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श्री लक्ष्मी अमृतवाणी लिरिक्स (Shree Lakshmi Amritwani Lyrics in Hindi) - Laxmi Amritwani By Kavita Paudwal - Bhaktilok

497 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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श्री लक्ष्मी अमृतवाणी: धन और सुख की आराधना

श्री लक्ष्मी अमृतवाणी का जप कर, धन, वैभव और सुख को आकर्षित करें।

 श्री लक्ष्मी अमृतवाणी लिरिक्स (Shree Lakshmi Amritwani Lyrics in Hindi) - विश्वप्रिया कमलेश्वरी लक्ष्मी दया निधानतिम्र हरो अज्ञान का ज्ञान का दो वरदानआठो सिद्धिया द्वार तेरे खड़ी है माँ कर जोड़निज भक्तन की लाज को तट की ओर तू मोड़निर्धन हम लाचार बड़े तू है धन का कोषसुख की वर्षा करके माँ कर लो मन का दोषजीवन चंदा को मैया ग्रहण लगा घनघोरडगमग डोले पग हमरे हम मानव कमजोरजय लक्ष्मी माता जय लक्ष्मी मातामहसुखदाई नाम तेरा कर कष्टों का अंतमरुस्थल जैसी ये काया दे दो इसे बसंतदिव्या रूप नारायणी पारस है तेरा धामतेरे सुमिरन से होते संतन के सिद्ध कामस्वर्ण सी तेरी कांति भय का करती नाशतेरी करुणा से टूटे हर जंजाल का पाशमैया शोक विनाशिनी ऐसा करो उपकारजीवन नौका हो जाए भवसिंधु से पारजय लक्ष्मी माता जय लक्ष्मी माताशेष की सैया बैठ के सकल विश्व को देखतेरी दृष्टि में मैया हर मस्तक की रेखसिंधु सुता भागेश्वरी दीजो भाग्य जगायताज के जग को हम तेरी शरण गए है आयतू वैकुण्ठ निवासिनी हम नर्को के जीवप्राणहीन ये देहि कहे करदो हमें सजीवकमला वैभव लक्ष्मी सुख सिद्धि तेरे पाससागर तट पे हम प्यासे मैया बुझा दो प्यासजय लक्ष्मी माता जय लक्ष्मी माताधन धान्य से घर हमरे सदा रहे भरपूरहर्ष के फूल खिलाय के कांटे करदो दूरतेरी अलौकिक माया से भागे दुःख संतापरोम रोम माँ करे तेरा मंगल का ही जापहर की है अर्धांगिनी कृपा की दृष्टि करअन्न धन संपत्ति से माँ भरा रहे ये घरसागर मंथन से प्रकटी ज्योति अपरम्पारमन से चिंतन हम करे सबकी चिंता हारजय लक्ष्मी माताजय लक्ष्मी माताजय लक्ष्मी माताजय लक्ष्मी माताजय लक्ष्मी माताजय लक्ष्मी माताजय लक्ष्मी माताजय लक्ष्मी माता ||

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

श्री लक्ष्मी अमृतवाणी में देवी लक्ष्मी की महिमा और कृपा का बखान किया गया है। यह भजन विशेष रूप से समृद्धि, धन, और सुख का वरदान मांगता है। पहले पंक्तियों में लक्ष्मी देवी को 'दया निधान' बताया गया है, यह संकेत देता है कि वे दया और करुणा का सागर हैं। भक्तों की लाज को पहचान कर, माता उनकी कठिनाइयों को कम करने के लिए सदा तत्पर हैं। दूसरी पंक्ति 'निर्धन हम लाचार' यह संदेश देती है कि सभी प्राणी (विश्व) उनके दरवाजे पर खड़े हैं, उनकी कृपा के लिए। सम्पत्ति और सुख की वर्षा का प्रतिज्ञा करना 'कर लो मन का दोष' का आशय है कि हमें अपनी आत्मा को पवित्र करते हुए लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करनी चाहिए।

