भक्ति काव्य व भजन मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

शिव भोला भंडारी नज़र तेरी मुझ पर हो जाये लिरिक्स (Shiv Bhola Bhandari Nazar Teri Mujh Par Ho Jaye Lyrics in Hindi) - Vicky Sharma Shiv Bhajan

शिव भोला भंडारी नज़र तेरी मुझ पर हो जाये भजन लिरिक्स हिंदी में पढ़ें। विक्की शर्मा द्वारा गाये गए इस प्रसिद्ध शिव भजन का आनंद लें।

भगवान शिव के परम करुणामयी और उदार स्वरूप 'भोला भंडारी' को समर्पित यह भजन "शिव भोला भंडारी नज़र तेरी मुझ पर हो जाये" एक अत्यंत भावपूर्ण और हृदयस्पर्शी रचना है। इस भजन के माध्यम से भक्त अपने आराध्य देव से केवल एक कृपा दृष्टि की याचना करता है। हिंदू सनातन धर्म में भगवान शिव को आशुतोष कहा गया है, जिसका अर्थ है जो अत्यंत शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं। गायक विक्की शर्मा द्वारा गाए गए इस भजन में विनय, समर्पण, करुणा और अनन्य भक्ति का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। सावन के पवित्र महीने, महाशिवरात्रि के पावन पर्व अथवा प्रत्येक सोमवार को इस भजन का गायन और श्रवण करने से मन को असीम शांति प्राप्त होती है और साधक का हृदय शिवमय हो जाता है। यह भजन भक्त के जीवन के अंधकार को मिटाकर उसमें दैवीय प्रकाश भरने की एक आर्त पुकार है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

शिव भोला भंडारी नज़र तेरी मुझ पर हो जाये

शिव भोला भंडारी नज़र तेरी मुझ पर हो जाये।
मेरा घर आँगन भी खुशियों से भर जाये॥
शिव भोला भंडारी नज़र तेरी मुझ पर हो जाये...

मेरे घर खुशिया हो और तुम आ जाना।
मेरे दुःख गम में भी साथ निभाजाना॥
तेरा हाथ दया का भी मेरे सर पर हो जाये।
शिव भोला भंडारी नज़र तेरी मुझ पर हो जाये...

आँखों में अपनी भोले सदा प्रेम भाव रखना।
मेरे मन कि माला को शिव शंकर तुम सुनना॥
कैलाश पे डेरा है अब मेरे दिल में हो जाये।
शिव भोला भंडारी नज़र तेरी मुझ पर हो जाये...

विष का प्याला पीकर जग को अमृत दिया है।
मै बालक हु तेरा सब कुछ तुमसे लिया है॥
ॐ नमः शिवाय मंत्र मेरे दिल में छप जाये।
शिव भोला भंडारी नज़र तेरी मुझ पर हो जाये...

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का मूल भाव पूर्ण आत्मसमर्पण और भगवान शिव की अहैतुकी कृपा प्राप्त करना है। भक्त अपने आराध्य शिव से प्रार्थना करता है कि हे भोला भंडारी! आपकी केवल एक कृपादृष्टि मेरे ऊपर हो जाए, जिससे मेरा संपूर्ण जीवन और मेरा घर-आँगन खुशियों से सराबोर हो जाए। यहाँ 'नज़र' शब्द का अर्थ भौतिक दृष्टि से नहीं, बल्कि भगवान के अनुग्रह और करुणा से है। जब ईश्वर की कृपा दृष्टि किसी जीव पर पड़ती है, तो उसके जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं।

भजन के प्रथम अंतरे में भक्त भगवान शिव को अपने सुख और दुख दोनों में आमंत्रित करता है। वह कहता है कि जब मेरे जीवन में खुशियों का आगमन हो, तब आप अतिथि बनकर पधारें और जब मेरे जीवन में दुख और गम के बादल छाएं, तब आप एक सच्चे रक्षक की तरह मेरा साथ निभाएं। भक्त की यह कामना है कि भगवान शिव का वरदहस्त (दया का हाथ) सदैव उसके मस्तक पर बना रहे।

दूसरे अंतरे में भक्त भगवान से प्रार्थना करता है कि वे अपनी आँखों में सदैव उसके प्रति प्रेम और वात्सल्य का भाव रखें। वह अपने मन की प्रार्थना रूपी माला को भगवान के चरणों में अर्पित करता है। सबसे सुंदर कल्पना इस पंक्ति में है जहाँ भक्त कहता है कि हे महादेव! आपका निवास स्थान तो वैसे कैलाश पर्वत पर है, परंतु अब आप मेरे इस तुच्छ हृदय को ही अपना निवास स्थान बना लीजिए।

