भक्ति काव्य व भजन मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

फिर से सजा दो दुनिया सारी लिरिक्स (Phir Se Saja Do Duniya Sari Lyrics in Hindi) - Shaan Ganesh Bhajan

गायक शान द्वारा गाए गणेश भजन 'फिर से सजा दो दुनिया सारी' के हिंदी लिरिक्स और भावार्थ। विघ्नहर्ता से सुख-समृद्धि की प्रार्थना के लिए पढ़ें।

भगवान श्री गणेश के चरणों में समर्पित यह अत्यंत भावपूर्ण भजन "फिर से सजा दो दुनिया सारी" (Phir Se Saja Do Duniya Sari) सुप्रसिद्ध पार्श्व गायक शान (Shaan) की मधुर आवाज में गाया गया है। यह भजन विघ्नहर्ता, मंगलमूर्ति भगवान गणेश से संपूर्ण सृष्टि के कल्याण, संकटों के निवारण और पुनः सुख-समृद्धि की स्थापना की प्रार्थना करता है। जब भी संसार पर कोई विपदा आती है या मनुष्य का जीवन संकटों से घिर जाता है, तब प्रथम पूज्य देव की शरण ही एकमात्र संबल बनती है। इस भजन का मुख्य भाव पूर्ण समर्पण, करुणा की पुकार और अटूट विश्वास है। गणेशोत्सव के पावन अवसर पर या दैनिक पूजा-अर्चना के समय इस भजन का श्रवण और कीर्तन भक्तों के हृदय में असीम शांति, सकारात्मक ऊर्जा और भक्ति भाव का संचार करता है। आइए, इस दिव्य भजन के शब्द-शब्द में छिपे आध्यात्मिक रस, इसके गूढ़ भावार्थ और शास्त्रीय महत्व का विस्तार से रसास्वादन करें।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

फिर से सजा दो दुनिया सारी

गणपति बाप्पा मोरया मंगल मूर्ति मोरया
विपदा है भारी बस तुझसे हारी
बीच भवर में अटकी नैया हमारी
फिर से वही सवेरा ला दो
सब मंगल मये फिर करवा दो
सब करते अर्ज तुम्हारी,
तुझपे टिकी है दुनिया सारी
तेरी किरपा ही है सुखकारी
ओ गणपति भप्पा,
अर्जी सुनी होगी हमारी
ओ विगनो के हरता
फिर से सजा दो दुनिया सारी,
गणपति भप्पा मोरेया मंगल मूर्ति मोरेया

बाप्पा जैसे आते थे वैसे ही आना
भगतो के सारे कष्ट मिटाना
जो भी हुई गलती दुनिया से
बाप्पा उन्हें क्षमा कर जाना
निभाई हमेशा तूने यारी
तेरी किरपा ही है सुख कारी
ओ गणपति भप्पा
अर्जी सुनी होगी हमारी
ओ विगनो के हरता
फिर से सजा दो दुनिया सारी,
गणपति भप्पा मोरेया मंगल मूर्ति मोरेया ||

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस सुंदर भजन का मुख्य संदेश भगवान गणेश के प्रति पूर्ण आत्मसमर्पण और उनकी असीम कृपा पर अटूट विश्वास है। भजन की शुरुआत "गणपति बाप्पा मोरया मंगल मूर्ति मोरया" के पावन जयघोष से होती है, जो भक्तों के हृदय में उत्साह और भक्ति का संचार करता है। प्रथम अंतरे में भक्त अपनी विवशता और संसार पर आई भारी विपदा का वर्णन करते हुए कहता है कि हे विघ्नहर्ता! वर्तमान समय में संकट अत्यंत गंभीर है और हमारी जीवन रूपी नैया बीच भंवर में फंसी हुई है। इस संकट से उबरने का हमारे पास कोई मार्ग नहीं है, केवल आपकी कृपा ही हमें बचा सकती है।

