श्री हनुमान अमृतवाणी (Shree Hanuman Amritwani) भगवान शिव के ग्यारहवें रुद्रावतार, परम रामभक्त श्री हनुमान जी की महिमा, शक्ति, भक्ति और करुणा का एक अत्यंत पावन और दिव्य संकलन है। अनुराधा पौडवाल जी की मधुर और भावपूर्ण आवाज में गाई गई यह अमृतवाणी भक्तों के हृदय में अनन्य भक्ति, साहस और मानसिक शांति का संचार करती है। हनुमान जी को कलयुग के जाग्रत देव माना जाता है, जो अपने भक्तों के सभी संकटों, भयों और बाधाओं को क्षण भर में दूर कर देते हैं। इस अमृतवाणी का नियमित श्रवण और पाठ न केवल नकारात्मक ऊर्जा का नाश करता है, बल्कि साधक में आत्मविश्वास, बल, बुद्धि और विद्या का विकास भी करता है। इस लेख में हम श्री हनुमान अमृतवाणी के सम्पूर्ण लिरिक्स, उनके गहरे आध्यात्मिक भावार्थ, गायन विधि, कठिन शब्दों के अर्थ और इससे मिलने वाले दिव्य लाभों का सविस्तार अध्ययन करेंगे।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
॥ दोहा ॥
आदि देव नमस्तुभ्यं सप्तर्षि पूजिताय च।
रामदूत नमस्तुभ्यं वायुपुत्र नमोऽस्तुते॥
॥ चौपाई ॥
हनुमान अमृतवाणी सुखदाई, जो गावे सो परम पद पाई।
अंजनी नंदन वीर अपारा, संकट मोचन नाम तुम्हारा॥
केसरी नंदन पवन कुमारा, दुष्ट दलन जन जन के प्यारा।
राम काज सब तुम ही संवारे, लक्ष्मण के तुम प्राण उबारे॥
द्रोणगिरी पर्वत ले आए, संजीवनी ला प्राण बचाए।
सीता की सुध लेने आए, लंका जारि के राम रिझाए॥
विभीषण को तुम धीर बंधाया, राज विभीषण को दिलवाया।
सुग्रीव का दुख दूर किया था, राम मिलाप करा ही दिया था॥
कोटि देव तुमको शीश नवाएं, यक्ष गंधर्व सब महिमा गाएं।
जो भी शरण तुम्हारी आए, उसके सब संकट मिट जाए॥
जय जय जय हनुमान गोसाईं, कृपा करो गुरुदेव की नाईं।
जो शत बार पाठ कर जोई, छूटहि बंदि महा सुख होई॥
चारों जुग परताप तुम्हारा, है प्रसिद्ध जगत उजियारा।
साधु संत के तुम रखवारे, असुर निकंदन राम दुलारे॥
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता, अस बर दीन जानकी माता।
राम रसायन तुम्हरे पासा, सदा रहो रघुपति के दासा॥
तुम्हरे भजन राम को पावै, जनम जनम के दुख बिसरावै।
अंतकाल रघुबर पुर जाई, जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई॥
और देवता चित्त न धरई, हनुमत सेइ सर्ब सुख करई।
संकट कटै मिटै सब पीरा, जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥
॥ दोहा ॥
पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
श्री हनुमान अमृतवाणी का मुख्य भाव भगवान हनुमान जी की शरणागति और उनकी असीम कृपा का गुणगान करना है। इस अमृतवाणी के माध्यम से भक्त अपने आराध्य के प्रति पूर्ण समर्पण व्यक्त करता है। हनुमान जी को 'संकटमोचन' कहा गया है, जिसका अर्थ है दुखों और कष्टों को हरने वाला। जब हम इस अमृतवाणी का पाठ करते हैं, तो हम हनुमान जी के उन महान कार्यों को याद करते हैं जो उन्होंने प्रभु श्री राम के लिए किए थे।
इस अमृतवाणी का केंद्रीय संदेश यह है कि जो व्यक्ति हनुमान जी की शरण में आता है, उसे किसी भी प्रकार का भय नहीं रहता। चाहे वह भूत-प्रेत का भय हो, ग्रहों का दोष हो या मानसिक अशांति हो, हनुमान जी के नाम स्मरण मात्र से सब दूर हो जाते हैं। अनुराधा पौडवाल जी के स्वर में यह अमृतवाणी सीधे आत्मा को स्पर्श करती है और साधक को ध्यान की उच्च अवस्था में ले जाती है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
श्री हनुमान अमृतवाणी केवल एक भजन नहीं है, बल्कि यह एक शक्तिशाली आध्यात्मिक कवच है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
- भय और चिंता से मुक्ति: हनुमान जी को बल और बुद्धि का प्रदाता माना गया है। इस अमृतवाणी के नियमित श्रवण से मन का अज्ञात भय समाप्त होता है।
- सकारात्मक ऊर्जा का संचार: इसके दिव्य शब्द घर और कार्यस्थल से नकारात्मक शक्तियों को दूर भगाते हैं और सकारात्मकता का संचार करते हैं।
- राम भक्ति की प्राप्ति: हनुमान जी की कृपा के बिना भगवान राम की भक्ति प्राप्त होना असंभव है। यह अमृतवाणी भक्त को प्रभु राम के भी निकट लाती है।
