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शांति मंत्र (Shanti Mantra in Hindi)- Bhaktilok


शांति मंत्र (Shanti Mantra in Hindi)- 

ॐ सह नाववतु। सह नौ भुनक्तु।

सह वीर्यं करवावहै।

तेजस्वि नावधीतमस्तु मा विद्विषावहै।

ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः।

शांति मंत्र (Shanti Mantra in Hindi)- Bhaktilok


शांति मंत्र का महत्व (Significance of Shanti Mantra):-

शांति मंत्रों का महत्व अत्यधिक है और ये विभिन्न धार्मिक साम्प्रदायों में प्रचलित हैं। इन मंत्रों का उच्चारण शांति, सुकून, एवं आत्मा की प्रशांति के लिए किया जाता है। यहां कुछ क्षेत्रों में शांति मंत्रों के महत्व को समझाया गया है:

  1. आध्यात्मिक प्रगति: शांति मंत्रें आध्यात्मिक सफलता की दिशा में मदद करते हैं। इनका जप और उच्चारण ध्यान में सहायक होता है जिससे चित्त शांत होकर आध्यात्मिक साधना में सफलता प्राप्त हो सकती है।

  2. मानवता के लिए एकता: शांति मंत्रें विभिन्न धर्मों के अनुयायियों को मिलकर एकता और सामंजस्य की भावना को प्रोत्साहित करते हैं। इन्हें बड़े संगीत या विशेष समारोहों में समझा जा सकता है जो समृद्धि और एकता का सन्देश देने का हिस्सा होते हैं।

  3. शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य: शांति मंत्रों का उच्चारण मानव शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद कर सकता है। इनका नियमित जप चित्त को शांति और स्थिरता प्रदान कर सकता है और स्वस्थ जीवनशैली को प्रोत्साहित कर सकता है।

  4. यज्ञ और ऋतुआदि की शांति: कई मंत्र यज्ञों और विशेष पर्वों के अवसर पर जपे जाते हैं जिनसे यज्ञ की शांति बनी रहती है और प्राकृतिक ऋतुएँ समृद्धि और शांति के साथ आए।

  5. समाज में शांति: शांति मंत्रों का प्रचलन समाज में शांति और एकता की भावना को बढ़ावा देता है। इन मंत्रों का समूहिक जप समूह की शांति और समृद्धि के लिए एक सामंजस्यपूर्ण वातावरण बना सकता है।

  6. प्राकृतिक शांति: कुछ शांति मंत्र प्राकृतिक आपदाओं से बचाव के लिए प्रयोग होते हैं। इन मंत्रों का जप और उच्चारण प्राकृतिक विकृतियों और आपदाओं के प्रति श्रद्धांजलि के रूप में किया जा सकता है।

यदि आप किसी विशेष शांति मंत्र के बारे में बात कर रहे हैं, तो उसका विशेष आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व अलग हो सकता है।

शांति मंत्र का अर्थ और विशेषता (Meaning and Importance of Shanti Mantra):-

शांति मंत्रों का अर्थ और विशेषता समर्पित मुद्रा, संकेत और भावनाओं के साथ जुड़े होते हैं। इन मंत्रों का उच्चारण और उनके महत्वपूर्ण भूमिकाओं का उल्लेख नीचे किया गया है:

शांति मंत्र का अर्थ:

  1. ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः:

    • पहला शान्ति: इसका अर्थ है शारीरिक और मानसिक शांति। यह स्वस्थ शारीरिकता और मानसिक सुख की प्राप्ति के लिए है।
    • दूसरा शान्ति: यह बाह्यकारणों से उत्पन्न वातावरणिक समस्याओं से मुक्ति के लिए है।
    • तीसरा शान्ति: इसे आध्यात्मिक शांति के लिए उच्चारित किया जाता है, जिससे आत्मा का समर्थन होता है।
  2. शांति पाठ:

    • यह मंत्र विशेष रूप से शांति प्राप्ति की प्रार्थना करता है। इसमें ब्रह्मा, विष्णु, रुद्र, सरस्वती, लक्ष्मी, पार्वती, गणेश, कुबेर, सूर्य, चंद्रमा, यम, वायु, अग्नि, जल, पृथ्वी, आकाश, नक्षत्र, ग्रह, नदी, समुद्र, पर्व, ऋतु, तिथि, नक्षत्र, मुहूर्त, इन्द्र, वरुण, यमराज, कुबेर, विक्रम, धनंजय, राजा, धर्मराज, भूतदिव, शांति देवी, विद्या, सर्वज्ञ, सर्वशक्ति, सर्वेश्वर, सच्चिदानंद रूपी परब्रह्मा को प्रणाम करता है।

