राम पे जब जब विपदा आई कौन बना रखवाला भजन परिचय
भक्ति संगीत की अनंत श्रृंखला में संकटमोचन हनुमान जी की महिमा का बखान करने वाले भजनों का विशेष स्थान है। "राम पे जब जब विपदा आई कौन बना रखवाला मेरा बजरंग बाला हो मेरा बजरंग बाला" एक ऐसा अत्यंत लोकप्रिय और ऊर्जावान भजन है जो हर भक्त के हृदय में वीरता, निष्ठा और अगाध विश्वास का संचार कर देता है। संध्या जालोर (Sandiya Jalore) द्वारा स्वरबद्ध और प्रस्तुत यह भजन इस बात का जीवंत प्रमाण है कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्री भगवान राम के जीवन में जब-जब कोई कठिन परीक्षा या विपत्ति आई, तब-तब उनके परम भक्त हनुमान जी ने आगे बढ़कर संकटों का निवारण किया। इस भजन का भाव (Bhava) समर्पण, शरणागति, असीम भक्ति और अटूट वफादारी का प्रतीक है। इसे विशेष रूप से मंगलवार, हनुमान जयंती, संकट मोचन अनुष्ठान, रामनवमी, सुंदरकांड पाठ के उपरांत या सामूहिक सत्संग और जागरण के पावन अवसरों पर बड़े उत्साह और भक्ति भाव के साथ गाया व सुना जाता है। इस भक्ति रचना के माध्यम से श्रोता भगवान राम और पवनसुत हनुमान के उस अलौकिक संबंध को महसूस करते हैं जहाँ भक्त अपने आराध्य के हर कष्ट को अपना मानकर उसे हरने के लिए तत्पर रहता है।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
राम पे जब जब विपदा आई कौन बना रखवाला भजन लिरिक्स
राम पे जब जब विपदा आई कौन बना रखवाला
मेरा बजरंग बाला हो मेरा बजरंग बाला
माता सिया को राम प्रभु से कौन मिलाने वाला
मेरा बजरंग बाला हो मेरा बजरंग बाला ||
जितने भी काम थे मुश्किल बजरंग के हिस्से आये
बजरंग के सिवा कोई सागर को लांघ ना पाए
रावण की सोने की लंका कौन जलाने वाला
मेरा बजरंग बाला हो मेरा बजरंग बाला ||
शक्ति लागी लक्ष्मण को और मूर्छा भारी आई
धरती पर देख लखन को जब रोने लगे रघुराई
संजीवन ला करके लखन को कौन बचाने वाला
मेरा बजरंग बाला हो मेरा बजरंग बाला ||
विभीषण ताना मारे बजरंग से सहा ना जाए
भक्ति कहते है किसको ये सबको ज्ञान कराये
भरी सभा में चिर के छाती कौन दिखाने वाला
मेरा बजरंग बाला हो मेरा बजरंग बाला ||
जो हनुमान ना होते ना होती राम कहानी
श्री राम प्रभु की महिमा घर घर ना जानी जाती
कहे पवन भक्ति का डंका कौन बजाने वाला
मेरा बजरंग बाला हो मेरा बजरंग बाला ||
गायक / गायिका (Singer): संध्या जालोर (Sandiya Jalore)
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
यह भजन भगवान श्रीराम और हनुमान जी के बीच के अटूट रिश्ते और निस्वार्थ प्रेम की व्याख्या करता है। भजन की शुरुआत इस मौलिक प्रश्न से होती है कि जब-जब मर्यादा पुरुषोत्तम राम पर कोई संकट या विपत्ति आई, तब-तब उनका सबसे बड़ा रखवाला और संकटमोचन कौन बनकर सामने आया? उत्तर स्वयं मिलता है - महावीर बजरंगबली। माता सीता का अशोक वाटिका में अपहरण के पश्चात राम जी से वियोग हुआ, तो माता सीता को प्रभु श्री राम से मिलाने का दुष्कर कार्य भी हनुमान जी ने ही अशोक वाटिका का पता लगाकर संपन्न किया था।
