Parvati Stotram

जय जय जय बजरंगबली लिरिक्स (Jay Jay Jay Bajarangbali Lyrics in Hindi) - Bajarang Bali Bhajan - Bhaktilok

392 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रस्तावना एवं परिचय

हनुमान भक्तिभाव: संकटमोचन बजरंगबली स्तुति

हनुमान जी की महिमा का गायन करें और अपने जीवन से कठिनाइयों को मिटाने का संकल्प लें।

जय जय जय बजरंगबली जो भी दिल से पुकारे तुमको....-2 उसकी विपदा पल मे टली जय जय जय बजरंगबली। लक्ष्मण के थे प्राण बचाए पर्वत हथेली पर ले आए ऐसी बूटी दी लक्ष्मण को खिल उठी जीवन की कली जय जय जय बजरंगबली॥ रामजी ने संदेशा भिजवाया सीता माँ को यकीन ना आया तब हनुमान ने राम अंगूठी सीता मां की रख दी तली जय जय जय बजरंगबली॥ सेना ने पूंछ में आग लगाई सब सोने की लंका जलाई देखते देखते ही पल भर में सब सोने की लंका जली जय जय जय बजरंगबली॥ हनुमत जो कोई तुम्हे धयातौ उसके दुख कभी निकट ना आता कहता है संदीप जलंधरी करते हो तुम सबकी भली जय जय जय बजरंगबली॥
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह भजन हनुमान जी की कृपा और शक्ति का गुणगान करता है। भजन के आरंभ में 'जय जय जय बजरंगबली' का उद्घोष करके भक्तिक भाव को व्यक्त किया गया है। यह दर्शाता है कि जो भी श्रद्धा और विश्वास के साथ हनुमान जी को पुकारता है, उसके दुखों का निवारण क्षण भर में हो जाता है। 'लक्ष्मण के थे प्राण बचाए' इस पंक्ति में वर्णित है कि कैसे हनुमान जी ने लक्ष्मण को जीवनदान दिया। वह पर्वत को अपनी हथेली पर उठा लाए और संजीवनी बूटी देने में सक्षम हुए। यह दिखाता है कि हनुमान जी कितने बलशाली और करुणाशील हैं।

भजन में यह भी उल्लेखित है कि जब राम ने सीता माता के पास संदेश भेजा, तो माता जी को विश्वास नहीं हुआ। तब हनुमान जी ने राम का अंगूठी दिखाकर उनका ध्यान आकर्षित किया। यह घटना भक्ति और प्रेम के महत्व को दर्शाती है। भक्त जब अपने इष्ट देव को याद करता है, तो न केवल उनकी मुसीबतें दूर होती हैं, बल्कि वे स्थायी रूप से संकटों से मुक्त होते हैं। 'हनुमत जो कोई तुम्हे धयात' का अर्थ है कि यदि कोई सच्चे मन से हनुमान जी का ध्यान करता है, तो उसके दुख कभी उसके निकट नहीं आते।

यह भजन भक्ति मार्ग को दर्शाता है। हनुमान जी की वंदना करते हुए, भक्त सच्चे मन से समर्पण का भाव व्यक्त करते हैं। उनका ध्यान मनुष्य को संकटों से ऊँचा उठाने की क्षमता रखता है। यह भजन भक्ति, प्रेम और समर्पण की शिक्षा देता है, जिसके माध्यम से भक्त अपने जीवन में शांति और खुशहाली की प्राप्ति कर सकते हैं। हनुमान जी को संकटमोचन कहा जाता है, जो व्यक्तियों को मानसिक और आत्मिक संकटों से दूर रखते हैं।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का महत्व पौराणिक संदर्भ से जुड़ा हुआ है, जहाँ रामायण में हनुमान जी को संकटमोचन के रूप में बताया गया है। भगवान श्री राम के भक्त हनुमान जी ने रावण की लंका में जाकर सीता जी का उद्धार किया। उनकी भक्ति से परिभाषित जीवन में दृढ़ता और साहस का संचार होता है। यह भजन उन सभी भक्तों के लिए है जो हनुमान जी की ओर अपनी श्रद्धा और भक्ति प्रकट करना चाहते हैं। पौराणिक कथाओं में हनुमान जी की शक्ति, समर्पण और भक्ति का वर्णन किया गया है, जिससे उनके प्रति भक्तों का प्रेम और अधिक बढ़ता है।

वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें। हनुमान जी की स्तुति करना मानसिक शांति एवं तनाव को कम करने का एक अद्भुत उपाय है। इस भजन का पाठ करने से भक्तों को शक्ति, साहस और आत्मविश्वास मिलता है। जीवन में आने वाले संकट और परेशानियों का समाधान पाना आसान हो जाता है। नियमित रूप से इस भजन का जप करने से आध्यात्मिक उन्नति भी साधित होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पाठ सुबह के समय करना सबसे शुभ माना जाता है। उच्चारण करते समय ध्यान और समर्पण का भाव रखें। एक दिव्य वातावरण बनाने के लिए दीप जलाना और पुष्प अर्पित करना फायदेमंद होगा। मंत्र का जाप करते समय सरल एवं सहज मुद्रा में बैठें, जिससे मन और आत्मा की एकाग्रता बनी रहे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

हनुमान जी की पूजा करने का सबसे अच्छा समय कब है?

हनुमान जी की पूजा के लिए मंगलवार और शनिवार का दिन विशेष महत्व रखता है। ये दिन भक्ति और श्रद्धा से भरे होते हैं। इस दिन भजन का पाठ करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।

क्या यह भजन सुनने से मन की शांति मिलती है?

जी हाँ, 'जय जय जय बजरंगबली' भजन मन को शांति और संतोष प्रदान करने में सहायक है। इसका नियमित श्रवण तनाव को कम करता है और मन को एकाग्र रखने में मदद करता है।

इस भजन का पाठ कैसे करना चाहिए?

इस भजन का पाठ सच्चे मन से ध्यान लगाकर करना चाहिए। अच्छे वातावरण में, दीया जलाते हुए इस भजन को गुनगुनाना चाहिए, जिससे मानसिक शांति एवं सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो सके।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 19 Sep 2026

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