शांति मंत्र की विशेषता:

  1. आध्यात्मिक साधना में सहायक:

    • शांति मंत्रों का जप और उच्चारण आध्यात्मिक साधना में सहायक होता है और चित्त को प्रशांत करने में मदद करता है।
  2. सामाजिक एकता का सन्देश:

    • इन मंत्रों का प्रचलन सामाजिक एकता और शांति की भावना को बढ़ावा देता है और लोगों को सामंजस्यपूर्ण जीवन जीने की प्रेरणा प्रदान करता है।
  3. प्राकृतिक आपदा का निवारण:

    • कई बार ये मंत्र प्राकृतिक आपदाओं से बचाव के लिए उच्चारित किए जाते हैं और भूमि, वायु, जल, अग्नि आदि की शांति की प्रार्थना करते हैं।
  4. यज्ञों और पूजाओं के लिए:

    • ये मंत्र यज्ञों और धार्मिक पूजाओं में उच्चारित किए जाते हैं, जिससे शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
  5. प्रतिदिन के जीवन में उपयोग:

    • इन मंत्रों का नियमित जप और उच्चारण रोजमर्रा के जीवन में सुख, शांति, और समृद्धि की प्राप्ति में सहायक हो सकता है।
  6. ध्यान और मनःशक्ति को बढ़ावा:

    • इन मंत्रों का उच्चारण ध्यान को स्थिर करने और मानव मनःशक्ति को विकसित करने में मदद करता है।

ये मंत्र विभिन्न संस्कृति और धर्मों में हो सकते हैं, लेकिन उनका मूल उद्देश्य शांति, सामंजस्य, और आध्यात्मिक साधना में सहायक होना है।

शांति मंत्र की प्रारूपिकता (Structure of Shanti Mantra):-

शांति मंत्रों की प्रारूपिकता विभिन्न धार्मिक साम्प्रदायों और धार्मिक ग्रंथों में भिन्न हो सकती है, क्योंकि ये अलग-अलग धार्मिक सम्प्रदायों और परंपराओं के अनुसार विकसित होते हैं। यहां कुछ सामान्य प्रारूपिकता की उदाहरण दिए जा रहे हैं:

ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः:

  1. शांति मंत्र का प्रारूप:

    • यह मंत्र एक साधुपूर्ण स्तोत्र है जो एक ही मंगलमय पंक्ति से शुरू होकर तीन बार शान्ति की प्रार्थना को दोहराता है।
  2. अर्थ:

    • इसका पहला "शान्तिः" शब्द देहिक, मानसिक और आध्यात्मिक शांति की प्रार्थना करता है।
    • दूसरा "शान्तिः" बाह्य परिस्थितियों से उत्पन्न वातावरणिक समस्याओं से मुक्ति की प्रार्थना करता है।
    • तीसरा "शान्तिः" आध्यात्मिक शांति की प्राप्ति के लिए है, जिससे आत्मा का समर्थन होता है।
  3. उच्चारण और उदात्तता:

    • यह मंत्र सामाजिक और धार्मिक आयोजनों में बहुत सी बार प्रदर्शित होता है, जिससे इसका उच्चारण सभी उपस्थित लोगों के लिए सुना जा सकता है।

शांति पाठ:

  1. शांति पाठ का प्रारूप:

    • यह मंत्र एक लम्बी सूची में ब्रह्मा, विष्णु, रुद्र, सरस्वती, लक्ष्मी, पार्वती, गणेश, कुबेर, सूर्य, चंद्रमा, यम, वायु, अग्नि, जल, पृथ्वी, आकाश, नक्षत्र, ग्रह, नदी, समुद्र, पर्व, ऋतु, तिथि, नक्षत्र, मुहूर्त, इन्द्र, वरुण, यमराज, कुबेर, विक्रम, धनंजय, राजा, धर्मराज, भूतदिव, शांति देवी, विद्या, सर्वज्ञ, सर्वशक्ति, सर्वेश्वर, सच्चिदानंद रूपी परब्रह्मा को प्रणाम करता है।
  2. अर्थ:

    • यह मंत्र विभिन्न देवताओं और शक्तियों को समर्पित करता है और उनसे शांति, समृद्धि, और कल्याण की प्रार्थना करता है।
  3. उच्चारण और सामूहिकता:

    • इसे सामूहिकता में उच्चारित किया जाता है, जिससे सभी उपस्थित व्यक्तियों को इसका लाभ हो सकता है।

शांति मंत्रों की प्रारूपिकता धार्मिक साम्प्रदायों और संस्कृति के अनुसार बदल सकती है, लेकिन उनका मुख्य उद्देश्य शांति, समृद्धि, और आध्यात्मिक साधना में सहायक होना है।

शांति मंत्र के प्रमुख शब्दों का विश्लेषण (Analysis of Key Words in Shanti Mantra):-

शांति मंत्रों में प्रयुक्त प्रमुख शब्दों का विश्लेषण धार्मिक, आध्यात्मिक और सामाजिक संदेशों को समझने में मदद करता है। यहां शांति मंत्रों के प्रमुख शब्दों का विश्लेषण है:

ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः:

  1. ॐ (ॐकार):

    • आध्यात्मिक संबंध: यह सबसे प्रमुख ब्रह्मास्त्र है और इसे परंपरागत रूप से परब्रह्मा का प्रतीक माना जाता है। इसका जप आध्यात्मिक साधना में सहायक होता है और चित्त को शांत करने में मदद करता है।
  2. शान्तिः (शांति):

    • दैहिक, मानसिक, आध्यात्मिक शांति: इस शब्द के माध्यम से शांति मंत्र दैहिक शांति, मानसिक शांति और आध्यात्मिक शांति की प्रार्थना करता है।

शांति पाठ:

  1. शांति:

    • शांति, समृद्धि, और कल्याण: इस शब्द से प्रकट होता है कि मंत्र शांति, समृद्धि और कल्याण की प्राप्ति के लिए है।
  2. देवताओं और शक्तियों का समर्पण:

    • देवता, देवी, और शक्तियों की प्रार्थना: मंत्र में प्रयुक्त विभिन्न देवताओं, देवियों, और शक्तियों के नामों के माध्यम से इसे देवताओं और शक्तियों को समर्पित किया गया है।

शान्ति मंत्र का उच्चारण:

  1. विशेष देवताओं का स्मरण:

    • विष्णु, लक्ष्मी, सरस्वती, गणेश, सूर्य, चंद्रमा, यम, वायु, अग्नि, जल, पृथ्वी, आकाश: इन देवताओं के नामों का उच्चारण धर्मिक एवं आध्यात्मिक प्राकृतिकी से संबंधित है और इनका स्मरण शांति और कल्याण के लिए किया जाता है।
  2. परब्रह्मा का प्रणाम:

    • सच्चिदानंद रूपी परब्रह्मा: इस मंत्र में परब्रह्मा के सच्चिदानंद स्वरूप का प्रणाम किया जाता है, जिससे आध्यात्मिक साधना में समर्थन होता है।

इन मंत्रों के प्रमुख शब्दों का विश्लेषण सामाजिक, आध्यात्मिक और धार्मिक संदेशों को समझने में मदद करता है और इनका उच्चारण शांति, समृद्धि, और आध्यात्मिक साधना में सहायक होता है।

शांति मंत्र का आध्यात्मिक असर (Spiritual Impact of Shanti Mantra):-

शांति मंत्रों का आध्यात्मिक असर विशेष रूप से आत्मा के साथ मिलकर, मानव चित्त को शांति, सुकून, और आध्यात्मिक साधना में मदद करने की प्रक्रिया में प्रकट होता है। ये मंत्र ध्यान, प्रार्थना और मनन के द्वारा आत्मा की ऊँचाइयों को छूने में सहायक हो सकते हैं। निम्नलिखित कुछ मुख्य आध्यात्मिक असरों को विवरणित किया गया है:

  1. चित्त शुद्धि:

    • शांति मंत्र का जप और उच्चारण चित्त को शुद्धि की दिशा में मदद कर सकता है। इसके अभ्यास से मानव चित्त में उत्कृष्टता और शुद्धि की भावना बढ़ सकती है।
  2. आत्मा संबंधी साधना:

    • शांति मंत्रों का आध्यात्मिक उच्चारण और उच्च सोचने की प्रक्रिया आत्मा के साथ संबंधित है। इससे व्यक्ति अपनी आत्मा को अध्यात्मिक रूप से महसूस कर सकता है।
  3. शांति और सुकून:

    • शांति मंत्रों का जप और सुनना चित्त को प्रशांत और तनावमुक्त बना सकता है। इससे आत्मा और चित्त में शांति और सुकून की अनुभूति होती है।
  4. आत्मा के साथ संवाद:

    • मंत्रों के जप के दौरान व्यक्ति आत्मा के साथ संवाद में प्रवृत्त हो सकता है। यह अंतर्निहित स्वरूप को अनुभव करने में सहायक हो सकता है।
  5. ध्यान एवं मनन में मदद:

    • शांति मंत्रों का जप ध्यान और मनन में मदद करता है। यह व्यक्ति को अपने आत्मा की ओर ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है।
  6. आत्मा के साथ एकाग्रता:

    • शांति मंत्रों का उच्चारण और ध्यान से व्यक्ति अपने आत्मा के साथ एकाग्रता प्राप्त कर सकता है, जिससे उसकी आत्मा के साथ मिलन होता है।
  7. कर्मयोग में सहायक:

    • शांति मंत्रों का जप करने से व्यक्ति कर्मयोग में लगाव और निष्काम कर्म करने की भावना में सहायक हो सकता है।
  8. आत्मा के साथ एकता:

    • इन मंत्रों का जप करने से व्यक्ति आत्मा में सामंजस्यपूर्ण एकता महसूस कर सकता है, जिससे उसे आत्मा के साथ मिलन होता है।

शांति मंत्रों का आध्यात्मिक असर व्यक्ति को आत्मा के साथ संबंधित बनाए रखने में मदद कर सकता है और उसे आत्मा की ऊँचाइयों की अनुभूति करने में साहाय्य कर सकता है।

शांति मंत्र का उपयोग और लाभ (Usage and Benefits of Shanti Mantra):-

शांति मंत्र का उपयोग और लाभ:

उपयोग (Usage):

  1. पूजा और यज्ञ:

    • शांति मंत्रों का उपयोग पूजा और यज्ञों में किया जाता है, जिससे देवताओं की कृपा और शांति प्राप्त होती है।
  2. आध्यात्मिक साधना:

    • इन मंत्रों का नियमित उच्चारण और जप आध्यात्मिक साधना में सहायक हो सकता है, जो चित्त को शांत, उदार, और ध्यानाकारी बनाए रखने में मदद करता है।
  3. परिस्थितिक आपदा के लिए:

    • शांति मंत्रों का जप प्राकृतिक आपदाओं या अन्य आपत्तियों से बचाव के लिए किया जा सकता है, जिससे शांति और सुरक्षा प्राप्त होती है।
  4. संगीत और ध्यान के साथ:

    • कई धार्मिक संगीत प्रदर्शनों और ध्यान सत्रों में शांति मंत्रों का उपयोग किया जाता है, जो आत्मा को संबोधित करने में सहायक हो सकता है।
  5. सामाजिक समारोह:

    • शांति मंत्रों का जप सामाजिक समारोहों, शादियों, और अन्य समारोहों में भी किया जा सकता है, जिससे समृद्धि और शांति होती है।

लाभ (Benefits):

  1. चित्त शांति:

    • शांति मंत्रों का नियमित उच्चारण चित्त को शांत, स्थिर, और शांति से भर सकता है, जिससे मानसिक स्वास्थ्य में सुधार हो सकता है।
  2. आत्मा के साथ जुड़ाव:

    • इन मंत्रों का जप और उच्चारण आत्मा के साथ एकाग्रता और मिलन को बढ़ावा देता है, जिससे व्यक्ति अपनी आत्मा को महसूस कर सकता है।
  3. योग और ध्यान को सहायक:

    • शांति मंत्रों का जप ध्यान और योग के दौरान मानव चित्त को शांति में रखने में सहायक हो सकता है और इन अभ्यासों को सुगम बना सकता है।
  4. कठिनाईयों का सामना करने की क्षमता:

    • शांति मंत्रों का अभ्यास करने से व्यक्ति कठिनाईयों का सामना करने की क्षमता मिल सकती है और उसे उच्चतम शक्ति और साहस की अधिकारिता हो सकती है।
  5. प्राकृतिक आपदा से सुरक्षा:

    • ये मंत्र प्राकृतिक आपदा से सुरक्षा के लिए प्रार्थना कर सकते हैं और व्यक्ति को सुरक्षित रखने में मदद कर सकते हैं।
  6. संबंधों में सामंजस्य:

    • शांति मंत्रों का उपयोग संबंधों में सामंजस्यपूर्णता और समर्थन में किया जा सकता है, जिससे व्यक्ति को सामाजिक संबंधों में सुधार हो सकता है।

