"मेरे मन तू भजता जा नारायण हरी हरी" एक अत्यंत ही पावन और हृदयस्पर्शी भजन है, जो भगवान विष्णु के नारायण स्वरूप के प्रति अनन्य भक्ति और समर्पण को समर्पित है। यह भजन साधक के मन को सांसारिक मोह-माया से हटाकर परमात्मा के चरणों में लीन करने का एक दिव्य माध्यम है। नारायण, जो समस्त चराचर जगत के पालनहार हैं, उनके नाम का संकीर्तन न केवल मन को शांति प्रदान करता है, बल्कि आत्मा को शुद्ध कर मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर करता है। इस भजन में निहित भाव 'शरणागति' का है, जहाँ भक्त अपने मन को निरंतर हरि नाम के सुमिरन में लगाने का संकल्प लेता है। चाहे सुबह की प्रार्थना हो या संध्याकालीन सत्संग, यह भजन भक्तों के हृदय में भक्ति का संचार करने के लिए अत्यंत उपयुक्त है।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
मेरे मन तू भजता जा नारायण हरी हरी,
तेरे चरणों में लगा दूँ सारा संसार हरी हरी।
सुबह शाम तेरा ही नाम लिया करूँ,
सुना तेरा गुणगान करके तुझमें ही खो जाऊँ।
मेरे मन तू भजता जा नारायण हरी हरी,
तेरे चरणों में लगा दूँ सारा संसार हरी हरी।
तू संग प्राणों की रेशमी धागा हरी हरी,
तू संग प्राणों की रेशमी धागा हरी हरी।
हे गोविन्द हे गोपाल हे दामोदर हरी हरी,
हे गोविन्द हे गोपाल हे दामोदर हरी हरी।
सुन ले ब्रजवासियों की पुकार हरी हरी,
सुन ले ब्रजवासियों की पुकार हरी हरी।
नाथ सुन हमारी अरज़ मान हरी हरी,
नाथ सुन हमारी अरज़ मान हरी हरी।
भक्ति में तू रंग ले भवरंग हरी हरी,
भक्ति में तू रंग ले भवरंग हरी हरी।
नींद चुरा लेने वाले कान्हा हरी हरी,
नींद चुरा लेने वाले कान्हा हरी हरी।
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
इस भजन का मूल भाव 'अनन्य भक्ति' है। भक्त अपने मन को संबोधित करते हुए कहता है कि हे मन! तू व्यर्थ की चिंताओं को छोड़कर निरंतर नारायण का नाम जप। जब मन भगवान के नाम में रम जाता है, तो यह संसार भी उनके चरणों में समर्पित प्रतीत होने लगता है। "तेरे चरणों में लगा दूँ सारा संसार" का अर्थ है कि भक्त अपनी समस्त लौकिक उपलब्धियों और संबंधों को ईश्वर की सेवा में अर्पित कर देता है।
भजन की पंक्तियाँ "तू संग प्राणों की रेशमी धागा" यह दर्शाती हैं कि ईश्वर और भक्त का संबंध अत्यंत कोमल, अटूट और प्रेमपूर्ण है। जिस प्रकार रेशम का धागा मजबूत और सुंदर होता है, उसी प्रकार प्रभु के साथ जुड़ाव जीवन को अर्थ देता है। आगे चलकर भक्त गोविन्द, गोपाल और दामोदर जैसे नामों का स्मरण कर प्रभु के लीला-पुरुषोत्तम स्वरूप का आह्वान करता है। अंत में, "नींद चुरा लेने वाले कान्हा" कहकर भक्त अपनी व्याकुलता और प्रभु के प्रति अपने गहरे प्रेम को प्रकट करता है, जो उसे संसार के आकर्षणों से मुक्त कर प्रभु की ओर खींचता है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
- नारायण भक्ति: यह भजन भगवान विष्णु के नारायण स्वरूप की महिमा का गान करता है।
- मानसिक शांति: निरंतर नाम जप से मन की चंचलता समाप्त होती है और एकाग्रता बढ़ती है।
- शरणागति का भाव: यह भजन भक्त को पूर्णतः ईश्वर पर निर्भर होने की प्रेरणा देता है।
- सात्विक वातावरण: इसके गायन से घर और मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
इस भजन को किसी भी समय गाया जा सकता है, परंतु ब्रह्म मुहूर्त (प्रातःकाल) और संध्याकाल के समय इसका प्रभाव सर्वाधिक होता है। इसे आप अपनी दैनिक पूजा, मंदिर दर्शन, या सामूहिक सत्संग के दौरान गा सकते हैं। गायन करते समय मन में पूर्ण श्रद्धा और एकाग्रता होनी चाहिए। यदि संभव हो, तो तुलसी की माला धारण कर या भगवान विष्णु के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर इसका गायन करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
यह भजन मुख्य रूप से भगवान विष्णु (नारायण) को समर्पित है। साथ ही, इसमें भगवान कृष्ण के विभिन्न नामों (गोविन्द, गोपाल, दामोदर, कान्हा) का उल्लेख है, जो विष्णु के ही अवतार हैं। भक्ति परंपरा में ऐसे भजनों का गायन संतों द्वारा ईश्वर से जुड़ने के लिए किया गया है। आप श्री बांके बिहारी चालीसा के साथ भी इस भजन का पाठ कर सकते हैं।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द | सरल अर्थ | संदर्भ |
|---|---|---|
| नारायण | जल में शयन करने वाले (विष्णु) | परमेश्वर का नाम |
| दामोदर | जिनके उदर (पेट) पर रस्सी बंधी थी | बाल कृष्ण की लीला |
| अरज़ | विनती या प्रार्थना | भक्त की पुकार |
| भवरंग | भक्ति का रंग | ईश्वरीय प्रेम में डूबना |
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| भजन का नाम | मेरे मन तू भजता जा नारायण हरी हरी |
|---|---|
| आराध्य देव | भगवान विष्णु / श्री कृष्ण |
| भाषा | हिंदी |
| मुख्य भाव | शरणागति और प्रेम भक्ति |
| उपयुक्त अवसर | दैनिक पूजा, सत्संग, एकादशी |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
यह सामग्री पारंपरिक भक्ति साहित्य, वैष्णव संप्रदाय के भजनों और लोक-परंपराओं के आधार पर संकलित की गई है।
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