हिंदू सनातन धर्म में भक्ति संकीर्तन का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। कलयुग में भगवान श्री कृष्ण के बर्बरीक स्वरूप यानी श्री खाटू श्याम जी की आराधना भक्तों के कष्टों को हरने वाली मानी गई है। सुप्रसिद्ध भजन गायिका प्रेरणा मित्तल द्वारा गाया गया मधुर भजन "श्याम तेरा मनमोहक मुखड़ा वाह तेरा क्या कहना" (Waah Tera Kya Kehna Lyrics in Hindi) श्याम भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है। धीरज सक्सेना द्वारा रचित और लवली शर्मा के संगीत से सजा यह भजन श्री श्याम प्रभु के अलौकिक सौंदर्य, उनकी मोरछड़ी की महिमा और उनके नयनों के जादू को अत्यंत भावपूर्ण शब्दों में व्यक्त करता है। इस भजन में 'माधुर्य भाव' और 'शरणागति भाव' का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है। जब भक्त इस भजन का गायन करते हैं, तो वे श्याम सुंदर के रूप-रंग में खो जाते हैं और उनके हृदय में अनन्य प्रेम का संचार होता है।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
श्याम तेरा मनमोहक मुखड़ा वाह तेरा क्या कहना
श्याम तेरा मनमोहक मुखड़ा
उस पर नैन कमाल
वाह तेरा क्या कहना
वाह तेरा क्या कहना॥
सिर पे मुकुट ये मणियों वाला
और घुंघराले बाल
वाह तेरा क्या कहना
वाह तेरा क्या कहना॥
चमक तेरे चेहरे की जैसे निकली हर दम धूप है
देखा ना हमने कभी ऐसा प्यारा ये रूप है
नज़र डाल के कर देता है पूरे सभी सवाल
वाह तेरा क्या कहना
वाह तेरा क्या कहना॥
तीन बाण वाले तेरी अलग ही निशानी है
मोरछड़ी की तेरी निराली कहानी है
जिसके सिर पे घूम जाए वो हो जाता निहाल
वाह तेरा क्या कहना
वाह तेरा क्या कहना॥
हर दिल को धीरज मिलता तेरे दर पे आते ही
दीवाना वो बन जाए दर्शनों को पाते ही
तेरी ये मुस्कान काटती पल में सब जंजाल
वाह तेरा क्या कहना
वाह तेरा क्या कहना॥
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
यह भजन श्री खाटू श्याम जी के दिव्य स्वरूप की वंदना करता है। इसका मुख्य भाव भगवान के प्रति अगाध श्रद्धा और उनके अनुपम सौंदर्य के प्रति समर्पण है।
प्रथम अंतरा: भजन की शुरुआत में भक्त भगवान श्याम सुंदर के मुखमंडल और उनकी नशीली आँखों की प्रशंसा करता है। भगवान के नयन इतने करुणामयी और विशाल हैं कि जो भी उन्हें देखता है, वह सुध-बुध खो बैठता है। उनके मस्तक पर सुशोभित मणियों से जड़ा मुकुट और उनके कंधे पर लहराते घुंघराले बाल उनके सौंदर्य में चार चांद लगाते हैं।
द्वितीय अंतरा: भगवान के मुख की आभा सूर्य के समान तेजस्वी है। भक्त कहता है कि ऐसा अलौकिक रूप संपूर्ण ब्रह्मांड में कहीं और देखने को नहीं मिलता। उनकी एक कृपादृष्टि भक्त के जीवन के सभी प्रश्नों और संकटों का समाधान कर देती है।
तृतीय अंतरा: यहाँ श्री श्याम जी के पौराणिक स्वरूप 'तीन बाणधारी' और उनकी 'मोरछड़ी' का वर्णन है। महाभारत काल में बर्बरीक के पास तीन अमोघ बाण थे। आज कलयुग में उनकी मोरछड़ी भक्तों के दुखों को झाड़कर उन्हें सुखी बनाती है। जिसके सिर पर प्रभु अपनी मोरछड़ी घुमा देते हैं, उसका जीवन धन्य हो जाता है।
