Rani Sati Dadi Bhajan बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

जब जब मेरा मन घबराए लिरिक्स (jab jab mera man ghabraye Lyrics in Hindi) - Rani Sati Dadi Bhajan

रानी सती दादी का लोकप्रिय भजन जब जब मेरा मन घबराए लिरिक्स हिंदी में पढ़ें। संदर्भ एवं व्याख्या सहित संपूर्ण भजन गीत यहाँ प्राप्त करें।

रानी सती दादी का यह अत्यंत हृदयस्पर्शी भजन "जब जब मेरा मन घबराए" उन समस्त भक्तों के लिए एक मजबूत आध्यात्मिक संबल और मानसिक शांति का स्रोत है, जो जीवन की विषम परिस्थितियों, कठिनाइयों और मानसिक द्वंद्वों से जूझ रहे हैं। राजस्थान के प्रसिद्ध ऐतिहासिक और आध्यात्मिक केंद्र झुंझुनूं की कुलदेवी, माँ नारायणी (रानी सती दादी) की महिमा त्रैलोक्य में अपरंपार है। यह पावन भजन केवल एक गीत मात्र नहीं है, बल्कि यह अगाध श्रद्धा, समर्पण और माँ के प्रति अनन्य प्रेम की वह अभिव्यक्ति है जो भक्त को यह विश्वास दिलाती है कि संसार के तमाम दुखों और तूफानों के बीच माँ का वात्सल्यपूर्ण हाथ हमेशा उनके सिर पर है। इस भजन को सुनने और गाने से साधक के मन का संताप दूर होता है और उसमें सकारात्मक ऊर्जा, धैर्य तथा अटूट विश्वास का संचार होता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

जब जब मेरा मन घबराए,
और तकलीफ़ सताती है,
मेरे सिरहाने खड़ी है दादी,
सर पे हाथ फिराती है।
मेरे सिरहाने खड़ी है दादी,
सर पे हाथ फिराती है॥

लोग ये समझे मैं हूँ अकेला,
लेकिन साथ में मैया है,
लोग ये समझे डूब रहा मैं,
चल रही मेरी नैया है।
जब जब तूफां आते हैं,
ये खुद पतवार चलाती है,
मेरे सिरहाने खड़ी है दादी,
सर पे हाथ फिराती है॥

जिसके आंसू कोई ना पोंछे,
कोई ना जिसको प्यार करे,
जिसके साथ ये दुनियाँ वाले,
मतलब का व्यवहार करे।
दुनियाँ जिसे ठुकराती है,
दादी उसे अपनाती है,
मेरे सिरहाने खड़ी है दादी,
सर पे हाथ फिराती है॥

संकट की जब रात घिरे तो,
दीपक बन ये जलती है,
बिना बुलाए दौड़ी आए,
ऐसी माँ की ममता चलती है।
अपने हर इक बच्चे की,
यह विपदा दूर भगाती है,
मेरे सिरहाने खड़ी है दादी,
सर पे हाथ फिराती है॥

जब जब मेरा मन घबराए,
और तकलीफ़ सताती है,
मेरे सिरहाने खड़ी है दादी,
सर पे हाथ फिराती है॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

रानी सती दादी के इस लोकप्रिय भजन का प्रत्येक शब्द भक्त और भगवान (माता) के बीच के पवित्र रिश्ते को गहराई से परिभाषित करता है। पहले पद में रचनाकार कहते हैं कि जब-जब संसार के दुखों, चिंताओं और समस्याओं के कारण भक्त का मन विचलित या घबरा जाता है, तब रानी सती दादी अदृश्य रूप से उसके सिरहाने आकर खड़ी हो जाती हैं और अपने वात्सल्य भरे हाथों से उसके सिर पर हाथ फेरकर उसे ढांढस बंधाती हैं। यह मातृत्व प्रेम की पराकाष्ठा है।

दूसरे अंतरे में भक्त समाज और दुनिया की झूठी तन्हाई का वर्णन करता है। दुनिया के लोग भले ही यह समझें कि संकट के समय व्यक्ति अकेला है और उसकी जीवन रूपी नैया डूबने वाली है, किंतु भक्त को पूर्ण विश्वास है कि उसकी नैया की पतवार स्वयं माँ रानी सती थामे हुए हैं। जब भी जीवन में विपत्ति के तूफान आते हैं, माँ स्वयं आगे बढ़कर उस नैया को सुरक्षित किनारे लगाती हैं।

