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चलो चलो अब अवधपुरी को(Chalo chalo ab avadhpuri ko lyrics in hindi) - bhaktilok

146 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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अवधपुरी की ओर: राम भक्ति का अभिनव स्वर

भगवान राम की महिमा को समर्पित, यह भजन हमें भक्ति और श्रद्धा से लवरेज करता है।

चलो चलो अब अवधपुरी को(Chalo chalo ab avadhpuri ko lyrics in hindi)चलो चलो अब अवधपुरी को( तर्ज :- सारी दुनिया तुमको पूजे राधा जी के नाथ जी )चलो चलो अब अवधपुरी को,अवधपुरी के नाथ जी,सारी अयोध्या तुम बिन सूनी,चल दो मेरे साथ जी ।नहीं चले तो राज अवध का,तुम बिन कौन संभालेगा,राजा यहाँ ओर प्रजा वहां है,कौन प्रजा को पालेगा ।सूख रहे हैं आंख के आंसू,कर दो अब बरसात जी।।सारी अयोध्या तुम...मां की इच्छा, पिता वचन मैं,पूरा करने आया हूंवन में ही अब मेरा घर ,मैं यहीं पे रहने आया हूं  ।राज मुझे तुम फिर दे देना,चौदह बरस के बाद जी,जाओ भरत तुम अवधपुरी को,तुम्ही संभालो राज जी ।-3सारी अयोध्या तुम...चरण पादुका दे दो अपनी,उनको ही ले जाऊंगा ,एक दिन की भी देरी की तो ,अपनी चिता जलाऊंगा,चौदह बरस तो मैं भी रहूंगा ,लेकर अब सन्यास जीसारी अयोध्या तुम... ।चलो चलो अब अवधपुरी को अवधपुरी के नाथ जी,सारी अयोध्या तुम बिन सूनी चल दो मेरे साथ जी।।ere saath jee.

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में 'चलो चलो अब अवधपुरी को' की उक्ति के द्वारा हम भगवान राम के घर, अयोध्या जाने की प्रेरणा प्राप्त करते हैं। यह अयोध्या, भगवान राम का स्थान, जहां भक्तों का मन उनकी अनुपस्थिति में भी सूना सा लगता है। जैसे कि भजन में कहा गया है, 'सारी अयोध्या तुम बिन सूनी', इससे यह स्पष्ट होता है कि राम की अनुपस्थिति से वह स्थान कितना निर्जन और दुखदायी हो जाता है। आगे भजन में संतों और भक्तों के प्रेम और विश्वास का प्रतीक है, जब वे कहते हैं कि बिना भगवान राम के, 'राजा यहाँ और प्रजा वहां', एक चिन्ह है कि भगवान राम का शासन और उनकी कृपा के बिना प्रजा की स्थिति कठिन हो जाती है। यह भजन अपने भक्तों को प्रेरित करता है कि वे भगवान राम के चरणों में लौटकर उनकी कृपा प्राप्त करें।

इस गीत में एक गहरी भावना समाई हुई है, जहाँ भक्ति की गहराई और भक्त की आकांक्षा दोनों का सम्मिलित वर्णन किया गया है। जैसे-जैसे भजन आगे बढ़ता है, भक्त माँ की इच्छा और पिता के वचन का उल्लेख कर रहा है, जो यह दर्शाता है कि राम अपनी जिम्मेदारियों से कितने जुड़ाव में हैं। वह 14 वर्षों का वनवास लेकर अयोध्या लौटने की प्रार्थना कर रहे हैं, जो वास्तव में अपने कर्तव्यों की निष्ठा को दर्शाता है। भजन के अंत में, यह श्रद्धालु यह दिखाते हैं कि राम के चरणों के बिना उनका जीवन अधूरा है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि उनकी भक्ति के प्रति एक गहरी आत्मीयता है।

इस भजन में भक्ति मार्ग की सूक्ष्मता दर्शाई गई है। यहां, भगवान राम को भगवान का स्वरूप मानकर उन्हें पूजने का भाव है। भक्त का प्रेम और निष्ठा बहुत स्पष्ट है जब वह भगवान के चरणों की पहचान करते हैं और उनकी पादुकाओं को ले जाने का संकल्प लेते हैं। यह दिखाता है कि भक्ति का मार्ग केवल भक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें श्रद्धा, साहस और अपने कर्तव्यों के प्रति निष्ठा भी शामिल है। भजन में व्यक्त दृढ़ता और राम की कृपा पर आस्था रक्षात्मक आध्यात्मिकता की ओर भी इंगित करती हैं।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन सदियों से भक्तों के हृदय को छूता आया है और इसे भगवान राम के प्रति भक्ति का एक अद्भुत उदाहरण माना जाता है। रामायण जैसे प्राचीन ग्रंथों में भगवान राम के चरित्र की महिमा का वर्णन है, जहां उनकी जीवन की घटनाएं और सिद्धांत आज भी मानवता के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। 'चलो चलो अब अवधपुरी को' भजन में भावनाओं की बारीकी और भगवान राम की आवश्यकता को स्पष्ट रूप से दिखाया गया है, जो भक्ति साहित्य के महत्वपूर्ण हिस्सों में से एक है। इस भजन के माध्यम से भक्त अपने चारों ओर की भावनाओं को साहस और आशा के रूप में व्यक्त करते हैं।

प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें। इस भजन का नियमित पाठ मानसिक शांति, आंतरिक शक्ति और सच्चे प्रेम के अनुभव प्रदान करता है। भक्तों को भगवान राम की कृपा और संरक्षण प्राप्त होता है, जिससे उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन होते हैं। मानसिक तनाव और चिंताओं को कम करते हुए, यह भजन भक्ति में डूबने का अवसर देता है, जो आत्मिक उन्नति के लिए उपयोगी है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पठन सुबह के समय करना अधिक फलदायी होता है। पूजा करते समय एक दीया जलाना, सुंदर फूलों और प्रसाद का भोग अर्पित करना चाहिए। उचित ध्यान और श्रद्धा के साथ, भक्त को एक शांत मुद्रा में बैठकर इस भजन का पाठ करना चाहिए। यह सम्पूर्ण समर्पण का आह्वान करता है, जिससे भक्त राम के प्रति अपनी भक्ति को प्रगाढ़ बना सकते हैं।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

यह भजन किस देवता को समर्पित है?

यह भजन भगवान श्रीराम को समर्पित है, जो अयोध्या के नाथ माने जाते हैं।

इस भजन का प्रमुख संदेश क्या है?

इस भजन का संदेश है कि भगवान राम की अनुपस्थिति से जीवन अधूरा होता है और उनका लौटना आवश्यक है।

इस भजन के पाठ के क्या लाभ हैं?

इस भजन के पाठ से भक्त को मानसिक शांति, आंतरिक शक्ति और भगवान राम की कृपा प्राप्त होती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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