भक्त प्रार्थना करता है कि हे प्रभु, इस अंधकारमय समय को दूर कर फिर से वही आशा और उत्साह का नया सवेरा ला दीजिए। संपूर्ण सृष्टि को पुनः मंगलमय और आनंदित कर दीजिए। संसार का प्रत्येक जीव आपसे ही प्रार्थना कर रहा है क्योंकि संपूर्ण सृष्टि का अस्तित्व और संतुलन आप पर ही टिका हुआ है। आपकी कृपा ही एकमात्र सुख प्रदान करने वाली है। हे विघ्नहर्ता, हमें पूर्ण विश्वास है कि आपने हमारी पुकार सुन ली होगी और आप शीघ्र ही इस उजड़ी हुई दुनिया को अपनी कृपा से पुनः सजा देंगे, इसे खुशहाल बना देंगे।

भजन के दूसरे भाग में भक्त भगवान गणेश के आगमन की प्रतीक्षा करते हुए कहता है कि हे बाप्पा! आप हर वर्ष की भांति उसी दिव्य और भव्य रूप में हमारे घरों और हृदयों में पधारिए। अपने भक्तों के समस्त शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक कष्टों का निवारण कीजिए। यदि अज्ञानतावश इस संसार के मनुष्यों से कोई भूल या पाप हुआ हो, तो अपनी करुणा और दयालुता के कारण हमें क्षमा कर दीजिए। आपने सदैव अपने भक्तों के साथ एक सच्चे मित्र की भांति संबंध निभाया है और संकट के समय उनका साथ दिया है। इसलिए हे प्रभु, हमारी इस करुण पुकार को स्वीकार करें और सृष्टि में पुनः सुख, शांति और समृद्धि का संचार करें।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन केवल एक संगीतमय प्रस्तुति नहीं है, बल्कि यह संकट काल में मानवता की सामूहिक पुकार और ईश्वर के प्रति अटूट आस्था का जीवंत दस्तावेज है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • सामूहिक प्रार्थना का बल: यह भजन व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर संपूर्ण विश्व के कल्याण ("सजा दो दुनिया सारी") की कामना करता है, जो सनातन धर्म के "वसुधैव कुटुम्बकम्" के सिद्धांत को दर्शाता है।
  • करुणा और क्षमा याचना: भजन में मनुष्य की सीमाओं और गलतियों को स्वीकार करते हुए भगवान से क्षमा याचना की गई है, जो साधक के भीतर अहंकार को समाप्त कर विनम्रता का भाव जगाती है।
  • सकारात्मकता का संचार: "फिर से वही सवेरा ला दो" जैसी पंक्तियां घोर निराशा के क्षणों में भी आशा की एक नई किरण जगाती हैं और मानसिक संबल प्रदान करती हैं।
  • मधुर संगीत और गायन: सुप्रसिद्ध गायक शान की भावपूर्ण और सुरीली आवाज ने इस भजन को अत्यंत संवेदनशील और हृदयस्पर्शी बना दिया है, जिससे श्रोता सीधे ईश्वर से जुड़ाव महसूस करता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यद्यपि भगवान गणेश की आराधना किसी भी समय की जा सकती है, परंतु इस भजन के गायन और श्रवण के लिए कुछ विशेष अवसर और विधियां अत्यंत फलदायी मानी गई हैं:

शुभ समय: इस भजन का श्रवण सुबह की पूजा के समय या संध्या आरती के दौरान करना अत्यंत उत्तम होता है। विशेष रूप से गणेश चतुर्थी, संकट चौथ, और प्रत्येक मास की विनायक व संकष्टी चतुर्थी के दिन इस भजन को सामूहिक रूप से गाना अत्यंत शुभ फल प्रदान करता है।

