radha bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

शिव मंदिर में दीप जला के कर लो मन उजियारा लिरिक्स (Shiv Mandir Me Deep Jala Lyrics In Hindi) - by ANURADHA PAUDWAL Shiv Bhajan

अनुराधा पौडवाल द्वारा गाए शिव भजन 'शिव मंदिर में दीप जला के कर लो मन उजियारा' के लिरिक्स हिंदी में पढ़ें। संदर्भ एवं व्याख्या सहित संपूर्ण भजन।

प्रस्तावना एवं परिचय

मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

 

शिव मंदिर में दीप जला के

कर लो मन उजियारा

उजियारा भक्तों

कर लो मन उजियारा

शिव चरणों में अर्पण कर दो

अपना जीवन सारा जीवन सारा

शिव मंदिर में दीप जला के

कर लो मन उजियारा

उजियारा भक्तों

कर लो मन उजियारा।


धन तू चीज है आनी जानी

मोह करो ना धन का

त्रिपुरारी की शरण में आओ

चैन मिले जीवन का

काम आए जो हर संकट में

नाम वही है प्यारा

है प्यारा भक्तों

शिव का नाम है प्यारा

शिव मंदिर में दीप जला के

कर लो मन उजियारा

उजियारा भक्तों

कर लो मन उजियारा।


भोर भी होगी क्यों डरते हो

दुःख की रातो से

शिव जी तो है बड़े दयालू

देंगे दोनों हाथों से

जटा से निकली गंगा में है

शीतल सुख धारा

सुख की है धारा

शिव का नाम है प्यारा

शिव मंदिर में दीप जला के

कर लो मन उजियारा

उजियारा भक्तों

कर लो मन उजियारा।


डग मग नैया ढोल रही है

पवन का तेज है बहाओ

देख के ऊँची ऊँची लहरें

काहे तुम घबराओ

शिव सागर में जो में उतरा

शिव ने पार उतारा

शिव मंदिर में दीप जला के

कर लो मन उजियारा

उजियारा भक्तों

कर लो मन उजियारा।


शिव मंदिर में दीप जला के

कर लो मन उजियारा

उजियारा भक्तों

कर लो मन उजियारा

शिव चरणों में अर्पण कर दो

अपना जीवन सारा जीवन सारा

शिव मंदिर में दीप जला के

कर लो मन उजियारा

उजियारा भक्तों

कर लो मन उजियारा।

साझा करें:

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

प्रस्तुत राधा-कृष्ण भजन "शिव मंदिर में दीप जला के कर लो मन उजियारा लिरिक्स (Shiv Mandir Me Deep Jala Lyrics In Hindi) - by ANURADHA PAUDWAL Shiv Bhajan - Bhaktilok" के माध्यम से भक्त और आराध्य के परम संबंध को दर्शाया गया है। वैष्णव संप्रदाय में राधा-कृष्ण का प्रेम लौकिक प्रेम न होकर जीवात्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है। इस भजन की एक-एक पंक्ति का सार यही है कि भगवान श्री कृष्ण स्वयं राधा रानी के प्रेम के अधीन हैं। बिना राधा के न तो वे मुरली बजाते हैं और न ही गोपी-गोपियों को सुख देते हैं।

भजन के पदों में यह स्पष्ट होता है कि वृंदावन की कुंज गलियों में जब तक 'राधे-राधे' नाम की गूंज नहीं होती, तब तक भगवान श्यामसुंदर का मन भी वहां नहीं रमता। भक्त राधा जी से आग्रह करता है कि वे भी कृष्ण की इस भक्ति और दिव्यता का रहस्य उजागर करें, ताकि एक सामान्य साधक भी कृष्ण प्रेम का अधिकारी बन सके।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

ब्रह्म पुराण और विष्णु पुराण के अनुसार, भगवान कृष्ण की आराधना से पूर्व राधा जी का नाम स्मरण करना अनिवार्य माना गया है। राधा नाम की महिमा स्वयं कृष्ण गाते हैं। इस भजन को श्रद्धापूर्वक गाने या सुनने से साधक के हृदय में भक्ति रस का संचार होता है और मानसिक विकारों तथा चिंताओं का समूल नाश होता है।

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें। राधा-कृष्ण भजन के गायन से गृहक्लेश दूर होता है, दांपत्य जीवन में मधुरता आती है और पारिवारिक वातावरण सात्विक बनता है। यदि इसका नियमित संकीर्तन किया जाए, तो साधक को मानसिक एकाग्रता और दिव्य शांति की अनुभूति होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन के संकीर्तन के लिए सर्वोत्तम समय प्रातःकाल (ब्रह्ममुहूर्त) अथवा संध्या आरती के समय का है। गायन के समय दीप प्रज्वलित कर, तुलसी दल अर्पित करें और शुद्ध भाव से युगल सरकार (राधा-कृष्ण) की छवि का ध्यान करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन के मुख्य आराध्य देव कौन हैं?

इस भजन के मुख्य आराध्य देव युगल सरकार अर्थात भगवान श्री कृष्ण और श्री राधा रानी जी हैं।

राधा-कृष्ण भजन का पाठ किस दिन विशेष रूप से करना चाहिए?

यद्यपि भगवान के नाम संकीर्तन के लिए हर दिन शुभ है, किन्तु एकादशी, पूर्णिमा और शनिवार/रविवार के दिन इसका संकीर्तन विशेष फलदायी माना गया है।

क्या यह भजन पारिवारिक सुख-शांति के लिए सहायक है?

हाँ, राधा-कृष्ण के भक्तिमय भजनों को घर में नियमित रूप से गाने अथवा सुनने से दांपत्य प्रेम बढ़ता है और नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 10 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!