भक्ति काव्य व भजन बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

अनमोल तेरा जीवन यूँ ही गँवा रहा है लिरिक्स (Anmol Tera Jeevan Yu Hi Gava Raha Hai Lyrics in Hindi) - Vividh Bhajan

अनमोल तेरा जीवन यूँ ही गँवा रहा है भजन लिरिक्स पढ़ें। प्रकाश गांधी द्वारा गाये इस प्रेरणादायी भजन का अर्थ एवं संदर्भ सहित पाठ करें।

भजन (Bhajan)

प्रकाशित तिथि: 2023-08-01 | अद्यतन: 2026 | श्रेणी: आध्यात्मिक भक्ति भजन

मानव जीवन की दुर्लभता, क्षणभंगुरता और आत्म-साक्षात्कार के संदेश को समर्पित अत्यंत पावन और प्रेरणादायी भजन "अनमोल तेरा जीवन यूँ ही गँवा रहा है" भक्ति रस से ओतप्रोत एक उत्कृष्ट रचना है। प्रसिद्ध गायक प्रकाश गांधी (Prakash Gandhi) की मधुर एवं भावपूर्ण वाणी में गाया गया यह भजन हर उस साधक और जिज्ञासु के हृदय को झकझोर देता है जो सांसारिक मोह-माया और प्रपंचों में फंसकर अपने असली गंतव्य को भूल बैठा है। भारतीय संत परंपरा और वेदान्त दर्शन का सार समेटे हुए यह भजन हमें स्मरण कराता है कि यह नर-शारीरिक चोला बार-बार नहीं मिलता। इस विस्तृत और प्रामाणिक मार्गदर्शिका में हम इस भजन के संपूर्ण लिरिक्स, सरल हिंदी अर्थ, भावार्थ, जीवनोपयोगी संदेश और आध्यात्मिक महत्व का गहन अध्ययन करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

अनमोल तेरा जीवन यूँही गँवा रहा है,
किस ओर तेरी मंजिल, किस ओर जा रहा है?
अनमोल तेरा जीवन यूँही गँवा रहा है ||

सपनों की नींद में ही, यह रात ढल न जाये,
पल भर का क्या भरोसा, कहीं जान निकल न जाये!
गिनती की है ये साँसें, यूँही लुटा रहा है,
किस ओर तेरी मंजिल, किस ओर जा रहा है ||

जायेगा जब यहाँ से, कोई न साथ देगा,
इस हाथ जो दिया है, उस हाथ जा के लेगा!
कर्मों की है ये खेती, फल आज पा रहा है,
किस ओर तेरी मंजिल, किस ओर जा रहा है ||

ममता के बन्धनों ने, क्यों आज तुझको घेरा?
सुख में सभी हैं साथी, कोई नहीं है तेरा!
तेरा ही मोह तुझको, कब से रुला रहा है,
किस ओर तेरी मंजिल, किस ओर जा रहा है ||

जब तक है भेद मन में, भगवान से जुदा है,
खोलो जो दिल का दर्पण, इस घर में ही खुदा है!
सुख रूप हो के भी, दुःख आज पा रहा है,
किस ओर तेरी मंजिल, किस ओर जा रहा है ||

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन केवल शब्दों का संकलन नहीं है, बल्कि यह मानव चेतना को जागृत करने वाली एक आध्यात्मिक पुकार है। भजन के प्रत्येक चरण में जीवन की नश्वरता और ईश्वर प्राप्ति के मार्ग पर चलने का गहरा संदेश छिपा है:

प्रथम चरण (मूल्यवान जीवन और गंतव्य): गायक प्रश्न करता है कि हे मानव! तुम्हारा यह जीवन अत्यंत दुर्लभ है—इसे चौरासी लाख योनियों के बाद प्राप्त किया गया है। तुम इसे सांसारिक प्रपंचों में व्यर्थ ही नष्ट कर रहे हो। तुम्हारी असली मंजिल परमात्मा की प्राप्ति है, किंतु तुम किस भ्रमित दिशा में आगे बढ़ रहे हो?