अंतिम अंतरे में भगवान शिव के नीलकंठ स्वरूप का स्मरण किया गया है। जिन्होंने समुद्र मंथन से निकले हलाहल विष को पीकर संपूर्ण सृष्टि की रक्षा की और संसार को जीवन रूपी अमृत प्रदान किया। भक्त स्वयं को भगवान शिव का अबोध बालक मानते हुए कहता है कि मेरा जो कुछ भी अस्तित्व है, वह सब आपकी ही देन है। अंत में वह कामना करता है कि पंचाक्षरी मंत्र 'ॐ नमः शिवाय' उसके हृदय पटल पर सदैव के लिए अंकित हो जाए।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन केवल एक संगीतमय प्रस्तुति नहीं है, बल्कि यह शिव साधना का एक सुगम मार्ग है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • आशुतोष भाव की अभिव्यक्ति: भजन में शिव के 'भोला भंडारी' स्वरूप को पुकारा गया है, जो अपने भक्तों की अल्प सेवा से भी प्रसन्न होकर उन्हें मनचाहा वरदान दे देते हैं।
  • समर्पण और शरणागति: इसमें भक्त का अहंकार पूरी तरह शून्य हो जाता है। वह स्वयं को बालक और शिव को सर्वस्व मानता है।
  • हृदय में ईश्वर की स्थापना: यह भजन बाह्य आडंबरों से दूर आंतरिक पूजा पर बल देता है, जहाँ कैलाशपति को अपने हृदय में बसाने की प्रार्थना की गई है।
  • मंत्र साधना का महत्व: भजन के अंत में 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र के मानसिक जप और उसे हृदय में अंकित करने की बात कही गई है, जो नाम-स्मरण की महिमा को दर्शाती है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यद्यपि भगवान शिव की आराधना किसी भी समय की जा सकती है, क्योंकि वे काल के भी काल महाकाल हैं, फिर भी इस भजन के गायन और श्रवण के लिए कुछ विशेष अवसर अत्यंत फलदायी माने गए हैं:

  • सावन मास (श्रावण सोमवार): सावन के महीने में भगवान शिव पृथ्वी पर निवास करते हैं। इस दौरान प्रतिदिन सुबह या शाम को इस भजन का गायन करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है।
  • महाशिवरात्रि और प्रदोष व्रत: शिवरात्रि की रात्रि जागरण में अथवा प्रदोष काल (सूर्यास्त के समय) में इस भजन को सामूहिक रूप से गाने से वातावरण भक्तिमय हो जाता है।
  • दैनिक पूजा: अपने घर के मंदिर में धूप-दीप प्रज्वलित करके शांत चित्त से इस भजन का श्रवण करने से मानसिक तनाव दूर होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन देवादिदेव महादेव शिव शंकर को समर्पित है। शिव पुराण के अनुसार, शिव ही आदि और अंत हैं। वे ही सृष्टि के सृजनकर्ता, पालनकर्ता और संहारक हैं। इस भजन में उनके दयालु, कृपालु और विषपायी (नीलकंठ) स्वरूप की वंदना की गई है। आधुनिक काल में गायक विक्की शर्मा ने अपनी मधुर आवाज के माध्यम से इस पारंपरिक भाव को जन-जन तक पहुँचाया है। यह भजन कबीर, तुलसी और सूरदास जैसे संतों की उस परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है जहाँ ईश्वर को अत्यंत निकट का संबंधी मानकर पुकारा जाता है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

यह भजन आधुनिक भक्ति संगीत की श्रेणी में आता है। इसकी पृष्ठभूमि लोक-संस्कृति और पारंपरिक शिव भजनों से प्रेरित है। भारत के ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में शिव को 'भंडारी' (भंडार भरने वाले) के रूप में पूजा जाता है। जब अकाल या विपत्ति आती है, तो लोग शिव के इसी स्वरूप की शरण में जाते हैं। इसी लोक-आस्था को शब्दों में पिरोकर इस सुंदर भजन की रचना की गई है, जो आज के समय में युवाओं और वृद्धों दोनों के बीच समान रूप से लोकप्रिय है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल, सुबोध और खड़ी बोली हिंदी है, जिसमें अवधी और लोकभाषा के शब्दों का सुंदर पुट है। इसकी काव्य शैली 'गीतिका' और 'पद' शैली से मिलती-जुलती है। इसमें प्रयुक्त रूपक और उपमाएं अत्यंत सजीव हैं। जैसे "मन की माला" और "दिल में छप जाये" जैसे प्रयोग भक्त के आंतरिक अनुराग को दर्शाते हैं। भजन का प्रवाह अत्यंत संगीतमय है, जो श्रोता को सहज ही अपनी ओर आकर्षित कर लेता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें कई महत्वपूर्ण जीवन मूल्य सिखाता है:

