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सजा है श्री राम दरबार (Saja hai shri ram darbaar Lyrics in Hindi) - Shri Ram Bhajan

प्रभु श्री राम के दिव्य दरबार का वंदन करें। पढ़ें 'सजा है श्री राम दरबार' भजन लिरिक्स हिंदी में अर्थ व भावार्थ सहित और पाएं मानसिक शांति।

सनातन धर्म में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री रामचंद्र जी की आराधना का विशेष महत्व है। "सजा है श्री राम दरबार" (Saja hai shri ram darbaar Lyrics in Hindi) एक अत्यंत लोकप्रिय और हृदयस्पर्शी राम भजन है, जो भक्त को सीधे साकेत धाम की पावन चेतना और प्रभु राम के दिव्य दरबार के दर्शन कराता है। यह भजन मुख्य रूप से समर्पण, विनय और दास्य भाव (सेवक भाव) से ओत-प्रोत है। जब कोई भक्त इस भजन का गायन या श्रवण करता है, तो उसके अंतःकरण में प्रभु राम, माता सीता, लक्ष्मण जी, भरत जी, शत्रुघ्न जी और परम भक्त हनुमान जी की छवि जीवंत हो उठती है। इस भजन का गायन विशेष रूप से रामनवमी, दीपावली, सुंदरकांड पाठ, हनुमान जन्मोत्सव और दैनिक संध्या आरती के समय किया जाता है। यह भजन न केवल मन को शांति प्रदान करता है, बल्कि साधक के भीतर धर्म, कर्तव्यपरायणता और निस्वार्थ सेवा की भावना को जाग्रत करता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

॥ सजा है श्री राम दरबार ॥

कोरस (मुखड़ा):
सजा है श्री राम दरबार, बैठे हैं राजा राम सरकार।
सजा है श्री राम दरबार, बैठे हैं राजा राम सरकार।
जनक दुलारी मैया जानकी, राजत अवध के द्वार।
सजा है श्री राम दरबार, बैठे हैं राजा राम सरकार॥

अंतरा 1:
लखन लाल चंवर ढुलावे, भरत शत्रुघ्न सेवा बजावे।
लखन लाल चंवर ढुलावे, भरत शत्रुघ्न सेवा बजावे।
अंजनी लाला पवन कुमारा, चरणों में शीश झुकावे।
कर रहे जय-जयकार, बैठे हैं राजा राम सरकार।
सजा है श्री राम दरबार, बैठे हैं राजा राम सरकार॥

अंतरा 2:
कोटि सूर्य सम तेज विराजे, मुकुट शीश पर सुंदर साजे।
कोटि सूर्य सम तेज विराजे, मुकुट शीश पर सुंदर साजे।
गल पुष्पों की माला सोहे, मंद-मंद प्रभु मुस्कावे।
करुणा की बहे धार, बैठे हैं राजा राम सरकार।
सजा है श्री राम दरबार, बैठे हैं राजा राम सरकार॥

अंतरा 3:
ऋषि-मुनि सब स्तुति गावे, देव लोक से फूल बरसावे।
ऋषि-मुनि सब स्तुति गावे, देव लोक से फूल बरसावे।
शरण पड़े जो शरण तिहारी, भवसागर से पार लगावे।
करते हैं बेड़ा पार, बैठे हैं राजा राम सरकार।
सजा है श्री राम दरबार, बैठे हैं राजा राम सरकार॥

अंतरा 4:
राम नाम की महिमा न्यारी, गाती है यह दुनिया सारी।
राम नाम की महिमा न्यारी, गाती है यह दुनिया सारी।
जो भी आए शरण तिहारी, संकट हरते अवध बिहारी।
महिमा अपरम्पार, बैठे हैं राजा राम सरकार।
सजा है श्री राम दरबार, बैठे हैं राजा राम सरकार॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस पावन भजन का मूल भाव भगवान श्री राम के दिव्य दरबार की महिमा और उनके शरणागत-वत्सल रूप का वर्णन करना है। भजन की शुरुआत में भक्त कहता है कि अयोध्या धाम में मर्यादा पुरुषोत्तम राजा राम का भव्य दरबार सजा हुआ है, जहां वे स्वयं सिंहासन पर विराजमान हैं। उनके साथ जनक नंदिनी माता सीता (जानकी जी) सुशोभित हो रही हैं। यह दृश्य इतना मनमोहक है कि जो भी इसे देखता है, वह अपनी सुध-बुध खो बैठता है।