द्वितीय चरण (समय की अनिश्चितता): जीवन की रात अज्ञान और मोह की नींद में यूं ही ढलती जा रही है। मृत्यु का कोई भरोसा नहीं है कि वह पल भर में आ जाए। हमारी श्वासों की गिनती तय है, और हम उन्हें सांसारिक वासनाओं में लुटा रहे हैं।

तृतीय चरण (कर्मों का सिद्धांत): इस लोक से प्रस्थान करते समय कोई भी सगा-संबंधी साथ नहीं जाता। केवल हमारे द्वारा किए गए कर्म ही हमारे साथ यात्रा करते हैं। जैसा हम बोते हैं, वैसा ही काटते हैं—यही सनातन कर्म सिद्धांत है।

चतुर्थ चरण (मोह और ममता के बंधन): परिवार, रिश्ते-नाते और ममता के पाश ने मनुष्य को ऐसा जकड़ा है कि वह सुख के समय तो सब को अपने पास पाता है, किंतु संकट या अंत समय में कोई साथ नहीं देता। केवल अपना ही मोह मनुष्य को जीवनभर रुलाता है।

पंचम चरण (द्वैत भाव और आत्म-दर्शन): जब तक मन में द्वैत (भेदभाव और मैं-तू का भाव) है, तब तक जीव परमात्मा से अलग महसूस करता है। यदि हृदय रूपी दर्पण को साफ कर लिया जाए, तो परमात्मा किसी मंदिर या आसमान में नहीं, बल्कि अपने ही भीतर विराजमान मिलेंगे। आनंद स्वरूप होते हुए भी जीव अज्ञान के कारण दुःख भोग रहा है। इसी प्रेरणा को आत्मसात् करने के लिए भक्त श्री हनुमान चालीसा और अन्य पवित्र स्तोत्रों का स्मरण करते हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • दार्शनिक गहराई: यह भजन वेदान्त के 'कोऽहम्' (मैं कौन हूँ) और आत्म-अवलोकन के सिद्धांत पर आधारित है।
  • वैराग्य भाव की उत्पत्ति: इसे सुनने या गाने से मन में सांसारिक मोह के प्रति विरक्ति और ईश्वर के प्रति सच्ची भक्ति जाग्रत होती है।
  • लोकप्रियता: प्रकाश गांधी जी की सादगी भरी आवाज और दिल को छू लेने वाले संगीत ने इसे घर-घर में लोकप्रिय बना दिया है।
  • शांति और संबल: मानसिक अशांति और अवसाद के समय यह भजन मनुष्य को उसकी वास्तविक पहचान का बोध कराकर आंतरिक शांति प्रदान करता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस प्रकार के आत्म-चिंतनात्मक भजनों को सुनने या गाने का कोई विशेष नियम या बंधन नहीं है, फिर भी आध्यात्मिक लाभ की दृष्टि से:

  • ब्रह्म मुहूर्त या संध्या बेला: सुबह उठने के तुरंत बाद या शाम को शांत वातावरण में इसे सुनना मन को एकाग्र करता है।
  • सत्संग और ध्यान: आध्यात्मिक सत्संग, ध्यान सत्र या एकांत चिंतन के समय यह भजन वैराग्य जगाने में अत्यंत सहायक होता है।
  • मानसिक शांति के लिए: जब भी जीवन में भटकाव या निराशा महसूस हो, इसे शांत चित्त से सुनना चाहिए। इसके साथ ही शिव तांडव स्तोत्र का पाठ भी ऊर्जावान बनाता है।