  • कृतज्ञता का भाव: "सब कुछ तुमसे लिया है" - यह पंक्ति हमें सिखाती है कि हमारे पास जो कुछ भी है, वह ईश्वर का दिया हुआ प्रसाद है। हमें सदैव कृतज्ञ रहना चाहिए।
  • समभाव (सुख-दुख में एक समान): भक्त सुख में शिव को बुलाता है और दुख में उनका साथ मांगता है। यह जीवन के उतार-चढ़ाव में मानसिक संतुलन बनाए रखने की सीख देता है।
  • परोपकार की प्रेरणा: शिव द्वारा विष पीकर जगत को अमृत देने का प्रसंग हमें सिखाता है कि हमें भी समाज के कल्याण के लिए कष्ट सहने को तत्पर रहना चाहिए।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द/शब्दांश सरल अर्थ भजन के संदर्भ में महत्व
भोला भंडारी अत्यंत सीधे और उदार दाता शिव का वह स्वरूप जो बिना किसी भेदभाव के सबका कल्याण करते हैं।
नज़र कृपादृष्टि / अनुग्रह ईश्वर की वह दया जिससे मनुष्य के कष्ट दूर होते हैं।
वरदहस्त / दया का हाथ आशीर्वाद का हाथ सुरक्षा और अभय प्रदान करने वाला ईश्वर का हाथ।
कैलाश शिव का दिव्य निवास पर्वत भक्त चाहता है कि शिव कैलाश छोड़कर उसके हृदय रूपी मंदिर में वास करें।
विष का प्याला हलाहल जहर संसार के संकटों को स्वयं पर ले लेने का प्रतीक।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"शिव भोला भंडारी नज़र तेरी मुझ पर हो जाये, मेरा घर आँगन भी खुशियों से भर जाये"
हे कल्याणकारी शिव! आपकी कृपादृष्टि मुझ पर हो। जैसे ही आपकी करुणा की एक बूंद मुझ पर गिरेगी, मेरा पूरा परिवार और जीवन खुशियों से महक उठेगा।

"मेरे घर खुशिया हो और तुम आ जाना, मेरे दुःख गम में भी साथ निभाजाना"
जब मेरे जीवन में सुख के क्षण हों, तो मैं आपको भूलूँ नहीं, बल्कि आप मेरे उत्सव में शामिल हों। और जब मुझ पर विपत्ति आए, तो आप मेरे सहायक बनकर खड़े रहें।

"तेरा हाथ दया का भी मेरे सर पर हो जाये"
मुझे संसार के किसी सहारे की आवश्यकता नहीं है, यदि आपका सुरक्षात्मक आशीर्वाद रूपी हाथ मेरे सिर पर हो।

"आँखों में अपनी भोले सदा प्रेम भाव रखना, मेरे मन कि माला को शिव शंकर तुम सुनना"
हे भोलेनाथ! आप सदा मुझसे प्रेम करें और मेरे मन में चलने वाले अनवरत विचारों और प्रार्थनाओं को स्वीकार करें।

"कैलाश पे डेरा है अब मेरे दिल में हो जाये"
यद्यपि आप कैलाश पर्वत के स्वामी हैं, परंतु मेरी भक्ति से प्रसन्न होकर आप मेरे हृदय कमल में आकर विराजमान हो जाएं।

"विष का प्याला पीकर जग को अमृत दिया है, मै बालक हु तेरा सब कुछ तुमसे लिया है"
आपने समुद्र मंथन के समय विष पीकर सृष्टि की रक्षा की। मैं आपका अज्ञानी बालक हूँ और मेरा जीवन, बुद्धि तथा वैभव सब आपकी ही देन है।