तीसरे और चौथे अंतरे में माँ की करुणा का जीवंत चित्रण है। दुनिया स्वार्थी है और मतलब का व्यवहार करती है, जो व्यक्ति दुखी है उसे और ठुकराती है; परंतु रानी सती दादी ऐसी करुणा की सागर हैं जो ठुकराए हुओं को गले लगाती हैं। संकट की अंधेरी रातों में वह दीपक बनकर मार्ग दिखाती हैं और बिना बुलाए अपने भक्त की पुकार सुनकर दौड़ी चली आती हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन रानी सती दादी के भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • अगाध मानसिक शांति: इसे सुनने मात्र से चिंता, अवसाद और भय दूर होते हैं।
  • मातृत्व भाव की प्रधानता: इसमें ईश्वर को एक रक्षक के साथ-साथ एक अत्यंत ममतामयी माँ के रूप में चित्रित किया गया है।
  • भक्ति और विश्वास का संगम: यह कठिन समय में भी भगवान पर अटूट विश्वास बनाए रखने की प्रेरणा देता है।
  • लोकप्रियता: झुंझुनूं धाम जाने वाले पदयात्रियों और घर-घर में होने वाले मंगला पाठ व दादी के जागरणों में यह भजन विशेष रूप से गाया जाता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को किसी भी समय सुना या गाया जा सकता है, किंतु इसके गायन के लिए कुछ विशेष अवसर और समय अत्यधिक फलदायी माने जाते हैं:

  • ब्रह्म मुहूर्त या प्रातःकाल: सुबह उठकर स्नान के पश्चात दादी के चित्र के समक्ष दीपक प्रज्वलित करके यह भजन सुनने से पूरा दिन सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर रहता है।
  • संध्याकालीन पूजन: शाम को घर में धूप-दीप दिखाने के समय इस भजन का गान घर की नकारात्मकता को दूर करता है।
  • दादी जी के जागरण एवं मंगला पाठ: श्री रानी सती दादी के मासिक उत्सव, भाद्रपद अमावस्या महोत्सव तथा महिला संगीत व सत्संगों में इस भजन को समूह में गाया जाता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन की आराध्य देवी श्री रानी सती दादी (माँ नारायणी) हैं। राजस्थान के झुंझुनूं में स्थित उनका मुख्य मंदिर पूरे भारतवर्ष के मारवाड़ी और अग्रवाल समाज के साथ-साथ अन्य सभी भक्तों की आस्था का महान केंद्र है। रानी सती दादी को शक्ति, साहस, पतिव्रता धर्म और वात्सल्य की अधिष्ठात्री माना जाता है। संकट के समय अपने भक्तों की रक्षा करने वाली माँ के रूप में इनकी पूजा की जाती है। अधिक जानकारी के लिए आप श्री रानी सती दादी चालीसा का पाठ भी कर सकते हैं।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

यह भजन समकालीन लोक भक्ति संगीत और दादी जी के भजनों की परंपरा का एक अनमोल रत्न है। इसे विभिन्न प्रसिद्ध भजन गायकों द्वारा अपनी मधुर आवाज में गाया गया है। इस प्रकार के भजनों की रचना का मुख्य उद्देश्य आधुनिक जीवन की भागदौड़ और मानसिक तनाव से जूझ रहे इंसानों को आध्यात्मिक संबल प्रदान करना है। लोक परंपरा में इसे मौखिक रूप से और आधुनिक युग में ऑडियो-वीडियो एलबम्स के माध्यम से घर-घर तक पहुँचाया गया है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा अत्यंत सरल, सहज और आम बोलचाल की हिंदी (खड़ी बोली) तथा राजस्थानी लोकभाषा के मिश्रण से युक्त है। इसमें अनुप्रास और उपमा अलंकारों का सुंदर प्रयोग हुआ है। "सिरहाने खड़ी है दादी, सर पे हाथ फिराती है" जैसी पंक्तियाँ सीधे हृदय को स्पर्श करती हैं और श्रोता की आँखों में भावुकता के आंसू ले आती हैं। काव्य शैली गेय और प्रवाहमयी है जिसे कोई भी साधारण व्यक्ति आसानी से गा सकता है.

