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गणेश अथर्वशीर्ष पाठ (Ganpati Atharvashirsha Path Lyrics in Hindi) - Ganesh Stotra Ganesh Atharvashirsha | Ganesh Chaturthi - Bhaktilok

100 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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गणेश अथर्वशीर्ष: विघ्न नाशक और सुखदायक पाठ

गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ भक्तों के लिए विघ्न दूर करने और सफलता प्रदान करने का साधन है।

 गणेश अथर्वशीर्ष पाठ (Ganpati Atharvashirsha Path Lyrics in Hindi) - ॐ नमस्ते गणपतये। त्वमेव प्रत्यक्षं तत्वमसित्वमेव केवलं कर्ताऽसित्वमेव केवलं धर्ताऽसित्वमेव केवलं हर्ताऽसित्वमेव सर्वं खल्विदं ब्रह्मासित्व साक्षादात्माऽसि नित्यम्।।1।।ऋतं वच्मि। सत्यं वच्मि।।2।।अव त्व मां। अव वक्तारं।अव श्रोतारं। अव दातारं।अव धातारं। अवानूचानमव शिष्यं।अव पश्चातात। अव पुरस्तात।अवोत्तरात्तात। अव दक्षिणात्तात्।अवचोर्ध्वात्तात्।। अवाधरात्तात।।सर्वतो मां पाहि-पाहि समंतात्।।3।।त्वं वाङ्‍मयस्त्वं चिन्मय:।त्वमानंदमसयस्त्वं ब्रह्ममय:।त्वं सच्चिदानंदाद्वितीयोऽसि।त्वं प्रत्यक्षं ब्रह्मासि।त्वं ज्ञानमयो विज्ञानमयोऽसि।।4।।सर्वं जगदिदं त्वत्तो जायते।सर्वं जगदिदं त्वत्तस्तिष्ठति।सर्वं जगदिदं त्वयि लयमेष्यति।सर्वं जगदिदं त्वयि प्रत्येति।त्वं भूमिरापोऽनलोऽनिलो नभ:।त्वं चत्वारिवाक्पदानि।।5।।त्वं गुणत्रयातीत: त्वमवस्थात्रयातीत:।त्वं देहत्रयातीत:। त्वं कालत्रयातीत:।त्वं मूलाधारस्थितोऽसि नित्यं।त्वं शक्तित्रयात्मक:।त्वां योगिनो ध्यायंति नित्यं।त्वं ब्रह्मा त्वं विष्णुस्त्वंरूद्रस्त्वं इंद्रस्त्वं अग्निस्त्वंवायुस्त्वं सूर्यस्त्वं चंद्रमास्त्वंब्रह्मभूर्भुव:स्वरोम्।।6।।गणादि पूर्वमुच्चार्य वर्णादिं तदनंतरं।अनुस्वार: परतर:। अर्धेन्दुलसितं।तारेण ऋद्धं। एतत्तव मनुस्वरूपं।गकार: पूर्वरूपं। अकारो मध्यमरूपं।अनुस्वारश्चान्त्यरूपं।बिन्दुरूत्तररूपं।नाद: संधानं। सं हितासंधि:सैषा गणेश विद्या। गणकऋषि:निचृद्गायत्रीच्छंद:। गणपतिर्देवता।ॐ गं गणपतये नम:।।7।।एकदंताय विद्‍महे।वक्रतुण्डाय धीमहि।तन्नो दंती प्रचोदयात।।8।।एकदंतं चतुर्हस्तं पाशमंकुशधारिणम्।रदं च वरदं हस्तैर्विभ्राणं मूषकध्वजम्।रक्तं लंबोदरं शूर्पकर्णकं रक्तवाससम्।रक्तगंधाऽनुलिप्तांगं रक्तपुष्पै: सुपुजितम्।।भक्तानुकंपिनं देवं जगत्कारणमच्युतम्।आविर्भूतं च सृष्टयादौ प्रकृ‍ते पुरुषात्परम्।एवं ध्यायति यो नित्यं स योगी योगिनां वर:।।9।।नमो व्रातपतये। नमो गणपतये।नम: प्रमथपतये।नमस्तेऽस्तु लंबोदरायैकदंताय।विघ्ननाशिने शिवसुताय।श्रीवरदमूर्तये नमो नम:।।10।।एतदथर्वशीर्ष योऽधीते।स ब्रह्मभूयाय कल्पते।स सर्व विघ्नैर्नबाध्यते।स सर्वत: सुखमेधते।स पञ्चमहापापात्प्रमुच्यते।।11।।सायमधीयानो दिवसकृतं पापं नाशयति।प्रातरधीयानो रात्रिकृतं पापं नाशयति।सायंप्रात: प्रयुंजानोऽपापो भवति।सर्वत्राधीयानोऽपविघ्नो भवति।धर्मार्थकाममोक्षं च विंदति।।12।।इदमथर्वशीर्षमशिष्याय न देयम्।यो यदि मोहाद्‍दास्यति स पापीयान् भवति।सहस्रावर्तनात् यं यं काममधीते तं तमनेन साधयेत्।13।।अनेन गणपतिमभिषिंचतिस वाग्मी भवतिचतुर्थ्यामनश्र्नन जपतिस विद्यावान भवति।इत्यथर्वणवाक्यं।ब्रह्माद्यावरणं विद्यात्न बिभेति कदाचनेति।।14।।यो दूर्वांकुरैंर्यजतिस वैश्रवणोपमो भवति।यों लाजैर्यजति स यशोवान भवतिस मेधावान भवति।यो मोदकसहस्रेण यजतिस वाञ्छित फलमवाप्रोति।य: साज्यसमिद्भिर्यजतिस सर्वं लभते स सर्वं लभते।।15।।अष्टौ ब्राह्मणान् सम्यग्ग्राहयित्वासूर्यवर्चस्वी भवति।सूर्यग्रहे महानद्यां प्रतिमासंनिधौवा जप्त्वा सिद्धमंत्रों भवति।महाविघ्नात्प्रमुच्यते।महादोषात्प्रमुच्यते।महापापात् प्रमुच्यते।स सर्वविद्भवति से सर्वविद्भवति।य एवं वेद इत्युपनिषद्‍।।16।।अथर्ववेदीय गणपतिउपनिषद संपूर्णम।।*** Singer:- Sushmita Sarker ****