गायन की विधि: भजन गाते समय मन में पूर्ण पवित्रता और भगवान गणेश की छवि का ध्यान होना चाहिए। यदि संभव हो, तो हाथ में मंजीरा या ताली बजाकर लयबद्ध तरीके से इसका कीर्तन करें। भजन के अंत में भगवान गणेश को मोदक या दुर्वा अर्पित कर आरती अवश्य करें। इससे घर का वातावरण शुद्ध होता है और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन प्रथम पूज्य, बुद्धि और समृद्धि के प्रदाता भगवान श्री गणेश को समर्पित है। हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, किसी भी शुभ कार्य, पूजा या अनुष्ठान का प्रारंभ भगवान गणेश की वंदना के बिना अधूरा माना जाता है। वे विघ्नहर्ता हैं, अर्थात अपने भक्तों के मार्ग में आने वाली सभी बाधाओं को दूर करने वाले हैं।

इस भजन में भगवान गणेश के "मंगलमूर्ति" स्वरूप की आराधना की गई है, जो अमंगल का नाश कर सर्वत्र शुभ और कल्याण की स्थापना करते हैं। यद्यपि यह एक आधुनिक रचना है, परंतु इसका मूल भाव प्राचीन संतों जैसे संत ज्ञानेश्वर और संत तुकाराम की गणेश वंदनाओं से प्रेरित है, जिन्होंने ईश्वर को अत्यंत सरल, सुलभ और भक्तवत्सल रूप में प्रस्तुत किया है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

यह भजन आधुनिक काल की एक अत्यंत लोकप्रिय रचना है। इसे विशेष रूप से उस समय की पृष्ठभूमि में देखा जा सकता है जब संपूर्ण विश्व किसी अदृश्य संकट या महामारी से जूझ रहा था और चारों ओर निराशा का माहौल था। ऐसे समय में, जब मानवीय प्रयास विफल होने लगते हैं, तब दिव्य शक्ति की शरण ही एकमात्र मार्ग बचती है।

गायक शान ने अपनी दिव्य आवाज के माध्यम से वैश्विक संकट के समय मानवता की पीड़ा और ईश्वर से पुनः सब कुछ ठीक करने की प्रार्थना को सुरों में पिरोया है। इस भजन के बोल अत्यंत सरल और आम बोलचाल की हिंदी में हैं, ताकि समाज का प्रत्येक वर्ग इससे जुड़ाव महसूस कर सके और सामूहिक रूप से भगवान के चरणों में अपनी अर्जी लगा सके।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल, सुबोध और प्रवाहमयी हिंदी है, जिसमें भक्ति रस की प्रधानता है। इसमें कहीं-कहीं मराठी शब्दों जैसे "बाप्पा" और "मोरया" का सुंदर समन्वय किया गया है, जो भगवान गणेश की पारंपरिक आराधना शैली को प्रदर्शित करता है।

काव्य शैली की दृष्टि से, यह एक "प्रार्थना गीत" या "विनय पद" है। इसमें रूपक अलंकार का सुंदर प्रयोग किया गया है, जैसे "बीच भवर में अटकी नैया हमारी", जहां संसार को एक भवसागर और मानव जीवन को एक नैया के रूप में दर्शाया गया है। भजन की लयबद्धता और अंतरा-मुखड़ा का संयोजन ऐसा है कि यह सुनने वाले के मन-मस्तिष्क पर गहरा प्रभाव छोड़ता है और सहज ही याद हो जाता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें कई महत्वपूर्ण आध्यात्मिक और व्यावहारिक जीवन की सीख देता है:

  • समर्पण ही मुक्ति का मार्ग है: जब हम अपनी सीमाओं को स्वीकार कर ईश्वर के चरणों में पूर्ण समर्पण कर देते हैं, तो हमारे सारे भय और चिंताएं समाप्त हो जाती हैं।
  • विपत्ति में धैर्य और प्रार्थना: जीवन में जब भी कठिन परिस्थितियां आएं, तो विचलित होने के बजाय प्रार्थना का सहारा लेना चाहिए। प्रार्थना में वह शक्ति है जो असंभव को भी संभव बना सकती है।
  • क्षमाशीलता और विनम्रता: अपनी गलतियों को स्वीकार करना और ईश्वर से क्षमा मांगना आत्मा को शुद्ध करता है। यह हमें दूसरों के प्रति भी क्षमाशील होना सिखाता है।
  • सृष्टि के प्रति कृतज्ञता: यह भजन हमें याद दिलाता है कि यह सुंदर दुनिया ईश्वर की देन है और इसकी रक्षा व खुशहाली के लिए हमें सदैव प्रार्थना और प्रयास करते रहना चाहिए।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
विपदा संकट, मुसीबत या भारी कष्ट संसार में आने वाले शारीरिक या मानसिक कष्ट।
भवर (भंवर) पानी का चक्रवात, संकटपूर्ण स्थिति संसार रूपी सागर में आने वाली कठिन परिस्थितियां।
नैया नाव, जीवन रूपी नौका मनुष्य का अस्तित्व और उसका जीवन सफर।
मंगल मये (मंगलमय) कल्याणकारी, शुभ और आनंददायक ऐसी स्थिति जहां सब कुछ शुभ और सकारात्मक हो।
अर्जी प्रार्थना, निवेदन या याचिका भक्त द्वारा भगवान के चरणों में लगाई गई गुहार।
विघ्नहर्ता बाधाओं को दूर करने वाले भगवान गणेश का वह स्वरूप जो सभी संकटों का नाश करता है।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"विपदा है भारी बस तुझसे हारी / बीच भवर में अटकी नैया हमारी"
हे प्रभु! इस समय संसार पर जो संकट आया है, वह अत्यंत विशाल और हमारी शक्ति से परे है। हम अपने प्रयासों से इसे दूर करने में असमर्थ हैं, यह संकट केवल आपकी दिव्य शक्ति से ही पराजित हो सकता है। हमारी जीवन रूपी नाव इस संकट के भंवर में फंस गई है और डूबने की कगार पर है, अब आप ही हमारे खैया (नाविक) बनिए।

"फिर से वही सवेरा ला दो / सब मंगल मये फिर करवा दो"
हे मंगलमूर्ति! इस निराशा और भय के अंधकार को दूर करके हमारे जीवन में पुनः आशा, सुख और उमंग का नया सवेरा लेकर आइए। चारों ओर फैली अशांति को समाप्त कर पुनः सब कुछ शुभ, कल्याणकारी और आनंदमय बना दीजिए।

"बाप्पा जैसे आते थे वैसे ही आना / भगतो के सारे कष्ट मिटाना"
हे प्रिय बाप्पा! आप हर वर्ष की तरह उसी हर्षोल्लास, ढोल-नगाड़ों और अपार खुशियों के साथ हमारे घरों में पधारिए। आपके आगमन मात्र से ही भक्तों के हृदय के सारे दुःख, संताप और कष्ट स्वतः ही समाप्त हो जाएं।

"जो भी हुई गलती दुनिया से / बाप्पा उन्हें क्षमा कर जाना"
हे दयालु देव! यदि अज्ञानतावश या प्रमादवश इस संसार के मनुष्यों से प्रकृति के प्रति या धर्म के प्रति कोई भूल हुई हो, तो अपनी असीम करुणा के कारण हमें क्षमा कर दीजिए और हमें सही मार्ग पर चलने की सद्बुद्धि प्रदान कीजिए।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के गायन या श्रवण से पूर्व भगवान गणेश के इन दिव्य मंत्रों और श्लोकों का उच्चारण करने से भजन का प्रभाव और भी अधिक बढ़ जाता है:

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

अर्थ: घुमावदार सूंड वाले, विशाल शरीर वाले, करोड़ों सूर्यों के समान तेजस्वी भगवान गणेश! मेरे सभी कार्यों को हमेशा बाधा रहित (निर्विघ्न) पूरा करने की कृपा करें।

ॐ गं गणपतये नमो नमः, श्री सिद्धिविनायक नमो नमः।
अष्टविनायक नमो नमः, गणपति बाप्पा मोरया॥