"ॐ नमः शिवाय मंत्र मेरे दिल में छप जाये"
मेरी अंतिम अभिलाषा यही है कि आपका महामंत्र मेरे अंतःकरण में इस प्रकार अंकित हो जाए कि मेरी हर सांस के साथ केवल आपका ही नाम निकले।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के भावों को और अधिक प्रगाढ़ करने के लिए निम्नलिखित मंत्रों का संपुट लगाया जा सकता है:

महामृत्युंजय मंत्र:

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥

शिव पंचाक्षर स्तोत्र का प्रथम श्लोक:

नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय भस्माङ्गरागाय महेश्वराय।
नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय तस्मै नकाराय नमः शिवाय॥

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम शिव भोला भंडारी नज़र तेरी मुझ पर हो जाये
मुख्य आराध्य देव भगवान शिव (महादेव)
गायक / कलाकार विक्की शर्मा (Vicky Sharma)
भाषा हिंदी (Devanagari)
भक्ति का भाव (Bhava) समर्पण, करुणा, वात्सल्य, विनय भाव
उपयुक्त अवसर सावन सोमवार, महाशिवरात्रि, प्रदोष व्रत, दैनिक संध्या आरती
मुख्य संदेश ईश्वर की कृपा ही जीवन का परम लक्ष्य है

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस अत्यंत लोकप्रिय शिव भजन को सुप्रसिद्ध भजन गायक विक्की शर्मा (Vicky Sharma) ने अपनी मधुर आवाज में गाया है।

भगवान शिव अत्यंत सरल हृदय हैं। वे अपने भक्तों की थोड़ी सी भक्ति, जैसे केवल जल और बेलपत्र चढ़ाने से भी प्रसन्न हो जाते हैं और उनके भंडारे (सुख-समृद्धि) भर देते हैं, इसलिए उन्हें 'भोला भंडारी' कहा जाता है।

इस भजन को प्रतिदिन सुबह या शाम की पूजा के समय सुना जा सकता है। विशेष रूप से सोमवार, प्रदोष व्रत और महाशिवरात्रि के दिन इसका श्रवण अत्यंत फलदायी माना जाता है।

इसका अर्थ है कि भक्त भगवान शिव को केवल बाहरी जगत या दूर कैलाश पर्वत पर ही नहीं देखना चाहता, बल्कि वह अपनी अंतःकरण की शुद्धि करके शिव को अपने हृदय मंदिर में स्थापित करना चाहता है।

यह पंक्ति समुद्र मंथन के समय निकले भयंकर हलाहल विष के पान की घटना की ओर संकेत करती है, जिसे पीकर भगवान शिव ने संपूर्ण सृष्टि को विनाश से बचाया था और 'नीलकंठ' कहलाए थे।

हाँ, इस भजन के शब्द और संगीत अत्यंत शांत और भक्ति रस से परिपूर्ण हैं। इसका नियमित पाठ या श्रवण करने से मन के विचार शांत होते हैं और मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है।

भजन में कामना की गई है कि यह महामंत्र भक्त के दिल में छप जाए। यह दर्शाता है कि निरंतर नाम-जप ही कलयुग में ईश्वर प्राप्ति और आत्म-कल्याण का सबसे सरल मार्ग है।

हाँ, इसकी सरल भाषा और मधुर लय के कारण बच्चे इसे आसानी से सीख सकते हैं। इससे उनमें बचपन से ही नैतिक मूल्य, कृतज्ञता और ईश्वर के प्रति श्रद्धा का विकास होता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख "शिव भोला भंडारी नज़र तेरी मुझ पर हो जाये लिरिक्स" के प्रामाणिक पाठ और उसके गहरे आध्यात्मिक निहितार्थों को प्रस्तुत करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। हमारी संपादकीय टीम ने इस भजन के प्रत्येक शब्द की शुद्धता और उसके दार्शनिक पक्षों का गहन विश्लेषण किया है। यह सामग्री पूरी तरह से संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है, जो पाठकों को न केवल भजन के बोल प्रदान करती है, बल्कि उन्हें शिव भक्ति के वास्तविक रस से भी सराबोर करती है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • शिव पुराण: कोटिरुद्र संहिता (भगवान शिव के अवतार और उनकी लीलाएं)।
  • श्रीमद्भागवत महापुराण: समुद्र मंथन और हलाहल विष पान का प्रसंग।
  • पारंपरिक भजन संग्रह: उत्तर भारतीय लोक भजन परंपरा और विक्की शर्मा के आधिकारिक भक्ति एल्बम।

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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