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ओम जय श्री श्याम हरे लिरिक्स (Om Jai Shree Shyam Hare Lyrics in Hindi) - Khatu Shyam Aarti Lakhbir Singh Lakha - Bhaktilok

225 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रस्तावना एवं परिचय

श्याम कृपा: एक अद्भुत भक्ति गीत

श्याम जी की भक्ति में डूबकर sing करें, आपके जीवन में सुख और शांति का संचार होगा।

ओम जय श्री श्याम हरे, ओम जय श्री श्याम हरे। कृपा करो श्याम हरे, कृपा करो श्याम हरे॥ गोपाल गोपाल, श्याम गोपाल। मुरलीधर भगवान, श्याम हम सबका॥ श्याम तेरा नाम, श्याम तेरा रूप। सच्चा प्रेम, सच्चा साज॥ मेरा जीवन तेरे नजरों में। तेरा भक्ति ही है मेरा धर्म॥ सारा संसार तेरा सहारा। सुख-दुख में, तेरा साथ हमारा॥ नंदलाल कृपाल, सबका इश्त देवता। तेरे चरणों में बसा है सुख सारा॥ हर लीला तूने ही खेली। हम सब तेरे सच्चे दास हैं॥ श्याम तेरी महिमा अपार। शरणागत वत्सल, सबका उद्धार॥ ओम जय श्री श्याम हरे, ओम जय श्री श्याम हरे। कृपा करो श्याम हरे, कृपा करो श्याम हरे॥
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

भजन 'ओम जय श्री श्याम हरे' में श्याम जी की स्तुति की गई है। यह परंपरा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण भजन है जिसमें भक्ति, प्रेम और समर्पण का भाव झलकता है। भजन का पहला पद 'ओम जय श्री श्याम हरे' हे श्याम का जयकारा करते हुए, भक्त भगवान से कृपा की याचना करते हैं। यहाँ 'कृपा करो श्याम हरे' का अर्थ है कि श्याम जी अपनी कृपा बरसाएं, जिससे भक्तों का जीवन सुखमय हो सके। श्याम जी को गोपाल, मुरलीधर और नंदलाल जैसे नामों से संबोधित किया गया है, जो उनके दिव्य रूप को दर्शाते हैं।

इसके भावार्थ की बात करें तो यह भजन भक्तों के हृदय में शांति और प्रेम का संचार करता है। श्याम जी के नाम का जप करते हुए भक्त स्वयं को उनकी आश्रय में समर्पित महसूस करते हैं। 'सारा संसार तेरा सहारा' इस पंक्ति में भक्त उनके कृपा भाव को स्थापित करता है, यह महसूस करते हुए कि भगवान ही हमारे दुख-सुख का साथी हैं। इस प्रकार, श्याम जी की भक्ति का यह भजन अनुराग और असीम प्रेम का प्रतीक है।

इस भजन में भक्ति मार्ग का प्रमुख संकेत मिलता है जहाँ भक्त अपने जीवन के हर क्षण में भगवान श्याम पर विश्वास करते हैं। भक्ति का मार्ग हमें सच्चे प्रेम और समर्पण की ओर ले जाता है। श्याम जी की लीला, उनकी महिमा और उनके प्रति श्रद्धा की भावना भक्तों को जीवन की कठिनाइयों में भी विश्वास प्रदान करती है। यह भजन हमें यह सिखाता है कि हमें हमेशा राम या कृष्ण की कृपा में विश्वास रखना चाहिए और उनके प्रति निष्ठा दिखाते रहना चाहिए।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का महत्व पुरानी हिंदू परंपराओं में निहित है, जहाँ भगवान श्याम को श्रद्धा और प्रेम का प्रतीक माना जाता है। महाभारत में श्याम का महत्व अत्यधिक है, जहाँ श्री कृष्ण ने श्याम के रूप में अपनी लीला का प्रदर्शन किया। इस भजन के माध्यम से भक्त भगवान श्याम के प्रति अपनी भक्ति और समर्पण को व्यक्त करते हैं। इस तरह, यह भजन न केवल एक साधना है, बल्कि धार्मिक आस्था की भी पराकाष्ठा है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का जप मानसिक शांति को बढ़ाता है और आत्मा में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। नियमित रूप से इस भजन का पाठ करने से ध्यान में गहराई आती है, तनाव दूर होता है, और भक्त का मन सुस्वास्थ्य की ओर अग्रसर होता है। यह भजन भक्ति के भाव को बढ़ावा देता है और भक्त को आध्यात्मिक उन्नति की ओर ले जाता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पाठ सुबह या संध्या समय करना सबसे उत्कृष्ट होता है। दीया जलाना, फूल अर्पित करना और संपूर्ण मन से श्याम जी का स्मरण करना चाहिए। उचित मुद्रा में बैठकर भजन का पाठ करना ध्यान को केंद्रित करने में मदद करता है, जिससे भक्त का मन शांति और धैर्य अनुभव करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का अर्थ क्या है?

यह भजन भगवान श्याम की महिमा और कृपा की याचना करता है, जिससे भक्त उनके चरणों में श्रद्धा पूर्वक निवेदन करते हैं।

इस भजन का श्रवण कब करना चाहिए?

सुबह या सायंकाल का समय इस भजन का पाठ करने के लिए उचित रहता है, जिससे मन की शांति और एकाग्रता प्राप्त होती है।

भजन का पाठ करने से क्या लाभ है?

इस भजन का नियमित पाठ मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य में सुधार करता है और भक्त की शक्ति और धैर्य को बढ़ाता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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