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साथी हमारा कौन बनेगा तुम ना सुनोगे कौन सुनेगा लिरिक्स (tum na sunoge to kon sunega Lyrics in Hindi) - अधिष्ठा अनुष्का भजन

अधिष्ठा अनुष्का द्वारा गाए प्रसिद्ध भजन 'साथी हमारा कौन बनेगा तुम ना सुनोगे कौन सुनेगा' के संपूर्ण लिरिक्स हिंदी में पढ़ें। भक्ति भाव के साथ यहाँ देखें।

प्रस्तावना एवं परिचय

मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

 

साथी हमारा कौन बनेगा
तुम ना सुनोगे कौन सुनेगा
तुम ना सुनोगे कौन सुनेगा।।

आ गया दर पे तेरे
सुनाई हो जाए
जिंदगी से दुःखो की
विदाई हो जाए
एक नजर कृपा की डालो
मानूंगा अहसान
संकट हमारा कैसे टलेगा
तुम ना सुनोगे कौन सुनेगा
तुम ना सुनोगे कौन सुनेगा।।

सुना हमने सभी से
खिवैया एक ही है
घूम ले सारी दुनिया
कन्हैया एक ही है
अबकी अबकी पार लगाओ
मानूंगा अहसान
हमको किनारा कैसे मिलेगा
तुम ना सुनोगे कौन सुनेगा
तुम ना सुनोगे कौन सुनेगा।।

पानी है सर से ऊपर
मुसीबत अड़ गई है
आज हमको तुम्हारी
जरुरत पड़ गई है
अपने हाथ से हाथ पकड़लो
मानूंगा अहसान
साथ हमारे कौन चलेगा
तुम ना सुनोगे कौन सुनेगा
तुम ना सुनोगे कौन सुनेगा।।

तुम्हारे दर पे शायद
हमेशा धर्मी आते
आज पापी आया है
श्याम काहे घबराते
हमने सुना है तेरी नजर में
सब हे एक समान
इसका पता तो आज चलेगा
तुम ना सुनोगे कौन सुनेगा
तुम ना सुनोगे कौन सुनेगा।।

वो तेरे भक्त होंगे
जिन्हे तुमने है तारा
बता ऐ मुरली वाले
कौन सा तीर मारा
भक्त तुम्हारे भक्ति करते
लेते रहते नाम
काम तो उनका करना पड़ेगा
तुम ना सुनोगे कौन सुनेगा
तुम ना सुनोगे कौन सुनेगा।।

वो रिश्तेदार होंगे
करते रहते बढ़ाई
तेरे हम कुछ ना लगते
हमने की क्या बुराई
अपनों का सब साथ निभाए
रखते उनका ध्यान
जो है पराया किससे कहेगा
तुम ना सुनोगे कौन सुनेगा
तुम ना सुनोगे कौन सुनेगा।।

गिरते को क्या गिराना
श्याम इतना बताओ
मजा तो तब आएगा
उसे आकर उठाओ
अब तो बिगड़ी बात बनाओ
इसमें तुम्हारी शान
बिगड़े हुए का क्या बिगड़ेगा
तुम ना सुनोगे कौन सुनेगा
तुम ना सुनोगे कौन सुनेगा।।

गुनाह कर करके हारा
श्याम तुमको पुकारा
जहान में जो है अकेला
उसे तेरा सहारा
दिन दुखी का साथ निभा दो
दे दो दया का दान
मेरा भी बेड़ा पार लगेगा
तुम ना सुनोगे कौन सुनेगा
तुम ना सुनोगे कौन सुनेगा।।

नाम जितना सुना है
उतने दातार हो क्या
दयालु हो कितने तुम
फैसला आज होगा
अब तक केवल सुनते आए
अब देखेंगे श्याम
भरम हमारा आज मिटेगा
तुम ना सुनोगे कौन सुनेगा
तुम ना सुनोगे कौन सुनेगा।।

देखकर मुझको दर पे
श्याम शरमा गए क्या
मिली जो मुझसे नजरे
पसीने आ गए क्या
ये है परीक्षा तेरी मोहन
सुनले देकर ध्यान
जो कुछ घटेगा तेरा घटेगा
तुम ना सुनोगे कौन सुनेगा
तुम ना सुनोगे कौन सुनेगा।।

पाप की गठरी सर पे
लाद कर मैं हूँ लाया
बोझ कुछ हल्का कर दे
उठाने ना पाया
धर्म की राह बता ‘बनवारी’
हो जाए कल्याण
इसमें तुम्हारा कुछ ना घटेगा
तुम ना सुनोगे कौन सुनेगा
तुम ना सुनोगे कौन सुनेगा।।

साथी हमारा कौन बनेगा
तुम ना सुनोगे कौन सुनेगा
तुम ना सुनोगे कौन सुनेगा।।


साथी हमारा कौन बनेगा तुम ना सुनोगे कौन सुनेगा लिरिक्स (tum na sunoge to kon sunega Lyrics in Hindi) - अधिष्ठा अनुष्का भजन - Bhaktilok

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "साथी हमारा कौन बनेगा तुम ना सुनोगे कौन सुनेगा लिरिक्स (tum na sunoge to kon sunega Lyrics in Hindi) - अधिष्ठा अनुष्का भजन - Bhaktilok" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।

भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।

भजनों को गाने की सही विधि क्या है?

भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।

क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?

हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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