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ अत्यंत दिव्य और अद्वितीय है, जिसमें भगवान गणेश की महानता और अद्वितीयता का वर्णन किया गया है। 'ॐ नमस्ते गणपतये' से आरंभ होकर, वह भक्तों को यह सिखाता है कि गणेश सर्वश्रेष्ठ देवता हैं, जो सृष्टि के प्रत्येक तत्व में समाहित हैं। 'त्वमेव प्रत्यक्षं तत्वमसित्वमेव' का शाब्दिक अर्थ यह है कि गणेश ही सच्चाई एवं तत्व के रूप में प्रकट होते हैं। यहाँ गणेश को न केवल सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड का कर्ता और धर्ता माना गया है, बल्कि उन्हें ज्ञान और विज्ञान का भी अवतार माना गया है। यह पाठ हमें यह समझता है कि भगवान गणेश का ध्यान करने से शान्ति, समृद्धि तथा ज्ञान की प्राप्ति होती है। पाठ के प्रत्येक मंत्र में गणेश की कृपा एवं उनकी दिव्यता का उल्लेख किया गया है, जो भक्तों को संपूर्ण जीवन में सहायता प्रदान करती हैं।

भावार्थ की दृष्टि से, यह पाठ भक्तों को हृदय में श्रद्धा और भक्ति से गणेश की आराधना करने का मार्ग दिखाता है। 'आपणां पाहि-पाहि समंतात्' का अर्थ है, 'हे गणेश, सभी दिशाओं से मेरी रक्षा करें।' यह भाव भक्त की आवश्यकता और समर्पण को दर्शाता है। भक्त जब गणेश का ध्यान करता है, तो उसे सर्वत्र सुरक्षित और संरक्षित महसूस होता है। पाठ में जो संस्कृत श्लोक हैं, वे जिज्ञासा, भक्ति और ज्ञान की प्राप्ति के लिए मार्ग प्रशस्त करते हैं। 'धर्मार्थकाममोक्षं च विंदति' का अर्थ है कि एक भक्त सफलतापूर्वक अपने जीवन के चार पुरूषार्थों धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को प्राप्त कर सकता है। इसका भाव यह है कि गणेश की आराधना से सभी कार्य सिद्ध हो सकते हैं।