भजन के अंतराओं में राम दरबार के अन्य सदस्यों की सेवा भावना का सुंदर चित्रण है। लक्ष्मण जी प्रभु पर चंवर ढुला रहे हैं, भरत और शत्रुघ्न जी सेवा में तत्पर खड़े हैं, और पवनपुत्र हनुमान जी प्रभु के चरणों में अपना शीश झुकाए बैठे हैं। यह दृश्य आदर्श परिवार, भ्रातृ प्रेम और अनन्य भक्ति का सर्वोत्तम उदाहरण प्रस्तुत करता है। प्रभु राम का तेज करोड़ों सूर्यों के समान है, फिर भी उनके चेहरे पर करुणा और मंद मुस्कान है, जो भक्तों को अभय प्रदान करती है। जो भी जीव इस दरबार की शरण में आता है, प्रभु राम उसका बेड़ा पार कर देते हैं और उसे भवसागर से मुक्ति दिलाते हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन केवल एक संगीतमय रचना नहीं है, बल्कि यह सनातन संस्कृति के उच्चतम आदर्शों का संकलन है। इस भजन की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • आदर्श परिवार का चित्रण: यह भजन हमें सिखाता है कि एक आदर्श परिवार कैसा होना चाहिए, जहां भाइयों में प्रेम हो और बड़ों के प्रति आदर का भाव हो।
  • दास्य भक्ति की पराकाष्ठा: हनुमान जी का प्रभु के चरणों में बैठना निस्वार्थ सेवा और पूर्ण समर्पण को दर्शाता है।
  • करुणा और अभयदान: प्रभु राम का शांत और मुस्कुराता हुआ रूप यह संदेश देता है कि वे अपने भक्तों के सभी दुखों को हरने वाले हैं।
  • मानसिक शांति: इस भजन के नियमित श्रवण से मन की चंचलता समाप्त होती है और अंतःकरण में सात्विक विचारों का उदय होता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यद्यपि ईश्वर की आराधना किसी भी समय की जा सकती है, परंतु इस भजन के गायन और श्रवण के लिए कुछ विशेष समय और विधियां अत्यधिक फलदायी मानी गई हैं:

  • शुभ समय: इस भजन का गायन सुबह की पूजा के समय या संध्या काल की आरती के बाद करना सर्वोत्तम माना जाता है।
  • विशेष अवसर: श्री राम रक्षा स्तोत्र के पाठ के बाद, रामनवमी, दीपावली, सुंदरकांड के आयोजन या किसी भी धार्मिक अनुष्ठान के समय इस भजन को सामूहिक रूप से गाना चाहिए।
  • गायन विधि: भजन गाते समय मन में राम दरबार की छवि का ध्यान करना चाहिए। हाथों से ताली बजाकर और ढोलक-मंजीरे की थाप पर सामूहिक रूप से गाने से वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन मुख्य रूप से भगवान श्री रामचंद्र जी को समर्पित है, जो भगवान विष्णु के सातवें अवतार हैं। उनके साथ माता सीता (लक्ष्मी जी का अवतार), लक्ष्मण जी (शेषनाग के अवतार), भरत और शत्रुघ्न जी (शंख और चक्र के अवतार) तथा भगवान शिव के रुद्रावतार हनुमान जी की वंदना की गई है। गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरितमानस में जिस राम राज्य की परिकल्पना की थी, यह भजन उसी राम राज्य और राम दरबार की सजीव झांकी प्रस्तुत करता है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

यह भजन पारंपरिक लोक धुनों और शास्त्रीय संगीत के सम्मिश्रण पर आधारित है। इसकी रचना अवध की पावन भूमि की लोक संस्कृति से प्रेरित है। सदियों से भारत के मंदिरों और घरों में राम दरबार की मूर्तियां स्थापित की जाती रही हैं। इस भजन की पृष्ठभूमि भक्तों को उसी विग्रह (मूर्ति) के सामने बैठकर ध्यान लगाने और प्रभु की लीलाओं का रसपान करने के लिए प्रेरित करती है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल, सुबोध और प्रवाहमयी खड़ी बोली हिंदी है, जिसमें अवधी और ब्रजभाषा के शब्दों का सुंदर पुट देखने को मिलता है। जैसे "राजत", "सोहे", "बजावे" आदि शब्द पारंपरिक भक्ति साहित्य की याद दिलाते हैं। इसकी काव्य शैली गेय (गाने योग्य) है, जिसमें अनुप्रास और रूपक अलंकारों का सहज प्रयोग हुआ है। इसकी लय इतनी सरल है कि बच्चे से लेकर वृद्ध तक इसे आसानी से याद कर गा सकते हैं।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें कई महत्वपूर्ण जीवन मूल्य सिखाता है:

  • सेवा भाव (Duty & Service): लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न की तरह हमें भी अपने कर्तव्यों का पालन बिना किसी स्वार्थ के करना चाहिए।
  • शरणागति (Surrender): जब हम अपनी चिंताओं को भगवान के चरणों में छोड़ देते हैं, तो वे हमारे जीवन का भार स्वयं उठा लेते हैं।
  • अहंकार का त्याग: हनुमान जी जैसे महाबली भी प्रभु के चरणों में शीश झुकाते हैं, जो हमें सिखाता है कि शक्ति और ज्ञान पाकर भी मनुष्य को विनम्र रहना चाहिए।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
राम दरबार श्री राम का दिव्य न्यायालय / सभा जहां न्याय, धर्म और करुणा का वास है।
चंवर ढुलावे पंखे से हवा करना प्रभु की सेवा और आदर का प्रतीक।
कोटि सूर्य करोड़ों सूर्य प्रभु के असीम तेज और ज्ञान का सूचक।
भवसागर संसार रूपी समुद्र जन्म और मृत्यु का चक्र जिससे मुक्ति पानी है।
अवध बिहारी अयोध्या में विहार करने वाले भगवान श्री राम का एक प्रिय नाम।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"सजा है श्री राम दरबार, बैठे हैं राजा राम सरकार।"
अयोध्या धाम में प्रभु श्री राम का दिव्य दरबार सजा हुआ है, जहां वे राजाधिराज के रूप में विराजमान हैं।