शांति मंत्रों का नियमित उच्चारण और जप से व्यक्ति को आत्मा के साथ संबंधित बनाए रखने में मदद करता है और उसे चित्त शांति, सामंजस्य, और आत्मिक समृद्धि प्रदान कर सकता है।

शांति मंत्र का इतिहास और प्रसार (History and Spread of Shanti Mantra):-

शांति मंत्रों का इतिहास विश्वभर में कई साल पहले की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ा हुआ है। ये मंत्र विभिन्न धार्मिक संस्कृतियों में उपयोग होते हैं और उनके विभिन्न रूपों में प्रसारित होते हैं।

वैदिक साहित्य:

  1. ऋग्वेद:

    • शांति मंत्रों की शुरुआत वैदिक साहित्य, विशेषकर ऋग्वेद, में की गई थी। यहां प्रमुख उदाहरण है "ॐ द्यौः शान्तिरन्तरिक्षँ शान्तिः" जो ऋग्वेद (1.89.8) से है।
  2. यजुर्वेद:

    • शांति मंत्रों का उपयोग यजुर्वेद में यज्ञों और पूजाओं के समय किया जाता है, जैसे कि "असतोमा सद्गमया" या "तमसोमा ज्योतिर्गमया"।

हिन्दू धर्म:

  1. उपनिषद:

    • उपनिषदों में भी शांति मंत्रों का उपयोग दिखाई गया है, जैसे कि "असतोमा सद्गमया" और "ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं"।
  2. भगवद गीता:

    • भगवद गीता में अर्जुन को शांति के लिए मार्गदर्शन के रूप में भगवान कृष्ण के वचनों में भी शांति मंत्रों का अध्ययन किया जा सकता है।

बौद्ध और जैन धर्म:

  1. बौद्ध धर्म:

    • बौद्ध धर्म में भी ध्यान और शांति के मंत्र प्रचलित हैं, जो मेधितेश्वर, मैत्रेय, तारानाथ, और अन्य बौद्ध देवताओं के साथ जुड़े होते हैं।
  2. जैन धर्म:

    • जैन धर्म में भी शांति मंत्रों का विशेष उपयोग किया जाता है, जो अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य, और अपरिग्रह की प्रमाणिति करते हैं।

विस्तार और प्रसार:

शांति मंत्रों का प्रसार विभिन्न धार्मिक समुदायों के बाहर भी हुआ है। इन मंत्रों की महत्ता और उनका उपयोग विश्वभर में मानव समृद्धि और शांति की प्राप्ति में मदद करने के लिए है। आधुनिक युग में, इन मंत्रों का अधिक अध्ययन और प्रसार हो रहा है, विशेषकर विभिन्न योग और आध्यात्मिक समुदायों के माध्यम से।

शांति मंत्रों का इतिहास विशेष रूप से वेदों, उपनिषदों, और भगवद गीता में मिलता है और इनका प्रसार विभिन्न धार्मिक समुदायों के बीच हुआ है। इन मंत्रों का उपयोग ध्यान, पूजा, यज्ञ, और आध्यात्मिक साधना में किया जाता है और इनके उच्चारण से चित्त को शांति, समृद्धि, और आत्मिक साधना में मदद मिलती है।

 शांति मंत्र का सांस्कृतिक महत्व (Cultural Significance of Shanti Mantra):-

शांति मंत्रों का सांस्कृतिक महत्व बहुत गहरा है और इन्हें विभिन्न सांस्कृतिक तथा धार्मिक परंपराओं में महत्वपूर्ण स्थान पर रखा गया है। इन मंत्रों का सांस्कृतिक महत्व निम्नलिखित प्रकार से है:

  1. आध्यात्मिक साधना:

    • शांति मंत्रों का उच्चारण और जप आध्यात्मिक साधना का हिस्सा है। इनका प्रयोग ध्यान, योग, और मनन में मदद करने के लिए किया जाता है, जिससे चित्त को शांति और सामंजस्य प्राप्त होती है।
  2. पूजा और यज्ञ:

    • शांति मंत्रों का प्रयोग पूजा, यज्ञ और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों में होता है। ये मंत्र परम्परागत धार्मिक अनुष्ठान में शांति और आत्मिक समृद्धि के लिए प्रार्थना करते हैं।
  3. संस्कृति में सहायक:

    • शांति मंत्रों का सजीव सांस्कृतिक विरासत में महत्वपूर्ण स्थान है। इनका संधारण और उच्चारण संस्कृति को स्थायीता और आध्यात्मिकता के साथ जोड़ने में मदद करता है।
  4. सामाजिक और परिवारिक अनुष्ठान:

    • इन मंत्रों का सांस्कृतिक महत्व सामाजिक और परिवारिक अनुष्ठान में भी है। विभिन्न सामाजिक और परिवारिक आयोजनों में इन मंत्रों का प्रयोग शांति, कल्याण, और समृद्धि के लिए किया जाता है।
  5. साहित्य में समर्थन:

    • शांति मंत्रों का सांस्कृतिक महत्व साहित्य और दर्शन में भी प्रतिस्थापित है। कविता, काव्य, और धार्मिक ग्रंथों में इन मंत्रों का उद्धारण देखा जा सकता है।
  6. योग और ध्यान में:

    • योग और ध्यान के समय भी शांति मंत्रों का प्रयोग किया जाता है। इन मंत्रों के सहायता से योगी और ध्यानी अपने मानसिक और आत्मिक स्थिति को संतुलित रखते हैं।
  7. भगवान की पूजा:

    • शांति मंत्रों का उच्चारण भगवान की पूजा के समय भी किया जाता है। इन मंत्रों के माध्यम से श्रद्धालु भगवान से शांति और कल्याण की प्राप्ति की प्रार्थना करते हैं।
  8. आपसी सम्बन्धों में मदद:

    • शांति मंत्रों का आदान-प्रदान सामाजिक और पारिवारिक संबंधों को सुधारने में भी होता है। इन मंत्रों के माध्यम से लोग आपसी समझ, समर्थन, और प्रेम में बढ़ोतरी कर सकते हैं।

शांति मंत्रों का सांस्कृतिक महत्व उन्हें एक ऐसे माध्यम के रूप में बनाए रखता है जो धार्मिकता, साहित्य, और सामाजिक जीवन के विभिन्न पहलुओं को संबोधित करने में मदद करता है।

शांति मंत्र के विभिन्न रूप (Different Forms of Shanti Mantra):-

शांति मंत्र के विभिन्न रूप:

  1. शांति मंत्र:

    • असतोमा सद्गमया |
    • तमसोमा ज्योतिर्गमया |
    • मृत्योर्मामृतं गमया ||
    • ऊँ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ||
  2. यजुर्वेदीय शांति मंत्र:

    • आपो हि ष्ठा मयोभुवस्था ना ऊर्जे दधातन |
    • महे रणाय चक्षसे ||
  3. तैत्तिरीय उपनिषद् शांति मंत्र:

    • ऊँ सह नाववतु |
    • सह नौ भुनक्तु |
    • सह वीर्यं करवावहै |
    • तेजस्वि नावधीतमस्तु |
    • मा विद्विषावहै ||
    • ऊँ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ||
  4. इषा उपनिषद् शांति मंत्र:

    • पूर्णमदः पूर्णमिदं |
    • पूर्णात्पूर्णमुदच्यते |
    • पूर्णस्य पूर्णमादाय |
    • पूर्णमेवावशिष्यते ||
    • ऊँ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ||
  5. भू सुक्तम:

    • भूर्भुवः स्वः |
    • तत्सवितुर्वरेण्यं |
    • भर्गो देवस्य धीमहि |
    • धियो यो नः प्रचोदयात् ||
  6. विश्वनाथ स्तोत्रम्:

    • योगेश्वराय विश्वनाथाय महादेवाय द्विदिव्याय |
    • त्र्यंबकाय त्रिपुरान्तकाय त्रिकालाग्निकालाय कालाग्निकालाय ||
    • कालाग्निरुद्राय नीलकण्ठाय मृत्युञ्जयाय सर्वेश्वराय ||
    • शिवाय शिवाय नमः ||
  7. गायत्री मंत्र:

    • ॐ भूर्भुवः स्वः |
    • तत्सवितुर्वरेण्यं |
    • भर्गो देवस्य धीमहि |
    • धियो यो नः प्रचोदयात् ||
  8. मृत्युञ्जय मंत्र:

    • ॐ त्र्यम्बकं यजामहे |
    • सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् |
    • उर्वारुकमिव बन्धनान् |
    • मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ||

ये मंत्र विभिन्न शाखाओं, ग्रंथों, और समुदायों में पाए जाते हैं और इनका उच्चारण ध्यान, पूजा, यज्ञ, और आध्यात्मिक साधना के लिए किया जाता है। ये मंत्र मन को शांति, समृद्धि, और आत्मिक साधना की प्राप्ति में मदद करते हैं।

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