Krishna Bhajan बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

साथ देना मेरा हर बार सांवरे भजन लिरिक्स (Sath Dena Har Baar Sanware Lyrics in Hindi) - Krishna Bhajan Vinit Rajvanshi

साथ देना मेरा हर बार सांवरे भजन में भगवान कृष्ण के प्रति अनन्य भक्ति व समर्थन की प्रार्थना है।

प्रस्तावना एवं परिचय

संकट से मुक्ति: सांवरे की कृपा

इस भजन का गहराई से गान करें और श्री कृष्ण की कृपा का अनुभव करें।

साथ देना मेरा हर बार सांवरे, साथ देना मेरा हर बार सांवरे। तेरा ही मैं हूँ दीवाना, तुझे देखूं, तेरा ही मैं हूँ दीवाना। साथ देना मेरा हर बार सांवरे। तू ही मेरा चाँद, तू ही मेरी चाँदनी, तू ही मेरा हर सपना, तू ही मेरी साजन, तू ही मेरा हर सपना। साथ देना मेरा हर बार सांवरे। तेरा ही मैं हूँ दीवाना, तुझे देखूं, तेरा ही मैं हूँ दीवाना। साथ देना मेरा हर बार सांवरे। तू ही मेरा प्रेम, तू ही मेरी भक्ति, संसार की मोह माया से दूर कर, तू ही मेरी भक्ति। साथ देना मेरा हर बार सांवरे। तेरा ही मैं हूँ दीवाना, तुझे देखूं, तेरा ही मैं हूँ दीवाना। साथ देना मेरा हर बार सांवरे। तेरे बिना सब अधूरा, तेरे बिना जिया सूना, संदेशे तेरा ही सुनूं, सुनूं मैं तेरा ही हर बार, साथ देना मेरा हर बार सांवरे। तेरा ही मैं हूँ दीवाना, तुझे देखूं, तेरा ही मैं हूँ दीवाना। साथ देना मेरा हर बार सांवरे।
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन की मूल भावना भगवान श्री कृष्ण के प्रति अनन्य भक्ति और भक्ति में निष्ठा को दर्शाती है। भक्त बार-बार प्रार्थना करता है कि 'साथ देना मेरा हर बार सांवरे', यह इस अभिलाषा का प्रतीक है कि हर परिस्थिति में भगवान का साथ आवश्यक है। भगवान की उपस्थिति के बिना, जीवन अधूरा है। भक्त इस स्वर में अपने प्रेम और समर्पण को प्रकट करता है, जताते हुए कि भगवान ही न केवल उसे प्यार करते हैं, बल्कि उसके जीवन के हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण हैं। यह भावना, 'तेरा ही मैं हूँ दीवाना', भक्त की निष्कलंक भक्ति और भगवान के प्रति उसकी असीमित प्रेम के संकेत है।

भजन में प्रेम और भक्ति का गहरा अर्थ छिपा है। भक्त भगवान की अनुकंपा का आग्रह करते हुए कहता है कि जीवन की सभी कठिनाइयों में, तेरा साथ ही उसे और अधिक साहस प्रदान करता है। 'तू ही मेरा चाँद, तू ही मेरी चाँदनी' की पंक्ति में, भक्त अपने जीवन में प्रेम और उजाले के प्रतीक के रूप में कृष्णा का उल्लेख करता है। भक्ति के इस अनुभव से भक्त का मन शुद्ध होता है और वह संसार के बुराइयों से दूर रहने का प्रयास करता है। यह भजन भक्त को आत्मिक शांति और संतोष की अनुभूति कराता है।

इस भजन का मंत्रिक अर्थ न केवल भक्त के लिए, बल्कि समाज के लिए भी महत्वपूर्ण है। यह बताता है कि भक्ति का मार्ग, प्रेम और समर्पण से भरा होता है। जैसे-जैसे भक्त भगवान की प्रशंसा करते हैं, उसकी आस्था और दृढ़ता बढ़ती है। इस भजन में भगवान कृष्ण का निरंतर स्मरण करना, आत्मिक उन्नति का मार्ग है। यह ध्यान में रखना आवश्यक है कि भक्ति की सच्ची भावना से ही इंसान अपने जीवन में उच्चतम लक्ष्यों को प्राप्त कर सकता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन भक्त परंपरा में एक गहन धार्मिकता को प्रकट करता है। अनेक पौराणिक ग्रंथों में, जैसे कि भागवत पुराण में श्री कृष्ण की लीलाओं और दिव्यता की व्याख्या की गई है। भक्तों के लिए, यह भजन अपने आराध्य के प्रति विश्वसनीय साहायता को दर्शाता है, जो उन्हें जीवन के संघर्षों में संजीवनी प्रदान करता है। भक्ति को सर्वोपरि बताने वाले संस्कृत श्लोक और उपनिषदों में भी यहीं संदेश है कि सच्चे प्रेम और श्रद्धा से भगवान का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन के नियमित पाठ और गायन से न केवल आध्यात्मिक बल में वृद्धि होती है, बल्कि मानसिक तनाव को भी कम किया जा सकता है। यह दूर करता है नकारात्मकता और आत्मविश्वास को बढ़ाता है। भक्ति के माध्यम से, भक्त की आत्मा में शांति व संतोष का अनुभव होता है, जिससे स्वास्थ्य में सुधार होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जप अथवा गायन सुबह के समय या शाम को आरती के समय करना अति उत्तम होता है। स्वच्छ निवास स्थान में, दीप जलाकर और फूलों की सुगंधित नैवैद्य अर्पित करके भक्ति भाव के साथ इसे गाना चाहिए। भजन के दौरान मन में भक्ति और प्रेम की भावना होनी चाहिए, जिससे अनुभव की गहराई बढ़ सके।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

ये भजन किस भगवान को समर्पित है?

यह भजन भगवान श्री कृष्ण को समर्पित है, जो प्रेम और भक्ति के प्रतीक हैं। भक्त कृष्ण की कृपा के लिए प्रार्थना करता है।

इस भजन का मुख्य भाव क्या है?

इस भजन में भक्त श्री कृष्ण से लगातार समर्थन की प्रार्थना करता है और अपने जीवन के हर पहलू में उनकी उपस्थिति की आवश्यकता का अनुभव करता है।

क्या इस भजन का कोई विशेष समय है गायन के लिए?

इस भजन का गायन सुबह या शाम को पूजा के समय करना विशेष लाभकारी होता है, जिससे मन को शांति और ध्यान की अनुभूति होती है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 10 Oct 2026

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