भक्ति काव्य व भजन मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

बिगड़ी तेरी बनायेगा नाम गणपति का (Bigdi Teri Banayega Lyrics in Hindi) - Ganesh Bhajan LAKHBIR SINGH LAKKHA

लखबीर सिंह लक्खा द्वारा गाए प्रसिद्ध गणेश भजन 'बिगड़ी तेरी बनायेगा नाम गणपति का' के संपूर्ण बोल और हिंदी अर्थ पढ़ें। विघ्नहर्ता की भक्ति का आनंद लें।

प्रथम पूज्य, विघ्नहर्ता और मंगलमूर्ति भगवान श्री गणेश जी की महिमा अपरंपार है। भारतीय सनातन संस्कृति में जब भी किसी मांगलिक कार्य, अनुष्ठान या नई शुरुआत का विचार किया जाता है, तो सबसे पहले गणेश जी का स्मरण किया जाता है। लखबीर सिंह लक्खा द्वारा गाया गया सुमधुर भजन "बिगड़ी तेरी बनायेगा नाम गणपति का" (Bigdi Teri Banayega Lyrics in Hindi) भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है। यह भजन केवल एक भक्ति गीत नहीं, बल्कि उन सभी श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक संबल है जो जीवन के किसी मोड़ पर कठिनाइयों, बाधाओं या निराशा का सामना कर रहे हैं। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस लोकप्रिय भजन के संपूर्ण बोल, सरल हिंदी अर्थ, गायन विधि, आध्यात्मिक महत्व और गणेश उपासना के रहस्यों पर विस्तार से चर्चा करेंगे। यदि आप विघ्नहर्ता के चरणों में अपनी आस्था को सुदृढ़ करना चाहते हैं, तो यह पावन प्रस्तुति आपके अंतःकरण को प्रफुल्लित कर देगी।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

मुखड़ा:

बिगड़ी तेरी बनायेगा नाम गणपति का,
ले के तो देख तू एक बार नाम गणपति का!
बिगड़ी तेरी बनायेगा नाम गणपति का,
ले के तो देख तू एक बार नाम गणपति का!

अंतरा 1:

संकट मोचन विघ्न विनाशन, मंगल मूर्ति देवा,
तीनों लोक पूजते तुझको, करते नित सेवा!
रिद्धि-सिद्धि के दाता हैं, भण्डार भरेंगे ये,
तू दिल से पुकार के देख, संवारेगा ये काम तेरा!
बिगड़ी तेरी बनायेगा नाम गणपति का,
ले के तो देख तू एक बार नाम गणपति का!

अंतरा 2:

मस्तक तिलक विराजे सोहे, मूषक वाहन साजे,
लड्डुओं का भोग लगे और मोदक मन को भावे!
जो भी शरण में आया, खाली हाथ न लौटा,
पार लगाए नैया, बिसरा दे सारे गम तेरा!
बिगड़ी तेरी बनायेगा नाम गणपति का,
ले के तो देख तू एक बार नाम गणपति का!

अंतरा 3:

लखबीर सिंह लक्खा गुण गाए, चरणों में झुक जाए,
गणेश जी की महिमा जो कोई नर गाए!
सुख संपत्ति घर आवे, दुःख सारे मिट जावे,
बन जाए हर बिगड़ा काम, यही है विश्वास मेरा!
बिगड़ी तेरी बनायेगा नाम गणपति का,
ले के तो देख तू एक बार नाम गणपति का!

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस दिव्य भजन के माध्यम से गायक लखबीर सिंह लक्खा जी ने भगवान गणेश की महिमा का अत्यंत सरल और प्रभावी चित्रण किया है। भजन का मुख्य भाव यह है कि मनुष्य जब जीवन की जटिल समस्याओं, असफलताओं और संकटों से घिर जाता है, तब संसार के सारे द्वार बंद प्रतीत होते हैं। ऐसे समय में केवल विघ्नहर्ता गणेश का नाम ही एकमात्र ऐसा संबल है जो मनुष्य की बिगड़ी किस्मत को संवार सकता है। भजन की शुरुआती पंक्तियाँ आह्वान करती हैं कि भक्त को केवल एक बार पूर्ण निष्ठा और समर्पण के साथ गणेश जी का स्मरण करना चाहिए।