- मानसिक एकाग्रता: विद्यार्थियों और पेशेवरों के लिए इसका पाठ अत्यंत लाभकारी है क्योंकि यह मस्तिष्क को शांत और एकाग्र बनाता है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
हनुमान अमृतवाणी का पाठ करने के लिए कुछ विशेष नियम और समय निर्धारित किए गए हैं, जिनका पालन करने से साधक को शीघ्र और सर्वोत्तम फल प्राप्त होता है:
- शुभ दिन: वैसे तो इसका पाठ प्रतिदिन किया जा सकता है, परंतु मंगलवार और शनिवार के दिन इसका विशेष महत्व है।
- सर्वोत्तम समय: ब्रह्ममुहूर्त (सुबह 4 से 6 बजे) या संध्याकाल में इसका पाठ करना सबसे अधिक फलदायी माना जाता है।
- पूजा विधि: पाठ शुरू करने से पहले स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ लाल या पीले वस्त्र धारण करें। हनुमान जी की प्रतिमा के समक्ष चमेली के तेल का दीपक या शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें।
- भोग: हनुमान जी को बूंदी के लड्डू, गुड़-चना या तुलसी दल अर्पित करें। इसके बाद शांत चित्त होकर अमृतवाणी का पाठ करें या श्रवण करें।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
यह अमृतवाणी मुख्य रूप से भगवान शिव के अंशावतार श्री हनुमान जी को समर्पित है। हनुमान जी को अष्टचिरंजीवियों में से एक माना जाता है, जो आज भी पृथ्वी पर सशरीर उपस्थित हैं। इनके साथ ही, इस भजन में प्रभु श्री राम, माता सीता, भ्राता लक्ष्मण और जानकी माता का भी स्मरण किया गया है।
इस अमृतवाणी के भाव गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित श्री हनुमान चालीसा और रामचरितमानस के सुंदरकांड से अत्यधिक प्रेरित हैं। संतों का मानना है कि हनुमान जी की आराधना करने से सभी नौ ग्रहों के दोष, विशेषकर शनिदेव की साढ़ेसाती और ढैय्या का कुप्रभाव शांत हो जाता है।
भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background
हनुमान अमृतवाणी पारंपरिक लोक भजनों और शास्त्रीय चौपाइयों का एक सुंदर मिश्रण है। इसकी पृष्ठभूमि रामायण काल के उन प्रसंगों पर आधारित है जहाँ हनुमान जी ने अपनी अतुलनीय शक्ति और बुद्धि से असंभव कार्यों को संभव बनाया। चाहे वह समुद्र लांघना हो, लंका दहन करना हो, या द्रोणगिरी पर्वत उठाकर लाना हो, हनुमान जी ने हर बार अपनी स्वामीभक्ति का परिचय दिया। आधुनिक समय में, टी-सीरीज और अनुराधा पौडवाल जी के सहयोग से इस अमृतवाणी को घर-घर में पहचान मिली और यह आज भी सबसे लोकप्रिय हनुमान भजनों में से एक है।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
इस अमृतवाणी की भाषा सरल, सुबोध और प्रवाहमयी अवधी व हिंदी मिश्रित है। इसमें चौपाई और दोहा छंद का प्रयोग किया गया है, जो भारतीय काव्य परंपरा की रीढ़ हैं। इसकी काव्य शैली में 'वीर रस' और 'भक्ति रस' का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। सरल शब्दों के प्रयोग के कारण इसे बच्चे से लेकर वृद्ध तक आसानी से समझ और गा सकते हैं। इसमें प्रयुक्त रूपक और उपमाएं हनुमान जी के विराट स्वरूप को सजीव कर देती हैं।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
श्री हनुमान अमृतवाणी हमें केवल भक्ति ही नहीं सिखाती, बल्कि जीवन जीने के कई महत्वपूर्ण सूत्र भी प्रदान करती है:
- निःस्वार्थ सेवा (Seva Bhava): हनुमान जी ने कभी भी अपने लिए कुछ नहीं मांगा। उनका पूरा जीवन प्रभु राम की सेवा में समर्पित था। हमें भी समाज और परिवार के प्रति कर्तव्यनिष्ठ होना चाहिए।
- संकट में धैर्य: जब लक्ष्मण जी मूर्छित हुए, तब हनुमान जी विचलित नहीं हुए बल्कि तुरंत संजीवनी बूटी लेने निकल पड़े। यह हमें सिखाता है कि संकट के समय घबराने के बजाय समाधान ढूंढना चाहिए।
- विनम्रता (Humility): असीम शक्तियों के स्वामी होने के बावजूद हनुमान जी अत्यंत विनम्र हैं। वे स्वयं को हमेशा 'रामदूत' और 'दासा' ही कहते हैं।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / वाक्यांश | सरल हिंदी अर्थ | आध्यात्मिक संदर्भ |
|---|---|---|
| अतुलितबलधामा | असीमित बल के घर (स्रोत) | हनुमान जी की अनंत शारीरिक और मानसिक शक्ति का प्रतीक। |