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें निम्नलिखित महत्वपूर्ण जीवन मूल्य सिखाता है:

  • कभी अकेलापन महसूस न करें: ईश्वर या कुलदेवी की शक्ति हमेशा हमारे साथ होती है।
  • धैर्य और विश्वास: विपरीत परिस्थितियों में भी घबराने के बजाय अपनी श्रद्धा को मजबूत रखना चाहिए।
  • निस्वार्थ प्रेम: माँ का प्यार स्वार्थरहित होता है, और हमें भी जीवन में करुणा का मार्ग अपनाना चाहिए।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल अर्थ संदर्भ / भाव
सिरहाने पास में, सिर के नजदीक दादी का भक्त के हमेशा निकट होना
नैया नाव मानव जीवन या संकट में फंसा जीवन
पतवार नाव चलाने का साधन जीवन की दिशा को नियंत्रित करने वाली शक्ति
ममता माता का स्नेह निस्वार्थ और असीम प्रेम

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"जब जब मेरा मन घबराए, और तकलीफ़ सताती है..."
भावार्थ: जब कभी जीवन में सांसारिक दुखों या समस्याओं के कारण मेरा मन अशांत होता है, तब मेरी माँ रानी सती तुरंत मेरे पास आकर मुझे ढांढस बंधाती हैं।

"लोग ये समझे मैं हूँ अकेला, लेकिन साथ में मैया है..."
भावार्थ: भले ही दुनिया मुझे अकेली समझकर छोड़ दे या मेरा साथ न दे, किंतु मुझे पूर्ण ज्ञान है कि मेरी रक्षा करने वाली जगतजननी मैया हर पल मेरे साथ है।

"जिसके आंसू कोई ना पोंछे... दादी उसे अपनाती है"
भावार्थ: समाज द्वारा उपेक्षित और दुखी व्यक्तियों को जब कोई सहारा नहीं देता, तब रानी सती दादी उन्हें अपनी शरण में लेकर उनका दुःख हर लेती हैं।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

रानी सती दादी की वंदना करते समय निम्नलिखित मंत्र का स्मरण करना अत्यंत शुभ माना जाता है:

ॐ श्री राणीसत्यै नमः ॥

सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तु ते॥

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विवरण जानकारी
भजन का नाम जब जब मेरा मन घबराए (Jab Jab Mera Man Ghabraye)
आराध्य देवी श्री रानी सती दादी जी (माँ नारायणी)
श्रेणी रानी सती दादी भजन (Rani Sati Dadi Bhajan)
भाषा हिंदी / राजस्थानी लोक शैली
मुख्य भाव भक्ति, समर्पण, मातृत्व प्रेम और सांत्वना
उपयुक्त अवसर दैनिक पूजा, जागरण, मंगला पाठ, अमावस्या उत्सव

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह अत्यंत लोकप्रिय भजन राजस्थान के झुंझुनूं की कुलदेवी श्री रानी सती दादी जी (माँ नारायणी) को समर्पित है।

आप इस भजन को किसी भी समय सुन सकते हैं, विशेषकर जब आप मानसिक तनाव, चिंता या किसी संकट से गुजर रहे हों। सुबह के समय या संध्या पूजन के वक्त इसे सुनना अत्यधिक शांति प्रदान करता है।

श्री रानी सती दादी जी का भव्य और मुख्य मंदिर राजस्थान के झुंझुनूं जिले में स्थित है, जहाँ देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।

इस भजन का मुख्य संदेश यह है कि भक्त कभी भी अकेला नहीं होता। संकट के समय ईश्वर और कुलदेवी माँ का असीम वात्सल्य और सुरक्षा कवच हमेशा उसके साथ रहता है।

हाँ, यह भजन दादी जी के मंगला पाठ, महिला संगीत, और घरों में होने वाले साप्ताहिक सत्संगों व जागरणों का एक मुख्य आकर्षण है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री रानी सती दादी भक्तों की परंपरा, लोक आस्था और उपलब्ध भक्ति साहित्य के आधार पर संकलित की गई है। इसका उद्देश्य पाठकों को सटीक और मानसिक शांति प्रदान करने वाले भजन लिरिक्स व भावार्थ उपलब्ध कराना है। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के अंतर्गत इसकी भाषा और गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा गया है ताकि पाठकों को एक प्रामाणिक आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त हो सके।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • रानी सती दादी स्तुति एवं भजन संग्रह
  • भारतीय लोक भक्ति एवं भजन परंपरा
  • श्री रानी सती मंदिर ट्रस्ट, झुंझुनूं - प्रकाशित विवरण

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 10 Oct 2026

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