आगे की पंक्तियों में भजनकार बताती है कि लंका यात्रा के दौरान विशाल समुद्र को लांघना कोई साधारण कार्य नहीं था। भगवान राम के जितने भी कठिन और असंभव कार्य थे, वे सब बजरंगबली के हिस्से आए। हनुमान जी के अतिरिक्त कोई अन्य उस अथाह समुद्र को पार नहीं कर सका। रावण की अजेय सोने की लंका को जलाकर भस्म करने का पराक्रमी कार्य भी हनुमान जी ने ही किया था, जिससे रावण के अहंकार का विध्वंस हुआ था।
युद्ध के दौरान जब मेघनाद की शक्ति से लक्ष्मण जी मूर्छित हो गए और लक्ष्मण को गहरी मूर्छा आ गई, तब धरती पर वीर लखन को अचेत देख मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम भी व्याकुल होकर रोने लगे थे। ऐसे विकट और शोकपूर्ण क्षण में द्रोणगिरि पर्वत से संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मण के प्राणों की रक्षा करने वाले भी एकमात्र बजरंग बाला ही थे।
भजन के अंतिम चरणों में हनुमान जी की अनन्य भक्ति और उनके चरित्र के उस स्वर्णिम प्रसंग को उकेरा गया है जब रावण के भाई विभीषण द्वारा प्रभु राम की भक्ति पर संशय जताने या ताने मारने पर हनुमान जी से सहन नहीं हुआ। हनुमान जी ने भरी सभा में अपने सीने को चीरकर यह सिद्ध कर दिया कि उनके हृदय में सदैव सिया-राम ही निवास करते हैं। अंत में रचनाकार कहती है कि यदि हनुमान जैसा महान सेवक और भक्त न होता, तो संपूर्ण रामायण की महिमा और श्री राम कथा घर-घर तक इस प्रकार जीवंत रूप में प्रसारित नहीं हो पाती।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
- संकट मोचन स्वरूप: यह भजन हनुमान जी के 'संकटमोचन' और 'रखवाला' स्वरूप का सुंदर बखान करता है।
- रामायण के प्रमुख प्रसंगों का सार: इसमें लंका दहन, संजीवनी बूटी लाना, समुद्र लांघना और सीना चीरकर राम-दर्शन कराना जैसे महत्वपूर्ण प्रसंग समाहित हैं।
- भक्ति की पराकाष्ठा: यह सिखाता है कि सच्ची भक्ति केवल शब्दों में नहीं, बल्कि निस्वार्थ सेवा और कर्म में होती है।
- संध्या जालोर की प्रस्तुति: लोकप्रिय गायिका संध्या जालोर की मधुर वाणी और भावपूर्ण शैली ने इस भजन को श्रोताओं के बीच अमर बना दिया है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
इस ऊर्जावान भजन को प्रातःकाल उठकर, संध्या बेला में, या विशेष रूप से मंगलवार और शनिवार को हनुमान जी की पूजा के दौरान गाया व सुना जा सकता है। हनुमान चालीसा, श्री हनुमान चालीसा और सुंदरकांड के पाठ से पहले या बाद में इस भजन का संकीर्तन करने से घर का वातावरण पवित्र और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्त होता है। इसे मंदिर परिसरों, जागरण, चौकी और धार्मिक उत्सवों में सामूहिक रूप से वाद्य यंत्रों (ढोलक, मंजीरा, हारमोनियम) के साथ पूरी तन्मयता से गाया जा सकता है।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
इस भजन के मुख्य आराध्य भगवान श्री राम और उनके अनन्य भक्त, पवनसुत हनुमान (बजरंगबली) हैं। साथ ही माता सीता, लक्ष्मण जी और भक्त विभीषण का प्रसंग भी इसमें जुड़ा हुआ है। हनुमान जी को भगवान शिव का रुद्रांश और केसरी-अंजना का नंदन माना जाता है। इस भजन को स्वरबद्ध करने वाली कलाकार संध्या जालोर हैं, जिन्होंने अपनी सुमधुर आवाज से इस devotional composition को जन-जन तक पहुँचाया है।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / पद | सरल अर्थ | संदर्भ |
