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ॐ श्री श्याम देवाय नमः लिरिक्स (Om Shree Shyam Devay Namah Lyrics in Hindi) - Shyam Bhajan - Bhaktilok

726 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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भक्ति और अध्यात्म की पावन भूमि पर भगवान श्री श्याम (खाटू श्याम जी) के चरणों में समर्पित ॐ श्री श्याम देवाय नमः महामंत्र और संकीर्तन भजन साधकों के अंतर्मन को जागृत करने वाला एक अत्यंत प्रभावी साधन है। कलियुग के अवतारी हारे के सहारे बाबा श्याम की महिमा अपरंपार है, और उनके महामंत्र का स्मरण करना मात्र से ही जीवन के समस्त कष्टों और दुखों का निवारण हो जाता है। सनातन धर्म में नाम स्मरण को सर्वसुविधाजनक और परम कल्याणकारी मार्ग बताया गया है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम ॐ श्री श्याम देवाय नमः भजन और मंत्र के संपूर्ण लिरिक्स, उसके गहरे आध्यात्मिक अर्थ, भावार्थ, जप विधि, और जीवन में इसके महत्व को विस्तार से समझेंगे ताकि प्रत्येक भक्त खाटू नरेश की अनन्य कृपा प्राप्त कर सके।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

ॐ श्री श्याम देवाय नमः लिरिक्स (Om Shree Shyam Devay Namah Lyrics)


ॐ श्री श्याम देवाय नमः, ॐ श्री श्याम देवाय नमः।
खाटू वाले बाबा तेरा, सुमिरन सुखदायी रे भक्तों का तू रखवाला, महिमा तेरी गाई रे॥

हार के जो दर पे आया, उसने सब कुछ पाया है।
चरणों की धूलि से उसके, भाग्य का ताला खुला है॥
शीश के दाणी तेरी जय हो, तीन बाण धारी तेरी जय हो।
लोटा जल और फूल चढ़ा कर, शीश झुकाते सारे रे॥
ॐ श्री श्याम देवाय नमः, ॐ श्री श्याम देवाय नमः॥

नीले घोड़े पर असवार होकर, तू भक्तों के संग आता है।
संकट मोचन बनकर प्यारे, सबका मान बढ़ाता है॥
कलयुग का भगवान तूही है, सब दुखियों का प्राण तूही है।
तेरे बिना इस सूने मन को, कौन सम्भाले प्यारे रे॥
ॐ श्री श्याम देवाय नमः, ॐ श्री श्याम देवाय नमः॥

जो कोई ध्यावे प्रेम भाव से, उसकी नैया तर जाती है।
श्याम नाम की महिमा निराली, दुनिया सारी गाती है॥
भक्तिकुटिर में गूंजे माला, जपते भक्त सुवाला रे।
ॐ श्री श्याम देवाय नमः, ॐ श्री श्याम देवाय नमः॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन और नाम संकीर्तन भगवान श्री श्याम के प्रति अटूट प्रेम, अगाध श्रद्धा और पूर्ण शरणागति का जीवंत दस्तावेज है। "ॐ श्री श्याम देवाय नमः" का उच्चारण मात्र से ही ब्रह्मांड की सकारात्मक ऊर्जा साधक के चारों ओर एक सुरक्षा कवच का निर्माण कर देती है। भजन की प्रथम पंक्तियों में खाटू वाले बाबा के नाम स्मरण को परम सुखदायी बताया गया है। संसार के बंधनों और दुखों से घबराया हुआ मनुष्य जब खाटू नरेश के दरबार में पहुंचता है, तो उसे हारे के सहारे का वास्तविक अनुभव होता है।

महाभारत काल के प्रतापी योद्धा बर्बरीक, जिन्हें भगवान श्री कृष्ण ने कलयुग में अपने 'श्याम' नाम से पूजे जाने का वरदान दिया था, आज भी अपने भक्तों के हर संकट का निवारण करते हैं। भजन में 'शीश के दाणी' और 'तीन बाण धारी' कहकर उनकी उस महान त्याग की महिमा का गुणगान किया गया है, जो उन्होंने अपने आराध्य को शीश दान कर के दिखाया था। इस भजन का मुख्य दार्शनिक संदेश यह है कि मनुष्य चाहे कितने भी संकटों से क्यों न घिरा हो, यदि वह सच्चे मन से बाबा श्याम के चरणों में ध्यान लगाता है, तो उसकी नौका भवसागर से पार लग जाती है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

