Hanuman Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

हनुमान गाथा भाग 1 लिरिक्स (Hanuman Gatha Lyrics in Hindi Part) - Kumar Vishu Hanuman Gatha

कुमार विशु द्वारा गाई गई हनुमान गाथा भाग 1 के लिरिक्स हिंदी में पढ़ें। पवनपुत्र हनुमान के जन्म और महिमा की पावन कथा, संदर्भ एवं व्याख्या सहित।

प्रस्तावना एवं परिचय

मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

 

हम आज पवनसुत हनुमान की कथा सुनाते हैं

पावन कथा सुनाते हैं

वीरों के वीर उस महावीर की गाथा गाते हैं

हम कथा सुनाते हैं

जो रोम-रोम में सिया राम की छवि बासाते हैं

पावन कथा सुनाते हैं

वीरों के वीर उस महावीर की गाथा गाते हैं

हम कथा सुनाते हैं


हे ज्ञानी गुण के निधान जय महाबीर हनुमान

हे ज्ञानी गुण के निधान जय महाबीर हनुमान


पुंजिकस्थला नाम था जिसका

स्वर्ग की थी सुंदरी

वानर राज को जर के जन्मी नाम हुआ अंजनी

कपि राज केसरी ने उससे

ब्याह रचाया था

गिरी नामक संगपर क्या आनंद

मंगल छाया था

राजा केसरी को अंजना का

रूप लुभाया था

देख देख अंजनी को उनका

मान हार्षया था

वैसे तो उनके जीवन में थी

सब खुशहाली

परन्तु गोद अंजनी माता की

संतान से थी खाली

अब सुनो हनुमंत कैसे पवन के पुत्र कहते हैं

पावन कथा सुनाते हैं


बजरंगबली उस महाबली की

गाथा गाते है हम कथा सुनाते हैं

हे ज्ञानी गुण के निधान जय महाबीर हनुमान

हे ज्ञानी गुण के निधान जय महाबीर हनुमान


पुत्र प्राप्ति कारण मां आंजना

तब की थी भारी

मदन मुनि प्रसन्न हुए

अंजना पर अति भारी

बक्तेश्वर भगवान को

जप और तप से प्रशन्न किया

अंजना ने आकाश गंगा का

पावन जल पिया

घोर तपस्या करके

वायु देव को प्रसन्न किया

अंजनी मां को स्पर्श किया

वायु का एक झोंका

पवन देव हो प्रकट उन्हें

फिर पुत्र प्रदान किया

इस कारण बजरंग

पवन के पुत्र कहते हैं

बजरंगबली उस महाबली की

गाथा गाते है हम कथा सुनाते हैं


बजरंगबली उस महाबली की

गाथा गाते है हम कथा सुनाते हैं

हे ज्ञानी गुण के निधान जय महाबीर हनुमान

हे ज्ञानी गुण के निधान जय महाबीर हनुमान


राजा केसरी और अंजना

करते शिव पूजा

शिव भक्ति के बिना नहीं था

काम उन्हें दूजा

हो प्रसन्न शिव प्रकट हुए

तब अंजना वर मांगी

हे शिव शंकर पुत्र मेरा हो

आपके जैसा ही

शिव जी बोले अंजना होगी

पूर्ण तेरी इच्छा

मेरे अंश का 11 रुद्र ही

पुत्र तेरा होगा

जन्म लिये बजरंगी

घट गए संकट के बादल

चैत्र शुक्ल की 15 की

और दिन था शुभ मंगल

बजरंगी तब से शंकर के

अवतार कहते हैं पावन कथा सुनाते हैं

बजरंगबली उस महाबली की

गाथा गाते है हम कथा सुनाते हैं


बजरंगबली उस महाबली की

गाथा गाते है हम कथा सुनाते हैं

हे ज्ञानी गुण के निधान जय महाबीर हनुमान

हे ज्ञानी गुण के निधान जय महाबीर हनुमान


केसरी नंदन का है भक्तों प्यारा था बचपन

झूल रहे थे चंदन के पालने में सुख रंजन

कामकाज में लगी हुई थी तब अंजना रानी

सूरज को फल समझ उन्होंने खाने की ठानी

उड़ने की शक्ति पवन देव ने उनको दे ही दी थी

उड़ने लगे सूरज का फल खाने वाले बजरंगी

वायु देव को चिंता हुई मेरा बच्चा जल ना जाए

सूर्य देव की किरणों से मेरा फूल झुलस ना जाए

वर्फ के जैसी वायु देव यूँ हवा चलाते हैं


बजरंगबली उस महाबली की

गाथा गाते है हम कथा सुनाते हैं

हे ज्ञानी गुण के निधान जय महाबीर हनुमान

