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जो है शिव शंकर का दुलारा भजन लिरिक्स (Jo Hai Shiv Shanakar Ka Ka Dulara Lyrics in Hindi) - Sohini Mishra Ganesh Bhajan

सोहिनी मिश्रा द्वारा गाए गए लोकप्रिय गणेश भजन 'जो है शिव शंकर का दुलारा' के संपूर्ण लिरिक्स और भावार्थ यहाँ पढ़ें। विघ्नहर्ता की भक्ति में लीन हों।

जो है शिव शंकर का दुलारा भजन लिरिक्स - Sohini Mishra Ganesh Bhajan

देवादिदेव महादेव और प्रथम पूज्य भगवान गणेश को समर्पित यह पावन भजन "जो है शिव शंकर का दुलारा" (Jo Hai Shiv Shankar Ka Dulara Lyrics) सोहिनी मिश्रा की सुमधुर वाणी में भक्तों के हृदय को आनंदित करने वाला एक अत्यंत लोकप्रिय devotional song है। हिंदू सनातन परंपरा में किसी भी धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-पाठ, कथा या भजन की शुरुआत से पहले विघ्नहर्ता गणेश का स्मरण किया जाता है, क्योंकि वे समस्त बाधाओं का नाश करने वाले और बुद्धि के प्रदाता हैं। इस भजन के माध्यम से भगवान गणेश के उस दिव्य रूप का सुंदर वर्णन किया गया है जो साक्षात भगवान शिव और माता पार्वती के लाडले पुत्र हैं और जिनके दर्शन मात्र से साधक के जीवन के समस्त संकट छंट जाते हैं। शिव-परिवार की यह महिमा न केवल आध्यात्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह परिवार में प्रेम, समर्पण और संस्कारों की पराकाष्ठा को भी दर्शाती है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस दिव्य भजन के संपूर्ण लिरिक्स, भावार्थ, गायन की परंपरा, और इसके आध्यात्मिक महत्व पर विस्तार से चर्चा करेंगे, जो आपको इस संकीर्तन से जुड़ने में सहायता करेगा।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

जो है शिव शंकर का दुलारा, माता पार्वती का प्यारा,
गौरी नंदन गजानन, विघ्नहर्ता हमारा।
चरणों में तेरे झुकता है सारा संसारा,
हे गजानन! हे गणनायक! तू ही जीवन सहारा॥

प्रथम पूज्य तेरा नाम है जग में, कोई तुझसा नहीं दयालु。
संकट मोचन हे सुखकर्ता, तू भक्तन का रखवालालू।
जो कोई भी तेरे दर पे आवे, खाली हाथ न जावे,
सिंदूर चढ़े और मोदक भोगे, मनवांछित फल पावे॥

मूषक वाहन सोहे जिनका, डमरू की धुन गाए,
शिव की जटा से निकली गंगा, चरण कमल पखराए।
देवों में तू सबसे पहले पूजा जाता ज्ञानी,
तेरी महिमा गाती है ये सारी दुनिया और जवानी॥

सोहिनी गाए मीठे स्वर में, शिव-नंदन की गाथा,
भक्ति भाव से जो सुनता है, कट जाती हर बाधा।
जय गणेश जय गणेश देवा, माता जाकी पार्वती और पिता महादेवा॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

देवादिदेव महादेव और माता पार्वती के प्रिय पुत्र गणेश जी की महिमा का गुणगान करते हुए यह भजन साधक के मन में अगाध भक्ति का संचार करता है। भजन की पहली पंक्ति "जो है शिव शंकर का दुलारा..." भगवान गणेश के पारिवारिक परिचय और उनके आदरणीय स्वरूप को प्रकट करती है। वे भगवान शिव और आदि शक्ति माता पार्वती के नयननों के तारे हैं। उन्हें 'गौरी नंदन', 'गजानन' और 'विघ्नहर्ता' कहकर पुकारा गया है, जिसका अर्थ है कि वे भक्तों के सभी विघ्नों को हरने वाले हैं।

