Durga Bhajan Lyrics मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

श्री दुर्गा स्तुति लिरिक्स (Shree Durga Stuti Lyrics in Hindi) - Durga Stuti

श्री दुर्गा स्तुति का अर्थ, महत्व और भक्ति मार्ग में दी जाती विधि। माँ दुर्गा की कृपा से मीलों बाधाएँ दूर होती हैं।

प्रस्तावना एवं परिचय

श्री दुर्गा स्तुति: माँ दुर्गा का आशीर्वाद

श्री दुर्गा स्तुति सुनने या गाने से मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक सशक्तीकरण प्राप्त होता है।

मिटटी का तन हुआ पवित्रगंगा के स्नान सेअंत करण हो जाये पवित्रजगदम्बे के ध्यान सेसर्व मंगल मांगल्येशिवे सर्वार्थ साधिकेशरण्ये त्रम्बके गौरीनारायणी नमोस्तुतेशक्ति शक्ति दो मुझेकरू तुम्हारा ध्यानपाठ निर्विगन्य हो तेरामेरा हो कल्याणह्रदय सिंहासन पर आबैठो मेरी माँसुनो विनय माँ दिन कीजग जननी वरदानसुन्दर दीपक घी भराकरू आज तैयारज्ञान उजाला माँ करूमेत्तो मोह अन्धकारचंद्र सूर्य की रौशनीचमके चमन अखंडसब में व्यापक तेज़ हैजलवा का प्रचंडजलवा जग जननी मेरीरक्षा करो हमसेदूर करो माँ अम्बिकेमेरे सभी कलेशशरधा और विश्वास सेतेरी ज्योत जलाऊतेरा ही है अश्त्रतेरे ही गुण गाउतेरी अनदभक्त गात कोपढूं में निश्चय धरसाक्षात् दर्शन करूतेरे जगत आधारमन चंचल से बात केसमय जो औगुन होयेदेती अपनी दया सेध्यान न देना कोयमैं अंजान मलिन मनना जानू कोई रीतअत पट वाणी को ही माँसमझो मेरी प्रीतचमन के औगुन बहुत हैकरना नहीं ध्यानसिंहवाहिनी माँ अम्बिकेकरो मेरा कल्याणधन्य धन्य माँ अम्बिकेशक्ति शिवा विशालअनघ अनघ में रम रहीडटी दिन दयाल
साझा करें:

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

श्री दुर्गा स्तुति का मुख्य स्वर हर भाव में माँ दुर्गा की स्तुति करना है। यह भजन अनगिनत दिव्य विशेषताओं और शक्तियों का उल्लेख करता है, जैसे कि सृजन का बल, संरक्षण और बुराई के प्रति सुरक्षा। 'मिटटी का तन हुआ पवित्र' इस तथ्य को संकेत करता है कि जब मनुष्य माँ दुर्गा के ध्यान में लीन होता है, तब उसकी आत्मा शुद्ध होती है। नीचे दी गई पंक्तियों में मां को 'जगदम्बे' के रूप में संबोधित किया गया है, जो सारी सृष्टि की माता हैं। इसके आगे 'शक्ति, शक्ति दो मुझे' वाक्य में हम माँ से आवश्यक ऊर्जा की याचना कर रहे हैं। माँ दुर्गा की कृपा से हमारे समस्त कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

इस स्तुति के भावार्थ को समझते हुए, यह स्पष्ट होता है कि भक्त की आत्मा का गहन जुड़ाव माँ के साथ स्थापित होता है। 'चंद्र सूर्य की रौशनी' से अभिप्रेषित है कि माँ की ऊर्जा से हमारे भीतर का अंधकार समाप्त होता है, जिससे ज्ञान की किरणें चमकती हैं। 'ह्रदय सिंहासन पर आबैठो मेरी माँ' में भक्त अपनी आदर्श स्थिति की कल्पना करता है जहाँ माँ उसके हृदय में निवास करती हैं। यह एक अत्यंत व्यक्तिगत और आंतरिक अनुभव है जो भक्त को सोपान पर ले जाता है, जहाँ वह 'साक्षात् दर्शन' की प्रार्थना करता है। इस प्रकार की भावनाएं भक्ति मार्ग को और भी गहरा बनाती हैं।

