Krishna Bhajan

श्री राधा रमण गिरिधारी-गिरिधारी श्याम बनवारी (Shri radha raman giridhaari-giridhaari shyam banvaari Lyrics in Hindi) - Krishna Bhajan - Bhaktilok

86 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
आकार:
कंट्रास्ट:

"श्री राधा रमण गिरिधारी-गिरिधारी श्याम बनवारी" यह भजन भगवान श्री कृष्ण और उनकी आह्लादिनी शक्ति श्री राधा रानी के प्रति अटूट प्रेम और समर्पण का एक अद्भुत संगम है। वैष्णव परंपरा में, राधा-कृष्ण का प्रेम केवल एक युगल का प्रेम नहीं, बल्कि जीवात्मा का परमात्मा के साथ मिलन का प्रतीक है। यह भजन वृंदावन की कुंज गलियों की उस दिव्यता को दर्शाता है जहाँ हर कण में 'राधे-राधे' का नाद गूंजता है। इस भजन को गाते समय भक्त स्वयं को गोपी भाव में अनुभव करता है, जहाँ कृष्ण के 'गिरिधारी' स्वरूप का स्मरण कर मन को शांति और भक्ति का रस प्राप्त होता है। यह भजन विशेष रूप से सत्संग, कीर्तन और एकांत साधना के समय अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

श्री राधा रमण गिरिधारी, गिरिधारी श्याम बनवारी।
श्री राधा रमण गिरिधारी, गिरिधारी श्याम बनवारी॥

वृंदावन के कुंज गलिन में, रची रही रास बिहारी।
श्री राधा रमण गिरिधारी, गिरिधारी श्याम बनवारी॥

मोर मुकुट सिर ऊपर सोहे, कुंडल की छवि न्यारी।
श्री राधा रमण गिरिधारी, गिरिधारी श्याम बनवारी॥

अधरन पे मुरली बाजे, सुध-बुध सब बिसारी।
श्री राधा रमण गिरिधारी, गिरिधारी श्याम बनवारी॥

राधा रानी के संग सोहे, युगल छवि बलिहारी।
श्री राधा रमण गिरिधारी, गिरिधारी श्याम बनवारी॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन की प्रत्येक पंक्ति में भगवान कृष्ण के विभिन्न स्वरूपों का वर्णन है। 'श्री राधा रमण' का अर्थ है जो राधा रानी को आनंद प्रदान करते हैं। 'गिरिधारी' उस लीला को स्मरण कराता है जब प्रभु ने गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर धारण कर ब्रजवासियों की रक्षा की थी। भजन का भाव यह है कि भक्त अपने आराध्य के उस रूप का ध्यान कर रहा है जो वृंदावन की कुंज गलियों में रास रचाते हैं। जब भक्त 'गिरिधारी श्याम बनवारी' का उच्चारण करता है, तो वह सांसारिक बंधनों से मुक्त होकर कृष्ण के प्रेम में लीन हो जाता है। यह भजन हमें सिखाता है कि कृष्ण की प्राप्ति का मार्ग राधा रानी की सेवा और उनके नाम के स्मरण से होकर ही जाता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • भक्ति भाव: यह भजन 'माधुर्य भाव' की भक्ति को समर्पित है।
  • सांस्कृतिक महत्व: ब्रज मंडल में इस प्रकार के संकीर्तन का विशेष स्थान है।
  • मानसिक शांति: इसके नियमित श्रवण से मन की चंचलता दूर होती है और एकाग्रता बढ़ती है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को ब्रह्म मुहूर्त में या संध्या काल में दीपक जलाकर गाना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसे कीर्तन की शैली में ढोलक और मंजीरे के साथ गाने से वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द सरल अर्थ
राधा रमण राधा रानी को आनंदित करने वाले
गिरिधारी गोवर्धन पर्वत को धारण करने वाले
कुंज गलिन वृंदावन की लताओं से घिरी गलियां
अधरन होंठों पर

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम श्री राधा रमण गिरिधारी
आराध्य श्री राधा-कृष्ण
भाषा ब्रज-मिश्रित हिंदी
भाव भक्ति एवं माधुर्य

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस भजन को गाने का सबसे अच्छा समय क्या है?

इस भजन को आप किसी भी समय गा सकते हैं, लेकिन संध्या आरती के समय इसका प्रभाव अधिक होता है।

क्या यह भजन बच्चों को सिखाया जा सकता है?

जी हाँ, यह भजन सरल और मधुर है, जो बच्चों में भक्ति संस्कार डालने के लिए उत्तम है।

'गिरिधारी' नाम का अर्थ क्या है?

गिरिधारी का अर्थ है 'गिरि' (पर्वत) को 'धारण' करने वाले, जो भगवान कृष्ण के गोवर्धन लीला से संबंधित है।

क्या इस भजन के लिए किसी विशेष वाद्य यंत्र की आवश्यकता है?

नहीं, इसे आप बिना किसी वाद्य यंत्र के भी भावपूर्ण तरीके से गा सकते हैं।

राधा-कृष्ण भजन सुनने के क्या लाभ हैं?

इससे मन को शांति मिलती है और भक्ति भाव जागृत होता है।

क्या यह भजन एकादशी पर गाया जा सकता है?

एकादशी के दिन भगवान कृष्ण के भजनों का कीर्तन करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।

क्या इस भजन का कोई विशेष नियम है?

भजन को शुद्धता और पूर्ण श्रद्धा के साथ गाना ही इसका मुख्य नियम है।

मुझे और अधिक कृष्ण भजन कहाँ मिलेंगे?

आप हमारी वेबसाइट पर कृष्ण भजन श्रेणी में अन्य भजनों का आनंद ले सकते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री। यह भजन पारंपरिक वैष्णव संकीर्तन परंपरा पर आधारित है।

संबंधित भजन एवं लेख

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!