आगे की पंक्तियों में गणेश जी को 'संकट मोचन', 'विघ्न विनाशन' और 'मंगल मूर्ति' कहकर संबोधित किया गया है। इसका अर्थ यह है कि वे सभी प्रकार के संकटों को हरने वाले और अमंगल का नाश करने वाले हैं। रिद्धि (समृद्धि) और सिद्धि (बुद्धि व सफलता) के वे स्वामी हैं। जो भी भक्त सच्चे मन से मोदक और लड्डू का भोग लगाकर उनकी वंदना करता है, उसके जीवन से दरिद्रता और दुख हमेशा के लिए दूर हो जाते हैं। इस भजन का मुख्य संदेश यही है कि भगवान गणेश की शरण में जाने वाला कभी निराश नहीं लौटता, बल्कि उसकी नैया भवसागर से पार लग जाती है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

भगवान गणेश सनातन धर्म के उन विशिष्ट देवताओं में हैं जिन्हें 'आद्य देव' यानी सबसे पहले पूजनीय होने का वरदान प्राप्त है। स्वयं आदिदेव महादेव ने उन्हें यह आशीर्वाद दिया था कि किसी भी यज्ञ, पूजा, विवाह या नए कार्य के आरंभ में यदि गणेश जी का पूजन नहीं किया जाएगा, तो वह कार्य सफल नहीं होगा। गणेश चतुर्थी व्रत कथा और संकष्टी चतुर्थी के पावन अवसरों पर इस भजन का श्रवण और गायन विशेष रूप से फलदायी माना जाता है। इस भजन की विशेषता इसकी लयबद्धता और सरलता है, जो बच्चे से लेकर वृद्ध तक हर किसी के जुबान पर आसानी से चढ़ जाती है। इसे सुनने से मानसिक तनाव कम होता है, सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और एकाग्रता बढ़ती है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

भक्ति संगीत की अपनी एक निश्चित ऊर्जा और काल होता है। इस भजन को निम्नलिखित अवसरों पर गाया या सुना जा सकता है:

  • प्रतिदिन प्रातः काल स्नान के पश्चात पूजा घर में दीप प्रज्वलित करते समय।
  • बुधवार के दिन विशेष रूप से भगवान गणेश की आराधना के समय।
  • नया व्यापार, गृह प्रवेश, वाहन खरीदी या किसी भी मांगलिक कार्य के आरंभ से पूर्व।
  • गणेश उत्सव, संकष्टी चतुर्थी और दीवाली जैसे पर्वों पर परिवार के साथ सामूहिक संकीर्तन में।
  • मानसिक अशांति या कार्य में बार-बार बाधा आने पर ध्यान लगाते समय।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के आराध्य देव भगवान श्री गणेश हैं, जो बुद्धि, विवेक, विद्या और सौभाग्य के देवता हैं। उनके गजमुख (हाथी का मस्तक) का स्वरूप हमें यह सिखाता है कि बुद्धि विशाल और गहरी होनी चाहिए। उनके बड़े कान अधिक सुनने (समझने) का प्रतीक हैं और छोटा मुख कम बोलने का संदेश देता है। इस भजन को अपनी सुरीली आवाज से सजाने वाले प्रसिद्ध भजन गायक श्री लखबीर सिंह लक्खा हैं, जिन्होंने अपनी अनूठी शैली से देश-विदेश में माता रानी, हनुमान जी और गणेश जी के भजनों को घर-घर तक पहुँचाया है। उनकी गायकी में एक खास प्रकार की भक्ति और पुकार होती है जो सीधे श्रोता के हृदय को स्पर्श करती है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

