Rani Sati Dadi Bhajan सोमवार विशेष (महादेव शिव व चंद्र देव)

तू चरणों में झुक जा तेरा हाथ पकड़ लेगी लिरिक्स (Tu charno me jhuk ja tera hath pakad legi Lyrics in Hindi) - Rani Sati Dadi Bhajan

रानी सती दादी का प्रसिद्ध भजन 'तू चरणों में झुक जा तेरा हाथ पकड़ लेगी' के लिरिक्स हिंदी में पढ़ें। माँ की शरणागति और करुणा का सुंदर वर्णन, संदर्भ सहित।

रानी सती दादी भजन शरणागति भाव भक्ति संगीत

Rani Sati Dadi Bhajan

अद्यतन तिथि: फरवरी 2026 | पाठन समय: 10 मिनट | संकलन: भक्तिलोक संपादकीय टीम

रानी सती दादी का यह अत्यंत पावन और भावपूर्ण भजन "तू चरणों में झुक जा, तेरा हाथ पकड़ लेगी" भारतीय भक्ति परंपरा में शरणागति, अगाध विश्वास और माँ की असीम करुणा का एक अद्भुत प्रतीक है। यह भजन उन तमाम भक्तों के लिए आध्यात्मिक संजीवनी के समान है, जो जीवन के संघर्षों, मानसिक चिंताओं, दुखों और सांसारिक उलझनों से घिरे हुए आंतरिक शांति की तलाश कर रहे हैं। माँ श्री रानी सती दादी की महिमा अपरंपार है, और जो भी श्रद्धालु पूर्ण समर्पण भाव से उनके श्रीचरणों में नतमस्तक होता है, माँ स्वयं उसका हाथ थामकर उसे भवसागर की सभी बाधाओं से पार लगा देती हैं। इस अनन्य रचना में निहित भाव जीव और जगत जननी के बीच के उस अटूट प्रेम को दर्शाता है, जहाँ भक्त को केवल अपने आराध्य पर पूर्ण भरोसा रखने की सीख मिलती है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

तू चरणों में झुक जा, तेरा हाथ पकड़ लेगी,
दादी तुझको अपनी भगती में जकड़ लेगी।
तू चरणों में झुक जा, तेरा हाथ पकड़ लेगी॥

दादी के चरणों में बैकुंठ समाया है,
जो झुका उसी ने ही सुख स्वर्ग का पाया है।
जन्नत की सब खुशियाँ झोली में भर देगी,
दादी तुझको अपनी भगती में जकड़ लेगी॥

जिस घड़ी तू दादी के चरणों में झुक जाए,
माथे की सब चिंता चौखट पे चढ़ जाए।
माँ मुक्ति तुझे सारी चिंता से कर देगी,
दादी तुझको अपनी भगती में जकड़ लेगी॥

चरणों की रज जिनके मस्तक पे लग जाती,
दादी की हरदम उन्हें किरपा ही मिल जाती।
स्वाती दुखड़े तेरे दादी जी हर लेगी,
दादी तुझको अपनी भगती...

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन केवल कुछ पंक्तियों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह एक संपूर्ण दार्शनिक संदेश है जो भक्तों को भक्ति और समर्पण का मार्ग दिखाता है। भजन की हर एक पंक्ति में माँ रानी सती के प्रति अगाध प्रेम और उनकी कृपा का वर्णन किया गया है।

प्रथम अंतरा और मुखड़ा: रचयिता का संदेश स्पष्ट है कि मनुष्य को अपने अहंकार का त्याग करके माँ के चरणों में झुक जाना चाहिए। जब भक्त अपनी संपूर्ण अहंता को छोड़कर दादी के दरबार में नतमस्तक होता है, तो माँ स्वयं उसका हाथ थाम लेती हैं। 'भगती में जकड़ लेगी' का अर्थ यहाँ किसी बंधन से नहीं, बल्कि माँ के उस वात्सल्यपूर्ण प्रेम से है जो भक्त को संसार के विकारों से मुक्त कर अपनी भक्ति में सदा के लिए लीन कर लेता है।

दूसरा अंतरा: इस भाग में दादी के चरणों की महिमा का बखान करते हुए कहा गया है कि उनके चरणों में ही समस्त लोक (बैकुंठ) का सुख समाहित है। जो भी भक्त अपनी सुधि-बुध खोकर माँ के चरणों में झुकता है, उसे अलौकिक आनंद और आंतरिक शांति की प्राप्ति होती है। माँ उसकी खाली झोली को समस्त सुख-सौभाग्य और कृपा से भर देती हैं।