भजन से जुड़े कलाकार एवं पृष्ठभूमि | Singer & Background

यह भजन पारंपरिक लोक संगीत और संतवाणी शैली से प्रेरित है। इसे लोकप्रिय बनाने में प्रसिद्ध भजन गायक श्री प्रकाश Gandhi का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनकी गायकी में एक खास सादगी, समर्पण और वैराग्य का भाव झलकता है जो श्रोताओं के मन को सीधे छू लेता है। इस प्रकार के भजन भारतीय ग्रामीण और शहरी दोनों ही संस्कृतियों में गहरी आध्यात्मिक छाप छोड़ते हैं।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / पद सरल अर्थ संदर्भित भाव
अनमोल जीवन कीमती दुर्लभ मानव शरीर चौरासी लाख योनियों में सर्वश्रेष्ठ अवसर
गिनती की साँसें सीमित आयु जीवन का हर पल कम होना
कर्मों की खेती किए गए अच्छे-बुरे कर्म जैसी करनी वैसी भरनी का सिद्धांत
ममता के बंधन मोह, परिवार और लगाव सांसारिक प्रपंच जिसमें जीव उलझा रहता है
दिल का दर्पण शुद्ध अंतःकरण मन की पवित्रता जहाँ ईश्वर का वास है

भजन से जुड़े आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

  • समय का सदुपयोग: समय किसी के लिए नहीं रुकता, इसलिए अपने जीवन के हर पल का उपयोग अच्छे कर्मों और ईश्वर स्मरण में करें।
  • मोह का त्याग: अत्यधिक मोह और आसक्ति ही सभी दुखों का मूल कारण है। कर्तव्यों का निर्वाह करें किंतु मोह से दूर रहें।
  • भीतर की तलाश: ईश्वर बाहर किसी मंदिर या तीर्थ में खोजने से पहले अपने भीतर के पवित्र हृदय में विराजमान हैं, आवश्यकता है तो बस अंतर्दृष्टि खोलने की।
  • कर्म प्रधान जीवन: हमारे कर्म ही हमारे सच्चे साथी हैं, अतः हमेशा परोपकार और धर्म के मार्ग पर चलें।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम अनमोल तेरा जीवन यूँ ही गँवा रहा है (Anmol Tera Jeevan Yu Hi Gava Raha Hai)
गायक (Singer) प्रकाश गांधी (Prakash Gandhi)
भाषा हिंदी / सरल ब्रज-अवधि मिश्रित बोलचाल
विषय / थीम वैराग्य, मानव जीवन की दुर्लभता, आत्म-चिंतन और भक्ति
प्रमुख भाव चेतावनी, करुणा, आत्म-बोध और समर्पण
उपयुक्त अवसर सत्संग, ध्यान, एकांत चिंतन और सुबह-शाम की प्रार्थना

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस लोकप्रिय भजन को प्रसिद्ध गायक श्री प्रकाश गांधी (Prakash Gandhi) जी ने अपनी बेहद भावपूर्ण और मधुर आवाज में गाया है।

यह भजन हमें याद दिलाता है कि मानव जीवन अत्यंत दुर्लभ है। इसे सांसारिक मोह-माया और व्यर्थ की चिंताओं में गंवाने के बजाय ईश्वर की भक्ति और अच्छे कर्मों में लगाना चाहिए।

इस भजन को किसी विशेष त्योहार तक सीमित नहीं किया गया है। इसे किसी भी दिन, सत्संग, धार्मिक सभा या दैनिक आत्म-चिंतन के समय सुना और गाया जा सकता है।

इसका अर्थ है कि परमात्मा बाहरी दुनिया या किसी दूर स्थान पर नहीं, बल्कि हमारे अपने शुद्ध हृदय और अंतरात्मा के भीतर ही निवास करते हैं।

ऐसे भजन सुनने से मन का भटकाव कम होता है, मानसिक तनाव दूर होता है, और जीवन के प्रति एक सकारात्मक एवं आध्यात्मिक दृष्टिकोण विकसित होता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री Bhaktilok.in के संपादकीय मानकों के अनुसार पूरी तरह से शुद्धता, प्रामाणिकता और भक्ति भाव को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है। इस लेख में प्रस्तुत भजन के बोल, अर्थ और आध्यात्मिक विश्लेषण पाठकों को सनातन संस्कृति और वेदान्त दर्शन से जोड़ने के लिए संकलित किए गए हैं।

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • पारंपरिक संतवाणी एवं लोक भजन परंपरा
  • वेदान्त दर्शन और आत्म-चिंतन के ग्रंथ
  • भक्तिकालिन कवियों के वैराग्य पद

संबंधित भजन एवं लेख

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!