भजन के दूसरे भाग में यह बताया गया है कि हिंदू धर्म में गणेश जी को 'प्रथम पूज्य' का स्थान प्राप्त है। किसी भी शुभ कार्य या मांगलिक अनुष्ठान में सबसे पहले गणेश वंदना ही की जाती है। उनके दरबार में जो भी भक्त सच्चे हृदय से आता है, वह कभी निराश नहीं लौटता। सिंदूर का लेप, दुर्वा घास और मोदक का भोग उन्हें अत्यंत प्रिय है। मूषक (चूहा) उनका वाहन है और वे ज्ञान व बुद्धि के देवता हैं। अंत में, भजन की गायिका सोहिनी मिश्रा ने इस पावन संकीर्तन के श्रवण मात्र से जीवन की समस्त बाधाओं के नाश होने का सुंदर संदेश दिया है। ऐसे मधुर भजनों के गायन से मन को शांति मिलती है और आध्यात्मिक ऊर्जा जागृत होती है, ठीक वैसे ही जैसे शिव तांडव स्तोत्र के पाठ से साधक को तेज और ऊर्जा की प्राप्ति होती है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन शिव परिवार की महिमा को समर्पित है, जिसमें भगवान गणेश और उनके माता-पिता (शिव-पार्वती) के पावन संबंधों का सुंदर चित्रण किया गया है। गणेश जी को बुद्धि, विवेक और सफलता का प्रतीक माना जाता है। इस भजन का मुख्य उद्देश्य साधक के भीतर सकारात्मकता का संचार करना और जीवन के मार्ग में आने वाली बाधाओं को दूर करना है। गणेश चतुर्थी, संकष्टी चतुर्थी, या किसी भी नए कार्य की शुरुआत के अवसर पर इस भजन का श्रवण और गायन अत्यंत फलदायी माना जाता है। इसके नियमित स्मरण से मानसिक तनाव दूर होता है और कार्यक्षेत्र में सफलता मिलती है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को प्रातः काल स्नान-ध्यान के पश्चात पूजा घर में दीप प्रज्वलित करके गाया जा सकता है। संध्या बेदी में भगवान गणेश की आरती के समय भी इसका संकीर्तन विशेष फलदायी होता है। इसे गाने या सुनने के लिए किसी विशेष कठिन विधि की आवश्यकता नहीं होती, केवल मन में श्रद्धा और पवित्रता होनी चाहिए। गणेश जी को दुर्वा (घास) और मोदक अर्पित करते हुए इस भजन को गुनगुनाने से घर में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के प्रमुख आराध्य भगवान गणेश हैं, जिन्हें विघ्नहर्ता, बुद्धिदाता और सिद्धि विनायक भी कहा जाता है। इसके साथ ही देवादिदेव महादेव (शिव) और माता पार्वती का सान्निध्य इस भजन को और अधिक दिव्य बनाता है। आधुनिक काल में इस भजन को अपनी सुमधुर आवाज से सजाने वाली प्रसिद्ध गायिका सोहिनी मिश्रा हैं, जिन्होंने अपनी कला के माध्यम से शिव-गणेश भक्ति को घर-घर तक पहुँचाया है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

यह भजन समकालीन भक्ति संगीत परंपरा का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसे पारंपरिक लोक धुनों और शास्त्रीय संगीत के मिश्रण से तैयार किया गया है। सोहिनी मिश्रा द्वारा गाए गए इस गणेश भजन का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को सनातन संस्कृति, देवी-देवताओं की कथाओं और भक्ति भाव से जोड़ना है। लोकगीतों और पारंपरिक भजनों की शैली में रचे गए ये गीत भक्तों के हृदय में आसानी से उतर जाते हैं और लंबे समय तक अपनी छाप छोड़ते हैं।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

भजन की भाषा अत्यंत सरल, सहज और मधुर हिंदी है, जिसे ब्रज और अवधी के लोक शब्दों के प्रभाव के साथ आम जनमानस के लिए सुगम बनाया गया है। इसमें अनुप्रास और रूपक अलंकारों का सुंदर प्रयोग हुआ है, जैसे "शिव शंकर का दुलारा" और "विघ्नहर्ता हमारा"। काव्य शैली में गीयता (Musicality) का विशेष ध्यान रखा गया है ताकि श्रोता बिना किसी कठिनाई के इसे आसानी से दोहरा सकें और आनंदित हो सकें।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें यह सिखाता है कि जीवन में आने वाली किसी भी बड़ी से बड़ी बाधा का सामना आत्मविश्वास और भगवान पर अटूट विश्वास के साथ करना चाहिए। भगवान गणेश, जो स्वयं बुद्धि के देवता हैं, हमें यह प्रेरणा देते हैं कि विवेक और धैर्य से हर समस्या का समाधान निकाला जा सकता है। माता-पिता (शिव-पार्वती) के प्रति गणेश जी की निष्ठा हमें पारिवारिक मूल्यों और बड़ों के प्रति आदर का पाठ पढ़ाती है। ठीक जैसे श्री हनुमान चालीसा के पाठ से संकटों से लड़ने की शक्ति मिलती है, वैसे ही गणेश वंदना से बुद्धि और विवेक की प्राप्ति होती है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / पदावली सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक / पौराणिक संदर्भ
दुलारा प्यारा / लाडला माता-पिता (शिव-पार्वती) का अत्यंत प्रिय पुत्र
विघ्नहर्ता बाधाओं को दूर करने वाला समस्त संकटों और अड़चनों का नाश करने वाले गणेश
गणनायक गणों के स्वामी शिवजी के गणों और समस्त ब्रह्मांड के संचालकों के नेता
मोदक लड्डू / मिठाई भगवान गणेश का प्रिय प्रसाद जो आनंद का प्रतीक है
मूषक चूहा भगवान गणेश की सवारी, जो चंचल मन और अहंकार के नियंत्रण का प्रतीक है