चतुर्थ अंतरा: खाटू धाम आने वाले हर भक्त को असीम शांति और धीरज मिलता है। प्रभु की मंद-मंद मुस्कान भक्त के जीवन के सभी सांसारिक बंधनों और जंजालों को क्षण भर में काट देती है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
यह भजन केवल एक गीत नहीं है, बल्कि यह भक्त और भगवान के बीच के जीवंत संबंध को दर्शाता है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
- सौंदर्य वर्णन (रूप माधुरी): इसमें भगवान के नयन, मुकुट, घुंघराले बाल और मुखमंडल की चमक का सजीव चित्रण किया गया है, जो भक्त को ध्यान लगाने में मदद करता है।
- मोरछड़ी की महिमा: श्याम बाबा की मोरछड़ी को उनके आशीर्वाद का प्रतीक माना जाता है। भजन में इस बात को रेखांकित किया गया है कि मोरछड़ी का स्पर्श जीवन को निहाल कर देता है।
- शरण्य भाव: यह भजन सिखाता है कि भगवान के दर पर आने मात्र से व्याकुल मन को धीरज और शांति मिलती है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
यद्यपि ईश्वर की आराधना किसी भी समय की जा सकती है, परंतु इस भजन के गायन और श्रवण के लिए विशेष अवसर निम्नलिखित हैं:
- एकादशी और द्वादशी: खाटू श्याम जी की पूजा में एकादशी (विशेषकर शुक्ल पक्ष की एकादशी) का अत्यधिक महत्व है। इस दिन इस भजन को गाने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है।
- संध्या आरती के समय: घर या मंदिर में संध्या पूजन के समय इस भजन को सामूहिक रूप से गाया जा सकता है।
- नियम: भजन गाते समय मन में पूर्ण श्रद्धा, शुद्धता और समर्पण होना चाहिए। हाथ में मोरपंख या मोरछड़ी रखकर कीर्तन करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
यह भजन महाभारत कालीन महान योद्धा और भगवान श्री कृष्ण के वरदान से पूजित श्री खाटू श्याम जी (बर्बरीक) को समर्पित है। बर्बरीक भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र थे। उन्होंने अपनी माता मोरवी को वचन दिया था कि वे युद्ध में हारने वाले पक्ष का साथ देंगे। भगवान श्री कृष्ण ने उनकी दानवीरता और धर्म के प्रति निष्ठा को देखकर उन्हें अपना नाम 'श्याम' दिया और वरदान दिया कि कलयुग में वे इसी नाम से पूजे जाएंगे।
भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background
इस सुंदर भजन के रचनाकार धीरज सक्सेना हैं, जिन्होंने अत्यंत सरल और मर्मस्पर्शी शब्दों का चयन किया है। संगीतकार लवली शर्मा ने इसे एक ऐसी धुन में पिरोया है जो सीधे हृदय को छूती है। दिल्ली की सुप्रसिद्ध भजन गायिका प्रेरणा मित्तल ने अपनी सुमधुर और भावपूर्ण आवाज से इस भजन को जीवंत कर दिया है। यह भजन 'युकी' (Yuki) लेबल के अंतर्गत रिलीज किया गया था और आज यह हर श्याम संकीर्तन का मुख्य हिस्सा बन चुका है।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
इस भजन की भाषा सरल, सुबोध और खड़ी बोली हिंदी है, जिसमें राजस्थानी और ब्रजभाषा का पुट भी महसूस होता है। काव्य शैली में 'अनुप्रास' और 'उपमा' अलंकार का सुंदर प्रयोग हुआ है (जैसे: "चमक तेरे चेहरे की जैसे निकली हर दम धूप है")। इसकी लयबद्धता और ताल ऐसी है कि भक्त स्वतः ही झूमने और ताली बजाने लगते हैं।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
यह भजन हमें निम्नलिखित जीवन मूल्य सिखाता है:
- धैर्य और विश्वास: "हर दिल को धीरज मिलता तेरे दर पे आते ही" - यह पंक्ति हमें सिखाती है कि जीवन में चाहे कितनी भी विकट परिस्थिति हो, ईश्वर पर विश्वास रखने से मन को शांति मिलती है।
- अहंकार का त्याग: भगवान के अलौकिक रूप के सामने समर्पण करने से मनुष्य का अहंकार नष्ट होता है।
- सच्ची प्रसन्नता: सांसारिक सुख क्षणभंगुर हैं, वास्तविक और शाश्वत आनंद केवल ईश्वर के चरणों में ही है।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / वाक्यांश | सरल अर्थ | भक्ति संदर्भ |
|---|---|---|
| मनमोहक | मन को मोह लेने वाला | श्री श्याम जी का अत्यंत सुंदर रूप। |
| नयन कमाल | अद्भुत और सुंदर आँखें | प्रभु के करुणामयी नयन जो भक्तों पर कृपा बरसाते हैं। |
| तीन बाण वाले | तीन अमोघ बाण धारण करने वाले | बर्बरीक का महाभारत कालीन स्वरूप। |
| मोरछड़ी | मोर के पंखों से बनी छड़ी | श्याम बाबा का वह पवित्र यंत्र जिससे वे भक्तों के कष्ट दूर करते हैं। |
| निहाल | कृतार्थ या सुखी होना | प्रभु की कृपा से जीवन का सफल होना। |
| जंजाल | सांसारिक कष्ट और बंधन | माया-मोह के बंधन जिन्हें प्रभु की मुस्कान काट देती है। |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
"श्याम तेरा मनमोहक मुखड़ा, उस पर नैन कमाल..."
हे श्याम सुंदर! आपका मुखड़ा इतना सुंदर है कि वह मन को मोह लेता है। उस पर आपकी सुंदर और विशाल आँखें कमाल ढाती हैं, जो भी उन्हें देखता है, वह आपका ही होकर रह जाता है।
"सिर पे मुकुट ये मणियों वाला, और घुंघराले बाल..."
आपके मस्तक पर मणियों से जड़ा हुआ दिव्य मुकुट सुशोभित है और आपके घुंघराले बाल आपके चेहरे की सुंदरता को और अधिक बढ़ा रहे हैं।
"चमक तेरे चेहरे की जैसे निकली हर दम धूप है..."
आपके चेहरे का तेज ऐसा है मानो साक्षात सूर्य देव की किरणें बिखर रही हों। ऐसा अनुपम रूप हमने आज तक कहीं नहीं देखा।
"नज़र डाल के कर देता है पूरे सभी सवाल..."
आपकी केवल एक कृपादृष्टि ही भक्त के जीवन की सभी उलझनों और प्रश्नों को हल करने के लिए पर्याप्त है।
"तीन बाण वाले तेरी अलग ही निशानी है, मोरछड़ी की तेरी निराली कहानी है..."
हे तीन बाणधारी! आपकी महिमा जगजाहिर है। आपकी मोरछड़ी की कहानी अत्यंत निराली है, जो भक्तों के दुखों को पल भर में दूर कर देती है।
भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
श्याम बाबा की पूजा के समय इस महामंत्र का जाप करना अत्यंत फलदायी माना जाता है:
॥ ॐ श्री श्याम देवाय नमः ॥
॥ ॐ मोर्वी नन्दनाय विद्महे, श्याम देवाय धीमहि, तन्नो बर्बरीकः प्रचोदयात् ॥
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| भजन का नाम | श्याम तेरा मनमोहक मुखड़ा (Waah Tera Kya Kehna) |
| आराध्य देव | श्री खाटू श्याम जी (बर्बरीक) |
| गायिका | प्रेरणा मित्तल (दिल्ली) |
| गीतकार | धीरज सक्सेना |
| संगीतकार | लवली शर्मा |
| भाषा | हिंदी (भक्ति प्रधान) |
| मुख्य रस/भाव | माधुर्य भाव, समर्पण रस |
| उपयुक्त अवसर | श्याम संकीर्तन, एकादशी, द्वादशी, दैनिक पूजा |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: "श्याम तेरा मनमोहक मुखड़ा" भजन के मूल लेखक कौन हैं?
