आज का पंचांग (Columbus) | सूर्योदय: ०४:३१ PM | सूर्यास्त: ०५:३० AM
Punjabi Devi Bhajan

सब सुखियन की धानी सुनो मैया आदि भवानी (Sab Sukhiyan Ki Dhani Suno Maiya Aadi Bhavani Lyrics in Hindi) - Devi Bhajan - Bhaktilok

210 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
आकार:
कंट्रास्ट:

आदि भवानी की कृपा: सुखों का संगम

माँ दुर्गा की इस भजन में भावित होकर, सुख-शांति की प्राप्ति के लिए भक्त झुकते हैं।

सब सुखियन की धानी सुनो मैया आदि भवानी सब सुखियन की धानी सुनो मैया आदि भवानी।। सब सुखियन की धानी सुनो मैया आदि भवानी सब सुखियन की धानी सुनो मैया आदि भवानी।। दुर्गा अम्बे काली कहत हो दुर्गा अम्बे काली कहत हो दुर्गा अम्बे काली कहत हो दुर्गा अम्बे काली कहत हो नवरात्रि महारानी सुनो मैया आदि भवानी सब सुखियन की धानी सुनो मैया आदि भवानी।। विनती कर फ़रियाद लगावे विनती कर फ़रियाद लगावे विनती कर फ़रियाद लगावे विनती कर फ़रियाद लगावे घट घट आप समानी सुनो मैया आदि भवानी सब सुखियन की धानी सुनो मैया आदि भवानी ब्रह्मा विष्णु तुम खों ध्यावे ब्रह्मा विष्णु तुम खों ध्यावे ब्रह्मा विष्णु तुम खों ध्यावे ब्रह्मा विष्णु तुम खों ध्यावे आदि शक्ति महारानी सुनो मैया आदि भवानी सब सुखियन की धानी सुनो मैया आदि भवानी।। महिषासुर दलन हारी मैया महिषासुर दलन हारी मैया महिषासुर दलन हारी मैया महिषासुर दलन हारी मैया अष्ट भुजी महारानी सुनो मैया आदि भवानी सब सुखियन की खानी सुनो मैया आदि भवानी।। परदेसी तोरे चरण डरो है परदेसी तोरे चरण डरो है परदेसी तोरे चरण डरो है परदेसी तोरे चरण डरो है कर दो मीठी वाणी सुनो मैया आदि भवानी कर दो मीठी वाणी सुनो मैया आदि भवानी।। सब सुखियन की धानी सुनो मैया आदि भवानी सब सुखियन की धानी सुनो मैया आदि भवानी।।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन 'सब सुखियन की धानी सुनो मैया आदि भवानी' में देवी को सुखों की अधिष्ठात्री के रूप में व्यक्त किया गया है। यह भजन देवी दुर्गा, काली और अष्टभुजी देवी की महिमा का गान करता है। भक्त माँ से प्रार्थना कर रहे हैं कि वे उनके सब दुखों का निवारण करें और उन्हें सुख और समृद्धि प्रदान करें। 'विनती कर फ़रियाद लगावे' में भक्तों की मनोकामनाएँ स्पष्ट होती हैं, जो उन्हें सम्पूर्ण रूप से देवी पर निर्भर होने के लिए प्रेरित करती हैं। यहाँ 'घट घट आप समानी' का आशय है कि देवी हर एक जीव में उपस्थित हैं और वह अपने भक्तों की हर अवस्था में सहायता करती हैं। इस प्रकार, भक्ति का एक गहरा भाव इस भजन में छिपा है, जिसमें भक्त देवी की शक्ति को समर्पित कर रहे हैं।