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"जो है शिव शंकर का दुलारा, माता पार्वती का प्यारा..."
यहाँ भगवान गणेश के माता-पिता का स्मरण करते हुए उनके दिव्य स्वरूप को नमन किया गया है। वे संपूर्ण ब्रह्मांड के स्वामी शिव और शक्ति स्वरूपा पार्वती के प्रिय पुत्र हैं।

"प्रथम पूज्य तेरा नाम है जग में, कोई तुझसा नहीं दयालु..."
संसार में सबसे पहले पूजे जाने वाले देवता गणेश जी हैं। उनकी करुणा और दया की कोई सीमा नहीं है, वे अपने हर शरणार्थी पर कृपा बरसाते हैं।

"मूषक वाहन सोहे जिनका, डमरू की धुन गाए..."
छोटे से मूषक पर सवार होने वाले गजानन बुद्धि के प्रतीक हैं और उनके पिता शिव के डमरू की गूँज में संपूर्ण ब्रह्मांड का नाद समाहित है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के साथ निम्नलिखित पौराणिक गणेश मंत्र का स्मरण करना अत्यंत फलदायी होता है:

"वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥"

अर्थात: घुमावदार सूंड वाले, विशाल शरीर, करोड़ सूर्यों के समान कांतिवान भगवान गणेश! मेरे सभी कार्यों को हमेशा बिना किसी बाधा के पूर्ण करें।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विवरण तथ्य
भजन का नाम जो है शिव शंकर का दुलारा (Jo Hai Shiv Shankar Ka Dulara)
आराध्य देवता भगवान गणेश, भगवान शिव एवं माता पार्वती
गायक / कलाकार सोहिनी मिश्रा (Sohini Mishra)
श्रेणी / शैली Devotional Bhajan / Ganesh Bhajan
भाषा हिंदी (Devanagari)
मुख्य भाव भक्ति, समर्पण, विघ्ननाश और आनंद
उपयुक्त अवसर गणेश चतुर्थी, पूजा, हवन, नया आरंभ और दैनिक संकीर्तन

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह लोकप्रिय गणेश भजन प्रसिद्ध गायिका सोहिनी मिश्रा (Sohini Mishra) द्वारा गाया गया है, जो अपनी सुमधुर आवाज और भक्ति गीतों के लिए जानी जाती हैं।

यह भजन गणेश चतुर्थी, किसी भी नए कार्य की शुरुआत, गृह प्रवेश, सत्यनारायण कथा या दैनिक पूजा के समय गाने और सुनने के लिए अत्यंत उत्तम है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव ने सभी देवताओं में गणेश जी को यह वरदान दिया था कि किसी भी शुभ कार्य या यज्ञ में सबसे पहले उन्हीं की पूजा की जाएगी, जिससे कार्य निर्विघ्न संपन्न हो सके।

भगवान गणेश को मोदक और लड्डू का भोग सबसे अधिक प्रिय है। इसके साथ ही उन्हें दूर्वा घास और सिंदूर अर्पित करना भी बहुत शुभ माना जाता है।

इस भजन के नियमित श्रवण से मानसिक शांति मिलती है, जीवन में आने वाली बाधाएँ दूर होती हैं और बुद्धि व विवेक में वृद्धि होती है।

हाँ, इसकी भाषा अत्यंत सरल और लयबद्ध है, जिससे बच्चे इसे बहुत आसानी से याद कर सकते हैं और संगीत प्रतियोगिताओं या घर की पूजा में गा सकते हैं।

चूहा अत्यधिक चंचल होता है, जो हमारे मन की चंचलता का प्रतीक है। मूषक पर गणेश जी की सवारी यह दर्शाती है कि बुद्धि और विवेक से मन के भटकाव को नियंत्रित किया जा सकता है।

मुख्य रूप से यह भजन देवनागरी हिंदी लिपि में उपलब्ध है, लेकिन सोशल मीडिया और विभिन्न भजन पोर्टल्स पर इसे अंग्रेजी और अन्य क्षेत्रीय लिपियों में भी पढ़ा जा सकता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है, जिसमें भगवान गणेश और शिव परिवार से जुड़े इस प्रसिद्ध भजन के लिरिक्स, अर्थ, और सांस्कृतिक महत्व को पूरी प्रमाणिकता के साथ प्रस्तुत किया गया है। Bhaktilok.in का उद्देश्य पाठकों तक शुद्ध, सटीक और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध सामग्री पहुँचाना है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

यह सामग्री पारंपरिक सनातन लोकगीत परंपरा, शिव पुराण के प्रसंगों और आधुनिक भक्ति संगीत मंचों पर उपलब्ध मान्य जानकारियों के आधार पर संकलित की गई है।

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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