श्याम भजन और संकीर्तन की भारतीय संस्कृति में एक विशिष्ट परंपरा रही है। इस भजन की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • नाम प्रभाव: 'ॐ श्री श्याम देवाय नमः' का जाप मानसिक शांति और एकाग्रता प्रदान करता है।
  • शरणागति का भाव: यह भजन साधक को अहंकार त्याग कर प्रभु के चरणों में समर्पित होने की प्रेरणा देता है।
  • संकट निवारण: खाटू श्याम जी को 'हारे का सहारा' माना जाता है, और यह भजन निराशा में आशा का संचार करता है।
  • सर्व सुलभ भक्ति: इस मंत्र और भजन को किसी भी आयु वर्ग का व्यक्ति आसानी से गा और जप सकता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

भक्ति संगीत और मंत्र संकीर्तन के लिए समय और पवित्रता का विशेष महत्व होता है:

  • प्रातःकाल एवं संध्या वंदन: सुबह स्नान के पश्चात पूजा घर में दीप प्रज्वलित कर इस भजन का गान अत्यंत फलदायी है।
  • श्याम बाबा के कीर्तन में: एकादशी, द्वादशी या फाल्गुनी मेलों के दौरान सामूहिक संकीर्तन में इसे विशेष रूप से गाया जाता है।
  • मानसिक जप: यात्रा करते समय या कार्य के दौरान मन ही मन 'ॐ श्री श्याम देवाय नमः' का जाप मानसिक तनाव को दूर करता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के केंद्र में भगवान श्री श्याम (बर्बरीक) हैं, जो वास्तव में भगवान श्री कृष्ण के ही कलयुग में पूजित स्वरूप हैं। घटोत्कच के पुत्र और मूर दैत्य के पौत्र बर्बरीक ने अपनी तपस्या से देवताओं को प्रसन्न किया था। उनके महान बलिदान से प्रसन्न होकर भगवान श्री कृष्ण ने उन्हें अपने नाम 'श्याम' से पूजित होने का वरदान दिया। राजस्थानी लोक संस्कृति और उत्तर भारत की भक्ति परंपरा में संत महात्माओं और भक्तों ने श्याम बाबा की महिमा को घर-घर तक पहुँचाया है। आप श्री बांके बिहारी चालीसा के माध्यम से कृष्ण भक्ति की इस अनवरत धारा को और अधिक गहराई से समझ सकते हैं।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

श्याम बाबा के भजन सदियों से लोक परंपरा, संतों के प्रवचन और खाटू धाम की यात्राओं के दौरान रचे और गाए जाते रहे हैं। 'ॐ श्री श्याम देवाय नमः' मूल रूप से एक बीज मंत्र आधारित संकीर्तन पद है जिसे आधुनिक संगीतकारों और पारंपरिक भजन गायकों ने सुंदर धुनों में ढाला है। यह भजन खाटू धाम की पावन माटी, वहां जलने वाली अखंड ज्योति और बाबा के दरबार में गूंजने वाले जयकारों से प्रेरित है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

यह भजन सरल हिंदी, ब्रज भाषा और राजस्थानी लोक शब्दावली के मधुर मिश्रण से सुसज्जित है। इसमें अनुप्रास और रूपक अलंकार का सहज प्रयोग हुआ है। शब्दों की सरलता ऐसी है कि एक साधारण ग्रामीण से लेकर आधुनिक शहर का वासी भी इसके भाव को तुरंत आत्मसात कर लेता है। भाषा की यह सुगमता ही इस भजन की लोकप्रियता का मुख्य रहस्य है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन केवल शब्दों का मेल नहीं है, बल्कि जीवन जीने की एक कला सिखाता है:

  • अहंकार का त्याग: बर्बरीक जी ने अपना शीश हंसते-हंसते दान कर दिया, जो सिखाता है कि अहंकार का त्याग ही भगवान प्राप्ति का मार्ग है।
  • अटल विश्वास: कठिन परिस्थितियों में भी ईश्वर पर अटूट विश्वास रखना चाहिए।
  • परोपकार की भावना: हारे हुए और असहाय व्यक्ति की सहायता करना ही सच्ची श्याम भक्ति है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / पद सरल अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
शीश के दाणी अपना सिर दान करने वाले सर्वस्व समर्पण और बलिदान का प्रतीक
तीन बाण धारी तीनों लोकों को भेदने वाले अचूक बाण प्रभु की सर्वशक्तिमानता
नीले घोड़े पर असवार नीले घोड़े (लिल्यां घोड़ा) की सवारी करने वाले शीघ्रता से भक्तों के संकट दूर करने वाले
सुमिरन स्मरण करना या नाम जपना भगवत प्राप्ति का साधन

