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धीरे-धीरे रे मना धीरे सब कुछ होय दोहे का अर्थ(Dhire Dhire Re Mana Dhire Sab Kuchh Hoy Dohe Ka Arth in Hindi) - Bhaktilok


धीरे-धीरे रे मना धीरे सब कुछ होय दोहे का अर्थ(Dhire Dhire Re Mana Dhire Sab Kuchh Hoy Dohe Ka Arth in Hindi):- 


धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय ।

माली सींचे सौ घड़ा, ॠतु आए फल होय ।


धीरे-धीरे रे मना धीरे सब कुछ होय दोहे का अर्थ(Dhire Dhire Re Mana Dhire Sab Kuchh Hoy Dohe Ka Arth in Hindi) - Bhaktilok


धीरे-धीरे रे मना धीरे सब कुछ होय दोहे का अर्थ(Dhire Dhire Re Mana Dhire Sab Kuchh Hoy Dohe Ka Arth in Hindi):-

कबीर दास जी मन को समझाते हुए कहते हैं कि हे मन! दुनिया का हर काम धीरे धीरे ही होता है। इसलिए सब्र करो। जैसे माली चाहे कितने भी पानी से बगीचे को सींच ले लेकिन वसंत ऋतू आने पर ही फूल खिलते हैं।




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