"जनक दुलारी मैया जानकी, राजत अवध के द्वार।"
राजा जनक की पुत्री माता सीता प्रभु राम के वामांग (बाईं ओर) सुशोभित हो रही हैं, जो संपूर्ण सृष्टि की माता हैं।

"लखन लाल चंवर ढुलावे, भरत शत्रुघ्न सेवा बजावे।"
लक्ष्मण जी अपने हाथों से चंवर डुलाकर प्रभु की सेवा कर रहे हैं, जबकि भरत और शत्रुघ्न जी आज्ञाकारी सेवकों की भांति खड़े हैं।

"अंजनी लाला पवन कुमारा, चरणों में शीश झुकावे।"
पवनपुत्र हनुमान जी, जो अतुलित बल के धाम हैं, वे भी अत्यंत विनम्रतापूर्वक प्रभु के चरणों में शीश नवाए बैठे हैं।

"कोटि सूर्य सम तेज विराजे, मुकुट शीश पर सुंदर साजे।"
प्रभु राम के मुखमंडल पर करोड़ों सूर्यों का तेज है और उनके मस्तक पर राजा राम का दिव्य मुकुट सुशोभित है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

राम दरबार के ध्यान के समय इस प्रसिद्ध श्लोक का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है:

"रामाय रामभद्राय रामचंद्राय वेधसे।
रघुनाथाय नाथाय सीतायाः पतये नमः॥"

अर्थ: भगवान राम, रामभद्र, रामचंद्र, विधाता, रघुनाथ, और माता सीता के स्वामी प्रभु राम को मैं बारंबार नमस्कार करता हूँ।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम सजा है श्री राम दरबार (Saja hai shri ram darbaar)
मुख्य देवता भगवान श्री राम, माता सीता, लक्ष्मण जी, हनुमान जी
भक्ति का भाव दास्य भाव, शरणागति, समर्पण
भाषा हिंदी (अवधी व ब्रज के प्रभाव सहित)
उपयुक्त अवसर रामनवमी, सुंदरकांड, दीपावली, दैनिक संध्या आरती
मुख्य संदेश पारिवारिक एकता, प्रभु भक्ति, निस्वार्थ सेवा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस भजन का मुख्य उद्देश्य भगवान श्री राम के दिव्य दरबार का स्मरण करना और भक्तों के मन में समर्पण, सेवा और भक्ति भाव को जाग्रत करना है।

राम दरबार में मुख्य रूप से भगवान श्री राम, माता सीता, लक्ष्मण जी, भरत जी, शत्रुघ्न जी और उनके परम भक्त हनुमान जी शामिल हैं।

इस भजन को सुबह की पूजा के समय या शाम की आरती के बाद गाना सबसे उत्तम माना जाता है। विशेषकर मंगलवार और शनिवार को इसका विशेष महत्व है।

हाँ, इस भजन की मधुर लय और सकारात्मक शब्द मन के तनाव को दूर करते हैं और मानसिक शांति प्रदान करते हैं।

राम दरबार की पूजा करने से घर में सुख, शांति, समृद्धि और पारिवारिक एकता बनी रहती है। यह जीवन के सभी संकटों को दूर करने में सहायक है।

इस भजन में हनुमान जी को प्रभु राम के चरणों में शीश झुकाए हुए दिखाया गया है, जो उनकी अनन्य भक्ति और दास्य भाव को प्रदर्शित करता है।

हाँ, इसकी भाषा बहुत सरल है। बच्चों को यह भजन सिखाने से उनमें अच्छे संस्कार, बड़ों के प्रति आदर और धार्मिक रुचि का विकास होता है।

शास्त्रों के अनुसार, कलयुग में राम नाम का जाप ही मोक्ष प्राप्ति का सबसे सरल और सुलभ साधन है। यह सभी पापों का नाश करता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख "सजा है श्री राम दरबार" भजन के आध्यात्मिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक पहलुओं का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है। इस भजन के माध्यम से भक्त न केवल प्रभु की स्तुति करते हैं, बल्कि जीवन जीने के उत्तम आदर्शों को भी सीखते हैं। यह सामग्री पूरी तरह से संदर्भ एवं व्याख्या सहित सामग्री के रूप में तैयार की गई है, ताकि पाठकों को प्रामाणिक और उपयोगी जानकारी मिल सके।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण: भगवान राम के चरित्र और दरबार का मूल वर्णन।
  • श्रीरामचरितमानस (गोस्वामी तुलसीदास): अवध दरबार और भ्रातृ प्रेम का प्रसंग।
  • सनातन भजन परंपरा: पारंपरिक लोक भजन संग्रह और मौखिक इतिहास।

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 24 Oct 2026

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