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मोरे अंगना पधारो हे गजानन लिरिक्स (More Angana Padharo He Gajana Lyrics in Hindi) - Pooja Golhani Ganesh Chaturthi

पूजा गोलहानी द्वारा रचित 'मोरे अंगना पधारो हे गजानन' भजन के संपूर्ण लिरिक्स हिंदी में पढ़ें। गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर विघ्नहर्ता का स्वागत करें।

हिंदू धर्म में भगवान श्री गणेश प्रथम पूज्य देव हैं। किसी भी शुभ कार्य, पूजा या अनुष्ठान का शुभारंभ विघ्नहर्ता गजानन की आराधना से ही होता है। "मोरे अंगना पधारो हे गजानन" एक अत्यंत मधुर, भावपूर्ण और श्रद्धा से सराबोर भजन है, जिसे सुप्रसिद्ध गायिका पूजा गोलहानी ने अपनी दिव्य आवाज में गाया है। यह भजन विशेष रूप से गणेश चतुर्थी के पावन पर्व पर भक्तों के घरों में गूंजता है। इस भजन का मुख्य भाव 'स्वागत' और 'समर्पण' है, जहां एक भक्त अपने आराध्य देव को अपने गृह-आंगन में पधारने का निमंत्रण दे रहा है। इस भजन के माध्यम से भक्त अपनी पलकों की डगर सजाकर, गंगाजल से चरण पखारने की अभिलाषा व्यक्त करता है। यह भजन न केवल सुनने में कर्णप्रिय है, बल्कि यह आत्मा को परमात्मा से जोड़ने वाला एक सशक्त माध्यम भी है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

मोरे अंगना पधारो हे गजानन

मोरे अंगना पधारो हे गजानन
जोड कर और तेरे पखारू चरण
मोरे अंगना पधारो हे गजानन ||

सज गयी सारी गलिया
सज गये सब नगर
अपनी पलकों से हमने
सजायी डगर
राह तेरी निहारे है पल पल नयन
मोरे अंगना पधारो हे गजानन
जोड कर और तेरे पखारू चरण
मोरे अंगना पधारो हे गजानन ||

आरती तेरे गुण टेर गायेंगे हम
और चन्दन का टिका लगायेंगे हम
तोरे गंगा के जल से धुलाये चरण
मोरे अंगना पधारो हे गजानन
जोड कर और तेरे पखारू चरण
मोरे अंगना पधारो हे गजानन ||

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन भगवान गणेश के प्रति एक भक्त के अनन्य प्रेम और आतिथ्य सत्कार की भावना को प्रदर्शित करता है। इसका विस्तृत भावार्थ इस प्रकार है:

प्रथम भाग (मुखड़ा): भक्त भगवान गजानन से प्रार्थना करता है कि हे विघ्नहर्ता, आप मेरे घर के आंगन में पधारें। मैं दोनों हाथ जोड़कर अत्यंत श्रद्धापूर्वक आपके चरणों को पखारना (धोना) चाहता हूँ। यहाँ हाथ जोड़ना विनम्रता और अहंकार के विसर्जन का प्रतीक है, जबकि चरण पखारना सेवा भाव को दर्शाता है।

द्वितीय भाग (अंतरा १): भगवान के आगमन की खुशी में पूरा नगर और सभी गलियां सज चुकी हैं। भक्त कहता है कि हमने आपके स्वागत के लिए केवल भौतिक सजावट ही नहीं की है, बल्कि अपनी पलकों से आपके आने की राह को सजाया है। हमारे नयन पल-पल आपके दर्शन के लिए तरस रहे हैं और आपकी राह निहार रहे हैं। यह विरह और मिलन की व्याकुलता का सुंदर चित्रण है।

तृतीय भाग (अंतरा २): भक्त आगे की तैयारी का वर्णन करते हुए कहता है कि जब आप पधारेंगे, तब हम आपकी आरती उतारेंगे और आपके दिव्य गुणों का गान करेंगे। हम आपके मस्तक पर चंदन का शीतल तिलक लगाएंगे और गंगा के पवित्र जल से आपके श्रीचरणों को धोएंगे। यह पंचोपचार और षोडशोपचार पूजा का एक अत्यंत सरल और भक्तिमय रूप है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

इस भजन की कई ऐसी विशेषताएं हैं जो इसे अन्य भजनों से विशिष्ट बनाती हैं:

  • आवाहन की प्रधानता: इस भजन में भगवान को बुलाने या आमंत्रित करने का भाव है। शास्त्रों में 'आवाहन' को पूजा का पहला और अत्यंत महत्वपूर्ण चरण माना गया है।
  • वात्सल्य और सख्य भाव: भजन में भगवान को एक अतिथि और रक्षक के रूप में देखा गया है, जिससे भक्त का आत्मीय संबंध स्थापित होता है।
  • सरलता और मधुरता: पूजा गोलहानी की सुमधुर आवाज और सरल शब्दों के चयन के कारण यह भजन बच्चों से लेकर वृद्धों तक सभी की जुबान पर आसानी से चढ़ जाता है।
  • सांस्कृतिक जुड़ाव: यह भजन भारत की 'अतिथि देवो भव' की प्राचीन परंपरा को आध्यात्मिक धरातल पर चरितार्थ करता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यद्यपि भगवान का स्मरण किसी भी समय किया जा सकता है, परंतु इस भजन के गायन और श्रवण के लिए निम्नलिखित समय और विधि सर्वोत्तम मानी गई है:

सर्वोत्तम समय: गणेश चतुर्थी के उत्सव के दौरान, विशेषकर जब आप अपने घर में गणपति बप्पा की मूर्ति की स्थापना (स्थापना मुहूर्त) कर रहे हों। इसके अतिरिक्त, दैनिक सुबह की पूजा या संध्या आरती के समय भी इसका गायन अत्यंत फलदायी होता है।

गायन की विधि:

  • सर्वप्रथम स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • पूजा स्थल पर दीपक प्रज्वलित करें और हाथ में पुष्प लेकर भगवान गणेश का ध्यान करें।
  • भजन को गाते समय मन में यह भाव रखें कि साक्षात भगवान श्री गणेश आपके द्वार पर खड़े हैं और आप उनका स्वागत कर रहे हैं।
  • भजन की समाप्ति पर भगवान को मोदक या लड्डू का भोग लगाएं।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन मुख्य रूप से भगवान शिव और माता पार्वती के लाडले पुत्र, बुद्धि और समृद्धि के दाता भगवान श्री गणेश (गजानन) को समर्पित है। गणेश जी को विघ्नहर्ता कहा जाता है, जो अपने भक्तों के जीवन से सभी बाधाओं को दूर करते हैं। इस भजन के माध्यम से भक्त उनके मंगलकारी रूप की आराधना करता है।

आधुनिक संदर्भ में, इस भजन को अपनी मधुर आवाज से जन-जन तक पहुंचाने का श्रेय सुप्रसिद्ध भक्ति गायिका पूजा गोलहानी को जाता है। उनकी गायकी में एक विशेष प्रकार की तन्मयता और समर्पण भाव होता है, जो श्रोताओं को सीधे ईश्वर की भक्ति में लीन कर देता है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

यह भजन पारंपरिक लोक-शैली और आधुनिक सुगम संगीत का एक अद्भुत मिश्रण है। गणेशोत्सव के समय महाराष्ट्र सहित पूरे भारत में बप्पा को घर लाने की एक अनूठी परंपरा है। इसी पृष्ठभूमि पर इस भजन की रचना की गई है। जब भक्त अपने घर में बप्पा की मूर्ति लाते हैं, तो उनके मन में जो उत्साह, उमंग और श्रद्धा का ज्वार उठता है, उसी को शब्दों में पिरोकर इस भजन का रूप दिया गया है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल, सुबोध और खड़ी बोली हिंदी है, जिसमें अवधी और लोकभाषा के शब्दों (जैसे 'मोरे', 'तोरे', 'पखारू') का सुंदर पुट दिया गया है। इसकी काव्य शैली गेय (गाने योग्य) है। इसमें अनुप्रास और रूपक अलंकार का सहज प्रयोग देखने को मिलता है, जैसे "पलकों से हमने सजायी डगर" में भक्त की गहरी आंतरिक भावना को रूपक के माध्यम से व्यक्त किया गया है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें केवल भक्ति ही नहीं सिखाता, बल्कि जीवन के कई महत्वपूर्ण संदेश भी देता है:

  1. विनम्रता (Humility): "जोड़ कर हाथ" खड़े होना यह सिखाता है कि ईश्वर के सामने हमें अपने अहंकार को पूरी तरह त्याग देना चाहिए।
  2. तैयारी और अनुशासन (Preparation): जैसे हम भगवान के आने के लिए गलियां और नगर सजाते हैं, वैसे ही हमें अपने अंतःकरण (मन और हृदय) को भी शुद्ध और सुसज्जित रखना चाहिए।
  3. पवित्रता (Purity): गंगाजल से चरण धोने का अर्थ है कि हमारे कर्म और विचार गंगा की तरह पवित्र होने चाहिए।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
गजानन गज (हाथी) के समान मुख वाले, श्री गणेश बुद्धि और विवेक के अधिष्ठाता देव
पखारू चरण पैरों को धोना या साफ करना अत्यंत आदर और सेवा का भाव
डगर रास्ता या मार्ग जीवन का मार्ग या भक्ति का पथ
निहारे लगातार देखना या राह देखना ईश्वर दर्शन की तीव्र अभिलाषा
गुण टेर गुणों का गान करना या पुकारना कीर्तन और नाम-स्मरण की महिमा

