अपार उत्साह भर देता है।
  • दैनिक सुबह की प्रार्थना: सुबह के समय इस भजन को सुनने से मन शांत होता है और दिनभर के कार्यों को करने के लिए सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।
  • गायन की विधि: इस भजन को पूरे उत्साह, ढोलक, मंजीरे और तालियों की थाप के साथ सामूहिक रूप से गाना चाहिए। ताली बजाने से शरीर के एक्यूप्रेशर बिंदु सक्रिय होते हैं और ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलती है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन में सनातन धर्म के कई प्रमुख दिव्य स्वरूपों का आह्वान किया गया है:

  • भगवान श्री गणेश: शिव-पार्वती के पुत्र, जिन्हें बुद्धि, समृद्धि और शुभता का प्रतीक माना जाता है। वे विघ्नहर्ता हैं।
  • सतगुरु: आध्यात्मिक मार्गदर्शक, जो अज्ञान के अंधकार को मिटाकर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं।
  • माँ सरस्वती: विद्या, कला और संगीत की अधिष्ठात्री देवी, जो साधक को सद्बुद्धि प्रदान करती हैं।
  • श्री हनुमान: बल, बुद्धि और विद्या के दाता, जो संकटों से रक्षा करते हैं।
  • आदि शक्ति (मात): जगत जननी माँ दुर्गा, जो जीवन को सुख, समृद्धि और सुरक्षा से भर देती हैं।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

यह भजन पारंपरिक लोक शैली और आधुनिक संकीर्तन परंपरा का एक सुंदर मिश्रण है। उत्तर भारत के जागरणों और चौकियों में यह भजन अत्यंत लोकप्रिय है। इसके रचनाकार ने "धनुवंशी प्रीत" के माध्यम से अपनी भक्ति और समर्पण को व्यक्त किया है। इस प्रकार के भजनों की रचना का मुख्य उद्देश्य जनमानस को सरल भाषा में गूढ़ आध्यात्मिक सत्यों से परिचित कराना और उन्हें ईश्वर भक्ति के मार्ग पर अग्रसर करना होता है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल, सुबोध और खड़ी बोली हिंदी है, जिसमें लोकभाषा (जैसे "फेर", "मनाये") के शब्दों का भी प्रयोग किया गया है। इसकी काव्य शैली गेय (गाए जाने योग्य) है। इसमें अंत्यानुप्रास अलंकार (जैसे सेवा-देवा, खाली-ताली) का सुंदर प्रयोग किया गया है, जिससे यह सुनने में अत्यंत मधुर और याद रखने में आसान हो जाता है। इसकी लय तेज और उत्साहवर्धक है, जो श्रोताओं को झूमने और ताली बजाने पर मजबूर कर देती है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें कई महत्वपूर्ण व्यावहारिक और आध्यात्मिक सीख देता है:

  1. प्राथमिकता का निर्धारण (Prioritization): जीवन में सांसारिक कार्य कभी समाप्त नहीं होंगे, इसलिए ईश्वर के लिए समय निकालना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।
  2. विनम्रता और समर्पण: हाथ जोड़ना और ताली बजाना अहंकार को मिटाने और ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण के प्रतीक हैं।
  3. समय का सदुपयोग: "आज की पावन रात को ना यू बर्बाद करें" पंक्ति हमें सचेत करती है कि हमें सत्संग और ईश्वर चिंतन के बहुमूल्य अवसरों को व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए।
  4. एकता की भावना: सामूहिक रूप से भजन गाने से सामाजिक समरसता और आपसी प्रेम बढ़ता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
गणपति गणों के स्वामी, भगवान गणेश बुद्धि और विघ्ननाशक देव
सतगुरु सच्चे गुरु या मार्गदर्शक ईश्वर प्राप्ति का मार्ग दिखाने वाले
आराधना पूजा, उपासना या प्रार्थना मन को ईश्वर में लीन करना
लंगर वीरा वीर हनुमान या क्षेत्रीय रक्षक देव सुरक्षा और शक्ति के प्रतीक
गजमुख धारी हाथी के मुख वाले विशाल बुद्धि और धैर्य के प्रतीक
बलिहारी न्योछावर होना, समर्पित होना पूर्ण शरणागति का भाव

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"सब हाथ जोड़ दरबार में गणपति का ध्यान धरें..."
कवि सभी भक्तों से अनुरोध करते हैं कि वे अपने दोनों हाथों को जोड़कर (जो कि विनय का प्रतीक है) भगवान गणेश के पावन दरबार में अपना ध्यान केंद्रित करें और अपने सभी सांसारिक कार्यों को कुछ समय के लिए छोड़कर केवल ईश्वर का स्मरण करें।

"सबसे पहले सतगुरु सेवा, फेर मनाये गणपति देवा..."
साधना का नियम है कि सबसे पहले गुरुदेव की वंदना की जाए, क्योंकि गुरु ही गोविंद से मिलाते हैं। गुरु सेवा के पश्चात प्रथम आराध्य भगवान गणेश को मनाया जाता है और फिर माँ सरस्वती से प्रार्थना की जाती है कि वे हमारी बुद्धि को सन्मार्ग पर लगाएं।

