Morning Bhajan

इतनी शक्ति हमें दे न दाता मनका विश्वास कमज़ोर हो ना (Itni Shakti Hame Dena Data Lyrics in Hindi) - Morning Prayer Pamela Jain Sai Bhajan - BHaktilok

175 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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इतनी शक्ति हमें दे न दाता मनका विश्वास कमज़ोर हो ना - परिचय एवं आध्यात्मिक महत्व

"इतनी शक्ति हमें दे न दाता, मनका विश्वास कमज़ोर हो ना" यह प्रार्थना आधुनिक काल के सबसे लोकप्रिय और प्राणवान भक्ति गीतों में से एक है। इस प्रार्थना का मूल भाव मनुष्य की आंतरिक शुद्धि, अडिग आत्मविश्वास, सदाचार और मानवता के कल्याण से जुड़ा है। भले ही यह किसी पारंपरिक धार्मिक ग्रंथ से न जुड़ी हो, फिर भी इसे हर सुबह स्कूलों, प्रार्थना सभाओं, मंदिरों और घरों में पूरे विधि-विधान और भक्ति भाव से गाया जाता है। यह प्रार्थना हमें सिखाती है कि भौतिक प्रगति के साथ-साथ हमारी नैतिक और आध्यात्मिक नीव कितनी मजबूत होनी चाहिए। पामेला जैन (Pamela Jain) और अन्य प्रतिष्ठित गायकों द्वारा अपनी मधुर वाणी में गाए जाने वाले इस भजन/प्रार्थना ने देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं के दिलों में एक विशेष स्थान बनाया है। इस प्रार्थना का उद्देश्य भगवान से यह मांगना नहीं है कि हमें सुख-सुविधाएं मिलें, बल्कि यह प्रार्थना है कि विपरीत परिस्थितियों में भी हमारा धर्म और विश्वास न डगमगाए।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

इतनी शक्ति हमें दे न दाता
मनका विश्वास कमज़ोर हो ना
हम चलें नेक रास्ते पे हमसे
भुलकर भी कोई भूल हो ना...

हर तरफ़ ज़ुल्म है बेबसी है
सहमा-सहमा-सा हर आदमी है
पाप का बोझ बढ़ता ही जाये
जाने कैसे ये धरती थमी है
बोझ ममता का तू ये उठा ले
तेरी रचना का ये अन्त हो ना...
हम चलें नेक रास्ते पे हमसे,
भुलकर भी कोई भूल हो ना...

दूर अज्ञान के हो अन्धेरे
तू हमें ज्ञान की रौशनी दे
हर बुराई से बचके रहें हम
जितनी भी दे, भली ज़िन्दगी दे
बैर हो ना किसीका किसीसे
भावना मन में बदले की हो ना...
हम चलें नेक रास्ते पे हमसे,
भुलकर भी कोई भूल हो ना...

हम न सोचें हमें क्या मिला है
हम ये सोचें किया क्या है अर्पण
फूल खुशियों के बाटें सभी को
सबका जीवन ही बन जाये मधुबन
अपनी करुणा को जब तू बहा दे
कर दे पावन हर इक मन का कोना...
हम चलें नेक रास्ते पे हमसे,
भुलकर भी कोई भूल हो ना...

हम अन्धेरे में हैं रौशनी दे
खो ना दे खुद को ही दुश्मनी से
हम सज़ा पाये अपने किये की
मौत भी हो to सह ले खुशी से
कल जो गुज़रा है फिरसे ना गुज़रे
आनेवाला वो कल ऐसा हो ना...
हम चलें नेक रास्ते पे हमसे,
भुलकर भी कोई भूल हो ना...

इतनी शक्ति हमें दे न दाता
मनका विश्वास कमज़ोर हो ना...