लखबीर सिंह लक्खा के गाए अधिकांश भजन पारंपरिक और लोक-भक्ति शैलियों पर आधारित होते हैं, जिन्हें आधुनिक संगीत के साथ संयोजित किया जाता है। "बिगड़ी तेरी बनायेगा नाम गणपति का" रचना इस प्रकार रची गई है कि सामान्य जनमानस आसानी से इसे गा सके। इसकी पृष्ठभूमि में सनातन धर्म की वह सनातन परंपरा है जिसमें संकट के समय भगवान का नाम ही सबसे बड़ा टॉनिक माना गया है। कवि ने शब्दों का चयन करते समय गणेश जी के स्वरूप (मूषक वाहन, मस्तक पर तिलक, मोदक प्रिय) को बहुत ही खूबसूरती से पिरोया है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल और सुबोध हिंदी (खड़ी बोली और ब्रज-अवधि के मिले-जुले लोक स्वरूप) में है, जिसे उत्तर भारत सहित पूरे देश में आसानी से समझा और गाया जा सकता है। काव्य शैली की दृष्टि से इसमें तुकबंदी (Rhyme Scheme) का बहुत सुंदर प्रयोग हुआ है जैसे- 'गण गणपति का', 'सेवा-देवा', 'साजे-भावे'। यह शैली श्रोताओं को झूमने और गाने के लिए प्रेरित करती है। उपमा और रूपक अलंकारों के माध्यम से गणेश जी के स्वरूप का जीवंत वर्णन किया गया है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें जीवन का एक बहुत बड़ा पाठ पढ़ाता है। आधुनिक जीवन की भागदौड़ में मनुष्य अक्सर छोटी-छोटी बाधाओं से विचलित हो जाता है। यह भजन हमें अटूट विश्वास (Faith) रखना सिखाता है। संदेश स्पष्ट है:

  1. समर्पण की भावना: अपने अहंकार को छोड़कर ईश्वर के चरणों में नतमस्तक होना ही सच्ची विजय है।
  2. धैर्य और निरंतरता: जैसे गणेश जी हर विघ्न को अपनी सूंड से हटा देते हैं, वैसे ही हमें जीवन में धैर्य के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
  3. सकारात्मक दृष्टिकोण: निराशा के अंधकार में भी भगवान के नाम का एक दीया आशा की किरण जगा सकता है।
  4. अन्य आध्यात्मिक अनुष्ठानों और स्तोत्रों के बारे में जानने के लिए आप शिव तांडव स्तोत्र और श्री हनुमान चालीसा का पाठ भी अवश्य पढ़ें।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
विघ्न विनाशन बाधाओं को नष्ट करने वाला जो भक्त के जीवन के सभी कष्टों को दूर करे
मंगल मूर्ति कल्याणकारी स्वरूप जिनका दर्शन मात्र ही शुभ फल दायक हो
रिद्धि-सिद्धि समृद्धि और सफलता गणेश जी की दोनों पत्नियाँ जो सफलता प्रदान करती हैं
मोदक एक विशेष प्रकार का लड्डू आनंद और मिष्ठान्न का प्रतीक जो गणेश जी को प्रिय है
मूषक वाहन चूहा है सवारी जिनकी चंचल मन पर नियंत्रण का प्रतीक

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"बिगड़ी तेरी बनायेगा नाम गणपति का, ले के तो देख तू एक बार नाम गणपति का!"
भावार्थ: कवि कहते हैं कि यदि तुम्हारी परिस्थितियाँ प्रतिकूल हैं और बनते हुए काम बिगड़ रहे हैं, तो संसार में भटकने के बजाय केवल एक बार सच्चे हृदय से गणेश जी का नाम लेकर देखो। वे तुम्हारी हर बिगड़ी बात को बना देंगे।

"संकट मोचन विघ्न विनाशन, मंगल मूर्ति देवा, तीनों लोक पूजते तुझको, करते नित सेवा!"
भावार्थ: हे देवा! आप संकटों को हरने वाले और विघ्नों का नाश करने वाले हैं। स्वर्ग, पाताल और मृत्युलोक—तीनों लोकों में सभी देवी-देवता और ऋषि-मुनि आपकी नित्य पूजा और सेवा करते हैं।

"रिद्धि-सिद्धि के दाता हैं, भण्डार भरेंगे ये, तू दिल से पुकार के देख, संवारेगा ये काम तेरा!"
भावार्थ: भगवान गणेश सभी प्रकार की ऐश्वर्य और सफलताओं के प्रदाता हैं। वे आपके जीवन के सभी अभावों को दूर कर देंगे। शर्त यह है कि आप उन्हें कपट छोड़कर सच्चे दिल से पुकारें।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