"लंगर वीरा ज्योत जगाओ, सब मिलके हनुमान मनाओ..."
भक्ति की इस पावन वेला में रक्षक देवों और हनुमान जी का आह्वान किया जाता है। हनुमान जी की कृपा से सभी प्रकार के भय दूर होते हैं। इसके साथ ही जगत जननी माँ दुर्गा का पूजन करके अपने जीवन को धन्य और आबाद करने की प्रार्थना की गई है।

"हाथ उठाकर मारो ताली, भरलो अपनी झोली खाली..."
भक्तों से कहा गया है कि वे संकोच छोड़कर दोनों हाथ उठाकर ताली बजाएं और भगवान की महिमा गाएं। ऐसा करने से ईश्वर की कृपा बरसती है और भक्तों की खाली झोलियां खुशियों से भर जाती हैं। इस पावन अवसर को व्यर्थ की बातों में नष्ट नहीं करना चाहिए।

"सिद्धि विनायक गजमुख धारी, तुम पर सारा जग बलिहारी..."
हे सिद्धि और बुद्धि के दाता, गजमुख धारी भगवान गणेश! आपके इस सुंदर और मंगलकारी रूप पर संपूर्ण सृष्टि न्योछावर है। हम सभी भक्तगण अत्यंत प्रेम और आदर के साथ आपके चरणों में कोटि-कोटि धन्यवाद अर्पित करते हैं।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के गायन से पूर्व या पश्चात भगवान गणेश के इस प्रसिद्ध श्लोक का पाठ करना अत्यंत फलदायी माना जाता है:

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

अर्थ: हे घुमावदार सूंड वाले, विशाल शरीर वाले, करोड़ों सूर्यों के समान तेजस्वी देव! मेरे सभी कार्यों को हमेशा विघ्न रहित पूरा करें।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम सब हाथ जोड़ दरबार में गणपति का ध्यान धरें
मुख्य आराध्य देव भगवान श्री गणेश (विघ्नहर्ता)
सह-आराध्य सतगुरु, माँ सरस्वती, हनुमान जी, आदि शक्ति
भाषा सरल हिंदी (खड़ी बोली)
भजन का भाव समर्पण, कृतज्ञता, सामूहिक भक्ति (सत्संग)
उपयुक्त अवसर गणेश चतुर्थी, कीर्तन का प्रारंभ, दैनिक पूजा, जागरण

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस भजन का मुख्य उद्देश्य भक्तों को सांसारिक चिंताओं से मुक्त कर भगवान गणेश की शरण में लाना और किसी भी शुभ कार्य या सत्संग की निर्विघ्न शुरुआत के लिए उनका आशीर्वाद प्राप्त करना है।

इस भजन में सबसे पहले "सतगुरु सेवा" यानी सच्चे गुरु की सेवा करने की बात कही गई है, क्योंकि गुरु ही ईश्वर तक पहुँचने का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

लोक परंपराओं में "लंगर वीरा" का संबंध रक्षक देवों या भैरव जी से माना जाता है, जो नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करते हैं और साधना के मार्ग को सुरक्षित बनाते हैं।

हाँ, इस भजन को आप अपनी दैनिक सुबह या शाम की पूजा में गा सकते हैं। यह मन को एकाग्र करने और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने में मदद करता है।

ताली बजाना आनंद और समर्पण की अभिव्यक्ति है। आध्यात्मिक रूप से यह मन के भटकाव को रोकती है और सामूहिक संकीर्तन में एक लयबद्ध ऊर्जा का निर्माण करती है।

इसके गायन से मानसिक शांति मिलती है, एकाग्रता बढ़ती है, विघ्नों का नाश होता है और साधक के भीतर कृतज्ञता तथा भक्ति का भाव जाग्रत होता है।

इस भजन में ज्ञान की देवी माँ सरस्वती और शक्ति स्वरूपा आदि माता (दुर्गा जी) की आराधना की गई है।

यह भजन के रचयिता या उनकी मंडली का सूचक नाम है, जो यह दर्शाता है कि वे भगवान गणेश के चरणों में अत्यंत प्रेम (प्रीत) के साथ अपना धन्यवाद और समर्पण अर्पित कर रहे हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत आता है। इस भजन के पाठ और भावार्थ को प्रामाणिक स्रोतों, पारंपरिक संकीर्तन पद्धतियों और वैदिक दर्शन के आलोक में तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य पाठकों को न केवल भजन के शब्द प्रदान करना है, बल्कि उनके पीछे छिपे गहरे आध्यात्मिक संदेश से भी अवगत कराना है ताकि उनकी साधना और भक्ति अधिक अर्थपूर्ण हो सके।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्भागवत महापुराण एवं गणेश पुराण (विघ्नहर्ता महिमा संदर्भ)
  • पारंपरिक संकीर्तन एवं भजन संग्रह परंपरा
  • सनातन धर्म की पंचदेव उपासना पद्धति

संबंधित भजन एवं लेख

यदि आपको यह भजन पसंद आया है, तो आप हमारी वेबसाइट पर निम्नलिखित पावन भजनों और स्तोत्रों के लिरिक्स और भावार्थ भी पढ़ सकते हैं:

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!