हे ज्ञानी गुण के निधान जय महाबीर हनुमान


सूर्य देव ने उनको आते देखा अपनी ओर

समझ गए वह पवन पुत्र है नहीं बालक कोई और

शीतल कर ली सूर्य देव ने अपनी गरम किरणें

पवन पुत्र गुरु रथ पर चढ़कर सूर्य लगे डसने

अमावस्या को जब राहु सर्प डस ने को आया

बजरंगी का खेल देखकर बड़ा ही घबराया

इंद्रदेव को आकर सारा हाल था बतलाया

बोला एक बालक से मैं तो प्राण थोड़ा लाया

इंद्रदेव को साथ में लेकर राहु आते हैं

हम कथा सुनाते हैं


बजरंगबली उस महाबली की

गाथा गाते है हम कथा सुनाते हैं

हे ज्ञानी गुण के निधान जय महाबीर हनुमान

हे ज्ञानी गुण के निधान जय महाबीर हनुमान

* Album: Hanuman Gatha *

* Singer: Kumar Vishu *

वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें।

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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

संकटमोचन हनुमान जी का यह भजन "हनुमान गाथा भाग 1 लिरिक्स (Hanuman Gatha Lyrics in Hindi Part) - Kumar Vishu Hanuman Gatha - Bhaktilok" बल, बुद्धि, विद्या और भक्ति का संचार करने वाला है। कलयुग के जागृत देव श्री हनुमान जी की महिमा अपार है। इस भजन का मुख्य उद्देश्य साधक के भीतर के भय को दूर कर उसमें आत्मगौरव और निष्काम सेवा भाव जागृत करना है।

भजन की चौपाइयों और पंक्तियों में हनुमान जी की लंका दहन, संजीवनी बूटी लाना और प्रभु श्री राम के प्रति अनन्य प्रेम का वर्णन होता है। हनुमान जी की शरण में जाने पर बड़े से बड़ा संकट भी क्षण भर में समाप्त हो जाता है, यही इस भजन की मूल भावना है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

हनुमान चालीसा और सुंदरकांड की भांति ही हनुमान भजनों का विशेष धार्मिक महत्त्व है। हनुमान जी को अष्ट सिद्धि और नौ निधियों के दाता के रूप में पूजा जाता है। इस पावन भजन के गायन से भूत-पिशाच, नकारात्मक ऊर्जा और सभी प्रकार के ऊपरी बाधाओं से मुक्ति मिलती है।

वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें। हनुमान भजन से आत्मविश्वास में अभूतपूर्व वृद्धि होती है, मानसिक रोग जैसे तनाव, अनिद्रा और डिप्रेशन दूर होते हैं। यह छात्रों की बुद्धि और परीक्षा में सफलता के लिए भी रामबाण है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

हनुमान जी की पूजा के लिए मंगलवार और शनिवार का दिन विशेष रूप से निर्धारित है। लाल आसन पर बैठकर, हनुमान जी के सम्मुख चमेली के तेल का दीपक जलाएं और पूरे मनोयोग से इस भजन का संकीर्तन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

हनुमान जी को किस दिन चमेली का तेल चढ़ाना चाहिए?

शनिवार और मंगलवार के दिन हनुमान जी को सिंदूर में चमेली का तेल मिलाकर चढ़ाना अत्यंत शुभ और संकट निवारक माना गया है।

क्या हनुमान भजन परीक्षा के भय को दूर करने में सहायक है?

हाँ, हनुमान जी के भजनों और मंत्रों के संकीर्तन से मन एकाग्र होता है, भय का नाश होता है और याददाश्त बढ़ती है।

शनि दोषों की शांति के लिए हनुमान उपासना क्यों की जाती है?

हनुमान जी ने शनिदेव को रावण के बंधन से मुक्त कराया था, जिसके कारण शनिदेव ने वचन दिया था कि जो हनुमान जी की भक्ति करेगा, उसे शनि जनित पीड़ा नहीं भोगनी पड़ेगी।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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