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कन्या पूजन - भक्तिलोक(Kanya Poojan 2023) -Bhaktilok

कन्या पूजन - भक्तिलोक(Kanya Poojan 2023):-

कन्या पूजन - भक्तिलोक(Kanya Poojan 2023) -Bhaktilok
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कन्या पूजन - भक्तिलोक(Kanya Poojan 2023):-

कन्या पूजन, सरद नवरात्रि के दौरान एक महत्वपूर्ण काम है, जिसमे छोटी छोटी  लड़कियों को देवी माँ का रूप मानते हुए उनका सम्मान के साथ पूजा की जाती है। कन्या पूजन में कन्या को देवी रूप देवी माँ दुर्गा के अवतारों को माना जाता हैं। यह भी दावा किया जाता है कि माँ देवी दुर्गा ने राक्षस कालसुर से लड़ने के लिए एक युवा लड़की का रूप धारण किया था। नतीजतन, कन्यायों के पास आज भी सार्वभौमिक रचनात्मक शक्तियां है, जिनके आशीवार्द से आपकी सब समस्याएं खत्म हो सकती है।

कन्या पूजा, जिसे कही कही लोग इसे कंजक पूजा भी कहते है, आमतौर पर नवरात्रि के आठवें और नौवें दिन यह पूजा की जाती है। देवी माँ दुर्गा के नौ अवतार, जिन्हें नवदुर्गा के नाम से जाना जाता है। को नौ छोटी लड़कियों के रूप में पूजा जाता है। कुछ मंदिरों या पूजा संस्थानों में कन्या पूजन नवरात्रों में हर रोज़ होता है, यह आप माँ वैष्णो देवी मंदिर जम्मू कश्मीर में आप देख सकते है। घरों में कन्या पूजन नवरात्रे के आंठवे दिन या नवें दिन व्रत या पूजा अनुष्ठान के रूप में किया जाता है।

कन्या पूजा एक हिंदू रिवाज़ है, जो दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, और बिहार में प्रचलित है। रामनवमी पर कुछ राज्य इस प्रथा को बड़े ही धूम धाम से मनाया जाता है।

सरद नवरात्रि और माँ दुर्गा पूजा के दौरान, कन्या पूजा एक प्रमुख रीती रिवाज़ है। कन्या पूजा और कुमारिका पूजा कुमारी पूजा के अन्य नाम हैं।

नवरात्रि के नौ दिनों में धार्मिक ग्रंथों में भी कन्या पूजा की का उल्लेख है और इसे विधि पूर्वक करने की शाश्त्र आज्ञा भी देता है। सरद नवरात्रि के पहले दिन केवल एक कन्या की पूजा करनी चाहिए और जैसे जैसे नवरात्रे का दिन बढ़ते जाते है, उसी प्रकार प्रतिदिन कन्यायों की संख्या बढ़ाकर पूजा करनी चाहिए।

जँहा दूसरी ओर, कई लोग एक ही दिन कुमारी पूजा करना पसंद करते हैं, जैसे अष्टमी पूजन या नवमी पूजन। उस दिन लोग अपने घर में नवरात्रे अनुसार ८ या ९ कन्यायों को अपने घर बुलाकर उनकी पूजा करते है।

इसे भी पढ़े - नवरात्रि पूजा मंत्र और उसके अर्थ (Navratri Puja Mantra Aur Arth) 

भक्तगड इस दिन छोटी बच्चियों को अपने घर बुलाकर उपवास रखते हैं। ऐसा माना जाता है कि यह अनुष्ठान दुर्गा देवी की प्रशंसा व्यक्त करने के लिए किया जाता है।

नवरात्रि के नौ देवियो ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालराती, महागौरी और सिद्धिदात्री को देवी दुर्गा के नौ दिव्य रूपों के अवतार के रूप में पूजा जाता है।

कंजक पूजा के साथ अब छोटे लड़के भी लड़कियों के साथ जाते हैं। जिनमे हनुमान जी के बालरूप या माता के रक्षाक के रूप में जाना जाता है।

भागवत पुराण के अनुसार नवरात्रि का नौवां दिन भक्तों की मनोकामना पूरी करता है और जो नौ दिन का व्रत रखते हैं ,और नवरात्रि के अंत में कन्याओं की पूजा करते हैं।  उन्हें माँ भगवती की कृपा जरूर प्राप्त होती है।

एक कन्या की पूजा करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है। दो कन्याओं की पूजा करने से ज्ञान और मोक्ष की प्राप्ति होती है, और तीन कन्याओं की पूजा करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। बच्चे अधिकार और ज्ञान का पक्ष लेते हैं और नौ कन्या पूजा को सर्वोच्चता का आशीर्वाद माना जाता है।

कन्या पूजन विधिी इन हिंदी(Kanya Pujan Vidhi in Hindi):-

  • छोटे लड़कियों के पैर धोकर एक आसन पर बिठाया जाता है।
  • कलावा, या पवित्र धागा को उनकी कलाई के चारों ओर बांधें, फिर उनके माथे पर कुमकुम का टिका लगाएं।
  • पूरी, हलवा, काला चना और नारियल जैसे विशेष खाद्य पदार्थ तैयार करें, और थाली में परोसे।
  • लड़कियों को दुपट्टे चूड़ियाँ और नए कपड़े जैसे उपहार देने चाहिए।
  • कन्याओं के चरण स्पर्श करें, प्रसाद चढ़ाएं और उनका आशीर्वाद मांगें।


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