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"मोरे अंगना पधारो हे गजानन, जोड कर और तेरे पखारू चरण"
हे भगवान गणेश! आप कृपा करके मेरे घर के आंगन में पधारिए। मैं अत्यंत आदरपूर्वक अपने दोनों हाथों को जोड़कर आपके पावन चरणों को धोना चाहता हूँ।

"सज गयी सारी गलिया, सज गये सब नगर, अपनी पलकों से हमने सजायी डगर"
आपके आगमन की खुशी में पूरा नगर और सभी गलियां सज-धजकर तैयार हैं। हमने आपके स्वागत के लिए अपनी पलकों को बिछा दिया है, अर्थात हम अत्यंत व्याकुलता से आपका इंतजार कर रहे हैं।

"राह तेरी निहारे है पल पल नयन, मोरे अंगना पधारो हे गजानन"
हमारे नेत्र हर क्षण केवल आपकी ही राह देख रहे हैं। हे गजानन, अब आप हमारे घर पधारकर हमें कृतार्थ करें।

"आरती तेरे गुण टेर गायेंगे हम, और चन्दन का टिका लगायेंगे हम"
जब आप आएंगे, तो हम आपकी दिव्य आरती उतारेंगे, आपके मंगलकारी गुणों का गान करेंगे और आपके मस्तक पर चंदन का शीतल तिलक लगाकर आपका सत्कार करेंगे।

"तोरे गंगा के जल से धुलाये चरण, मोरे अंगना पधारो हे गजानन"
हम पतित-पावनी गंगा मैया के पवित्र जल से आपके चरणों को धोएंगे। हे विघ्नहर्ता, आप हमारे आंगन में अवश्य पधारें।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के गायन से पूर्व या पश्चात निम्नलिखित गणेश मंत्रों का जाप करने से पूजा का फल बहुगुणित हो जाता है:

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

ॐ गं गणपतये नमः॥

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विवरण जानकारी
भजन का नाम मोरे अंगना पधारो हे गजानन
समर्पित देवता भगवान श्री गणेश (गजानन)
मुख्य गायिका पूजा गोलहानी (Pooja Golhani)
मुख्य अवसर गणेश चतुर्थी, गणेशोत्सव, दैनिक पूजा
भक्ति का भाव समर्पण, आतिथ्य, विनय और प्रेम भाव
भाषा हिंदी (लोकभाषा के शब्दों सहित)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस अत्यंत लोकप्रिय और मधुर भजन को सुप्रसिद्ध भक्ति गायिका पूजा गोलहानी ने गाया है।

यह भजन मुख्य रूप से गणेश चतुर्थी और दस दिवसीय गणेशोत्सव के दौरान बप्पा के स्वागत और स्थापना के समय गाया जाता है।

"चरण पखारना" का अर्थ है आदर और श्रद्धापूर्वक पैरों को धोना। यह हिंदू संस्कृति में अतिथि और ईश्वर के प्रति सर्वोच्च सम्मान का प्रतीक है।

इस भजन में भगवान गणेश के चरणों को धोने के लिए सबसे पवित्र नदी "गंगा" के जल (गंगाजल) का उल्लेख किया गया है।

हाँ, इस भजन को आप अपनी दैनिक सुबह या शाम की पूजा के समय भगवान गणेश को प्रसन्न करने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए गा सकते हैं।

इसका मुख्य संदेश यह है कि जब हम पूर्ण समर्पण, शुद्ध मन और विनम्रता के साथ ईश्वर को अपने जीवन और हृदय में आमंत्रित करते हैं, तो वे अवश्य पधारते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत आता है। इस भजन के बोल और भावार्थ को प्रामाणिक स्रोतों, पारंपरिक भक्ति पद्धतियों और संगीत के विद्वानों के परामर्श के आधार पर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य पाठकों को न केवल भजन के सही बोल प्रदान करना है, बल्कि उन्हें इसके गहरे आध्यात्मिक अर्थ से भी अवगत कराना है ताकि उनकी पूजा और भक्ति अधिक फलदायी हो सके।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्भागवत महापुराण एवं गणेश पुराण के संदर्भ।
  • पारंपरिक गणेशोत्सव भजन संग्रह एवं लोक संगीत परंपरा।
  • पूजा गोलहानी द्वारा गाए गए आधिकारिक ऑडियो/वीडियो संस्करण।

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 19 Oct 2026

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