यह मंत्र भगवान गणेश के विभिन्न सिद्ध स्वरूपों को नमन करता है और जीवन में सुख, समृद्धि तथा विघ्नों के नाश का मार्ग प्रशस्त करता है। इसके नियमित जप से मानसिक शांति प्राप्त होती है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम फिर से सजा दो दुनिया सारी (Phir Se Saja Do Duniya Sari)
मुख्य गायक शान (Shaan)
समर्पित देवता भगवान श्री गणेश (विघ्नहर्ता, मंगलमूर्ति)
भजन का मुख्य भाव विनय, समर्पण, करुणा और वैश्विक कल्याण की भावना
मुख्य भाषा हिंदी (मराठी शब्दों के सुंदर समन्वय के साथ)
उपयुक्त अवसर गणेश चतुर्थी, संकष्टी चतुर्थी, दैनिक सुबह-शाम की आरती व पूजा
मुख्य संदेश ईश्वर पर अटूट विश्वास रखना और संकट काल में धैर्य न खोना

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह अत्यंत लोकप्रिय और भावपूर्ण भजन सुप्रसिद्ध भारतीय पार्श्व गायक शान (Shaan) द्वारा गाया गया है। उनकी मधुर और संवेदनशील आवाज ने इस भजन को बहुत प्रभावशाली बनाया है।

यह भजन प्रथम पूज्य, विघ्नहर्ता और बुद्धि के प्रदाता भगवान श्री गणेश को समर्पित है। इसमें उनके मंगलकारी और संकटमोचक स्वरूप की स्तुति की गई है।

इस भजन का मुख्य विषय वैश्विक कल्याण और ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण है। यह भजन भगवान गणेश से प्रार्थना करता है कि वे संसार से सभी दुखों, बीमारियों और संकटों को दूर कर पुनः सुख-शांति की स्थापना करें।

इस पंक्ति का आध्यात्मिक अर्थ यह है कि जब मनुष्य का जीवन कठिन परिस्थितियों, संकटों या दुखों से घिर जाता है और उसे बाहर निकलने का कोई मार्ग नहीं सूझता, तब वह भगवान से अपनी जीवन रूपी नैया को पार लगाने की गुहार लगाता है।

इस भजन को सुबह की पूजा के समय या शाम की आरती के दौरान सुनना अत्यंत शुभ माना जाता है। विशेष रूप से गणेशोत्सव (गणेश चतुर्थी) के दस दिनों के दौरान और प्रत्येक चतुर्थी तिथि को इसका श्रवण विशेष फलदायी होता है।

हां, भजन की पंक्तियां "जो भी हुई गलती दुनिया से, बाप्पा उन्हें क्षमा कर जाना" स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं कि भक्त संपूर्ण मानवता की ओर से अपनी भूलों के लिए भगवान से क्षमा याचना कर रहा है।

"बाप्पा" का अर्थ पिता या रक्षक होता है और "मोरया" शब्द भगवान गणेश के एक परम भक्त 'मोरया गोसावी' के नाम से जुड़ा है। यह उद्घोष भगवान और भक्त के अटूट संबंध को दर्शाता है।

इस भजन के शांत सुर और सकारात्मक शब्द हमारे मस्तिष्क को सुकून पहुंचाते हैं, तनाव को कम करते हैं और मन में आशा तथा सुरक्षा की भावना का संचार करते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत आता है। इस भजन के पाठ, अर्थ और आध्यात्मिक संदर्भों को प्रामाणिक स्रोतों और शास्त्रीय मान्यताओं के आधार पर संकलित किया गया है। भजन के बोलों की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए मूल ऑडियो प्रस्तुति का गहराई से विश्लेषण किया गया है। यह भजन आधुनिक युग में भक्ति संगीत की प्रासंगिकता का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो प्राचीन भक्ति परंपरा को समकालीन संगीत के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाता है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्भागवत महापुराण एवं गणेश पुराण में वर्णित विघ्नहर्ता स्तुति प्रसंग।
  • सुप्रसिद्ध गायक शान द्वारा प्रस्तुत मूल भजन "फिर से सजा दो दुनिया सारी" का आधिकारिक ऑडियो/वीडियो संस्करण।
  • सनातन धर्म की पारंपरिक गणेश वंदनाएं और संकीर्तन पद्धतियां।

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 12 Oct 2026

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