तीसरा और चौथा अंतरा: जीवन की चिंताएं मनुष्य को भीतर से खोखला कर देती हैं। भजन आश्वासन देता है कि जैसे ही कोई सच्चे मन से दादी की चौखट पर माथा टेकता है, उसकी सारी चिंताएं माँ की चौखट पर ही समाप्त हो जाती हैं। चरणों की रज (धूल) का स्पर्श मात्र ही मनुष्य के भाग्य को बदल देता है और उसके समस्त दुखों का निवारण हो जाता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • शरणागति का संदेश: यह भजन जीव को भगवान या आराध्य के प्रति पूर्ण समर्पण (शरणागति) का पाठ पढ़ाता है।
  • मानसिक शांति का स्रोत: इसे सुनने या गाने से अवसाद, चिंता और मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है।
  • पारिवारिक और सामूहिक आयोजन: श्री रानी सती दादी के जागरण, मंगला पाठ, भजोत्सव और कीर्तन मेलों में इस भजन को विशेष रूप से गाया जाता है।
  • अटूट विश्वास: यह भक्तों के मन में दादी की शक्ति और उनकी ममता के प्रति विश्वास को और अधिक दृढ़ करता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

भक्ति संगीत का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए उचित विधि और समय का ध्यान रखना आवश्यक माना गया है। इस भजन को निम्नलिखित अवसरों पर गाया जा सकता है:

दैनिक पूजा एवं संध्या वंदन

सुबह स्नान के पश्चात या संध्या के समय जब आप माँ रानी सती की ज्योत प्रज्वलित करते हैं, तब इस भजन का गान अत्यंत फलदायी होता है।

दादी सत्संग एवं मंगला पाठ

सामूहिक सत्संग, महिलाओं के मंगला पाठ और विशेषकर भादवा अमावस्या के पावन पर्व पर इस भजन से माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो जाता है।

श्री रानी सती दादी जी की महिमा एवं पृष्ठभूमि | Deity Background

राजस्थान के झुंझुनू जिले में स्थित श्री रानी सती दादी का धाम देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है। इन्हें शक्ति स्वरूपा, नारायणी देवी और दादी जी के नाम से पूजा जाता है। दादी अपने भक्तों के हर संकट को दूर करने वाली और उन्हें अभयदान देने वाली देवी मानी जाती हैं।

इनकी उपासना करने से घर में सुख, शांति, समृद्धि और पारिवारिक सौहार्द बना रहता है। इस परंपरा से जुड़े रानी सती दादी भजन और श्री रानी सती दादी चालीसा का नियमित पाठ भक्तों को मानसिक संबल प्रदान करता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
चरणों में झुक जा अहंकार छोड़कर नतमस्तक होना पूर्ण शरणागति और विनम्रता का प्रतीक
भगती में जकड़ लेगी प्रेमपूर्ण भक्ति बंधन में बाँध लेना माया से निकालकर ईश्वरीय प्रेम में लीन करना
बैकुंठ समाया है समस्त दिव्य सुखों का वास आंतरिक शांति और परमानंद की प्राप्ति
चरणों की रज चरणों की पवित्र धूल भक्तों के मस्तक पर लगने वाला आशीर्वाद

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम तू चरणों में झुक जा तेरा हाथ पकड़ लेगी
समर्पित देवी श्री रानी सती दादी जी
भाषा सरल हिंदी / ब्रज-राजस्थानी मिश्रित
मुख्य विषय शरणागति, विश्वास और माँ की ममता
भाव (Bhava) भक्ति, समर्पण, विनय और करुणा
उपयुक्त अवसर दैनिक पूजा, जागरण, सत्संग, अमावस्या

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह पावन भजन शक्ति स्वरूपा श्री रानी सती दादी जी को समर्पित है, जो अपने भक्तों के सभी दुखों को हरने के लिए जानी जाती हैं।

इस भजन को आप सुबह की पूजा, संध्या आरती, या किसी भी विशेष अनुष्ठान जैसे कि दादी के जागरण और मंगला पाठ के समय गा सकते हैं।

भजन का मुख्य संदेश 'शरणागति' है। यह सिखाता है कि मनुष्य को अपनी चिंताओं और अहंकार को त्यागकर पूर्ण विश्वास के साथ ईश्वर या अपने आराध्य के चरणों में समर्पित हो जाना चाहिए।

श्री रानी सती दादी चालीसा, रानी सती दादी मनका 108 और उनकी आरती भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय और पावन माने जाते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख श्री रानी सती दादी के भक्तों की धार्मिक भावनाओं, पारंपरिक लोक-साहित्य और प्रामाणिक संकलनों के आधार पर संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसका उद्देश्य पाठकों को सटीक भजन लिरिक्स और उनके आध्यात्मिक अर्थ से अवगत कराना है।

स्रोत एवं संदर्भ

  • • पारंपरिक लोक भजन एवं संगीत परंपरा
  • • श्री रानी सती दादी मंदिर, झुंझुनू से जुड़ी प्रार्थना पुस्तकें
  • • भक्तजनों के संस्मरण एवं संकीर्तन संग्रह

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 19 Oct 2026

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