उत्तर: इस भजन के सुंदर और भावपूर्ण शब्द प्रसिद्ध गीतकार धीरज सक्सेना द्वारा लिखे गए हैं।
प्रश्न 2: इस भजन को किसने गाया है और इसका संगीत किसने दिया है?
उत्तर: इस भजन को सुप्रसिद्ध भजन गायिका प्रेरणा मित्तल ने गाया है और इसका मधुर संगीत लवली शर्मा द्वारा तैयार किया गया है।
प्रश्न 3: खाटू श्याम जी को 'तीन बाण धारी' क्यों कहा जाता है?
उत्तर: महाभारत काल में बर्बरीक (खाटू श्याम जी) के पास शिव जी द्वारा दिए गए तीन ऐसे अमोघ बाण थे, जिनसे वे अकेले ही पूरे युद्ध का परिणाम बदल सकते थे। इसलिए उन्हें तीन बाण धारी कहा जाता है।
प्रश्न 4: श्याम बाबा की मोरछड़ी का क्या महत्व है?
उत्तर: मोरछड़ी को श्याम बाबा के आशीर्वाद का साक्षात रूप माना जाता है। मान्यता है कि मोरछड़ी से झाड़ा लगवाने पर भक्तों के शारीरिक, मानसिक और आर्थिक कष्ट दूर हो जाते हैं।
प्रश्न 5: यह भजन किस राग या शैली में गाया गया है?
उत्तर: यह भजन सुगम संगीत और सुमधुर लोक शैली पर आधारित है, जो संकीर्तन के लिए अत्यंत उपयुक्त है।
प्रश्न 6: खाटू श्याम जी की पूजा के लिए कौन सा दिन सर्वश्रेष्ठ माना जाता है?
उत्तर: प्रत्येक माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी और द्वादशी तिथि खाटू श्याम जी की पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है।
प्रश्न 7: क्या इस भजन को घर की दैनिक पूजा में गाया जा सकता है?
उत्तर: हाँ, इस भजन को घर की दैनिक संध्या आरती या सुबह की पूजा के समय अत्यंत श्रद्धा के साथ गाया जा सकता है।
प्रश्न 8: इस भजन का मुख्य आध्यात्मिक संदेश क्या है?
उत्तर: इस भजन का मुख्य संदेश यह है कि भगवान का रूप अत्यंत दयालु है और उनके चरणों में आने वाले हर व्याकुल मन को परम शांति और धीरज प्राप्त होता है।
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह लेख "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत आता है। इस भजन के बोल, भावार्थ और पौराणिक संदर्भों को सनातन धर्म के ग्रंथों, महाभारत की कथाओं और खाटू धाम की स्थानीय परंपराओं के आधार पर सत्यापित कर प्रस्तुत किया गया है। यह भजन भक्तों को ईश्वर के सगुण रूप के प्रति आकर्षित करने और उनके मन में शांति स्थापित करने का एक उत्कृष्ट माध्यम है।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- स्कंद पुराण - कौमारिका खंड (बर्बरीक चरित्र)
- महाभारत - उद्योग पर्व (बर्बरीक की कथा)
- श्री खाटू श्याम मंदिर समिति, खाटू धाम (राजस्थान) की आधिकारिक परंपराएं
संबंधित भजन एवं लेख
यदि आप श्याम बाबा के अन्य भजनों और चालीसा का आनंद लेना चाहते हैं, तो निम्नलिखित लेख अवश्य पढ़ें:
पाठकों के विचार (0)
भक्ति रस चर्चा में भाग लें