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दया थोड़ी सी कर दो ना(Daya Thodi Si Kar Do Na lyrics in hindi) | by Nisha Dwivedi - bhaktilok

231 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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श्याम कृपा: दया का अर्चन

इस भजन के माध्यम से भक्त श्याम से दया की प्रार्थना करते हैं, जो जीवन में उम्मीद और आशा का स्त्रोत है।

दया थोड़ी सी कर दो न मेरे दामन को भर दो न लाल मैं भी तुम्हारा हूँ तो फिर क्यों बेसहारा हूँ ओ श्याम मेरे श्याम ............ प्रभु मुझ पे कृपा कर दे तू तो ममता की मूरत है मैं प्यासा हूँ तू सागर है मुझे तेरी ज़रूरत है दया की बूँद बरसाओ मुझे ना और तरसाओ लाल मैं भी तुम्हारा हूँ तो फिर क्यों बेसहारा हूँ दया थोड़ी सी कर दो न ............ सभी का बन गया मैं पर कोई मेरा न बन पाया बड़ी ही आस लेकर के तुम्हारे दर पे मैं आया तुम्ही तो हो मेरी हिम्मत तेरे बिन क्या मेरी कीमत लाल मैं भी तुम्हारा हूँ तो फिर क्यों बेसहारा हूँ दया थोड़ी सी कर दो न ............ मेरे हालात पे माधव हर कोई तंज कसता है तड़पता देख कर मुझको ज़माना खूब हँसता है ये दुनिया लाज की दुश्मन दुखाती है ये मेरा मन लाल मैं भी तुम्हारा हूँ तो फिर क्यों बेसहारा हूँ दया थोड़ी सी कर दो न ............ दुखों की रात है तो क्या सुख का सूरज भी निकलेगा देख कर के मेरे आंसू श्याम तेरा दिल पिघलेगा हलक पे जान है मेरी दया का दान दे दे रे लाल मैं भी तुम्हारा हूँ तो फिर क्यों बेसहारा हूँ दया थोड़ी सी कर दो न ............ ओ श्याम मेरे श्याम ............

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

भजन 'दया थोड़ी सी कर दो ना' में गाया गया भाव बताता है कि भक्त श्याम से दया की याचना कर रहे हैं। पहले चरण में, भक्त कहता है कि वो भी श्याम का है, लेकिन फिर भी वे बेसहारा और दुखी हैं। इस संदर्भ में, 'दया थोड़ी सी कर दो' का अर्थ है कि वे प्रभु की कृपा का अनुभव करना चाहते हैं, और अपनी विवशता एवं कठिनाइयों को दूर करने के लिए श्याम की ओर देख रहे हैं। यह याचना व्यक्त करती है कि जब भक्त संकट में होते हैं, तब परमेश्वर पर reliance करना अति आवश्यक होता है। आगे, भजन में भक्त अपना प्यासापन प्रकट करते हैं और ईश्वर को सागर के रूप में दर्शाते हैं, यह दर्शाता है कि भगवान से प्राप्त आशा और प्रेम के स्रोत का कोई अंत नहीं है।

दूसरे चरण में, भक्त अपनी व्यथा और अपेक्षाएँ व्यक्त करता है। वे बताते हैं कि वे सबके लिए कार्य करने वाले बन गए हैं, लेकिन कोई उनकी समस्या को समझने वाला नहीं है। यह भजन यह दर्शाता है कि शारीरिक और मानसिक संतोष की आवश्यकता होती है और इस संदर्भ में श्याम का दर ही एकमात्र स्थान है जहां पर भक्त का हृदय शांति और प्रेम की खोज करता है। भजन में साधु भाव से यह प्रार्थना की जाती है कि जब दुनिया की हंसी और मजाक उनके हालात पर होती है, तब भी उनके हृदय को साहस देने वाला केवल श्याम ही होता है। यह युगों से चली आ रही भक्तिभाव का एक उदाहरण है, जो ईश्वर से गहन प्रेम की ओर इंगित करता है।

इस भजन में भक्ति मार्ग का सार है, जिसकी मूल भावना भगवान का पक्षपात और संभावित करुणा की याचना है। यहाँ भक्त अपनी सीमा और कमजोरी को स्वीकार करता है और ईश्वर का प्रेम और दया प्राप्त करने के लिए कृतज्ञता के साथ चलने का प्रयास करता है। भगवान के प्रति प्रेम भक्ति का रूप है जहाँ भक्त उनका ध्यान करता है और हर क्षण उनके साथ रहना चाहता है। भक्त का प्रेम और उनकी प्रार्थना एक आंतरिक यात्रा की ओर संकेत करती है, जो न केवल संकट से मुक्त करती है, बल्कि भक्त को आध्यात्मिक उन्नति की ओर भी बढ़ाती है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस प्रार्थना का संदर्भ भारतीय पुराणों तथा भगवद् गीता में विवेचित भक्ति के सिद्धांतों से मिलता है। भक्तिभाव, जो कि भक्त और भगवान के बीच एक सशक्त संबंध का निर्माण करती है, रामायण तथा महाभारत में भी देखने को मिलता है। यहां प्रेम और श्रद्धा का संवाद न केवल भक्त को श्रवणशील बनाता है, बल्कि ईश्वर का ध्यान भी आकर्षित करता है। इस प्रकार, भक्त अपने दुःखों और कष्टों के खिलाफ खड़ा होकर, श्याम की कृपा की प्रतीक्षा करता है, जो हर विपत्ति से पार पाने का साहस देता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का निरंतर पाठ करने से मन को शांति और आत्मिक संतोष प्राप्त होता है। यह मानसिक स्वास्थ्य को भी सुधरता है और प्रेम व दया का अनुभव दिलाता है। भक्ति में लीन होने से आत्म-सुधार की प्रक्रिया आरंभ होती है, जिससे आध्यात्मिक उन्नति होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पाठ सुबह या संध्या के समय करना श्रेयस्कर है। विशेष रूप से भक्ति भाव में, दीप जलाने और फूलों का भोग अर्पित करना उत्तम है। सही मुद्रा में बैठकर एकाग्रता से इसे गाना या सुनना चाहिए, ताकि भावनाओं का पूर्ण संचार हो सके।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश है कि हम भगवान से दया की याचना करें, क्योंकि वे हमेशा हमारे दुखों को सुनते हैं और सहायता करते हैं।

क्या यह भजन किसी विशेष समय पर गाना चाहिए?

यह भजन सुबह या संध्या के समय गाना चाहिए, जिससे मन में शांति और आत्मा में भक्तिभाव का संचार हो।

इस भजन का महत्व क्या है?

इस भजन का महत्व यह है कि यह हमें जीवन के मुश्किल समय में उम्मीद और साहस प्रदान करता है, और ईश्वर की दया के प्रति हमारी उम्मीद को प्रदर्शित करता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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