यह भजन केवल भौतिक धन की कामना तक सीमित नहीं है, बल्कि आत्मिक शांति की भी प्रार्थना करता है। 'जीवन चंदा' की उपमा देकर देख सकते हैं कि कैसे देवी लक्ष्मी हमारे जीवन में सुख-समृद्धि का प्रकाश लाती हैं। 'हर जंजाल का पाश' तोड़ने का आग्रह इस तथ्य को दर्शाता है कि मां की करुणा से सारे दुःख और समस्याएं समाप्त हो सकती हैं। इस प्रकार इस अमृतवाणी के माध्यम से भक्त अपने हृदय में स्थायी शांति और सच्चे भक्ति भाव का अनुभव कर सकता है। माता के गुणों का वर्णन करते हुए, 'स्वर्ण सी तेरी कांति' यह संकेत करती है कि लक्ष्मी का दर्शन मात्र ही भक्ति के प्रभाव को बढ़ा देता है।

यहां की मुख्य बिंदु भक्ति मार्ग का अनुसरण करना है। भक्त को विश्वास है कि देवियों के प्रति निष्ठा और भिक्षाटन से वे अपनी मनोकामनाएं पूरी कर सकते हैं। 'भगवान की कृपा' का यह आशीर्वाद निम्नलिखित सिद्धियों की प्राप्ति का प्रतीक है। भक्ति मार्ग का अनुसरण करते हुए, भक्तों को हमेशा संतोष रहना चाहिए और मातृ रूप में देवी को मानना चाहिए। देवी लक्ष्मी की आराधना करने से साधकों को न केवल भौतिक सुख मिलेगा, बल्कि आध्यात्मिक उत्थान भी होगा। यह पूर्णता की ओर ले जाने का मार्ग है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

श्री लक्ष्मी अमृतवाणी का संदर्भ भारतीय पौराणिक कथाओं में लक्ष्मी देवी की पूजा से जुड़ा हुआ है। देवी लक्ष्मी, जिन्हें धन, वैभव, और समृद्धि की देवी माना जाता है, की महिमा का वर्णन कई पुराणों में मिलता है। विशेष रूप से, इस भजन में लक्ष्मी पूजन के समय किए जाने वाले अनुष्ठानों और प्रार्थनाओं को समाहित किया गया है। भागवत पुराण और अन्य प्रमुख लेखों में लक्ष्मी के स्वरूप का विस्तार से वर्णन किया गया है, जिसमें कहा गया है कि वे भगवान विष्णु की अर्धांगिनी हैं। उनका स्मरण प्राणी की भौतिक और आध्यात्मिक समृद्धि की ओर ले जाता है।

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। श्री लक्ष्मी अमृतवाणी का पाठ करने से व्यक्ति की मानसिक स्थिति में सुधार होता है और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। इसके नियमित उच्चारण से जीवन में सुख, शांति, और समृद्धि की इच्छा पूरी होती है। भक्त इस स्तोत्र का जाप करके लक्ष्मी माता की कृपा प्राप्त करते हैं, जिससे घर में आनंद और खुशहाली बनी रहती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस अमृतवाणी का पाठ सुबह या शाम के समय करना सर्वोत्तम होता है। पूजा के दौरान एक दिव्य दीप जलाएं और देवी लक्ष्मी को स्वच्छ वस्त्र और फल-फूल अर्पित करें। ध्यान करें कि आपका मन पूरी तरह से लक्ष्मी माता की ओर केंद्रित हो। अवसर पर संकल्प लें कि आप अपने जीवन में उनकी उपासना करेंगे और सदैव उनके गुणों का पुनरुच्चारण करेंगे।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

श्री लक्ष्मी अमृतवाणी का पाठ किस समय करना चाहिए?

श्री लक्ष्मी अमृतवाणी का पाठ सुबह या शाम के समय किया जाना चाहिए, जब वातावरण शांत और मनन के लिए उपयुक्त हो।

क्या इस भजन के पाठ से धन प्राप्ति होती है?

हां, इस भजन का नियमित पाठ करने से देवी लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है, जो धन, वैभव और समृद्धि को आकर्षित करती है।

इस अमृतवाणी का पाठ करने के क्या लाभ हैं?

इस अमृतवाणी का पाठ मानसिक तनाव को कम करता है, समृद्धि और शांति की भावना को बढ़ावा देता है और भक्तों को लक्ष्मी माता की कृपा प्राप्त होती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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