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यदा यदा ही धर्मस्य श्लोक लिरिक्स (Yada Yada Hi Dharmasya Sloka Lyrics in Hindi ) - Bhaktilok


 यदा यदा ही धर्मस्य श्लोक लिरिक्स  (Yada Yada Hi Dharmasya Sloka Lyrics in Hindi ) -


यदा यदा ही धर्मस्य श्लोक लिरिक्स  (Yada Yada Hi Dharmasya Sloka Lyrics in Hindi ) - Bhaktilok


यदा यदा ही धर्मस्य लिरिक्स


यदा यदा हि धर्मस्य

ग्लानीं भवति भरत

अभ्युत्थानम् अधर्मस्य

तदात्मनम् श्रीजाम्यहम्


परित्राणाय सौधुनाम्

विनशाय च दुष्कृताम्

धर्मसंस्था पन्नार्थाय

संभवामि युगे युगे


नैनम चिंदंति शास्त्राणि

नैनम देहाति पावकाः

न चैनम् केलदयंत्यपापो

ना शोषयति मारुताः


सुखदुक्खे समान कृतवा

लभलाभौ जयाजयौ

ततो युधाय युज्यस्व

निवम पापमवाप्स्यसि


अहंकारम बलम दरपम

कामम क्रोधम् च समश्रितः

महामातं परमदेषु

प्रदविष्णो अभ्यसुयाकः


यदा यदा ही धर्मस्य श्लोक हिंदी अर्थ in Hindi (Yada Yada Hi Dharmasya ka Arth in Hindi):- 


हां पार्थ, मै प्रकट होता हूँ, मै आता हूँ।

जब जब धर्म की हानि होती है, तब तब मै आता हूँ।

जब जब अधर्म बढ़ता है तब तब मैं आता हूँ।


धर्मियों की रक्षा के लिए, दुष्टों का विनाष करने के लिए मै आता हूँ।

धर्म की स्थापना केलिए मैं आता हूँ और युग युग में जन्म लेता हूँ।



आत्मा को नाही हथियार भेद सकते हैं,

न ही आग इसे जला सकते हैं।

पानी इसे गीला नहीं कर सकता,

और न ही हवा इसे सुखा सकती है।


कर्तव्य के लिए लड़ो, एक जैसे सुख और संकट, हानि और लाभ, जीत और हार का इलाज करो।

इस तरह अपनी ज़िम्मेदारी पूरी करने से आप कभी पाप नहीं करेंगे।


अहंकार, बल , इच्छा और क्रोध से अंधा, राक्षसी ने अपने शरीर के भीतर

और दूसरों के शरीर में मेरी उपस्थिति का दुरुपयोग किया।



यदा यदा ही धर्मस्य लिरिक्स (Yada Yada Hi Dharmasya Sloka Lyrics in english ) :- 


Yada Yada Hi Dharmasya

Yada Yada Hi Dharmasya

Glanir Bhavati Bharata

Abhyuthanam Adharmasya

Tadaatmaanam Srijaamyaham


Paritranaay Saadhunaam

Vinaashaay Ch Dushkritaam

Dharmasanstha Panaarthaay

Sambhavaami Yuge Yuge



Nainam Chindanti Shastrani

Nainam Dahati Paavakaah

Na Chainam Kledayantyaapo

Na Shoshayati Maarutaah


Sukhadukkhe Same Kritva

Laabhaalaabhau Jayaajayau

Tato Yuddhaaya Yujyasva

Naivam Paapamavaapasyasi


Ahankaaram Balam Darpam

Kaamam Krodham Cha Samshritaah

Maamaatam Pardaheshu

Pradvishanto Abhyasuyakaah


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