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस प्रार्थना का प्रत्येक शब्द गहन दार्शनिक और नैतिक शिक्षा से परिपूर्ण है। प्रथम पंक्ति में दाता (परमात्मा) से यह प्रार्थना की जाती है कि हे ईश्वर! हमें इतनी मानसिक और आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करना कि कठिन से कठिन समय में भी हमारा आंतरिक विश्वास और आस्था कमजोर न पड़े। हम हमेशा सच्चाई, ईमानदारी और धर्म के मार्ग पर चलें और जाने-अनजाने भी हमसे कोई पापकर्म या भूल न हो।

वर्तमान समाज की विसंगतियों का वर्णन करते हुए गीतकार कहता है कि चारों तरफ अत्याचार (ज़ुल्म), लाचारी (बेबसी) और भय का वातावरण है। हर व्यक्ति डरा हुआ है। पाप का भार लगातार बढ़ता जा रहा है, जिसे देखकर आश्चर्य होता है कि यह धरती अभी तक कैसे टिकी हुई है। ऐसी स्थिति में हे करुणावान! तू अपनी ममता का आंचल इस धरती पर उठा ले ताकि तेरी इस सुंदर सृष्टि का अंत न हो।

आगे की पंक्तियों में ज्ञान और परोपकार की कामना की गई है। अज्ञान रूपी अंधकार को दूर करके ज्ञान का प्रकाश फैलाने की प्रार्थना की गई है। मनुष्य यह मांगता है कि वह हर प्रकार की बुराई से बचा रहे और उसे एक पवित्र, सात्विक जीवन प्राप्त हो। किसी के प्रति भी मन में बैर, द्वेष या बदले की भावना (प्रतिकार) न आए। मनुष्य स्वार्थ की भावना को छोड़कर यह सोचे कि उसने समाज और मानवता के लिए क्या अर्पण किया है। सबके जीवन में खुशियों के फूल बांटने और जीवन को एक सुगंधित मधुबन बनाने की प्रेरणा दी गई है। अंत में समर्पण और आत्मशुद्धि का भाव है कि यदि हमारे कर्मों की सजा भी मिले, तो हम उसे प्रसन्नता से स्वीकार करें, बशर्ते हमारा आने वाला कल भय और अंधकार से मुक्त हो।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन केवल एक गीत नहीं है, बल्कि यह आत्म-सुधार और नैतिक उत्थान का एक महामंत्र है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • सार्वभौमिक अपील: यह प्रार्थना किसी विशेष संप्रदाय, जाति या वर्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि संपूर्ण मानव जाति के कल्याण की बात करती है।
  • आत्मविश्वास की प्रेरणा: यह व्यक्ति को अंदर से मजबूत बनाती है ताकि वह जीवन की बाधाओं से घबराए नहीं।
  • निष्काम भाव: इसमें भगवान से सांसारिक सुख या धन-दौलत नहीं, बल्कि अच्छे कर्म करने की शक्ति मांगी गई है।
  • विस्तृत जानकारी के लिए आप श्री हनुमान चालीसा और शिव तांडव स्टोट्रम् के पावन पाठ का भी स्मरण कर सकते हैं।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस प्रार्थना को गाने और सुनने के लिए सबसे उत्तम समय प्रातःकाल (ब्रह्म मुहूर्त या सुबह की प्रार्थना सभा) का माना जाता है। सुबह के समय मन शांत और शुद्ध होता है, जिससे प्रार्थना सीधे हृदय में उतरती है। इसे विद्यालयों में प्रार्थना के दौरान, योग सत्रों के आरंभ में, पारिवारिक अनुष्ठानों या मानसिक शांति के लिए किसी भी समय एकाग्र चित्त होकर गाया या सुना जा सकता है। इसे गाते समय शरीर की मुद्रा सीधी और मन में सकारात्मक भाव होना चाहिए।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
दाता देने वाला, परमात्मा, ईश्वर समस्त ब्रह्मांड के पालनहार और ऊर्जा के स्रोत
मनका विश्वास आंतरिक आस्था और दृढ़ संकल्प ईश्वर और सत्य के मार्ग पर अटूट भरोसा
नेक रास्ते सत्य, धर्म और नैतिकता का मार्ग श्रेष्ठ कर्म और परोपकार का पथ
मधुबन फूलों और सुगंध से भरा बगीचा प्रेम, शांति और भाईचारे से परिपूर्ण जीवन

