भक्ति काव्य व भजन मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

दिल मेरा ले गया सांवरिया(Dil Mera Le Gaya Sawariya in Hindi)

दिल मेरा ले गया सांवरिया भजन के लिरिक्स, अर्थ और वीडियो यहाँ पढ़ें। श्री कृष्ण के इस भावपूर्ण भजन का आनंद लें | Bhaktilok

"दिल मेरा ले गया सांवरिया" एक अत्यंत भावपूर्ण और हृदयस्पर्शी भजन है, जो भगवान श्री कृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम, समर्पण और व्याकुलता को व्यक्त करता है। यह भजन भक्ति परंपरा में 'विरह' और 'मिलन' की उस अवस्था को दर्शाता है जहाँ भक्त अपने आराध्य के बिना स्वयं को अधूरा महसूस करता है। 'सांवरिया' यानी श्याम वर्ण वाले श्री कृष्ण, जो अपनी काली कामरिया (काले कंबल) ओढ़कर भक्तों के मन को मोह लेते हैं, इस भजन का केंद्र बिंदु हैं। इसमें मीराबाई, द्रौपदी, नरसी मेहता और भीलनी जैसे महान भक्तों के प्रसंगों को पिरोया गया है, जो यह सिद्ध करते हैं कि प्रभु अपने शरणागत भक्तों की पुकार सुनकर सदैव उनकी सहायता के लिए तत्पर रहते हैं। यह भजन न केवल एक मधुर धुन है, बल्कि यह ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास और प्रेम का एक जीवंत दस्तावेज है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

यो दिल मेरा ले गया सांवरिया, ओढ़ के काली कामरिया,
यो दिल मेरा ले गया सांवरिया, ओढ़ के काली कामरिया!

ये मीरा तुझे पुकारे, रो-रो के नीर बहाए,
ये मीरा तुझे पुकारे, रो-रो के नीर बहाए!
आ के जहर अमृत बना जा सांवरिया, ओढ़ के काली कामरिया!
यो दिल मेरा ले गया सांवरिया, ओढ़ के काली कामरिया!

ये द्रौपदी तुझे पुकारे, रो-रो के नीर बहाए,
ये द्रौपदी तुझे पुकारे, रो-रो के नीर बहाए!
मेरा चीर बढ़ा जा सांवरिया, ओढ़ के काली कामरिया!
यो दिल मेरा ले गया सांवरिया, ओढ़ के काली कामरिया!

यो नरसी तुझे पुकारे, रो-रो के नीर बहाए,
यो नरसी तुझे पुकारे, रो-रो के नीर बहाए!
मेरा भात भरा जा सांवरिया, ओढ़ के काली कामरिया!
यो दिल मेरा ले गया सांवरिया, ओढ़ के काली कामरिया!

ये भीलनी तुझे पुकारे, रो-रो के नीर बहाए,
ये भीलनी तुझे पुकारे, रो-रो के नीर बहाए!
मीठे बेरों को खा जा सांवरिया, ओढ़ के काली कामरिया!
यो दिल मेरा ले गया सांवरिया, ओढ़ के काली कामरिया!

ये गुजरी तुझे पुकारे, रो-रो के नीर बहाए,
ये गुजरी तुझे पुकारे, रो-रो के नीर बहाए!
मेरा घड़ा उठा जा सांवरिया, ओढ़ के काली कामरिया!
यो दिल मेरा ले गया सांवरिया, ओढ़ के काली कामरिया!

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का भावार्थ अत्यंत गहरा है। भक्त यहाँ अपने आराध्य श्री कृष्ण से एक आत्मीय संबंध स्थापित कर रहा है। 'दिल ले जाना' यहाँ सांसारिक अर्थ में नहीं, बल्कि 'आत्म-समर्पण' के अर्थ में प्रयुक्त हुआ है। जब भक्त का मन पूरी तरह से ईश्वर में लीन हो जाता है, तो उसे संसार की कोई वस्तु आकर्षित नहीं करती। भजन में विभिन्न भक्तों के उदाहरण देकर यह बताया गया है कि प्रभु ने कैसे-कैसे संकटों में अपने भक्तों की रक्षा की। मीरा के लिए विष को अमृत बनाना, द्रौपदी की लाज बचाना, नरसी का भात भरना और शबरी (भीलनी) के जूठे बेर खाना—ये सभी प्रसंग प्रभु की करुणा और भक्त-वत्सलता के प्रमाण हैं। यह भजन हमें सिखाता है कि यदि पुकार सच्ची और हृदय से हो, तो प्रभु को आना ही पड़ता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • भक्ति भाव: यह भजन 'दास्य' और 'सख्य' भाव का अद्भुत मिश्रण है।
  • ऐतिहासिक संदर्भ: इसमें पौराणिक कथाओं के माध्यम से ईश्वर की सर्वव्यापकता को दर्शाया गया है।
  • मानसिक शांति: इस भजन का निरंतर श्रवण मन को एकाग्र करने और तनाव मुक्त करने में सहायक है।
  • सांस्कृतिक महत्व: यह भजन भारत के विभिन्न क्षेत्रों में संकीर्तन और सत्संगों में अत्यंत लोकप्रिय है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को किसी भी समय गाया जा सकता है, परंतु संध्या के समय या एकांत में बैठकर इसका गायन करने से विशेष शांति मिलती है। इसे गाते समय मन में श्री कृष्ण के 'सांवरे' स्वरूप का ध्यान करना चाहिए। यदि आप इसे पूजा-अर्चना के बाद गाते हैं, तो यह और भी अधिक प्रभावी होता है। सामूहिक कीर्तन में इसे तालियों के साथ गाने से भक्ति का वातावरण निर्मित होता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द सरल अर्थ संदर्भ
सांवरिया श्याम वर्ण वाले श्री कृष्ण ईश्वर का प्रेमपूर्ण संबोधन
काली कामरिया काला कंबल श्री कृष्ण का ग्वाल-बाल स्वरूप
नीर आंसू/जल भक्ति में व्याकुलता
चीर वस्त्र द्रौपदी की रक्षा का प्रसंग
भात मायके से दिया जाने वाला उपहार नरसी मेहता की कथा

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम दिल मेरा ले गया सांवरिया
आराध्य देव श्री कृष्ण
मुख्य भाव भक्ति, समर्पण, करुणा
भाषा हिंदी/ब्रज मिश्रित
उपयुक्त अवसर सत्संग, कीर्तन, जन्माष्टमी, एकादशी

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह भजन किसी भी समय गाया जा सकता है, विशेषकर जन्माष्टमी और एकादशी के अवसर पर यह अत्यंत प्रिय है।

इसका मुख्य संदेश है कि ईश्वर अपने भक्तों की पुकार को कभी अनसुना नहीं करते और वे सदैव रक्षा के लिए तत्पर रहते हैं।

संबंधित भजन एवं लेख

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

यह सामग्री पारंपरिक भक्ति साहित्य, श्री कृष्ण लीलाओं के संकलनों और लोक-भजन परंपराओं के आधार पर तैयार की गई है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 11 Oct 2026

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