श्री दुर्गा स्तुति के माध्यम से भक्ति मार्ग का अनुसरण करते हुए, हम माँ के अधिकार के प्रति समर्पण करते हैं। भक्त का आश्रय लेना, जहाँ 'शरण्ये' शब्दों में झलकता है, माँ के प्रति उनकी पूरी आस्था और विश्वास को दर्शाता है। 'मन चंचल से बात के समय जो औगुन होय' कहने का उद्देश्य है कि हमें ध्यान में स्थिर रहकर गिरने वाले विचारों पर नियंत्रण रखना चाहिए। यह भक्ति का रास्ता न केवल श्रद्धा का, बल्कि स्वयं को गहराई से समझने का भी है। पुनः, इस स्तुति में मौजूद उपासना की प्रक्रिया से यह स्पष्ट होता है कि माँ दुर्गा हमारे जीवन में ताकत, साहस और स्थिरता का स्रोत हैं।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

श्री दुर्गा स्तुति का विशेष महत्व हिंदू धर्म में महाकाली, दुर्गा और शक्ति की पूजा में निहित है। यह स्तुति विभिन्न पुराणों जैसे देवी भागवत पुराण और मार्कंडेय पुराण में देवी की महिमा को उजागर करती है। माँ दुर्गा का संदेश बुराई पर विजय और सदाचार की स्थापना का प्रतीक है। भक्तों के लिए यह स्तुति मानसिक आंतरिक शांति और संतोष की प्राप्ति हेतु एक महत्वपूर्ण साधन है। यह भक्ति का एक ऐसा मार्ग है, जिसके द्वारा भक्त अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। श्री दुर्गा स्तुति का जप मन की शांति को बढ़ाता है और आत्मा को ऊर्जा प्रदान करता है। यह न केवल धार्मिक विश्वास को मजबूत करता है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य में भी सुधार लाता है। इसके नियमित पाठ से कार्यों में बाधाएँ दूर होती हैं और जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है। यह भजन आत्मिक जागरण के लिए मदद करता है और भक्त को दिव्यता की ओर ले जाता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस स्तुति का पाठ सुबह या शाम को किया जाना चाहिए। विशेष रूप से, नवरात्रि के दौरान इसका जप अधिक प्रभावी होता है। पाठ के समय एक दिव्य दीप जलाना और माँ को फूलों का अर्पण करना श्रेयस्कर है। ध्यान मुद्रा में बैठकर पूर्ण मनोयोग से स्तुति का पाठ करना चाहिए, जिससे एकाग्रता और समर्पण के साथ माँ का ध्यान किया जा सके।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

श्री दुर्गा स्तुति को कब और कैसे करना चाहिए?

इस स्तुति का पाठ नवरात्रि, न केवल प्रतिदिन सुबह या शाम को किया जा सकता है। शांतिपूर्ण वातावरण में, माँ के चित्र के समक्ष दीप जलाकर कीजिए।

क्या इस स्तुति के पाठ से माता दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त होता है?

हाँ, इस स्तुति का नियमित पाठ करने से भक्त माता दुर्गा की कृपा प्राप्त कर सकता है, जो उसकी सभी बाधाएँ दूर करती हैं।

क्या भावार्थ में इस स्तुति का खास स्थान है?

इस स्तुति में भावार्थ का गहरा महत्व है, जिसमें भक्त का माँ दुर्गा के प्रति विश्वास, प्रेम और भक्ति को दर्शाया गया है, जो आत्मा को शांति प्रदान करता है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!