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"ॐ श्री श्याम देवाय नमः" — इस पवित्र मंत्र का अर्थ है कि हम उन श्री श्याम देव को बारम्बार प्रणाम करते हैं जो सब के स्वामी और रक्षक हैं।
"खाटू वाले बाबा तेरा, सुमिरन सुखदायी रे" — हे खाटू धाम के अधिपति बाबा श्याम! आपका नाम जपना इस संसार के सभी दुखों को दूर करके परम सुख की अनुभूति कराता है।
"हार के जो दर पे आया, उसने सब कुछ पाया है" — जो मनुष्य जीवन में असफल होकर, चारों तरफ से निराश होकर आपके दरबार में आता है, उसे आपकी कृपा से सब कुछ प्राप्त हो जाता है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

श्याम बाबा के स्मरण के लिए निम्नलिखित मंत्र अत्यंत प्रभावी माने जाते हैं:

  • "ॐ बर्बरीकाय विद्महे तीन बाण धाय धीमहि तन्नो श्याम प्रचोदयात्।"
  • "హारे का सहारा बाबा श्याम हमारा।" (लोक प्रसिद्ध स्तुति)
  • आप भगवान श्री हरि के अन्य रूपों के स्मरण के लिए श्री हरि स्तोत्रम् का भी पाठ कर सकते हैं।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम ॐ श्री श्याम देवाय नमः लिरिक्स (Om Shree Shyam Devay Namah Lyrics)
आराध्य देव भगवान श्री श्याम (बर्बरीक / खाटू नरेश)
भाषा हिंदी एवं ब्रज मिश्रित लोक भाषा
प्रमुख विषय शरणागति, नाम संकीर्तन और संकट निवारण
भक्ति भाव प्रेम, समर्पण, श्रद्धा और विश्वास
उपयुक्त अवसर खाटू श्याम दर्शन, एकादशी पूजा, जागरण और सत्संग

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस महामंत्र का जाप कम से कम 108 बार (एक माला) करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। हालांकि, आप दिनभर मानसिक रूप से भी इसका स्मरण कर सकते हैं।

भगवान श्री श्याम महाभारत काल के वीर बर्बरीक हैं। इनका मुख्य मंदिर राजस्थान के सीकर जिले के खाटू गाँव में स्थित है, इसलिए इन्हें खाटू नरेश कहा जाता है।

बर्बरीक ने भगवान श्री कृष्ण को वचन दिया था कि वह युद्ध में हमेशा हारे हुए पक्ष का साथ देंगे। इसी कारण उन्हें कलयुग में 'हारे का सहारा' कहा जाता है जो निराश लोगों की मदद करते हैं।

शुक्ल पक्ष की एकादशी और द्वादशी तिथि खाटू श्याम जी के दर्शन और पूजन के लिए सबसे पवित्र और प्रमुख दिन मानी जाती है।

हाँ, इस भजन को आप अपने घर पर पूजा के दौरान, अकेले या अपने परिवार के साथ सामूहिक रूप से पूरी श्रद्धा के साथ गा सकते हैं।

श्याम बाबा के नीले रंग के घोड़े को 'नंदिवाहन' या लोक भाषा में 'लिल्यां घोड़ा' कहा जाता है।

फाल्गुनी लक्खी मेला प्रतिवर्ष फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी के आसपास आयोजित किया जाता है जिसमें लाखों भक्त पहुंचते हैं।

इस भजन के निरंतर गायन और श्रवण से मन शांत होता है, नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और भगवान श्याम के प्रति अटूट प्रेम व भक्ति भाव जागृत होता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री भक्तीलोक (Bhaktilok.in) के संपादकीय मंडल द्वारा सनातन ग्रंथों, लोक परंपराओं और खाटू श्याम जी से जुड़े ऐतिहासिक एवं पौराणिक संदर्भों के आधार पर तैयार की गई है। इस लेख का उद्देश्य पाठकों को शुद्ध, प्रामाणिक और प्रेरणादायक धार्मिक सामग्री प्रदान करना है। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के अंतर्गत सभी तथ्यों को पूरी श्रद्धा और सटीकता के साथ प्रस्तुत किया गया है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्री महाभारत कथा एवं पर्व
  • स्कंद पुराण एवं प्राचीन लोक कथाएं
  • राजस्थानी भक्ति संगीत एवं संकीर्तन परंपरा
  • खाटू श्याम जी मंदिर ट्रस्ट के ऐतिहासिक विवरण

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 25 Sep 2026

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