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम इतनी शक्ति हमें दे न दाता मनका विश्वास कमज़ोर हो ना
गायक / कलाकार पामेला जैन (Pamela Jain) एवं अन्य प्रसिद्ध कलाकार
भाषा सरल हिंदी / उर्दू मिश्रित गीत
मुख्य थीम प्रार्थना, नैतिकता, आत्मविश्वास, परोपकार
उपयुक्त अवसर صبح की प्रार्थना, विद्यालय, सत्संग, मानसिक शांति

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

'इतनी शक्ति हमें दे न दाता' प्रार्थना के रचयिता कौन हैं?

यह लोकप्रिय प्रार्थना प्रसिद्ध गीतकार अभिलाष (Abhilash) द्वारा लिखी गई थी और इसे फिल्म 'अंकुश' (1986) में शामिल किया गया था, जिसे संगीतबद्ध कुलदीप सिंह ने किया था।

इस प्रार्थना को सुबह के समय ही क्यों गाया जाता है?

सुबह का समय मानसिक रूप से शांत और शुद्ध होता है। इस समय ऐसी सकारात्मक प्रार्थना गाने से पूरा दिन ऊर्जावान और नैतिक मूल्यों से परिपूर्ण रहता है।

इस भजन का मुख्य आध्यात्मिक संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश यह है कि मनुष्य को भगवान से धन या भौतिक सुख मांगने के बजाय अपने नैतिक चरित्र, आंतरिक बल, परोपकार और सत्य के मार्ग पर चलने की शक्ति मांगनी चाहिए।

क्या यह प्रार्थना किसी विशेष धर्म से संबंधित है?

नहीं, यह एक सार्वभौमिक प्रार्थना है जो मानवता, करुणा, सत्य और भाईचारे की बात करती है, इसलिए इसे सभी धर्मों के लोग अपनाते हैं।

पामेला जैन द्वारा गाया गया यह भजन कहाँ सुना जा सकता है?

आप इसे विभिन्न डिजिटल संगीत प्लेटफॉर्म्स और यूट्यूब पर पामेला जैन की मधुर आवाज में सुन सकते हैं।

इस प्रार्थना से बच्चों को क्या सीख मिलती है?

बच्चों में अनुशासन, बड़ों का सम्मान, सच्चाई का साथ देना और कठिन समय में भी हिम्मत न हारने जैसे संस्कार इस प्रार्थना से मिलते हैं।

क्या इस प्रार्थना को बिना संगीत के भी गाया जा सकता है?

हाँ, इसे सामूहिक रूप से बिना किसी वाद्य यंत्र के कोरस में भी पूरी तन्मयता के साथ गाया जाता है।

इस प्रार्थना में 'मधुबन' शब्द का क्या अर्थ है?

यहाँ 'मधुबन' का अर्थ एक ऐसे सुंदर जीवन से है जो प्रेम, खुशियों और सदभावना की सुगंध से महक रहा हो।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख Bhaktilok.in के उच्च गुणवत्ता मानकों और पाठकों की आध्यात्मिक जिज्ञासा को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। इसमें प्रार्थना के बोल, उसका विस्तृत भावार्थ, दार्शनिक महत्व और पाठकों के प्रश्नों के उत्तर शामिल किए गए हैं। यह सामग्री संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के अंतर्गत प्रकाशित की जाती है ताकि उपयोगकर्ताओं को शत-प्रतिशत उपयोगी और सटीक जानकारी प्राप्त हो सके।

स्रोत एवं संदर्भ

  • पारंपरिक भारतीय प्रार्थना संकलन एवं शैक्षिक गीत संग्रह
  • आधुनिक हिंदी भक्ति गीत एवं संगीत इतिहास
  • नैतिक शिक्षा एवं मूल्य आधारित साहित्य

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 25 Sep 2026

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