भजन के भावार्थ को समझते हैं तो यह दृष्टिगत होता है कि भक्त माँ को अंतरात्मा से पुकारते हैं, क्योंकि उनमें स्वयं की मौलिकता का आश्रय हैं। 'महिषासुर दलन हारी' के माध्यम से माँ की शक्ति और उसकी विनाशकता का भी उल्लेख किया गया है। माँ दुर्गा का यह पर्व, नवरात्रि, भक्तों के लिए विशेष रूप से शुभ समय होता है। जिससे उन्हें शक्ति, साहस और विश्वास मिलता है। यह भजन भक्तों को अपने कष्टों को भूलकर संपूर्ण समर्पण के भाव से देवी की ओर आकर्षित करता है। इसलिए, इस भजन की भक्ति में एक गहरी प्रेमभावना और आशा का समावेश है, जो मनुष्य को जीवन की कठिनाइयों में भी साहस प्रदान करती है।

इस भजन में देवी की भक्ति का मार्ग और उसकी महिमा का गुणन करते हुए, भक्ति मार्ग के सिद्धांत को भी उजागर किया गया है। भक्त इस भजन को गाकर देवी के प्रति अपनी सच्ची श्रद्धा का परिचय देते हैं और अपने मन, वचन और क्रिया से अंतिम रूप से उन्हें पूजते हैं। 'ब्रह्मा विष्णु तुम खों ध्यावे' में सभी देवी-देवताओं में माँ दुर्गा की सर्वोच्चता से दर्शित होता है। यह भजन साधना के माध्यम से भक्तों में एकत्रित होती हुई भक्ति की लहर को भी प्रस्तुत करता है। इस प्रकार, यह भक्ति मार्ग की एक मिशाल है, जो साधकों को न केवल आत्मिक शांति प्रदान करती है, बल्कि उन्हें साधना के प्रति भी प्रेरित करती है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का महत्व वैदिक और पुराणिक परंपराओं में गहरा है। देवी दुर्गा का महाकाल से युद्ध, 'महिषासुर मर्दिनी' के रूप में जाना जाता है। यह कथा देवी भागवत, देवी पुराण में भी महत्वपूर्ण स्थान रखती है, जिससे भक्तों को देवी की महत्ता और कल्याणकारी शमर्था के बारे में जागरूक किया जाता है। भजन में नवरात्रि की महत्ता को भी समझाया गया है, जो माँ दुर्गा की उपासना का खास पर्व है। इस भजन द्वारा भक्तजन देवी के प्रति अपनी श्रद्धा और भक्ति प्रकट करते हैं, जिससे वे आत्मिक विकास की ओर अग्रसर होते हैं।

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। यह भजन 'सब सुखियन की धानी सुनो मैया आदि भवानी' मानसिक तनाव को कम करने और सकारात्मक ऊर्जा को फैलाने में मदद करता है। नियमित रूप से इस भजन का गायन करने से भक्त की आस्था में वृद्धि होती है, जिससे वह जीवन के दुःख-सुख का सामना अधिक साहस के साथ कर सकता है। यह गुणात्मक रूप से आध्यात्मिक अनुभव को विकसित करता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का गायन सुबह या शाम को करना सर्वोत्तम रहता है। पूजा करते समय एक दीपक जलाएँ, पुष्प अर्पित करें और मन एकाग्रता के साथ इस भजन का जाप करें। मानसिक स्थिति का ध्यान रखते हुए प्रेम और श्रद्धा के साथ देवी की आराधना करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

यह भजन किस देवी को समर्पित है?

यह भजन देवी दुर्गा को समर्पित है, जो कि शक्ति, साहस और विजय की प्रतीक मानी जाती हैं।

क्या इस भजन का गायन अच्छे स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है?

हाँ, इस भजन का नियमित गायन मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। इससे सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।

कब और कैसे इस भजन का जाप करना चाहिए?

इस भजन का जाप सुबह या शाम को करना चाहिए, ध्यान और श्रद्धा के साथ देवी के चरणों में।

meta_description'

'इस भजन में माँ दुर्गा की महिमा और भक्ति को दर्शाया गया है, जो भक्तों हेतु सुख-शांति का स्रोत है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 03 Sep 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!