भक्ति काव्य व भजन बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

मन करता है आने को लिरिक्स (Man karta hai aane ko Lyrics in Hindi) - Vishnu BHajan

इस भजन में भगवान के चरणों में आने और उनके प्रति भक्ति की गहन भावना व्यक्त की गई है।

प्रस्तावना एवं परिचय

भगवान के चरणों में धन्य भाव

इस भजन के माध्यम से हम भगवान की शरण में आने की प्रार्थना करते हैं।

मन करता है आने को दर पे तेरे भगवन मन करता है आने को चरणों में तेरे झुक कर कुछ अपनी सुनाने को दर पे तेरे भगवन... पर किस विध आऊं मैं पड़ा हूं दुनियावी फेरों में ना सूझे कोई रस्ता घिरा हूं मायावी अंधेरों में प्रभु जी इतनी कृपा कर दो हाथ पकड़ के सहारा दो रोशन कर दो मेरी राहें दूर मन का अंधियारा हो मोह माया भरी दुनिया से जी चाहता है मन हटाने को चरणों में तेरे झुक कर कुछ अपनी सुनाने को दर पे तेरे भगवन.... कैसे पाऊं मैं किनारा सागर बड़ा गहरा है आऊं कैसे तुझसे मिलने दुनिया का जो पहरा है थाम लो पतवार मेरी नैया की भगवन मुझको किनारा दो तोड़के सारे बंधन पहरे मुझे मिलने का इशारा दो एक आवाज़ पे तेरी भगवन राजीव छोड़ आए जमाने को चरणों में तेरे झुक कर कुछ अपनी सुनाने को दर पे तेरे भगवन....
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में भक्त का मन भावुकता से भगवान की ओर बढ़ने की चाहत प्रकट करता है। 'मन करता है आने को' यह पंक्ति तीव्र इच्छा को दर्शाती है कि कैसे भक्त स्वयं को भगवान के चरणों में समर्पित करना चाहता है। यह वह भावना है, जो भक्ति की ऊंचाई को निरूपित करती है, जहां भक्त दुनिया की भ्रामकता और भ्रमण से दूर होकर, केवल अपने भगवान के पास आना चाहता है। 'चरणों में तेरे झुक कर कुछ अपनी सुनाने को' यह पंक्ति उस गहन भक्ति को निष्पादित करती है, जिसमें भक्त भगवान के चरणों में झुककर अपने मन की बात कहना चाहता है। ऐसे में, श्रद्धा और प्रेम का यह समर्पण दर्शाता है कि भक्त ने संसार के सारे दुखों और माया के कष्टों को त्यागकर एकमात्र भगवान की शरण लेने का निर्णय किया है। इस भावना को प्रतिबिंबित करने वाले शब्द भक्त की भक्ति का वास्तविक स्वरूप बताते हैं।

इस भजन का उपयोग करते समय भक्त की मनोदशा स्पष्ट होती है। 'पर किस विध आऊं मैं' यह वाक्य संसार द्वारा बनाई गई बाधाओं और संदेहों का संकेत करता है। भक्त स्वयं को संसार की उलझनों में फंसा हुआ महसूस कर रहा है, जहां उसे किसी तरह का रास्ता नहीं सूझ रहा है। 'घिरा हूं मायावी अंधेरों में' यह वास्तव में इस भ्रामकता को दर्शाता है, जो सांसारिक जीवन के मायाजाल में फंसा हुआ है। संपूर्ण भजन में भगवान से सहारा मांगने की भावना मौजूद है। भक्त भगवान से प्रार्थना करते हैं कि 'हाथ पकड़ के सहारा दो' ताकि वह फिर से अपने मार्ग को पहचान सके और आगे बढ़ सके। यह भाव, भक्त की संताप और अंधकार में फंसी आत्मा की पुकार है।

इस भजन में दिखायी देने वाले भावार्थ में भक्ति मार्ग का गूढ़ तत्व है। भक्त द्वारा भगवान से की जा रही प्रार्थना न केवल व्यक्तिगत मुक्ति की ओर इंगित करती है, बल्कि यह साक्षात्कार के अनुभव की खोज में भी दर्शाती है। 'थाम लो पतवार मेरी नैया की' यह एक प्रकार की निराशा की भावना है, जहां भक्त अपनी नैया को भगवान के सहारे छोड़ने की प्रार्थना कर रहा है। यह नैया, जीवन की डगर है, जिसमें भक्त इसे सुरक्षित पहुंचाने के लिए भगवान की कृपा का सहारा लेकर चलना चाहता है। यहाँ 'तोड़के सारे बंधन' पंक्ति वाणी द्वारा आत्मा के मौन बंधनों को दूर करने की इच्छा को व्यक्त करती है। इस प्रकार, भक्ति मार्ग में सुरक्षा और आत्मज्ञान की आकांक्षा की ओर संकेत किया गया है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का सांस्कृतिक और धार्मिक संदर्भ गहन है। यह भजन कई पुराणों और धार्मिक ग्रंथों में भक्ति की प्रासंगिकता को दर्शाता है। भक्तों के लिए यह एक प्रेरणाश्रोत का कार्य करता है, जैसे कि भगवद गीता में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा दिए गए उपदेश कि भक्त की भक्ति का मार्ग आत्मा की शुद्धि की ओर ले जाता है। संसार के बंधनों और मायालोक की समस्याओं के बीच भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करने का यह भजन, मनुष्य को उस विशेष अवस्था में ले जाता है जहां वह पूर्ण विश्वास और श्रद्धा के साथ प्रकट कर सकता है। ऐसे भजन न केवल ज्ञान की प्राप्ति में सहायक हैं, बल्कि मानवीय संवेदना की गहराई को भी उद्घाटित करते हैं।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का जाप करने से मानसिक शांति, आध्यात्मिक उन्नति और आत्मबल में वृद्धि होती है। भक्त जब मन से इसे गाता है, तो उसके मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इससे तनाव में कमी आती है और भक्ति भाव में वृद्धि होती है। नियमित जाप से आध्यात्मिक सुरक्षा और अनुभवों की गहराई में वृद्धि होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह के समय करना सर्वोत्तम है, जब मन शांत होता है। पूजा स्थल पर एक दीया जलाएं और भगवान की प्रतिमा या तस्वीर के सामने बैठें। ध्यान की मुद्रा में बैठकर मन को स्थिर करें। इस समय ईश्वर के प्रति भक्ति और प्रेम का भाव मन में रखें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन की प्रमुख भावनाएं क्या हैं?

इस भजन की मुख्य भावनाएं भगवान की शरण में जाने की आकांक्षा और संसार की बाधाओं को पार करने की प्रार्थना हैं। भक्त अपने मन की भावनाओं को भगवान के चरणों में व्यक्त करना चाहता है।

क्या इस भजन का नियमित जाप लाभकारी है?

हाँ, भजन का नियमित जाप मानसिक शांति और शारीरिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है। यह भक्त की आत्मा को शुद्ध करता है और गहन भक्ति का अनुभव कराता है।

भजन को किस प्रकार से गाना चाहिए?

भजन को भावनात्मकता के साथ और ध्यानपूर्वक गाना चाहिए। भगवान के प्रति श्रद्धा और भक्ति को मन में महसूस करके गाना अधिक प्रभावी होता है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 08 Oct 2026

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