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नवग्रह पीड़ाहर स्तोत्र (Navagraha Peeda Parihara Stotram in Hindi) - नवग्रह पीड़ा परिहार स्तोत्रम् Navagraha Peeda Parihara Stotram - Bhaktilok

117 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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नवग्रह पीड़ा से मुक्ति का स्तोत्र

नवग्रह पीढ़ाओं से राहत पाने के लिए इस स्तोत्र का जाप करें और दिव्य कृपा प्राप्त करें।

नवग्रह पीडाहर स्तोत्र 1. ॐ सूर्याय नम: 2. ॐ चन्द्राय नम: 3. ॐ गुरुवे नम: 4. ॐ ब्रह्मदेवाय नम: 5. ॐ बुधाय नम: 6. ॐ शुक्राय नम: 7. ॐ शनि देवाय नम: 8. ॐ राहु देवाय नम: 9. ॐ केतवे नम: नवग्रह पीड़ा परिहार स्तोत्र, देवताओं के समक्ष अनुग्रह लिए एक गूढ़ मंत्र है। यह नवग्रहों की पीड़ा को दूर करने एवं ईश्वर की कृपा प्राप्त करने का माध्यम है।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

नवग्रह पीड़ा परिहार स्तोत्र में सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु के प्रति प्रकट की गई भक्ति महत्वपूर्ण है। इसमें प्रत्येक ग्रह का नाम लेकर उनके प्रति आस्था, श्रद्धा और सम्मान प्रकट किया गया है। जैसे कि ‘ॐ सूर्याय नम:’ में सूर्य देव को प्रणाम किया जा रहा है, जिससे कि वे अपनी कृपा से सभी बुराइयों और संकटों को दूर करें। यह स्तोत्र स्पष्ट करता है कि मानव जीवन में ग्रहों का बड़ा प्रभाव होता है और श्रद्धा पूर्वक इनमें से प्रत्येक का स्मरण एवं पूजा, संकटों को दूर कर सकती है। देवताओं का मार्गदर्शन और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए हम इन मंत्रों को उच्चारण करते हैं, जो विशेष रूप से मंडलित होते हैं और प्रभावित करते हैं।

भावार्थ की दृष्टि से यह स्तोत्र व्यक्तिगत मोक्ष और शांति की साधना के लिए भी महत्वपूर्ण है। यह दिखाता है कि किस प्रकार भक्त अपनी भावनाओं और चिंताओं को ग्रहों की शक्तियों में समर्पित कर सकता है। जब भक्त देवताओं की स्मृति में इस स्तोत्र का जाप करता है, तब उसके द्वार पर दिव्य शक्तियाँ जाग्रत होती हैं, जो उनके अध्‍यात्मिक और भौतिक जीवन में सुधार लाती हैं। नवग्रहों को उचित रूप से समझना और उनके प्रति सच्चे मन से प्रार्थना करना, व्यक्ति में एक आत्मिक संतुलन और शांति लाता है। यह केवल ग्रहों की कृपा नहीं है, बल्कि आंतरिक शक्ति को जागृत करने की प्रक्रिया भी है।

नवग्रह पिड़ा परिहार स्तोत्र के द्वारा भक्ति मार्ग को समझा जा सकता है, जिसमें भक्तिपूर्ण गहरी महसूस होती है। यह बताता है कि किस प्रकार परमेश्वर की उपासना में समर्पण के साथ ग्रहों के प्रति विनम्रतापूर्वक भक्ति की जानी चाहिए। भक्त अपनी आस्था के साथ सर्वोत्तम परिणाम प्राप्त करने के लिए देवताओं से प्रार्थना करता है। यह स्तोत्र केवल ग्रहों की पीड़ा को दूर करने के लिए नहीं है, बल्कि यह आत्मा के स्तर पर भी विकास की एक प्रक्रिया है। इस प्रकार की साधना व्यक्ति के जीवन में सच्चे सुख और आनंद की प्राप्ति में सहायी होती है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह स्तोत्र पुराणों में वर्णित नवग्रहों के विद्या और उनके प्रभाव को बताता है। देवी-देवताओं और ग्रहों का महत्वपूर्ण स्थान होता है, और इन्ही के माध्यम से हम अपने जीवन में संतुलन बना सकते हैं। यह स्तोत्र विशेष रूप से चंद्रमा और सूर्य की कृपा प्राप्त करने के लिए प्रभावी माना जाता है, क्योंकि ये दोनों ग्रह सभी प्रकार की ऊर्जा और संबंधों के प्रतीक हैं। इससे मानव जीवन की जटिलताओं को समझने और समाधान खोजने में सहायता मिलती है।

प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें। इस स्तोत्र का जाप करने से व्यक्ति के जीवन में मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक शांति आती है। नवग्रहों की कृपा से साधक के सभी दुख-दर्द और संकट दूर होते हैं। मानसिक स्थिरता और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

नवग्रह पीड़ा परिहार स्तोत्र का जाप सुबह या शाम के समय करना उत्तम होता है। इस दौरान एक पवित्र स्थान पर बैठकर, स्वच्छ वस्त्र पहनने पर ध्यान केंद्रित करें। एक दीया जलाना और देवी-देवताओं को पुष्पांजलि अर्पित करना उचित रहेगा। सही मनोदशा से श्रद्धा और भक्ति के साथ इस स्तोत्र का पाठ करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

नवग्रह पीड़ा परिहार स्तोत्र का मुख्य उद्देश्य क्या है?

इस स्तोत्र का मुख्य उद्देश्य नवग्रहों की पीड़ा को दूर करना और ईश्वर की कृपा प्राप्त करना है, जिससे जीवन में सकारात्मकता और सुख की प्राप्ति हो।

क्या इस स्तोत्र का जाप केवल पूजा के दौरान करना चाहिए?

नवग्रह पीड़ा परihar स्तोत्र का जाप न केवल पूजायों में, बल्कि दैनिक जीवन में भी संकटों से बचने और मानसिक शांति प्राप्त करने के लिए किया जा सकता है।

क्या यह स्तोत्र केवल हिन्दू भक्तों के लिए है?

हालांकि यह स्तोत्र मुख्यतः हिन्दू धर्म से संबंधित है, लेकिन इसका लाभ सभी व्यक्ति ग्रहों के प्रभाव को समझने और संतुलन प्राप्त करने के लिए ले सकते हैं।

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“नवग्रह पीड़ा परिहार स्तोत्र से ग्रहों की कृपा प्राप्त कर मानसिक शांति और संकटों से मुक्ति की साधना करें।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 31 Aug 2026

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