गणेश जी की वंदना करते समय प्राचीन वैदिक श्लोकों का स्मरण करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। इस भजन के साथ निम्नलिखित प्रसिद्ध श्लोक का जाप करना चाहिए:

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

अर्थात: घुमावदार सूंड वाले, विशाल शरीर वाले, करोड़ों सूर्यों के समान दीप्तिमान हे भगवान गणेश! मेरे सभी कार्य हमेशा बिना किसी बाधा के संपन्न हों, ऐसी कृपा करें। इसके अतिरिक्त ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप भी भगवान शिव और गणेश परिवार की कृपा पाने के लिए किया जाता है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

बिंदु विवरण
भजन का नाम बिगड़ी तेरी बनायेगा नाम गणपति का (Bigdi Teri Banayega)
आराध्य देव भगवान श्री गणेश (विघ्नहर्ता)
गायक / कलाकार श्री लखबीर सिंह लक्खा (Lakhbir Singh Lakkha)
भाषा हिंदी / लोक भाषा
संगीत शैली भक्ति / संकीर्तन भजन
मुख्य भाव संकट निवारण, विश्वास और शरणागति
उपयुक्त अवसर गणेश चतुर्थी, बुधवार पूजा, नया कार्य आरंभ

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस प्रसिद्ध गणेश भजन के लोकप्रिय गायक प्रसिद्ध devotional singer श्री लखबीर सिंह लक्खा जी हैं।

यह भजन बुधवार के दिन, गणेश चतुर्थी व्रत के समय, या किसी भी नए कार्य की शुरुआत से पहले सुनना अत्यंत शुभ माना जाता है।

भगवान गणेश को मोदक, बेसन के लड्डू और दूर्वा घास अत्यंत प्रिय हैं। पूजा के समय इनका अर्पण करना बहुत फलदायी होता है।

क्योंकि वे अपने भक्तों के जीवन में आने वाली सभी बाधाओं, संकटों और विघ्नों को दूर करते हैं, इसलिए उन्हें विघ्नहर्ता कहा जाता है।

हाँ, इस भजन को घर में सुबह की पूजा के समय या संध्या वंदन के दौरान गाने से सकारात्मक ऊर्जा और शांति मिलती है।

रिद्धि का अर्थ भौतिक समृद्धि, ऐश्वर्य और सफलता है, जबकि सिद्धि का अर्थ आध्यात्मिक प्रगति, बुद्धि और विशिष्ट योग्यताओं से है।

भगवान गणेश का वाहन मूषक (चूहा) है। चूहा मन की चंचलता का प्रतीक है, जिस पर गणेश जी नियंत्रण रखते हैं।

हाँ, इस भजन के बोल देवनागरी लिपि के साथ-साथ अंग्रेजी (Roman Script) में भी इंटरनेट पर उपलब्ध हैं ताकि युवा पीढ़ी आसानी से पढ़ सके।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख भक्तिलोक (Bhaktilok.in) के संपादकीय मानकों के अनुसार पूरी तरह प्रमाणित, धार्मिक परंपराओं का सम्मान करने वाला और शुद्ध हिंदी में तैयार किया गया है। इस पृष्ठ पर दी गई समस्त जानकारी पारंपरिक स्रोतों, गणेश पुराण के संदर्भों और लोक प्रचलित संकीर्तन परंपराओं पर आधारित है। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के अंतर्गत पाठकों की सुविधा और प्रामाणिकता का विशेष ध्यान रखा गया है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • गणेश पुराण एवं मुद्गल पुराण के प्रामाणिक प्रसंग
  • पारंपरिक हिंदी भजन संकलन एवं लोकगीत परंपरा
  • श्री लखबीर सिंह लक्खा द्वारा प्रस्तुत भजन एल्बम एवं ऑडियो रिकॉर्डिंग
  • सनातन धर्म की दैनिक पूजा पद्धतियाँ एवं संकीर्तन ग्रंथ

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संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 11 Oct 2026

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