आध्यात्मिक दृष्टिकोण से, गणेश अथर्वशीर्ष हमें सिखाता है कि आत्मा और ब्रह्म का अंतर मिटता है और सभी जीवों में गणेश का परमात्मा का अंश है। 'त्वं गुणत्रयातीत:' में यह स्पष्ट किया गया है कि गणेश गुणों का अतिक्रमण करते हैं और उनके प्रति भक्ति केवल शारीरिक या भौतिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक स्तर पर भी होनी चाहिए। पाठ में दिए गए उक्ति दर्शाते हैं कि सभी ब्रह्मा, विष्णु, और शिव की शक्ति गणेश में समाहित है। यह न केवल शक्तिशाली गणेश की महिमा का प्रशंसा है, बल्कि यह भी हमें यह सिखाता है कि निःस्वार्थ सेवा, प्रेम, और ज्ञान का माध्यम बनकर ही हम आध्यात्मिक उन्नति के मार्ग पर बढ़ सकते हैं।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

गणेश अथर्वशीर्ष की महत्ता हिंदू धर्म में अत्यधिक है। यह उपनिषद् गणेश को ब्रह्मा के समकक्ष मानता है और समस्त विघ्नों का नाशक बताता है। इसे 'गणपति उपनिषद' के रूप में भी जाना जाता है, जिसमें गणेश की आराधना के द्वारा भक्त अपने सभी पापों और विघ्नों से छुटकारा पा सकते हैं। इसे पद्म पुराण, महाभारत और अन्य धार्मिक ग्रंथों में भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। यह उपनिषद भक्तों को गणेश में साकार परमात्मा के रूप में ध्यान करने का निर्देश देता है, जिससे भक्त का मन एकाग्र और उच्चता की ओर अग्रसर होता है।

प्रथम पूज्य श्री गणेश जी के जन्म और उनकी कथाओं का संपूर्ण विवरण जानने के लिए ब्रह्म पुराण गणेश महिमा का पाठ करें। गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ करने से मानसिक शांति, विघ्नों का नाश और जीवन में समृद्धि आती है। यह पाठ विशेषकर उन भक्तों के लिए लाभदायक है, जो किसी पूजा, कार्य या समारोह की शुरुआत करनी चाहते हैं। नियमित रूप से इस पाठ को करने से दु:ख-दर्द, विपत्तियाँ और समस्याएं दूर होती हैं। भक्त के मन में सकारात्मकता और आत्मविश्वास का संचार होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस पाठ का सही समय प्रात: या संध्या का होता है। पूजा करते समय, एक सफेद या लाल वस्त्र पहनें और गणेश जी के समीप एक दीया जलाएँ। दूर्वा, मोदक और फल का भोग लगाएँ। ध्यान रखें कि आपका मन पूरी तरह गणेश की भक्ति में आधारित हो। ध्यान मुद्रा में बैठकर, शांत मन से पाठ का जाप करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ किसके लिए विशेष है?

गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ सभी संप्रदायों के भक्तों के लिए विशेष है, जो गणेश से विघ्न की शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।

क्या इस पाठ को नियमित रूप से करना चाहिए?

हां, नियमित रूप से गणेश अथर्वशीर्ष पाठ करने से सभी विघ्न दूर होते हैं और मानसिक शांति एवं सुख की प्राप्ति होती है।

इस पाठ का मुख्य लाभ क्या है?

गणेश अथर्वशीर्ष पाठ का मुख्य लाभ मानसिक तनाव को दूर करना, विघ्नों का नाश करना और भक्त के जीवन में सुख-समृद्धि का संचार करना है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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