| असुर निकंदन | राक्षसों का नाश करने वाले | हमारे भीतर की बुराइयों और नकारात्मक विचारों को नष्ट करने वाले। |
| राम रसायन | राम नाम रूपी औषधि | संसार के सभी दुखों को दूर करने वाली दिव्य राम भक्ति। |
| अष्ट सिद्धि | आठ प्रकार की अलौकिक शक्तियां | अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व। |
| नव निधि | नौ प्रकार के दिव्य खजाने | कुबेर के नौ दिव्य कोष जो समृद्धि प्रदान करते हैं। |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
आइए इस पावन अमृतवाणी की कुछ प्रमुख पंक्तियों के गहरे अर्थ को समझें:
1. "हनुमान अमृतवाणी सुखदाई, जो गावे सो परम पद पाई।"
अर्थ: हनुमान जी की यह अमृतवाणी सभी सुखों को देने वाली है। जो भी भक्त इसका सच्चे मन से गान करता है, वह परम पद (मोक्ष और शांति) को प्राप्त करता है।
2. "राम काज सब तुम ही संवारे, लक्ष्मण के तुम प्राण उबारे।"
अर्थ: भगवान श्री राम के सभी कठिन कार्यों को आपने ही संवारा है। जब लक्ष्मण जी को शक्ति बाण लगा था, तब आपने ही संजीवनी बूटी लाकर उनके प्राणों की रक्षा की थी।
3. "अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता, अस बर दीन जानकी माता।"
अर्थ: आपको माता सीता (जानकी जी) से यह वरदान प्राप्त है कि आप किसी को भी आठ सिद्धियां और नौ निधियां प्रदान कर सकते हैं। आप भक्तों की दरिद्रता दूर करने वाले हैं।
4. "तुम्हरे भजन राम को पावै, जनम जनम के दुख बिसरावै।"
अर्थ: आपकी भक्ति करने से जीव को भगवान श्री राम की प्राप्ति होती है और उसके जन्म-जन्मांतर के सारे संताप और दुख समाप्त हो जाते हैं।
भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
अमृतवाणी के पाठ के साथ-साथ यदि निम्नलिखित मंत्रों का भी जाप किया जाए, तो हनुमान जी अत्यंत प्रसन्न होते हैं:
"ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट्॥"
यह हनुमान जी का अत्यंत प्रभावशाली और उग्र मंत्र है, जो शत्रुओं के नाश और आत्मरक्षा के लिए जपा जाता है। इसके अतिरिक्त, सुंदरकांड का यह श्लोक भी अत्यंत मंगलकारी है:
"अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्।
सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥"
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| विवरण बिंदु | महत्वपूर्ण जानकारी |
|---|---|
| भजन का नाम | श्री हनुमान अमृतवाणी (Shree Hanuman Amritwani) |
| मुख्य आराध्य देव | भगवान हनुमान (रुद्रावतार) |
| प्रसिद्ध गायिका | अनुराधा पौडवाल (Anuradha Paudwal) |
| काव्य शैली | दोहा और चौपाई (अवधी/हिंदी) |
| मुख्य रस | भक्ति रस, शांत रस और वीर रस |
| उपयुक्त अवसर | मंगलवार, शनिवार, हनुमान जयंती, रोज सुबह की प्रार्थना |
| मुख्य लाभ | भयमुक्ति, आत्मविश्वास में वृद्धि, मानसिक शांति, संकटों का निवारण |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह लेख "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत आता है। इस अमृतवाणी के पाठ और अर्थ को विभिन्न प्रामाणिक धार्मिक ग्रंथों, जैसे कि रामचरितमानस, हनुमान चालीसा और पारंपरिक भजनों के संकलनों से मिलान करके तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य पाठकों तक हनुमान जी की महिमा का शुद्ध और त्रुटिहीन रूप पहुंचाना है ताकि वे अपनी साधना में सफल हो सकें।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण - सुंदरकांड प्रसंग।
- श्री रामचरितमानस - गोस्वामी तुलसीदास।
- पारंपरिक हनुमान भजन संग्रह एवं टी-सीरीज भक्ति संगीत रिकॉर्डिंग्स।
संबंधित भजन एवं लेख
हनुमान जी की असीम कृपा प्राप्त करने के लिए हमारे ब्लॉग पर निम्नलिखित लेख भी अवश्य पढ़ें:
- श्री हनुमान चालीसा लिरिक्स एवं भावार्थ - हनुमान जी की सबसे लोकप्रिय स्तुति।
- सम्पूर्ण सुंदरकांड पाठ विधि - जीवन के सभी संकटों को दूर करने वाला महापाठ।
- बजरंग बाण का नियमित पाठ - शत्रुओं और बाधाओं से मुक्ति का अचूक उपाय।
- हनुमान जी की आरती - पूजा के अंत में गाई जाने वाली पावन आरती।
पाठकों के विचार (0)
भक्ति रस चर्चा में भाग लें