|---|---|---|
| विपदा | संकट, मुसीबत, कठिनाई | राम जी के जीवन में आए कठिन समय पर |
| रखवाला | रक्षा करने वाला, रक्षक | संकट के समय हनुमान जी की भूमिका |
| बजरंग बाला | वज्र के समान अंग वाले हनुमान | हनुमान जी का संबोधन |
| संजीवन | संजीवनी बूटी | लक्ष्मण जी के प्राण बचाने वाली जड़ी-बूटी |
| मूर्छा | बेहोशी | शक्ति लगने के बाद लक्ष्मण की दशा |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
"राम पे जब जब विपदा आई कौन बना रखवाला मेरा बजरंग बाला हो मेरा बजरंग बाला"
भावार्थ: जब-जब मर्यादा पुरुषोत्तम राम के जीवन में कोई विकट परीक्षा या संकट आया, तब-तब संसार में उनके सबसे बड़े रक्षक और ढाल बनकर केवल बजरंगबली ही खड़े हुए।
"शक्ति लागी लक्ष्मण को और मूर्छा भारी आई, धरती पर देख लखन को जब रोने लगे रघुराई..."
भावार्थ: युद्ध के मैदान में जब लक्ष्मण जी को मूर्छा आई और वे अचेत होकर धरती पर गिर पड़े, तो शरणागतवत्सल प्रभु राम भी विलाप करने लगे। उस असहनीय पीड़ा के क्षणों में संजीवनी बूटी लाकर लखन के प्राण बचाने वाले भी हनुमान ही थे।
भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
इस भजन के श्रवण के साथ निम्नलिखित हनुमान मंत्र का स्मरण करना अत्यंत फलदायी होता है:
ॐ मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम् ।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्री रामदूतम शरणं प्रपद्ये ॥
अर्थ: जो मन के समान वेग वाले हैं, वायु के समान गति वाले हैं, इंद्रियों को जीतने वाले हैं और बुद्धिमानों में श्रेष्ठ हैं, ऐसे वानर सेना के मुख्य और श्री राम के दूत पवनसुत हनुमान की मैं शरण लेता हूँ।
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| विवरण | तथ्य |
|---|---|
| भजन का नाम | राम पे जब जब विपदा आई कौन बना रखवाला |
| गायक / स्वर | संध्या जालोर (Sandiya Jalore) |
| आराध्य देवता | भगवान श्री राम एवं संकटमोचन हनुमान जी |
| भाषा | सरल हिंदी / राजस्थानी लोक शैली मिश्रित |
| श्रेणी (Category) | राम भजन / हनुमान भजन |
| मुख्य भाव | भक्ति, समर्पण, वीरता और संकट निवारण |
| उपयुक्त अवसर | मंगलवार व्रत, जागरण, सुंदरकांड पाठ, हनुमान जयंती |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
संपादकीय रूप से तैयार सामग्री। इस लेख में प्रस्तुत भजन के बोल, अर्थ और पृष्ठभूमि को पारंपरिक स्रोतों, लोकगीत परंपराओं और हनुमान भक्ति के साहित्यों के आधार पर पूरी शुद्धता के साथ संकलित किया गया है। इसका उद्देश्य पाठकों को प्रामाणिक और उच्च कोटि की devotional content उपलब्ध कराना है।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- श्री रामचरितमानस - तुलसीदास कृत (सुंदरकांड एवं लंकाकांड प्रसंग)
- पारंपरिक हनुमान भजन एवं लोक-संगीत संग्रह
- संध्या जालोर लाइव भजन प्रस्तुतियाँ एवं संकीर्तन अभिलेख
पाठकों के विचार (0)
भक्ति रस चर्चा में भाग लें